मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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शुभ काज को छोड़ अकाज करें ,
कछु लाज न आवत है इनको ,
एक रांड बुलाय नचावत हैं ,
घर को धन -धान लुटावन को
Virendra Kumar Sharma
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थकन

बहुत थक गयी हूँ मेरे जीवन साथी !
जीवन के इस जूए में
जिस दिन से मुझे जोता गया है
एक पल के लिए भी
गर्दन बाहर निकाल लेने का
मौक़ा ही कहाँ मिला है मुझे !
चलती जा रही हूँ चलती जा रही हूँ
बस चलती ही जा रही हूँ
निरंतर, अहर्निश, अनवरत...
Sudhinama पर sadhana vaid
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अपरिचित नींद
नींद भी आज कल कुछ ख़फ़ा ख़फ़ा हो
अपरिचित बेगानी सी रहती हैं
पलकों की खुशामदी दरकिनार कर
आँखों से कोसों दूर रहती हैं...
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मधुर झंकार
एकांत पलों में
जाने कब मन वीणा की
हुई मधुर झंकार
कम्पित हुए तार
सितार के मन लहरी के
पर शब्द रहे मौन
जीवन गीत के...
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