आज के शनिवासरीय चर्चा में राजीव उपाध्याय आपका हार्दिक स्वागत करता है।

थालियाँ रोली चन्दन की सजती रहें,
सुख की शहनाइयाँ रोज बजती रहें,
हों सफल भाइयों की सभी साधना।
दूज के इस तिलक में यही भावना...
उच्चारण
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सुशील कुमार जोशी
एक किनारे में
खड़ा एक भीड़ के
देखता हुआ
अपनी ही जैसे
एक नहीं कई
प्रतिलिपियाँ
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राजेंद्र कुमार
ॐ श्रीं हीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद।
प्रसीद श्रीं हीं श्रीं ॐ महालाक्ष्मै नमः।।
हिमकर श्याम
मानव-मानव का भेद मिटाएँ
दिल से दिल के दीप जलाएँ
मन का मंथन। पर kuldeep thakur
पिट्सबर्ग में एक भारतीय पर
इंतजार कायम रहे
(कविता)
नाउम्मीदी में खुशियों की ईद है
जो कल गई है वापिस वो दीवाली है
मन में मिलने की हरियाली है
सबसे प्यारे हैं इंतजार के क्षण
जल्दी भंग नहीं होते, भंगर नहीं होते
इंतजार में होता है सुकून...
अविनाश वाचस्पति पर नुक्कड़
(कविता)
नाउम्मीदी में खुशियों की ईद है
जो कल गई है वापिस वो दीवाली है
मन में मिलने की हरियाली है
सबसे प्यारे हैं इंतजार के क्षण
जल्दी भंग नहीं होते, भंगर नहीं होते
इंतजार में होता है सुकून...
"दोहे-गोवर्धन पूजा"
अन्नकूट पूजा करो, गोवर्धन है आज।
गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।१।
श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।
सेवा करके गाय की, कहलाये गोपाल।२।...
अन्नकूट पूजा करो, गोवर्धन है आज।
गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।१।
श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।
सेवा करके गाय की, कहलाये गोपाल।२।...
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हवा हूँ मैं या झोका कोई
चल रहीं हैं या ठहर गयीं
ये अंज़ान सांसें हैं रोज़ पुछ्तीं

बड़ी मुश्किल है बोलो क्या बताएं।
न पूछो कैसे हम जीवन बिताएं।
निष्ठुर तम हम दूर भगाएँ
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किशोरों के नाम
प्यारे बच्चों, कहते हैं कि मुग़ल काल के उर्दू-फारसी के महान शायर मिर्जा ग़ालिब बड़े मनमौजी किस्म के आदमी थे. एक बार उनको एक बार किसी शाही दावत का निमंत्रण मिला तो वे, यों ही, अपने साधारण लिबास में पहुँच गए, लेकिन द्वारपाल ने उनको ठीक से पहचाना नहीं तथा उनके पुराने, मैले से कपड़ों पर टिप्पणी करते हुए अन्दर घुसने की इजाजत नहीं दी. घर आकर मिर्जा ने अपनी सबसे अच्छी पोशाक पहनी और बड़े ठाठ से फिर पहुँच गए....
जाले पर पुरुषोत्तम पाण्डेय
प्यारे बच्चों, कहते हैं कि मुग़ल काल के उर्दू-फारसी के महान शायर मिर्जा ग़ालिब बड़े मनमौजी किस्म के आदमी थे. एक बार उनको एक बार किसी शाही दावत का निमंत्रण मिला तो वे, यों ही, अपने साधारण लिबास में पहुँच गए, लेकिन द्वारपाल ने उनको ठीक से पहचाना नहीं तथा उनके पुराने, मैले से कपड़ों पर टिप्पणी करते हुए अन्दर घुसने की इजाजत नहीं दी. घर आकर मिर्जा ने अपनी सबसे अच्छी पोशाक पहनी और बड़े ठाठ से फिर पहुँच गए....
जाले पर पुरुषोत्तम पाण्डेय
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खाँ फ़िनॉमिनन - कहानी

Smart Indian
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हे मौन तपस्वी ! हे यतिवर ! हे दिग्दिगंत !
हे कन्त मेरे
तड़प तड़प हम कहो करें क्या ?
हे अंतर्मन के संत मेरे
जीवन की मधुरिम बेला में
विरह सेज कंटक बन चुभते
यौवन की सुरभित घाटी में
प्रणय दीप जल जल बुझते
बोलो बोलो कुछ तो बोलो
हे मौन तपस्वी ! हे यतिवर ! हे दिग्दिगंत !
हे कन्त मेरे तड़प तड़प हम कहो करें क्या ?
हे अंतर्मन के संत मेरे ...
बेनकाब
Smart Indian
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हे मौन तपस्वी ! हे यतिवर ! हे दिग्दिगंत !
हे कन्त मेरे
तड़प तड़प हम कहो करें क्या ?
हे अंतर्मन के संत मेरे
जीवन की मधुरिम बेला में
विरह सेज कंटक बन चुभते
यौवन की सुरभित घाटी में
प्रणय दीप जल जल बुझते
बोलो बोलो कुछ तो बोलो
हे मौन तपस्वी ! हे यतिवर ! हे दिग्दिगंत !
हे कन्त मेरे तड़प तड़प हम कहो करें क्या ?
हे अंतर्मन के संत मेरे ...
बेनकाब









