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सोमवार, अगस्त 06, 2018

"वन्दना स्वीकार कर लो शारदे माता हमारी" (चर्चा अंक-3055)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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राधा तिवारी "राधेगोपाल " का  

काव्य पाठ  

(वन्दना)

ज्ञान के इन चक्षुओं में 
छा रहा अँधियार भारी।
वन्दना स्वीकार कर लो 
शारदे माता हमारी।।
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ग़ज़ल  

"वो कैसा शूल है"  

(राधा तिवारी" राधेगोपाल ") 

जो किसी को चुभ गया वह फूल कैसा फूल है l
 फूल के संग जो उगे न  तो वो कैसा शूल है... 
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मितान-मितानिन 

फ्रेन्डशिप डे वाली दोस्तियां 
बहुधा एक दिन का मामला होती हैं 
और फेसबुक का तो ढांचा ही फ्रेन्डबुक जैसा है, 
जिसने हर रिश्ते को दोस्ती में बदलकर, 
इसके बनने-बिगड़ने को 
एक क्लिक पर ला दिया है... 
Rahul Singh  at  
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मित्र 

Prabhat Singh Rana  at  
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३२०. 

बंदी से 

बंदी,  
ये पहरेदार जो सो रहे हैं,  
दरअसल सो नहीं रहे हैं,  
सोने का नाटक कर रहे हैं।  
तुम चुपके से निकलोगे,  
तो ये उठ जाएंगे,  
तुम्हें यातनाएं देंगे,  
फिर से बंदी बना लेंगे... 
कविताएँ पर Onkar 
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धीरे धीरे 

तारों पर
खामोशी तैरती
और चाँद अपनी तन्हाई में  
जलता 
धीरे धीरे

तम के आगोश में
बेपनाह गहरापन
फ़िर भी
रात जवाँ होता
धीरे धीरे... 
हमसफ़र शब्द पर संध्या आर्य 

क ग़ज़ल : ये आँधी,ये तूफ़ाँ-- 

ये आँधी ,ये तूफ़ाँ ,मुख़ालिफ़ हवाएँ  
भरोसा रखें, ख़ुद में हिम्मत जगायें  
कहाँ तक चलेंगे लकीरों पे कब तक  
अलग राह ख़ुद की चलो हम बनाएँ... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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सोमवार, जुलाई 30, 2018

"झड़ी लगी बरसात की" (चर्चा अंक-3048)

सुधि पाठकों!
सावन के प्रथम सोमवार  की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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अब तो आजा पिया 

​ये धड़के मेरा, यह नाजुक जिया  
आया सावन यह आया , 
आया मस्ती भरा । 
ओ रे पिया ,आजा रे पिया... 
Hindi Kavita Manch पर  
ऋषभ शुक्ला  

निजाम का स्वर्ण दान ! 

अभी पिछले दिनों फिर एक बार 65 के युद्ध के बाद भारत सरकार को हैदराबाद के निजाम द्वारा स्वर्ण दिए जाने की बात चर्चा में रही थी। बात ठीक थी, समय पर देश को आर्थिक सहारा भी मिला था पर सारे घटनाक्रम पर एक सवाल भी अपना सर उठाता है कि अचानक भारत विरोधी, पाक परस्त, अत्यंत कजूंस माने जाने वाले निजाम में ऐसा बदलाव कैसे आ गया ? उसकी सोच कैसे बदल गयी ? कौन सी ऐसी परिस्थितियां थीं, कैसे हालात थे जो उसे देश की भलाई की याद आई ?
#हिन्दी_ब्लागिंगइतिहास के पन्ने पल्टे जाएं तो पता चलता है कि  जिस समय भारत में ब्रिटिश शासन ख़त्म हुआ, उस समय यहाँ के 562 रजवाड़ों में से सिर्फ़ तीन को छोड़कर सभी ने भारत में विलय का फ़ैसला कर लिया था। ये तीन रजवाड़े थे कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद। कश्मीर और जूनागढ़ देश की सीमाओं पर स्थित थे, उनकी सरहदें पहाड़ों और समुद्र तट को छूती थीं पर हैदराबाद, जो एक विशाल और सम्पन्न रियासत थी, चारों ओर से भारत से घिरा हुआ था। उसका स्वतंत्र रहना या पकिस्तान में मिलना, देश के लिए खतरनाक साबित हो सकता था। पहले दो का तो कुछ जद्दोजहद के बाद भारत में विलय हो गया पर हैदराबाद मुसीबतें खड़ी करता रहा। उस समय हैदराबाद की आबादी का अस्सी फ़ीसदी हिंदू लोग थे जबकि अल्पसंख्यक होते हुए भी मुसलमान प्रशासन और सेना में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन थे... 
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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अविश्वास प्रस्ताव का शब्दकोशीय मतलब 

अविश्वास प्रस्ताव का शब्दकोशीय मतलब यह एक ऐसा कथन या वोट है जो किसी व्यक्ति ,व्यक्ति समूह के खिलाफ इस बिना पर लाया जाता है के वह अपने निर्धारित कर्तव्य कर्म को अंजाम नहीं दे रहा है/रहें हैं, के उसके फैसले समूह के शेष सदस्यों के अनुसार बेहद की नुकसानी पैदा कर रहे हैं। सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का गंभीर अर्थ होता है यह एक गंभीर मसला होता है जो खुलासा करता है के सरकार पूरी तरह नाकारा हो गई है उसके तमाम फैसले देश को नुक्सान पहुंचा रहे हैं... 
Virendra Kumar Sharma  
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दुनिया की नज़रों में...। 

दुनिया की नज़रों में ,शराफ़त का लबादा ओढ़ लेते हैं।  
बड़ी सफ़ाई से अपनी ,हक़ीक़त से मुंह मोड़ लेते हैं... 
kamlesh chander verma 
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आदत..  

श्यामल सुमन 

मेरी यही इबादत है।  
सच कहने की आदत है।।  
मुश्क़िल होता सच सहना तो।  
कहते इसे बग़ावत है... 
yashoda Agrawal  
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"पूज्य पिता जी आपका, वन्दन शत्-शत् बार"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

पूज्य पिता जी आपको श्रद्धापूर्वक नमन।
2014 में आज ही के दिन आप विदा हुए थे।
पूज्य पिता जी आपकावन्दन शत्-शत् बार।
बिना आपके हो गयाजीवन मुझ पर भार।।
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एक साल बीता नहींमाँ भी गयी सिधार।
बिना आपके हो रहादुखी बहुत परिवार।।
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बचपन मेरा खो गयाहुआ वृद्ध मैं आज।
सोच-समझकर अब मुझे, करने हैं सब काज।।
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जब तक मेरे शीश पररहा आपका हाथ।
लेकिन अब आशीष काछूट गया है साथ।।
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प्रभु मुझको बल दीजिएउठा सकूँ मैं भार।
एक-नेक बनकर रहेमेरा ये परिवार।।