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बुधवार, अप्रैल 24, 2013

बुधवारीय चर्चा ( 1224 ) ----- यह कैसी दरिंदगी घुली घुली फिजां में ..

 चर्चा मंच के पुरे परिवार और पाठक गन कोशशि पुरवार  का नमस्कार , 
हवा में भरा है रोष 
दर्द का बहाव 
दहशत और प्रश्न से भरा हुआ है 
 आज का वक़्त 
सीने  में खंजर मारता हुआ 
नन्ही कलियों को मसलता हुआ 
एक दानव ....क्या वह मानव ही है ? 
या फिर मानव की खाल  में ...............?
 ज्यादा न कहते हुए सीधे चलते है आपके प्यारे लिंक पर ...
आप का हर दिन मंगलमय हो . 

लोग पुराने अच्छे लगते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

गीत पुराने, नये तराने अच्छे लगते हैं।
हमको अब भी लोग पुराने अच्छे लगते हैं।



अल्पना वर्मा

उज्जवल प्रकाश की ओर......

अनुपमा त्रिपाठी 




जहाँ जोड़ना चाहिए 
वहाँ घटा देती हूँ 
जहाँ घटाना चाहिए 
वहाँ जोड़ देती हूँ ...

दिल्ली की दरिन्दगी
मेरा फोटो
अरविंद मिश्रा

बदलाव

आशा लता सक्सेना


मेरा फोटो
साधना वैद





  

मेरा फोटो









  





1.
सुहानी भोर 
सागर की लहरें 
मचाएँ शोर  ।...


  
"हनुमान जयन्ती" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मित्रों!
25 अप्रैल को
हनुमान जयन्ती है!
लेकिन आज मंगलवार को ही

सभी भक्तों को हनुमान जयन्ती की 
अग्रिम शुभकामनाएँ प्रेषित कर रहा हूँ!
 
धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।
जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।..



 क्रूर नियति
My Photo
 क्रूर नियति के निष्ठुर हाथों , यह कैसा अभिशाप लिखा है * 
* बचपन की स्वप्निल स्मृतिओं में यह कैसा संत्रास लिखा है..

आगे देखिए.."मयंक का कोना"
(1)
अब तो जो बचा है...
My Photo
डॉ.जेन्नी शबनम
दो राय नहीं 
अब तक कुछ नहीं बदला था  
न बदला है 
न बदलेगा, 
(2)
!!!! लुट गया हैं चमन मेरा ये खुशबू बांटते- बांटते !!!!
My Photo
रामकिशोर उपाध्याय
(3)
336 % बढ़ोतरी ,बच्चो पर बलात्कार मे

(4)
एक ही हल 'शून्य'

मीमांषा meemaanshaपरवनrashmi savita
(5)

बुधवार, अप्रैल 10, 2013

"साहित्य खजाना" (चर्चा मंच-1210)

 आज की बुधवारीय चर्चा में आप सभी का स्वागत है , चर्चा मंच के पूरे परिवार और पाठक सभी को  शशि पुरवार का नमस्कार , आशा है आपको लिंक्स  आपको पसंद आये , कहीं बचपन , कहीं यादें ...... साहित्य की गंगा , और जानकारी का खजाना लिए आपके समक्ष प्रस्तुत है आज की चर्चा ---
 शुरुआत करते है बचपन के बाल-गीत
अहा ! बालपन, बहुत निराला |
सीधा – सादा, भोला - भाला ||
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गोल गोल  ये बनती  जाती  
 चकले बेलन पर  घुमाती 
जो अपनी है भूख मिटाती 
माँ कहाँ से आई  चपाती ??
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 चार  परिभाषाएं -- (४)  जिंदगी की 
My Photo
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सांझ ढले,आसमान से
परिंदों का जाना
और तारों का आना 
अच्छा नहीं लगता
गति से स्थिर हो जाना सा
अच्छा नहीं लगता.....
अनु..अनुलता राज नायर
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यह तो 
वही शहर है 
जिसमें गंगा बहती थी |
एक गुलाबी -
गंध हवा के 
संग -संग बहती थी ...
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Photo
नम हवा फुलवारियों की, खूब भाती है मुझे। 
हौसलों के पंख दे, उड़ना सिखाती है मुझे।..

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गर्मी से होने वाली बीमारियों के कुछ मुख्य कारण:-
१.गर्मी के दिनों में खुले शरीर धुप में चलना और भाग-दौड करना,
२.तेज गर्मी में घर से खाली पेट यानि भूखा-प्यासा बाहर जाना,
३.धुप से आकर तुरंत ठण्डा पानी या अन्य ठन्डे पेय का सेवन करना,
४.तेज धुप से आकर सीधे AC कूलर में बैठना या यहाँ से सीधे उठकर  धुप में जाना,
५.तेज गर्मी में भी सिंथेटिक वस्त्रों का पहनना,
६.तैलीय,गरिष्ठ,तेज मसाले,बहुत गर्म खाना खाने,अधिक चाय,शराब का सेवन करना,
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रास हमको आ रहे हैं, अब मुखौटे मोम के
कुर्सियों को भा रहे हैं, अब मुखौटे मोम के...
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‘धन की तृष्णा’ दानवी, हाथ में ‘पाप-मशाल’ |
‘आग’ लगाने को चली, बन् कर आयी ‘काल’..
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 हरि शर्मा जी का संक्षिप्त परिचय
नाम                       हरि प्रसाद शर्मा

उम्र :                             ४७ 
लिंग:                            पुरुष
खगोलीय राशि:                    मीन
उद्योग:                बैंक अधिकारी भा.स्टेट बैंक
व्यवसाय:                       प्रबन्धक
स्थान:         सोमेश्वर,जिला अल्मौड़ा (उत्तराखण्ड)भारत
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कुछ पाया ..सब कुछ खोया          


तुम-तुम हीं रहे ..मैं -मैं न रही...

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अपना घर बना के क्यों सजाते है लोग
 यादों के सहारे क्यों जिए जाते है लोग...
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डॉ•ज्योत्स्ना  शर्मा
सुन सखी ! कहाँ विश्राम लिखा !
मैंने तो आठों याम लिखा ।
पथ पर कंटक,  चलना होगा,
अँधियारों में जलना होगा ।
मन- मरुभूमि सरसाने को 
हिमखंडों- सा, गलना होगा ।
शुभ, नव संवत्सर हो सदैव ,
संकल्प यही सत्काम लिखा।।...
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यहाँ नव वर्ष कैसे मनाया जाता है देखिये...
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सुनो!!! यु तनहा रहने का शउर सबको नही आता
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मित्रों! आज मेरी प्रथम चर्चा के लिए शगुन के तौर पर मात्र 21 लिंक ही..
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आगे देखिए "मयंक का कोना"
(3)
1 वीणा के स्वर तबले की संगत मधुर तान . 2स्वर लहरी जीवन की प्रेरणा बजी है वीणा . 3स्वर संगीत तन मन भी झूमे पीर भी भूले . 4 वाद्य यंत्र से बिखरा है संगीत मनमोहक 5 सुर संगम खिला मन प्रांगन जीवन मीत. 6 नर्म स्पर्श ममता का आँचल शिशु मुस्काए 7 माँ से मायका पिता जग दर्शन मार्गदर्शन 8 कभी न भूले वह स्नेहिल स्पर्श ननिहाल का . 

--------शशि पुरवार