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बुधवार, मार्च 28, 2018

"घटता है पल पल जीवन" (चर्चा अंक-2923)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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गीत  

"माला बन जाया करती है"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

जब कोई श्यामल सी बदली,
सपनों में छाया करती है!
तब होता है जन्म गीत का,
रचना बन जाया करती है!!
निर्धारित कुछ समय नही है,
कोई अर्चना विनय नही है,
जब-जब निद्रा में होता हूँ,
तब-तब यह आया करती है!
रचना बन जाया करती है...
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वे आँखें परेशान करती हैं 

1977 का वह दिन और आज का दिन। उस चाँटे की आवाज कानों में जस की तस गूँज रही है और तपिश अभी भी गाल पर महसूस हो रही है। खास बात यह कि वह चाँटा मुझे नहीं पड़ा था। मेरे ब्याह को डेढ़ बरस भी नहीं हुआ था। नौकरी करना फितरत में नहीं था और न थी कमा-खाने की जुगत भिड़ाने की अकल। मन्दसौर में सक्रिय पत्रकारिता में था। उस समय दैनिक *‘दशपुर-दर्शन’* का सम्पादक था। लेकिन पत्रकारिता के उच्च नैतिक आदर्श निभाते हुए कमाई कर लेने का करिश्मा मेरे बस के बाहर की बात थी। गृहस्थी चलाना तो कोसों दूर, अकेले का पेट पालना भी कठिन था। तभी एक अपराह्न, *बाबू (यादवेन्द्र भाटी)* रतलाम से आया... 
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पतझड़ 

यह मौसम है पतझड़ का 
पत्ते पीले पड रहे हैं 
और कमजोर भी 
वे गिर रहे हैं एक एक कर 
जैसे घटता है पल पल जीवन... 
सरोकार पर Arun Roy 
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भव्य एवं स्वभाव 

भव्य, सुंदर है
समादृत है
अलंकृत है
प्रशंसित है
परन्तु भव्य से
भी पहले
भव्य से भी
दुर्निवार
एक भाव है
जो हमारा स्वभाव है... 
Mamta Tripathi 
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माफ़ी 

हम जब छोटे थे तो कक्षा में गुरुजी 
और घर में बाउजी दंडाधिकारी थे। 
दोनों को सम्पूर्ण दंडाधिकार प्राप्त था। 
स्कूल में गलती किया तो मुर्गा बने, 
घर में गलती किया तो थप्पड़ खाए... 
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
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वक्त ...... 

बस यूँ ही .... 

जिंदगी की व्यस्तता वक्त को कोसती हुई चलती है। 
और वक्त ...वो क्या ....वो तो अपनी रफ़्तार में है। 
कोई फर्क उसे नहीं पड़ता...  
सतत...बिना रुके....अनवरत  
अपनी उसी रफ़्तार में... 
Kaushal Lal  
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हो इश्क़ मुक़म्मल तो जानें 

बुलंदियाँ तो इश्क़ की, 
नाकामियों में हैं
हम तुम्हारे और तुम हमारे
ये सब समझौते हुआ करते हैं
मुक़म्मल जज़्बात
तो तब हैं
कि 
तुम हममें
और हम तुममें रहें। 
Ye Mohabbatein  at  

मंगलवार, मार्च 27, 2018

"सरस सुमन भी सूख चले" (चर्चा अंक-2922)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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गीत  

"सरस सुमन भी सूख चले"  

भटक रहा है आज आदमी, सूखे रेगिस्तानों में।
चैन-ओ-अमन, सुकून खोजता, मजहब की दूकानों में।

मालिक को उसके बन्दों ने, बन्धक आज बनाया है,
मिथ्या आडम्बर से, भोली जनता को भरमाया है,

धन के लिए समागम होते, सभागार-मैदानों में...   

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आज के बच्चे कल के नेता 

समय भी क्या कमाल है
चुनाव के मौसम में
हो रही धमाल है
 अब हाथापाई तक
उतर आई है जबाबी बोलचाल
 शर्म न लिहाज
केबल बेसुरे नारों की भरमार... 
Akanksha  पर Asha Saxena  
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पति पत्नी इक दूजे से पूरे होते हैं --- 

मैसाज कराकर बॉडी का मन में हरियाली हो गई , 
मैसाज के चक्कर में पर म्हारी घरवाली खो गई... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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किताबों की दुनिया - 170 


नीरज पर नीरज गोस्वामी  
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जीत या हार ... 

सपने पालने की कोई उम्र नहीं होती

वो अक्सर उतावली हो के बिखर जाना चाहती थी
ऊंचाई से गिरते झरने की बूँद सरीखी
ओर जब बाँध लिया आवारा मोहब्बत ने उसे ... 
उतर गई अंधेरे की सीडियां, आँखें बंद किए....

Digamber Naswa 
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मेरे राम 

गंगा किनारे फैले बनारस की गलियों में जिसे पक्का महाल कहते हैं, प्रायः घर घर में मन्दिर है। मेरे घर में भी मन्दिर था, मेरे मित्र के घर में भी। मेरे राम काले थे। मेरे मित्र के गोरे। मेरे काले संगमरमर से बने, मित्र के सफेद संगमरमर वाले। बचपन में जब हम दोनों में झगड़ा होता तो मित्र कहता..तेरे राम काले कलूटे! हम कहते.. तेरे राम के शरीर में तो खून ही नहीं है, इसीलिए सफेद हैं। बड़े होने पर अपने झगड़े को याद कर हम खूब हंसते। कुछ और समझ आईं तो लगा यह झगड़ा तो बड़ा व्यापक है! 
कबीर के राम और तुलसी के राम में भी भेद है... 
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय  
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गर्मी आने की आहट 

समय के गाल पर मारकर चांटा 
इधर उधर भाग रहा है 
मौसम
चबूतरे पर 
पसरा पड़ा है 
बेसुध सन्नाटा... 
Jyoti Khare  
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“ बताओ ना मम्मा “ 

मेरा मन आज बहुत विचलित है ! मेरी छोटी बेटी शलाका ने आज मुझसे जो सवाल पूछे उनके जवाब मेरे पास नहीं हैं ! आज यह पोस्ट मैं आप सभी प्रबुद्ध पाठकों के सामने इसी प्रत्याशा से रख रही हूँ कि आप शायद उसके प्रश्नों का समुचित जवाब दे पायें और उसके नन्हे मन की अनंत जिज्ञासाओं को शांत कर सकें ! उसके सवालों का रेपिड फायर राउण्ड तब शुरू हुआ था जब नव रात्रि के व्रत के समापन के अवसर पर उसके लिए अष्टमी के दिन पड़ोस के वर्माजी के यहाँ से कन्या पूजन का बुलावा आया था... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
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आज के दिन  

चिपको आन्दोलन की शुरुआत 

नन्ही कोपल पर कोपल कोकास 
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बनबाला के गीतों सा..... 

महादेवी वर्मा... 

yashoda Agrawal 
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"कॉपी-पेस्ट सन्त के नाम टेलीग्राम" 

हे कॉपी-पेस्ट सन्त !!! हे आधुनिक जगत के अवैतनिक दूत !!!  आपका समर्पण स्तुत्य है। सूर्योदय काल से रात्रि नीम विश्राम बेला तक आपका परोपकारी व्यक्तित्व, पराई पोस्ट को कॉपी-पेस्ट करते नहीं थकता। इस व्यस्तता में आप स्वयं सृजन शून्य हो जाते हैं। शून्य ही तो सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड का एकमात्र सत्य है। आज मानव इतना स्वार्थी हो गया है कि किसी दूसरे के बारे में सोचता ही नहीं है। ऐसे कालखंड में स्वयं के सृजन को त्याग कर आप पराये सृजन का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। यही कार्य आपको महानता प्रदान कर रहा है... 
अरुण कुमार निगम 
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जौ 

अभिनव रचना पर Mamta Tripathi 
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नवरात्र : फेस्टिवल आफ फिटनेस ------  

किशोर चंद्र चौबे 

क्रांति स्वर पर विजय राज बली माथुर 
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कैंसर से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री  

मनोहर परिकर जी का मार्मिक सन्देश 

फेसबुक पर सदानंद गोडबोले जी की पोस्ट जो मूलत 
पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री जी का  मूल मराठी सन्देश  :: अनुवादक  पुखराज सावंतवाडी
की प्रस्तुति  कुमार निखिल द्वारा की जा रही है . 

मनोहर परिकर जी कैंसर से जूझ रहे हैं, अस्पताल के विस्तर से उनका यह संदेश बहुत मार्मिक है, आप भी पढ़ें...
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