स्नेहिल अभिवादन
आज की प्रस्तुति में
आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
ज्योत्सना का रात पर , पहरा लगा सा है ।
आसमां का रंग भी , उजला-उजला सा है ।।
पत्तियों में खेलता ,एक शिउली का फूल ।
डालियों के कान में ,कुछ कह रहा सा है ।।
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स्नेहिल अभिवादन
ज्योत्सना का रात पर , पहरा लगा सा है ।
आसमां का रंग भी , उजला-उजला सा है ।।
पत्तियों में खेलता ,एक शिउली का फूल ।
डालियों के कान में ,कुछ कह रहा सा है ।।
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कोविद नाईनटीन का रावण
जला दशहरा मैदान में
पर ज्यादा लोग देख नहीं
पाए इस आयोजन को |
घर से ही दुआ की
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विजय सभी की जब चाहें हमवे हर साल दशहरे पर
रावण का पुतला जलाते हैं,
पर अगले साल उन्हें
बड़े क़द का रावण चाहिए,
वे ख़ुद नहीं जानते
कि वे चाहते क्या हैं,
तन के घट भरा स्वांस रस
रत्ती रत्ती घटता जाये
संघर्षों की तीक्ष्ण आंच में
हुआ वाष्पन उड़ता जाये।
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मान्या व मेधा, पहाड़ो पर निवास करने वाले परिवार की बेटियाँ थीं। मान्या से लगभग पंद्रह महीने छोटी मेधा सगी बहन थी। दोनों बहनें सम क्षमता से सम कक्षाओं को उत्तीर्ण करती मल्टीनेशनल कम्पनी में संग-संग कार्यरत थीं। माता-पिता, परिवार–समाज को चौंकाती दोनों बहनें शादी नहीं करने का अटल फैसला सुना दी थी। कम्पनी में शनिवार व रविवार को अवकाश रहने के कारण शुक्रवार की शाम दोनों अपने माता-पिता के पास गाँव चली जातीं और सोमवार को पौ फटने के साथ अपने निवास पर वापस आ जातीं।
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खुलते ही गन्धकोष आते
हैं अनगिनत चाहने
वाले, कौन
कहाँ
ले जाए ख़्वाबों की गीली मिट्टी, - -
क्या पता तुम्हें है मालूम,
उस जादूगर कुम्हार
का ?
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चूँकि संस्कृत भाषा सामान्य व्यवहार में प्रचलित नहीं थी इसलिए संस्कृत में लिखे गए उस साहित्य को ऐसी भाषा में अनुवाद किया जाना आवश्यक था जो शासक वर्ग की भाषा हो और जिसे शासित वर्ग भी सीखता हो । 500 साल पहले तत्कालीन शासक अकबर ने इस संबंध में अल्प प्रयास किया था । 200 साल पहले अंग्रेजी शासन के समय में यह कार्य वृहद पैमाने पर हुआ । उस समय प्राचीन भारतीय साहित्य का अधिकतर अनुवाद कार्य अंग्रेजी, जर्मन और फ्रेंच में विदेशी विद्वानों के द्वारा किया गया । इस लेख में इन्हीं कार्यों का संक्षिप्त विवरण देने का प्रयास किया गया है ।
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“18 वीं शताब्दी में चिनाब नदी के किनारे एक कुम्भकार के घर सुन्दर सी लड़की का
जन्म हुआ जिसका नाम “सोहनी” था । पिता के बनाए मिट्टी के बर्तनों पर वह सुन्दर सुन्दर आकृतियाँ उकेरती । पिता-पुत्री के बनाए मिट्टी की बर्तन दूर दूर तक लोकप्रिय थे ।
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