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Thursday, September 09, 2010

आओ पहेलियाँ बुझायें...(चर्चा मंच ..273..अनामिका)

आज चलिए आप से कुछ पहेलियाँ पूछते हैं...देखें कितनी पहेलियाँ आप सुलझा सकते हैं...और अगर ना सुलझा पायें तो डरने की जरुरत बिलकुल भी नहीं है क्युकी हर फोटो में उस पहेली का लिंक छुपा है...चाहें तो फोटो पर क्लिक्क करते जाइए और इन पहेलियों का मजा लेते जाइए..तो लीजिए हाज़िर है मेरी ये कोशिश...आपके लिए..

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एक पहेली ऐसी भी अफ़वाहें अमर हैं बताती है
गुट-विरोधी गुटों की लटें सुलझाकर चोटी गूंथा करती है.....

एक पहेली ये भी भैया हमको इक बात सिखाती है
छुद्र नहीं केवल सृजक ही इक दिन इतिहास बनाते हैं.
ग़ज़ल/ जख्म दिया करते हैं फिर थोड़ा मुसकाते हैं

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डा.अजित जी पहेली बुझा रहे..

काफिर को यकीन कैसे आएगा...?

मैं तो सहर की अजान हूँ ..

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कैसा मुस्कुराता चेहरा और
ये कैसी पहेली करते है ...
मेरी अर्थी की बात करते हैं...दे रहे है जो मुझको अंतिम विदाई,
बरबस अश्को की सलामी से,
इतना बतला दो क्यों नहीं बहे,
दो बूँद भी मेरी लाचारी पर|
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वीरेंदर सिंह जी पहेली पूछे कैसे होगा
भारत निर्माण !!!!!!


हवा में ही पूरा कर रहे सपने
नादान जनता के आगे कर गुणगान !


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न दैन्यं न पलायनम् प्रवीण शाह पहेली बुझायम
पीड़ा कह दो जहाँ जहाँ, माणिक-दृग-नीर बिखेरें हैं
क्यों सम्बन्धों के आँगन में, अब आशंका के डेरे हैं,

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अनुपमा त्रिपाठी बुझें एक पहेली
मोल अनमोल समझना
आंसू या मोती ....!!
गागर जब बन जाये सागर ---
कविता फिर रस का प्याला
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शोभा महेन्द्रू जी देखो एक पहेली
के चक्रव्यूह में फंस गयी...
कल रात स्वप्न में
ये हैरान सी हो गई ।

हिन्दी से मुलाकात करके

ये कुछ मेरे भाव कह गयी...


मेरा फोटो

शायद तब ही ............. अब मैं आगे नहीं बताऊँगी की ये कौनसी पहेली बुझा रही हैं...ना जाने क्या होता है तब....जब ये सब होता है....


जो दीन ईमान से
ऊपर उठ जाये
जो जिस्म के
तूफ़ान से
ऊपर उठ जाए
दीवानगी
पागलपन जैसे
शब्दों की महत्ता
ख़त्म हो जाए

http://redrose-vandana.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html

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शादी के बाद अपराजिता से कुछ छीन गया है


पर फिर भी कहती हैं ....
जो कि रह सकेगा उम्र भर मेरा ‘अपना’....
ना जाने ये कैसी पहेली है ? चलो सुलझाते हैं इसे इन्ही की रचना पढ़ कर...

मानसी करती कोशिशें एक पहेली बुझाने की

सितारों के कारवां में एक सितारा बन
तुम्हारे साथ-साथ चलना मेरा...

बताओ क्या ????


कुछ और तस्वीरें.1


बड़ी मुश्किल से हाथ आए , तुम्हें हम जाने कैसे दें
अभी पैदा हुई ख़्वाहिश , अभी मर जाने कैसे दें
अभी तो रूठ कर आया है इक बादल समंदर से
ज़मीं प्यासी है , इसको लौट कर अब जाने कैसे दें

देखिये दीपक जी ना जाने एक पहेली सुलझा रहे हैं या इस स्टाईल में ये फोटो खिंचवा कर आपको धमकी दे रहे हैं...आप खुद ही पढ़िए यहाँ....
ग़ज़ल पढ़िए और देखिये कि कैसे एक कुकुर को आती है गिनती और जोड़, घटाना------->>>दीपक मशाल

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टिप्पणी नहीं चाहिए।
गिरिजेश राव जी कहते हैं
तुम पागल हो

"तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है।"
चलो! सिगरेट पी आते हैं।

अब इनकी पहेली तो आप इनके ब्लॉग पर जाकर ही सुलझा सकते हैं...की क्या हुआ है इन्हें ?????
श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना \

* साकार बनो ओ निराकार
पूछती बिटिया एक अपनी माँ "किरण' की पहेली .....

कर प्राण देह से अलग
भला क्या मानव मानव रह सकता,
पूजा के बिना पुजारिन का
अस्तित्व न कोई रह सकता
!
http://sadhanavaid.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html


मेरा परिचय यहाँ भी है!

एक आभूषण
और इसको लेकर
मैं चला गया
अपने शयनकक्ष में

देखिये शास्त्री जी अभी भी आभूषणों से कितना अनुराग रखते हैं ...विश्वास नहीं होता तो ये पहेली इनकी ये कविता पढ़ कर ही सुलझा लीजिए...
“मैंने पकड़ा आभूषण :डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री
http://uchcharan.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html

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उजाले की आस में राहुल रंजन पूछे एक पहेली...



उस झोपड़ी के आगे
दिया रोज टिमटिमाता है,
सूरज के बुझते ही वो बूढ़ा
रोज चिराग जलाता है.

बोलो क्या ?????


दो टूक बातें ------[निराशा से ]
करती ये राजवंत राज
कोई इनकी पहेली बस बतला दो आज ....

सुनहरी रेत की तरह
इस पार से उस पार तक
फैली उजली हंसी ने
कमरे में पसरे मौन से पूछा
ये चुप सी क्यों लगी है
अजी ! कुछ तो बोलिए |

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पहेली हैं कैसी

खामोशियाँ .

जिंदगी की देखो

खानाबदोशियाँ भी रास ना आयें.

पहेली बुझें संगीता जी जिंदगी से.




अनामिका नाम से ही लिख डाले हैं मेरे भाव
पूछे पहेली मेरी ये तो कैसे ना बुझूँ आज ??



घर मेरा नहीं पराई हूँ
दैनिक मंत्र जाप था यह
माँ अपनी की कोख जाई हूँ
पराया धन कैसा है यह ।




राजेश चड्ढ़ा
यूं ही तेरी याद में जिए जा रहा हूं मैं / राजेश च

पढ़िए राजेश चड्ढा जी की पहेली..

ले दे के तेरे नाम के दो हरफ़ बचे हैं ,
सब कुछ इसी लिए किए जा रहा हूं मैं ।

राजेश चड्ढा हर्फों के खेल में फंसे हैं..
पहेली है जिंदगी...फिर भी जी रहे हैं..
http://rajeshchaddha.blogspot.com/2010/09/blog-post.html

यहाँ समर्पित हैं कुछ लेख ...

मेरा फोटो
http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_09.html
कौन हो भारतीय स्त्री का आदर्श - द्रौपदी या सीता
पूरे भारत के इतिहास में द्रौपदी को सिर्फ एक आदमी न ही प्रशंसा दी है। और एक ऐसे आदमी ने जो बिलकुल अनपेक्षित है।

लेकिन चूंकि पुरूष कथाएं लिखते हे। इसलिए कथाओं में पुरूष-पात्र बहुत उभरकर दिखाई पड़ते है। असल में दुनिया की कोई महाकथा स्त्री की धुरी के बिना नहीं चलती है।
वह महायुद्ध जो पीछे कौरवों-पांडवों में हुआ, वह पांडवों-पांडवों में भी हो सकता था।
इसलिए कहानी मेरे लिए इतनी सरल नहीं है। कहानी बहुत प्रतीकात्मपक है और गहरी है।
...आगे की पहेली तो तभी सुलझेगी जब आप इस ब्लॉग पर जायेंगे..

[19012010014[4].jpg]

डा.रमेश मोहन झा जी समीक्षा कर रहे हैं अरुण सी राय की कविता गीली चीनी की...

भूलकर भी कभी मां के आगे मत रोना
बुनियाद पर नमी कभी अच्‍छी नहीं होती।


और दे रहे हैं आपको एक पहेली...


संबंध विस्‍तर हो गए हैं

Bs Pabla
आज बीबीसी रेडियो में एक रिपोर्ट थी छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी 'बस्तर की मैना' की . ये बस्तर की मैना थोड़े से प्रशिक्षण के बाद इंसानों की आवाज़ की हू-ब-हू नक़ल कर सकती है।
अरे भाई मैं कोई पहेली नहीं बूझ रही हूँ...विश्वास नहीं होता तो बी.एस. पाबला जी की ये पोस्ट
अगर आप वाह न कहें तो क्या फायदा इस पोस्ट का! पढ़िए और हाँ रिकार्डिंग जरूर सुनियेगा..तभी हो पायेगा इस पहेली का खुलासा..

http://oshosatsang.wordpress.com/2010/09/08/
ओशो

तुमने मृत्यु से परिपूर्णता से प्रेम किया। हाँ तुमने मुझे पूरे ह्रदय से अपने भीतर प्रवेश दिया और कैंसर विदा हो गया।....

जी हाँ ये भी एक पहेली ही है....बुझो तो जाने इस ब्लॉग पर...

कैंसर जैसी बीमारी एक नया अवसर देती है




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आखिर कौन हैं शिव ????
सुन्दर हैं तो कुरूप भी कम नहीं हैं ... भोगी हैं तो बड़े त्यागी भी हैं -सती तक का परित्याग कर दिया ....ऐसे हैं शिव....
अरे सारी पहेली तो मैंने ही सुलझा दी...अब आप क्या पढेंगे.....???

लेकिन बहुत कुछ है जानने को..
.

स्नेहाधार...
बताओ एक कहावत का मतलब
कहो तो एक हिंट दे जाऊ
दानवीर राजा बलि !! के दरबार की है बात,
ये मैं तुम्हे बताऊँ..
http://samvednasansaar.blogspot.com/2010/09/blog-post.html
दान में जो विघ्न डाले,नजर लगाये वह काना हो जाए ...
आगे पढ़ना हो तो भैया रंजना सिंह जी के संवेदना संसार में जाएँ....


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लूट पड़े तो टूट पड़ो मार पड़े तो भाग पड़ो

कामनवेल्थ गेम्स की ऐसी पहेली रे भैया
जो बड़े बड़े भी मुह काला करवाय लिए.
..


मेरा फोटो



गगन शर्मा जी ऐसी बात कहें
जो बात हजम ना होए
माने या ना माने पर यह सच ! ! ये भईया ऐसी पहेली बुझायें !
http://kuchhalagsa.blogspot.com/2010/09/blog-post_08.html
मेरा फोटो
http://balmuskan.blogspot.com/2010/09/blog-post_5084.html
अरुण बंछोर सीख वाली कहानी में
एक बचपन की बात बता रहे
एक हमारे सम्माननीय नेता की
इस पहेली में कहानी सुना रहे...

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बूझें बूझें एक पहेली...
मर कर कोई कहाँ है जाता..
क्या कोई फिर जिन्दा हो जाता.. क्या
मृत्‍यु के समय रीति-रिवाज और कर्मकाण्‍ड हैं इतने जरूरी और कितने गैर जरूरी – अजित


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दिल लुभाती रमज़ान की रौनक़
फिरदौस खान जी की डायरी में पढ़िए..
रमजान के महीने का वृतांत...


मरहबा सद मरहबा आमदे-रमज़ान है
खिल उठे मुरझाए दिल, ताज़ा हुआ ईमान है
हम गुनाहगारों पे ये कितना बड़ा अहसान है
या ख़ुदा तूने अता फिर कर दिया रमज़ान है

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निर्वासित बादशाह.... बहादुरशाह ज़फ़र....




'कितना बदनसीब ज़फर दफ़्न के लिए
दो गज ज़मीन भी न मिली कू ए यार में'

इसी के प्रतिउत्तर में किसी कवि ने कहा है...

दो गज ज़मीन भी न मिली तो क्या मलाल
ख़ुशबू ये कू ए यार है इस यादगार में.....

आगे की पहेली इनके ब्लॉग पर जाकर ही सुलझ सकती है तो पढ़िए अदा जी का ब्लॉग.
काव्य मंजूषा

और हाँ सब ने अंत में जवाब देना है की किसने कितनी पहेलियाँ बुझाई...क्युकी इसी की बिनाह पर आप सब को अंक मिलेंगे.....और मुझे भी...हा.हा.हा...चलिए...तो हो जाइये शुरू...और अब मैं करती हूँ इंतज़ार रिपोर्ट कार्ड का...:) :)


नमस्कार


अनामिका

39 comments:

  1. पहेलियां काफ़ी रोचक और शानदार रहीं।
    हल ढूंढने का प्रयास करते हैं।
    आपके प्रयास, मेहनत और सुंदर चयन ने इन पहेलियों के स्वरूप को बहुत आकर्षक बना दिया है।
    आभार। शुभकामनाएं।

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  2. अनामिका जी
    नमस्कार
    इन सारी पहेलियों ....उर्फ़ लिंक के लिए तहे दिल से धन्यवाद ....
    वाकई सब अपने में पहेली हैं ..
    पहेलियाँ ही नहीं हम भी सुलझ गए
    पढ़ के
    आप जैसे महान लोगों की बदोलत चर्चा मंच आज बुलंदियां छु रहा है
    स धन्यवाद ....

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  3. बेहद उम्दा ब्लॉग चर्चा ........जहाँ तक सवाल है पहेलियो का तो उसमे हम हमेशा ही कमज़ोर रहे है !

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  4. ham to kuch samjhe hi nahi Madam, please punish mat kijiyega..
    sorry madam...!
    haan nahi to..!

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  5. अनामिका जी
    हमेशा की तरह बेहद उम्दा ब्लॉग चर्चा है...पहेलियां भी काफ़ी रोचक और शानदार हैं... शुभकामनाएं...

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  6. समय लगा कर मन से की गई
    चर्चा के लिए शुक्रिया!

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  7. सुन्दर सुरुचिपूर्ण संकलन

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  8. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हिन्दी, भाषा के रूप में एक सामाजिक संस्था है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक और साहित्य के रूप में एक जातीय परंपरा है।

    हिन्दी का विस्तार-मशीनी अनुवाद प्रक्रिया, राजभाषा हिन्दी पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

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  9. mujhe ktyi umeed nhi thi morning is trha good morning hogi .is sneh ke liye kya khu .sirf our sirf aabhar hi preshit kr pa rhi hu .
    dhyan poorvk mnn krne layk samgri ko puri tvjjo dete huye apke pryas ko slaam .

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  10. अनामिका जी, पहेलियों भरी ये चर्चा बहुत अच्छी रही, बधाई और आभार.

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  11. बहोत ही अच्छी चर्चा रही

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  12. बडी शानदार चर्चा लगाई है………………बस हर पहेली हमारी ही तो थी फिर काहे का बूझना…………हा हा हा…………जो चाहे अंक दे देना।

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  13. बढ़िया चर्चा ....काफी पहेली बुझ ली हैं ....

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  14. अनामिका जी बहुत सुंदर चर्चा है आज की.. कुछ रचनाएं बेहतरीन हैं.. आलेख भी.. बहुत तन्मयता से आप मंच को सजाती हैं.. उल्लेखनीय रचनाओं में ...वंदना जी की 'शायद तब ही' , मेरे भाव की 'अनामिका' , प्रवीण जी की 'पीड़ा कह दो' आदि हैं.. रमेश मोहन झा की समीक्षा भी अच्छी लगी... अंत में पहेली यह है कि आप इतना सुंदर मंच कैसे सजा लेती हैं...

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  15. मनभावन चर्चा ,आभार

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  16. चर्चामंच पर मेरी रचनाएं शामिल करने के लिए अनामिका को हार्दिक धन्यवाद,ये आप सुधी ब्लाग पाठको का स्नेह ही है जो मुझे लेखन की प्रेरणा देता है।

    उम्दा प्रस्तुति....

    डा.अजीत
    www.shesh-fir.blogspot.com
    www.monkvibes.blogspot.com
    www.paramanovigyan.blogspot.com

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  17. अनामिकाजी बेहतरीन पहेलियों को चुन लाई हैं आप आज के मंच में. विविधतापूर्ण रचनाओं को एक जगह पढने का मौका मिला. "अनामिका " को शामिल करने के लिए धन्यवाद. "पीड़ा कह दो" और राकेश मोहन जी की "गीली चीनी" पर समीक्षा अच्छी लगी.

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  18. अनामिका जी आपकी मेहनत स्पष्ट झलक रही है.. आभार...

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  19. जिनकी बुद्धि बालक की होती है वह पहेलियां बुझाते हैं, हम तो अब बुढ़ा गए हैं तो क्‍या खाक पहेलियां बुझाएंगे? अनामिका तुमने तो गजब ही कर डाला, क्‍या पहेलियां लिखी हैं आनन्‍द आ गया। कुछ अच्‍छी पोस्‍ट जो मेरे से छूट गयी थी अब यहाँ आकर पढ़ूंगी। बहुत अच्‍छी चर्चा, आभार।

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  20. AAPNE BAHUT HI BADHIYA-2 PAHELIYON KO APNE IS 'CHARCHA MANACH ' MEN STHAN DIYA HAI.

    AAPKI MEHNAT RANG LAAI.

    APKO ISKE LIYE DHANYAVAAD, SAATH HI MERI RACHNA KO SHAAMIL KARNE KE LIYE APKA BAHUT-BAHUT AABHAR.

    ANAMIKA JI.....
    APNI RACHNA KO IS TRAH MAAN MILNE SE BAHUT HI KHOOSHI HOTI HAI
    AUR BHAVISHAY MEN BEHTER LIKHNE KI PRENAHAI MILTI HAI.

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  21. बहुत सुन्दर चर्चा अनामिका जी ! 'साकार बनो ओ निराकार' को इस चर्चामंच पर स्थान देने के लिए आभारी हूँ ! अन्य सभी रचनाएं भी बहुत शानदार और भावपूर्ण हैं ! इतना बढ़िया मंच सजाने के लिए आपको बहुत सारी बधाई !

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  22. Upar mere comment men 'PRENAHAI' ke sthan par ' PRENA' padha jaaye.

    Dhanayvaad.

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  23. बहुत ही सुन्दर एवं विचारनीय रचनाओ का चयन किया है| पढ़ कर मज़ा आ गया| हांलाकि अब तक सभी नहीं पढ़ पाया हूँ|
    परन्तु इस संग्रहण के लिए हार्दिक बधाई|

    और मेरी रचना को इस मंच पर स्थान पाने योग्य समझने के लिए बहुत धन्यवाद्|

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  24. अनामिका जी
    नमस्कार

    अनामिका जी, बहुत सुन्दर चर्चा। आपकी इस अथक मेहनत के लिए बधाई एवं बढ़िया लेख पढवाने के लिए आभार।

    साथ ही आभार की आपने मेरे लेख को अपनी चर्चा में शामिल किया ..
    बेहद उम्दा ब्लॉग चर्चा ....

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  25. माफ़ी चाहती हूँ कुछ तकनीकी गडबड के कारन कुछ फोटो पर क्लिक्क करने पर लिंक नहीं खुल पायेंगे...इसलिए उनके लिंक डिटेल अलग से दिए गए हैं.

    असुविधा के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ.

    और इस चर्चा पर आने वाले सभी पाठक गनो की आभारी हूँ .

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  26. अनामिका जी
    सबसे पहले बधाई स्वीकार करें। आपने मुझे यहां बुलाकर अच्छा साहित्य पढने का अवसर दिया। आपने बहुत स्तर की रचनाएँ पछवाई हैं । हृदय से आभार।

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  27. wah ji wah padhkar achcha laga but shayad hi mera dimag in paheliyon ko solve kar paaye dekhte hain aap sabhi ko Ganesh chaturthi aur Ied ki mubarak baad

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  28. इन सारी पहेलियों और लिंक के लिए आभार बेहद उम्दा ब्लॉग चर्चा

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  29. अनामिका जी
    पहेली तो कभी भी हमसे बुझी ही नहीं गई |पर आप फेल मत कीजियेगा |पासिंग मार्क दे दीजियेगा |
    आभार इतने बढ़िया ब्लाग्स का सुन्दर परिचय देने के लिए |सभी से परिचित होना बाकि है |

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  30. गणेशचतुर्थी और ईद की मंगलमय कामनाये !

    ..

    इस पर अपनी राय दे :-
    (काबा - मुस्लिम तीर्थ या एक रहस्य ...)
    http://oshotheone.blogspot.com/2010/09/blog-post_11.html

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  31. सारी बूझ ली..:) बेहतरीन चर्चा.

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  32. अनामिका जी -चर्चा मन्चपर मेरी कविता चुनने के लिए -बहुत बहुत धन्यवाद-
    बहुत सुंदर सुंदर पहेलियाँ चुनी -
    बधाई

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  33. व्यस्तता वस् समय पर न पहुँच सकी आपके इस उपयोगी चित्ताकर्षक मंच पर,क्षमाप्रार्थी हूँ...

    बहुत लाजवाब लिंक दिए हैं आपने और प्रस्तुति तो कमाल की है....
    बहुत बहुत आभार आपका इस वृहत सुन्दर चर्चा के लिए..

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

मित्रों! शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...