चर्चा मंच के पुरे परिवार और पाठक गन को- शशि पुरवार का नमस्कार ,
हवा में भरा है रोष
दर्द का बहाव
दहशत और प्रश्न से भरा हुआ है
आज का वक़्त
सीने में खंजर मारता हुआ
नन्ही कलियों को मसलता हुआ
एक दानव ....क्या वह मानव ही है ?
या फिर मानव की खाल में ...............?
ज्यादा न कहते हुए सीधे चलते है आपके प्यारे लिंक पर ...
आप का हर दिन मंगलमय हो . |
लोग पुराने अच्छे लगते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
गीत पुराने, नये तराने अच्छे लगते हैं। हमको अब भी लोग पुराने अच्छे लगते हैं। |
![]() अल्पना वर्मा |
उज्जवल प्रकाश की ओर......अनुपमा त्रिपाठी |
![]()
जहाँ जोड़ना चाहिए
वहाँ घटा देती हूँ
जहाँ घटाना चाहिए
वहाँ जोड़ देती हूँ ...
|
![]() साधना वैद |
|
|
| |
|
|
|
|
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
|
1.
सुहानी भोर
सागर की लहरें
मचाएँ शोर ।...
|
"हनुमान जयन्ती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
सभी भक्तों को हनुमान जयन्ती की
अग्रिम शुभकामनाएँ प्रेषित कर रहा हूँ!
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।..
|
क्रूर नियति
![]() क्रूर नियति के निष्ठुर हाथों , यह कैसा अभिशाप लिखा है * * बचपन की स्वप्निल स्मृतिओं में यह कैसा संत्रास लिखा है.. |
आगे देखिए.."मयंक का कोना"
|
(1)
अब तो जो बचा है... ![]() डॉ.जेन्नी शबनम दो राय नहीं
अब तक कुछ नहीं बदला था
न बदला है
न बदलेगा,
(2)!!!! लुट गया हैं चमन मेरा ये खुशबू बांटते- बांटते !!!! ![]() रामकिशोर उपाध्याय (3) 336 % बढ़ोतरी ,बच्चो पर बलात्कार मे ![]() (4) एक ही हल 'शून्य' ![]() मीमांषा meemaanshaपरवनrashmi savita (5) |



































