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शुक्रवार, सितंबर 24, 2010

फिजा को फसाद में न बदल दे मीडिया ..चर्चा # 287 (अनामिका की सदायें)

1   आज शुक्रवार भर लायी हूँ चर्चा का कलश आप के लिए..और मन के सागर में हिलोरे लेते कई सवालों के साथ कि  क्या करवट लेगा  बावरी मस्जिद का फैसला...क्या होगा कॉमन वेल्थ गेम का हश्र....बहुत कुछ घटित हो रहा है...बहुत कुछ सुनने को आ रहा है...हमारे देश की इज्जत दांव पर लगी है...और हर दिल में डर है....और है एक सवाल....कि क्या होगा....??? चलिए...आप तो आज इस कलश से निकलते अमृत को चखने के लिए फोटो पर क्लिक्क कर के जाइए और  ...कीजिये मंथन और निकालिए अपने नायब शब्द रूपी मोती हमारे  मार्गदर्शन  और प्रोत्साहन के लिए...

सबसे पहले यहाँ देखिये पद्यशाला 

3

ये सबसे पहला चित्र लिया गया है वाणी गीत जी के ब्लॉग गीत मेरे ..से और आज ये लिख रही हैं स्त्री की महिमा अपनी पोस्ट स्त्रियों का होना है जैसे खुशबू , हवा और धूप .में.



मन आँगन की महीन- सी झिरी से भी
छन कर छन से आ जाती हैं
सुवासित करती हैं घर आँगन
बुहार देती हैं कलेश , कपट , झूठ
सर्दी की कुनकुनी धूप सी
पाती हैं विशाल आँगन में विस्तार
आती हैं लेकर प्रेमिल ऊष्मा का त्यौहार
रचती हैं स्नेहिल स्वप्निल संसार
पहनाती बाँहों का हार
छेड़ती जैसे वीणा के तार

4My Photo
ये हैं I.I.T. कानपूर में पढ़ने वाले  विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के छात्र अखिलेश  लेकिन रखते हैं कविता लिखने का शौक और कविता क्या लिखी है इन्होने इस बार बस आग उगली है...इस से पता चलता है कि आज का हमारा युवा कितना सजग है अपने देश के प्रति...
पढ़िए इनकी नयी कृति ..
खुनी मेला लगने को है


कांटे अब डगर पर होंगे नहीं,
लाशो के कालीन बिछने को है,
होगी सांझ रंग-बिरंगी यारो,
विधवा की सदी के रंग उतरने को है,
शांति का माहोल होगा ,
किलकारियां अब खोने को है,
बिगुल बज गया है  तमाशे का,
बस चिंगारी देने की देरी है|

5My Photo
ये हैं हमारे युवा ब्लोग्गर रज़ीउद्दीन शहब जी ...इनकी भोली सूरत  पर मत जाइए  :) ...इनकी रचना आवाज़ें आती हैं...पढ़िए...हैरान रह जायेंगे की आज का युवा ऐसी नज़्म भी लिख सकता है...जब की हम सब अपने आप में से बाहर नहीं आते...




हां, आवाज़ें आती हैं
बारिश की बूंदों के शोर को दफ्न करके
तुम झूम रहे हो
अंबर का अमृत पी कर
वह दोखो,

6My Photo

स्वराज्य करुण  जी की रचना यह बेकार की जिद है पगले पढ़िए...कितने खुलासे से समझा रहे हैं लोगो को कि  ये मंदिर मस्जिद सब राजनीति के दांव पेच हैं...इन पचडों से दूर रहो..लेकिन कहाँ मानते हैं जो मजहब के पुजारी बनते हैं...

  वह मज़हब का व्यापारी है  मज़हब ही व्यापार है उसका ,
                         सिर्फ मतलब का है पुजारी , मज़हब ही हथियार है उसका !
                         उसके सारे दांव -पेंच को जनता भी अब जान गयी है ,
                          उसके नकाबपोश चेहरे को ठीक-ठीक पहचान गयी है !

7चिट्ठाकार

काव्यांचल पर आज दिनेश रघुवंशी जी की प्यारी से गज़ल पढ़िए...
उदासियाँ

लगने लगी हैं दिल को यूँ अच्छी उदासियाँ
चलती हैं साथ हौसला देती उदासियाँ
इक रोज़ ज़िन्दगी से यूँ बोली उदासियाँ
हर आदमी के साथ हैं उसकी उदासियाँ


8My Photo
अना जी की नयी कविता पढ़िए.. 

मन बंजारा




जन्मों से प्यासे इस मन को
     प्यार का जो सौगात मिला
      मन पंछी बन उड़ जाए
       रहे न जीवन से गिला

9
मेरा फोटो

ये हैं प्रतिभा सक्सेना जी जिनके शब्दों का सशक्त खेल कितनी सुंदर रचना सृजन कर देता है...आप भी देखिये इनके ब्लॉग शिप्रा की लहरें पर इनकी नयी रचना अनिर्वच..




कान दे सुन लो कि शिप्रा कह रही है -
मैं नहीं सूखी , चुके तुम ,
बोध कुंठित हो गए ,
रूखे हुए मन,
चुक गई संवेदनाएँ.

10My Photo
ये फोटो लिया गया है रजनीकांत जी के ब्लॉग से ...और हाँ इस मासूम फोटो पर मत जाइए...जाना है तो इनके deehwara--डीहवारा... पर prkant की रचना
एक और लड़की जल गयी है  पर जाइए...इनकी रचना आँखे नम ही  कर देगी ..लीजिए कुच्छ पंक्तियाँ यहाँ पेश करती हूँ..

कवि जी , कविताएँ लिखो तुम, तुमको क्या
एक और लड़की जल गयी है
प्रेम-ताप से नहीं मिट्टी के तेल से

उबले आलू के छिलके-सी छिलती है चमड़ी
भौंह-पलक-बाल सब झुलसे हुए हैं
मन के फफोले क्यों न कोई देख पाता
देख पाता  क्यों न कोई दाह मन का .

11मेरा फोटो
इनसे मिलिए ये हैं "निरंतर" की कलम से........ पर डा.राजेंद्र तेला "निरंतर" जो बता रहे हैं की आग क्या क्या कर सकती है..

आग जलाती है,चीज़ों को राख करती है
माहौल को गर्म करती है

लगे जो जज्बे में,राह नयी दिखाती है
जलती है जहन में,तो बर्बाद करती है

"निरंतर" की कलम से.....: जलाने की चाहत है,तो अधर्म को जलाओ


12

ये है ब्लॉग LIFE... जिस पर  Anupriya  (अनुप्रिया) आजकल के हालातों से रु-ब-रु होती लड़कियों की जिंदगी पर कुछ लिख रही हैं.



ऐसा लग रहा था है वो
मेरे अतीत का आइना,
जो कुछ भी वो कह रही थी
साथ मेरे हो चूका।

आज न्यूज़ में सुना मैंने एक  दास्ताँ,.

13

आज शोभना चौरे जी की एक कोरी सी रचना पढ़िए
"कोरे दीपक "  जिसकी कुछ पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार हैं...


तेल और बाती
का अभिमान
मै नहीं जानती
कैसे ?
जला जाता है
मेरा
समूचा वजूद |

14मेरा फोटो
ये हैं आशा जी जो रोज मर्रा की जिंदगी के एहसासों से अपने शब्दों की माला पिरोने में माहिर हैं..आज पढ़िए इनकी संवेदनशील रचना...अपने बच्चे के जन्मदिन पर एक गरीब माँ की परेशानी और वो कैसे लाती है अपने बच्चे की खुशी...
है जन्म दिन छोटे का

कैसे उसे संतुष्ट करे ,
उसकी सालगिरह कैसे मनाए ,
सड़क पूरी सूनी है,
काफी रात बाकी है ,
भारी कदम लिए खड़ी थी ,
सोच रही थी कल क्या होगा ,

15My Photo
ये हैं हमारे हास्य कवि मजाल साहब जो  देखिये कितने मजेदार पोस में खड़े फोटो खिंचवा रहे हैं और तो और इनके ब्लॉग का नाम भी मजेदार है ... वक़्त ही वक़्त कमबख्त और कविता का तो क्या कहना...आप भी नहीं कर सकते ऐसी कविता...जी हाँ क्या आप कभी बिना कोई मात्रा लगाए कविता कर सकते हैं...विश्वास नहीं होता तो लीजिए पढ़िए इनकी कविता ...हास्य - बिना मात्रा की कविता ! ( अगर न अब, तब कब ?...फिलहाल तो चंद पंक्तियाँ दे रही हूँ...बाकी का रास्ता तो आपको मालुम ही है...

धन कम पर,
न कम खपत !
समधन, हमदम,
सब गयत भग!
नयन बनत  जल तट !
सनशय, सनशय, सब तरफ !
मन भय - परलय कब ?!

16My Photo
अदा जी आजकल क्षणिकाएं कहने लगी हैं और वो भी बहुत गहरी गहरी...लीजिए पढ़िए आप भी..
कुछ बुलबुले...


देवता
कहते हैं !
तुम काम क्रोध छोड़ दोगे तो,
देवता बन जाओगे,
काम क्रोध छोड़े हुए
कोई देवता नहीं देखा !


17
 ये फोटो ली गयी है रूप चन्द्र शास्त्री जी के ब्लॉग से...तस्वीर देख कर अंदाजा लग गया होगा कि  कविता आज आँखों या अश्कों पर लिखी गयी है तो सही अंदाजा लगा रहे हैं आप सब ...



जब आता है दुःख तभी,
लोचन तन-मन धोता है।
आँसू का अस्तित्व,
नहीं सागर से कम होता है।।
“आँसू का अस्तित्व… ..”..

18      अब गद्यशाला ......

19My Photo
आज बावरी मस्जिद फैसला होना है तो क्यों न इसी मुद्दे पर पहली पोस्ट लगायी जाये...तो लीजिए फैसला होने से पहले जान तो लीजिए अयोध्या नगरी के हाल और वहाँ पर चलता राजनैतिक कारोबार..हमारे श्रेष्ठ ब्लोग्गर और पेशे से पत्रकार श्री राज कुमार सोनी की कलम से..

यही   अयोध्या  जिसने उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली की सरकार बदल दी पर किसी ने इसे बदलने की जहमत तक नही उठाई । न कोई उद्योग धंधा लगा न ही शिक्षा का कोई नया  केंद्र बनाया गया  । गंदगी के ढेर पर बैठे अयोध्या फैजाबाद में एक ढंग का म्यूजियम तक नही है जो इसका इतिहास बता सके । राम की जन्मभूमि यानी अयोध्या तो बहुत प्राचीन शहर है पर बाद में  इसी के पास और साथ बसे फैजाबाद का का भी रोचक इतिहास है । अंग्रेजो से अवध में जो संघर्ष हुआ उसमे भी फैजाबाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
फिजा को फसाद में न बदल दे मीडिया

20My Photo
ये हैं डा. टी.एस.दराल.  और जैसा की नाम से पता चलता है ये डॉक्टर हैं..हांजी जानती हूँ आप सब जानते हैं ये बात. मगर आप क्या जानते हैं...मोटापा क्यों होता है  और इसके कारण क्या हैं ??? नहीं जानते तो चलिए डा.साहब आपको कारण और इलाज बता रहे हैं अपने ब्लॉग

अंतर्मंथन पर हाइपोथायरायडिज्म---मोटापे का एक कारण --


21मेरा फोटो
लीजिए जी अजय झा जी को ब्लॉग्गिंग करते करते तीन साल पुरे हो चुके हैं....और ये बाँट रहे हैं अपने ब्लॉग अनुभव आपके साथ...और कह रहे हैं कि  अब ये ब्लॉग बवाल शुरू करेंगे...
ब्लॉगिंग में तीन साल पूरे........अब करूंगा " ब्लॉग बवाल "शुरू .........अजय कुमार झा
इनकी ये योजना अभी भविष्य के गर्भ में है ...मगर जल्दी ही आपके और इस दुनिया के नाम से "ब्लॉग बवाल "जरूर आएगा ।

22मेरा फोटो
सलिल वर्मा जी उर्फ   चला बिहारी ब्लॉगर बनने जी अपने बचपन की स्मृतियों में खोये हुए हैं और आपने बचपन के घर के आँगन में पढ़ रहे हैं...और पढ़ क्या रहे हैं आँगन के सामने की रोज-मर्रा की जिंदगियों को देख आज उनका मनन कर रहे हैं...चलो चलते हैं आज इनके गाँव और देखते हैं वहाँ क्या हुआ..
पति,पत्नी और वो!!

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ये चित्र है ब्लॉग दिव्य साधना DIVY SADHNA... से जहां  राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ जी आपको एक कहानी सुना रहे हैं नारद जी की.
एक भी बूंद तेल छलकना नहीं चाहिये

एक बार नारद जी को ऐसा भृम हो गया कि विष्णु की भक्ति करने वालों में उनका नाम सबसे ऊपर है । लेकिन इस विचार की पुष्टि कौन करता ? इस बात का सटीक उत्तर कौन देता ? जाहिर है । स्वयं विष्णु....


24मेरा फोटो
ये हैं गाज़ियाबाद से विद्यालंकार जी और बता रहे हैं अपने ब्लॉग Yog and Adhyatma के एक लेख

"क्षमा"


द्वारा क्षमा का महत्त्व..और लिखते हैं..

यमराज कभी भी आकर हमें अपना ग्रास बना सकता है। इसलिए क्षमा- धर्म के लिए आजकल की प्रतीक्षा हमें नहीं करनी चाहिए। हमें जिससे भी कषाय और कल्मष हो उसको प्रेम-भाव से क्षमा कर देना चाहिए, साथ ही दूसरे से भी क्षमा करवाने का प्रयास करना चाहिए। यही इस क्षमा-धर्म का मूल सार है। क्षमा में बहुत ही निराकुलता और आत्मशांति बनी रहती है।


25
ये हैं हमारे ब्लोग्गर पंकज त्रिवेदी जी जो आज हमें एक सीख देते हुए कहानी सुना रहे हैं...आपने राजा भोज का नाम तो सुना होगा...पर क्या आप राजा भोज का पूरा नाम जानते हैं...नहीं...??? तो चलिए जानिये राजा भोज का पूरा नाम और पढ़िए सीख देती इनकी ये कहानी..

सत्यवचन से स्वीकृति इनके ब्लॉग

विश्वगाथा पर


26मेरा फोटो

हमारे हिंदुओं में किसी भी मंगल कार्य में गायत्री मन्त्र के श्लोक का उच्चारण जरूर किया जाता है लेकिन हमारे बच्चों के अलावा कितने ही ऐसी उपस्थित गण होते हैं जिन्हें इस मन्त्र के मायने नहीं पता होते...तो चलिए आज आप और हम चलते हैं ओशो - सिर्फ एक  ओशो रजनीश जी के ब्लॉग पर और   
समझे गायत्री मन्त्र का सही अर्थ

27

अग्रदूत

यह ब्लॉग छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने समाचार पत्र "अग्रदूत" में प्रकाशित कुछ लेखों को प्रकाशित करेगा . जिन्हे  पत्र के प्रधान संपादक श्री विष्णु सिन्हा जी ने लिखा है .
ये लेख "सोच की लकीरें" के नाम से प्रकाशित होते हैं...
तो पढ़िए आज का इनका ताज़ा लेख...
अमेरिका की घटती और चीन की बढ़ती ताकत के कारण भारत ..
अमेरिका कुल जोड़ घटाना से अच्छी तरह से समझ रहा है कि पाकिस्तान ने उससे
दोस्ती का राग अलाप कर हर तरह का लाभ उठाया लेकिन उपहार में काश्मीर की
भूमि चीन को दी। आज काश्मीर का 44 प्रतिशत भाग भारत के पास है तो 36
प्रतिशत भाग पाकिस्तान के पास और चीन के पास 20 प्रतिशत भाग है। चीन ने
पाकिस्तान को परमाणु संपन्न राष्ट्र  बनाया। आज भी चीन पाकिस्तान में
परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगा रहा है।  ऐसा कोई समय आया कि पाकिस्तान को अपने
कब्जे वाला काश्मीर छोडऩा पड़ा तो वह उस पर भारत के बदले चीन का कब्जा
होना पसंद करेगा। चीन की विस्तारवादी नीति से सारी दुनिया अच्छी तरह से
परिचित है।


28मेरा फोटो
गौरव अगरवाल जी का एक लेख प्रस्तुत है..हिंदी को लूट लिया मिल के हिंदी वालों ने...

भारतीय अक्सर जिसे माँ मानते हैं उसे जम कर परेशान  करते हैं , भारत माँ के हाल किसी से छुपे नहीं है
हिंदी को माँ मानने वाले अक्सर अपनी मौसियों तेलुगु , उर्दू, अंग्रेजी से नफरत करने लगते हैं , कुल मिला कर यही उनकी माता भक्ति  , देशभक्ति का सुविधाजनक प्रतीक है


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ये हैं अर्पित श्रीवास्तव जी जो एक सन्देश दे रहे हैं मुंबई वासियों के लिए अपनी एक कहानी के ज़रिये...लीजिए पढ़िए इनकी छोटी सी कहानी
मुसाफिर

"भैया कुर्ला चलोगे?"
"किधर से आएला है भाऊ?"
"बिहार से"
"वो टैक्सी मे बोर्ड नही दिखता क्या? बिहारी नॉट अलोड अभी कल्टी कर इधर से चल

30

ये हैं लता 'हया' at ' हया और बहुत दिनों बाद इन्हें फुर्सत मिली है आज अपने ब्लॉग पर गपशप करने की. इनकी बातों का अंदाज़ शायराना है तो पढ़िए ये क्या कहती हैं...
हिन्दू हैं,मुल्क हिंद है,हिंदी परायी है !
तो जनाब यहाँ मिलने का मज़ा ही अलग है क्यूंकि ब्लॉग-जगत तो भाषा-प्रेमियों का सब से रोमांटिक स्थल (लव पॉइंट)है ; यहाँ हिंदी को propose किया जाता है,उसके साथ डेटिंग की जाती है,प्यार भरी गुफ़्तगू की जाती है..

और अब देखिये इनका शायराना अंदाज़..
इससे बड़ा मज़ाक़ तो होगा भी क्या भला
हिन्दू हैं,मुल्क हिंद है,हिंदी परायी है !

ये सोच कर के बात बिगड़ जाये ना कहीं
मैंने लबे-"हया" पे खमोशी सजाई है

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ये फोटो ली गयी है राजभाषा हिंदी से अल्लाउद्दीन खिलजी की. और मनोज जी कड़ी बध्ह कर के दे रहे हैं जानकारी चौदहवीं शताब्‍दी के प्रारंभिक दशक में इस राजा की  नियंत्रित अर्थव्‍यवस्‍था की...
"अलाउद्दीन अनपढ़ व्‍यक्ति था। अकबर की तरह टोडरमल या अबुल फजल जैसे काबिल सलाहकार भी उसके पास नहीं थे। अतः अलाउद्दीन ने जो भी सफलता प्राप्‍त की वह उसे अपनी सामान्‍य जानकारी के बदौलत ही मिली। इस योजना को मदद पहुंचानेवाले किसी वृहत ढांचे, तकनीकी दक्षतायुक्‍त निरीक्षण, तकनीकी सलाह और संगठित प्रशासनिक कुशलता के बिना ही, सिर्फ अपनी इच्‍छा शक्ति के बल पर उसने अल्‍पा‍वधि में ही चिरस्‍थाई प्रभाव पैदा किए...."
आज पेश है...


अलाउद्दीन के शासनकाल में सस्‍ता भारत-2

32

ये फोटो फ्रेम की गयी है कुमार राधारमण जी के ब्लॉग स्वास्थ्य-सबके लिए से जिसमे आज बताया जा रहा है की लीवर प्रत्यारोपण का काम और वो भी एक छोटे से छह माह के बच्चे का कितनी सुघड़ता से गुड़गांव स्थित मेदांता मेडीसिटी के डॉक्टरों ने किया...ऐसे ही गंगाराम के अस्पताल में लीवर प्रत्यारोपण के क्षेत्र में नई पद्घतियां अपनाई जा रही हैं। यहां की सफलता दर ९५ फीसदी तक है...आगे पढ़िए...
दिल्ली और गुड़गांव में कल लिवर प्रत्यारोपण के दो असाधारण मामले सफल रहे

33 हा हा हा ..... क्या हुक्म है आका ..
चलिए अंत में कुछ हंसी-मजाक हो जाए..तो पढ़िए...गजेंदर सिंह जी हंसा रहे हैं आपको अपने एक व्यग्य द्वारा..JANOKTI : जनोक्ति : राज-समाज और जन की आवाज...

अगर आप को बोतल मिले तो आप क्या मांगोगे..


34
और अब इजाजत.
नमस्कार.
अनामिका.

गुरुवार, सितंबर 09, 2010

आओ पहेलियाँ बुझायें...(चर्चा मंच ..273..अनामिका)

आज चलिए आप से कुछ पहेलियाँ पूछते हैं...देखें कितनी पहेलियाँ आप सुलझा सकते हैं...और अगर ना सुलझा पायें तो डरने की जरुरत बिलकुल भी नहीं है क्युकी हर फोटो में उस पहेली का लिंक छुपा है...चाहें तो फोटो पर क्लिक्क करते जाइए और इन पहेलियों का मजा लेते जाइए..तो लीजिए हाज़िर है मेरी ये कोशिश...आपके लिए..

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एक पहेली ऐसी भी अफ़वाहें अमर हैं बताती है
गुट-विरोधी गुटों की लटें सुलझाकर चोटी गूंथा करती है.....

एक पहेली ये भी भैया हमको इक बात सिखाती है
छुद्र नहीं केवल सृजक ही इक दिन इतिहास बनाते हैं.
ग़ज़ल/ जख्म दिया करते हैं फिर थोड़ा मुसकाते हैं

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डा.अजित जी पहेली बुझा रहे..

काफिर को यकीन कैसे आएगा...?

मैं तो सहर की अजान हूँ ..

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कैसा मुस्कुराता चेहरा और
ये कैसी पहेली करते है ...
मेरी अर्थी की बात करते हैं...दे रहे है जो मुझको अंतिम विदाई,
बरबस अश्को की सलामी से,
इतना बतला दो क्यों नहीं बहे,
दो बूँद भी मेरी लाचारी पर|
My Photo

वीरेंदर सिंह जी पहेली पूछे कैसे होगा
भारत निर्माण !!!!!!


हवा में ही पूरा कर रहे सपने
नादान जनता के आगे कर गुणगान !


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न दैन्यं न पलायनम् प्रवीण शाह पहेली बुझायम
पीड़ा कह दो जहाँ जहाँ, माणिक-दृग-नीर बिखेरें हैं
क्यों सम्बन्धों के आँगन में, अब आशंका के डेरे हैं,

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अनुपमा त्रिपाठी बुझें एक पहेली
मोल अनमोल समझना
आंसू या मोती ....!!
गागर जब बन जाये सागर ---
कविता फिर रस का प्याला
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शोभा महेन्द्रू जी देखो एक पहेली
के चक्रव्यूह में फंस गयी...
कल रात स्वप्न में
ये हैरान सी हो गई ।

हिन्दी से मुलाकात करके

ये कुछ मेरे भाव कह गयी...


मेरा फोटो

शायद तब ही ............. अब मैं आगे नहीं बताऊँगी की ये कौनसी पहेली बुझा रही हैं...ना जाने क्या होता है तब....जब ये सब होता है....


जो दीन ईमान से
ऊपर उठ जाये
जो जिस्म के
तूफ़ान से
ऊपर उठ जाए
दीवानगी
पागलपन जैसे
शब्दों की महत्ता
ख़त्म हो जाए

http://redrose-vandana.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html

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शादी के बाद अपराजिता से कुछ छीन गया है


पर फिर भी कहती हैं ....
जो कि रह सकेगा उम्र भर मेरा ‘अपना’....
ना जाने ये कैसी पहेली है ? चलो सुलझाते हैं इसे इन्ही की रचना पढ़ कर...

मानसी करती कोशिशें एक पहेली बुझाने की

सितारों के कारवां में एक सितारा बन
तुम्हारे साथ-साथ चलना मेरा...

बताओ क्या ????


कुछ और तस्वीरें.1


बड़ी मुश्किल से हाथ आए , तुम्हें हम जाने कैसे दें
अभी पैदा हुई ख़्वाहिश , अभी मर जाने कैसे दें
अभी तो रूठ कर आया है इक बादल समंदर से
ज़मीं प्यासी है , इसको लौट कर अब जाने कैसे दें

देखिये दीपक जी ना जाने एक पहेली सुलझा रहे हैं या इस स्टाईल में ये फोटो खिंचवा कर आपको धमकी दे रहे हैं...आप खुद ही पढ़िए यहाँ....
ग़ज़ल पढ़िए और देखिये कि कैसे एक कुकुर को आती है गिनती और जोड़, घटाना------->>>दीपक मशाल

My Photo

टिप्पणी नहीं चाहिए।
गिरिजेश राव जी कहते हैं
तुम पागल हो

"तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है।"
चलो! सिगरेट पी आते हैं।

अब इनकी पहेली तो आप इनके ब्लॉग पर जाकर ही सुलझा सकते हैं...की क्या हुआ है इन्हें ?????
श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना \

* साकार बनो ओ निराकार
पूछती बिटिया एक अपनी माँ "किरण' की पहेली .....

कर प्राण देह से अलग
भला क्या मानव मानव रह सकता,
पूजा के बिना पुजारिन का
अस्तित्व न कोई रह सकता
!
http://sadhanavaid.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html


मेरा परिचय यहाँ भी है!

एक आभूषण
और इसको लेकर
मैं चला गया
अपने शयनकक्ष में

देखिये शास्त्री जी अभी भी आभूषणों से कितना अनुराग रखते हैं ...विश्वास नहीं होता तो ये पहेली इनकी ये कविता पढ़ कर ही सुलझा लीजिए...
“मैंने पकड़ा आभूषण :डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री
http://uchcharan.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html

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उजाले की आस में राहुल रंजन पूछे एक पहेली...



उस झोपड़ी के आगे
दिया रोज टिमटिमाता है,
सूरज के बुझते ही वो बूढ़ा
रोज चिराग जलाता है.

बोलो क्या ?????


दो टूक बातें ------[निराशा से ]
करती ये राजवंत राज
कोई इनकी पहेली बस बतला दो आज ....

सुनहरी रेत की तरह
इस पार से उस पार तक
फैली उजली हंसी ने
कमरे में पसरे मौन से पूछा
ये चुप सी क्यों लगी है
अजी ! कुछ तो बोलिए |

My Photo

पहेली हैं कैसी

खामोशियाँ .

जिंदगी की देखो

खानाबदोशियाँ भी रास ना आयें.

पहेली बुझें संगीता जी जिंदगी से.




अनामिका नाम से ही लिख डाले हैं मेरे भाव
पूछे पहेली मेरी ये तो कैसे ना बुझूँ आज ??



घर मेरा नहीं पराई हूँ
दैनिक मंत्र जाप था यह
माँ अपनी की कोख जाई हूँ
पराया धन कैसा है यह ।




राजेश चड्ढ़ा
यूं ही तेरी याद में जिए जा रहा हूं मैं / राजेश च

पढ़िए राजेश चड्ढा जी की पहेली..

ले दे के तेरे नाम के दो हरफ़ बचे हैं ,
सब कुछ इसी लिए किए जा रहा हूं मैं ।

राजेश चड्ढा हर्फों के खेल में फंसे हैं..
पहेली है जिंदगी...फिर भी जी रहे हैं..
http://rajeshchaddha.blogspot.com/2010/09/blog-post.html

यहाँ समर्पित हैं कुछ लेख ...

मेरा फोटो
http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html
कौन हो भारतीय स्त्री का आदर्श - द्रौपदी या सीता
पूरे भारत के इतिहास में द्रौपदी को सिर्फ एक आदमी न ही प्रशंसा दी है। और एक ऐसे आदमी ने जो बिलकुल अनपेक्षित है।

लेकिन चूंकि पुरूष कथाएं लिखते हे। इसलिए कथाओं में पुरूष-पात्र बहुत उभरकर दिखाई पड़ते है। असल में दुनिया की कोई महाकथा स्त्री की धुरी के बिना नहीं चलती है।
वह महायुद्ध जो पीछे कौरवों-पांडवों में हुआ, वह पांडवों-पांडवों में भी हो सकता था।
इसलिए कहानी मेरे लिए इतनी सरल नहीं है। कहानी बहुत प्रतीकात्मपक है और गहरी है।
...आगे की पहेली तो तभी सुलझेगी जब आप इस ब्लॉग पर जायेंगे..

[19012010014[4].jpg]

डा.रमेश मोहन झा जी समीक्षा कर रहे हैं अरुण सी राय की कविता गीली चीनी की...

भूलकर भी कभी मां के आगे मत रोना
बुनियाद पर नमी कभी अच्‍छी नहीं होती।


और दे रहे हैं आपको एक पहेली...


संबंध विस्‍तर हो गए हैं

Bs Pabla
आज बीबीसी रेडियो में एक रिपोर्ट थी छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी 'बस्तर की मैना' की . ये बस्तर की मैना थोड़े से प्रशिक्षण के बाद इंसानों की आवाज़ की हू-ब-हू नक़ल कर सकती है।
अरे भाई मैं कोई पहेली नहीं बूझ रही हूँ...विश्वास नहीं होता तो बी.एस. पाबला जी की ये पोस्ट
अगर आप वाह न कहें तो क्या फायदा इस पोस्ट का! पढ़िए और हाँ रिकार्डिंग जरूर सुनियेगा..तभी हो पायेगा इस पहेली का खुलासा..

http://oshosatsang.wordpress.com/2010/09/08/
ओशो

तुमने मृत्यु से परिपूर्णता से प्रेम किया। हाँ तुमने मुझे पूरे ह्रदय से अपने भीतर प्रवेश दिया और कैंसर विदा हो गया।....

जी हाँ ये भी एक पहेली ही है....बुझो तो जाने इस ब्लॉग पर...

कैंसर जैसी बीमारी एक नया अवसर देती है




My Photo
आखिर कौन हैं शिव ????
सुन्दर हैं तो कुरूप भी कम नहीं हैं ... भोगी हैं तो बड़े त्यागी भी हैं -सती तक का परित्याग कर दिया ....ऐसे हैं शिव....
अरे सारी पहेली तो मैंने ही सुलझा दी...अब आप क्या पढेंगे.....???

लेकिन बहुत कुछ है जानने को..
.

स्नेहाधार...
बताओ एक कहावत का मतलब
कहो तो एक हिंट दे जाऊ
दानवीर राजा बलि !! के दरबार की है बात,
ये मैं तुम्हे बताऊँ..
http://samvednasansaar.blogspot.com/2010/09/blog-post.html
दान में जो विघ्न डाले,नजर लगाये वह काना हो जाए ...
आगे पढ़ना हो तो भैया रंजना सिंह जी के संवेदना संसार में जाएँ....


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लूट पड़े तो टूट पड़ो मार पड़े तो भाग पड़ो

कामनवेल्थ गेम्स की ऐसी पहेली रे भैया
जो बड़े बड़े भी मुह काला करवाय लिए.
..


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गगन शर्मा जी ऐसी बात कहें
जो बात हजम ना होए
माने या ना माने पर यह सच ! ! ये भईया ऐसी पहेली बुझायें !
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अरुण बंछोर सीख वाली कहानी में
एक बचपन की बात बता रहे
एक हमारे सम्माननीय नेता की
इस पहेली में कहानी सुना रहे...

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बूझें बूझें एक पहेली...
मर कर कोई कहाँ है जाता..
क्या कोई फिर जिन्दा हो जाता.. क्या
मृत्‍यु के समय रीति-रिवाज और कर्मकाण्‍ड हैं इतने जरूरी और कितने गैर जरूरी – अजित


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दिल लुभाती रमज़ान की रौनक़
फिरदौस खान जी की डायरी में पढ़िए..
रमजान के महीने का वृतांत...


मरहबा सद मरहबा आमदे-रमज़ान है
खिल उठे मुरझाए दिल, ताज़ा हुआ ईमान है
हम गुनाहगारों पे ये कितना बड़ा अहसान है
या ख़ुदा तूने अता फिर कर दिया रमज़ान है

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निर्वासित बादशाह.... बहादुरशाह ज़फ़र....




'कितना बदनसीब ज़फर दफ़्न के लिए
दो गज ज़मीन भी न मिली कू ए यार में'

इसी के प्रतिउत्तर में किसी कवि ने कहा है...

दो गज ज़मीन भी न मिली तो क्या मलाल
ख़ुशबू ये कू ए यार है इस यादगार में.....

आगे की पहेली इनके ब्लॉग पर जाकर ही सुलझ सकती है तो पढ़िए अदा जी का ब्लॉग.
काव्य मंजूषा

और हाँ सब ने अंत में जवाब देना है की किसने कितनी पहेलियाँ बुझाई...क्युकी इसी की बिनाह पर आप सब को अंक मिलेंगे.....और मुझे भी...हा.हा.हा...चलिए...तो हो जाइये शुरू...और अब मैं करती हूँ इंतज़ार रिपोर्ट कार्ड का...:) :)


नमस्कार


अनामिका