फ़ॉलोअर



यह ब्लॉग खोजें

मंगलवार, अक्टूबर 10, 2017

"थूकना अच्छा नहीं" चर्चामंच 2753


दीवाल पथ पर पार्क में 

यूँ थूकना अच्छा नहीं- 

रविकर 
कूड़ा यहाँ कचड़ा वहाँ मत फेंकिए यूँ मार्ग पर। 
उपयोग कूड़ेदान का नियमित करें हे मित्रवर। 
दीवाल पथ पर पार्क में यूँ थूकना अच्छा नहीं 
लघु-दीर्घ-शंका के लिए संडास हैं उपयोग कर।। 
--

पूनम का चाँद 

Akanksha पर Asha Saxena  

पति को पूजनीय बनाना 

या चौथ माता का व्रत करना? 

smt. Ajit Gupta 
 अजित गुप्‍ता का कोना 
--

एक नज़र -  

कविता 

खुशी हमसे यूँ बच निकलती हैरेत मुट्ठी से ज्यूँ फिसलती है
ये जहाँ आईना मेरे मन काअपनी हस्ती यूँ ही सिमटती है... 
Smart Indian 

जीवन, यात्रा और हम ::  

कुछ टुकड़े 

अनुपमा पाठक 
अगर कोई सुन्दर बाला आपसे कहे कि वो २०-२० के क्रिकेट मैच में हिस्सा लेकर लौट रही है, तो सीधा दिमाग में कौंधता है कि चीयर बाला होगी. किसी के दिमाग में यह नहीं आता कि हो सकता है वो महिला लीग का २०-२० खेल कर लौट रही हो. वही हाल हमारा होता है जब शाम को हमारे घर लौटते हुए रास्ते में कोई मिल जाये और उसे हम बतायें कि जिम से लौट रहे हैं. सब समझते हैं कि जिम का ऑडिट करके आ रहे होंगे या जिम में एकाऊन्टेन्ट होंगे... 

उड़न तश्तरी .... 
--

मन के हारे हार है, 

मन के जीते जीत 

 **विश्व* *मानसिक* *स्वास्थ्य* *दिवस* 
मुझे लगता है शायद आज का दौर ऐसा है जब हर इंसान को मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। पहले की ज़िंदगी में भी परेशानियाँ कम नहीं थीं लेकिन आज के दौर में जिस तरह लोग हर छोटी बड़ी बात का प्रेशर लेते हैं वो यहीं दर्शाता है कि हममें अपने पूर्वजों की अपेक्षा धैर्य और सहनशीलता की बहुत कमी है। जिस गति से ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रदूषण की चिंता की जा रही है उसी गति से मानसिक स्वास्थ्य में भी गिरावट आ रही है... 

क्या आप पर्याप्त पानी पी रहे हैं रोज़ाना ? 

Virendra Kumar Sharma 

प्रकाशन-शैलसूत्र  

"प्राणों से प्यारा वो अपना वतन" 

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 


नन्ही कोपलपरकोपल कोकास 


सु-मन (Suman Kapoor) 

मुक्ताकाश....पर आनन्द वर्धन ओझा 

Trek to Bijli Mahadev temple  

बिजली महादेव की यात्रा 

SANDEEP PANWAR 

--

एक गीत कराओके पर 

अर्चना चावजी Archana Chaoji  

अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल  

नीरज पर नीरज गोस्वामी 

सोमवार, अक्टूबर 09, 2017

"जी.एस.टी. के भ्रष्टाचारी अवरोध" (चर्चा अंक 2752)

सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

--

चर्चा मंच पर प्रतिदिन अद्यतन लिंकों की चर्चा होती है।
आश्चर्य तो तब होता है जब वो लोग भी चर्चा मंच पर 
अपनी उपस्थिति का आभास नहीं कराते है, 
जिनके लिंक हम लोग परिश्रम के साथ मंच पर लगाते हैं।
अतः आज के बाद ऐसे धुरन्धर लोगों के ब्लॉग का लिंक 
चर्चा मंच पर नहीं लगाया जायेगा।
--

जी.एस.टी. के भ्रष्टाचारी अवरोध 

सत्यार्थमित्र पर सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी  
--
--

करवा चौथ 

अर्चना चावजी Archana Chaoji 
--

दोहे  

"सबका अटल सुहाग" 

मेरी माता जी रहीं, जब तक मेरे साथ।
रहता था मेरे सदा, सिर पर उनका हाथ।१।

माता ने सिखला दिये, बहुओं को सब ढंग।
सीख गयीं बहुएँ सभी, त्यौहारों के रंग।२।

करवा पूजन की कथा, जब भी आती याद।
पति की लम्बी उमर की, वो करती फरियाद।३।

जन्म-ज़िन्दग़ी भर रहे, सबका अटल सुहाग।
बेटे-बहुओं में रहे, प्रीत और अनुराग।४।

चन्दा-करवा का रहा, युगों-युगों से साथ।
नारी के सौभाग्य पर, चन्दा का है हाथ।५।

सजना का उसके रहे, सुन्दर-स्वस्थ शरीर। 
करती सजनी कामना, लिए कलश में नीर।६। 
--

राष्ट्रप्रेम है तो महसूस करो विकास को 

हर चीज़ जो होती है वो दिखे भी- ऐसा तो कतई ज़रूरी नहीं है. आप ही देखें कि हवा होती तो है लेकिन दिखती कहाँ है? खुशबू होती तो है मगर दिखती कहाँ है? मोहब्बत होती तो है मगर दिखती कहाँ है? यह सब बस अहसास करने की, महसूस करने की बातें हैं. संभव है कि एक स्थान पर खड़े सभी लोग हवा एक साथ अहसास लें मगर देख तो कोई भी नहीं पायेगा. ऐसा भी संभव है कि एक ही दायरे में खड़े सभी लोगों को फिज़ा में खुशबू का अहसास हो मगर उन्हीं में से कोई एक, जिसे तगड़ा जुकाम हुआ हो वो नाकबंदी के चलते खुशबू न अहसास पाये या फिर उन्हीं में से कोई एक जो महीनों से नहाया न हो, जिसे स्वच्छता का तनिक भी अंदाजा न हो... 
--
--
--
--
--
--
--

करवा चौथ 

कार्तिक-कृष्णपक्ष चौथ का चाँद देखती हैं सुहागिनें आटा छलनी से.... उर्ध्व-क्षैतिज तारों के जाल से दिखता चाँद सुनाता है दो दिलों का अंतर्नाद। सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प होता नहीं जिसका विकल्प एक ही अक्स समाया रहता आँख से ह्रदय तक जीवनसाथी को समर्पित निर्जला व्रत चंद्रोदय तक। छलनी से छनकर आती चाँदनी में होती है सुरमयी सौम्य सरस अतीव ऊर्जा शीतल एहसास से हिय हिलोरें लेता होता नज़रों के बीच जब छलनी-सा पर्दा... 
Ravindra Singh Yadav 
--
--

हम आधुनिकाएं 

जानती हैं , मानती हैं 
फिर क्यों संस्कारगत बोई रस्में उछाल मारती हैं 
प्रश्न खड़ा हो जाता है विचारबोध से युक्त 
संज्ञाओं पर प्रश्नचिन्ह लगा जाता है 
हम आधुनिकाएं निकल रही हैं 
शनैः शनैः परम्पराओं के ओढ़े हुए लिहाफ से ... 
vandana gupta 
--

रविवार, अक्टूबर 08, 2017

"सलामत रहो साजना" (चर्चा अंक 2751)

मित्रों!
चर्चा मंच पर प्रतिदिन अद्यतन लिंकों की चर्चा होती है।
आश्चर्य तो तब होता है जब वो लोग भी चर्चा मंच पर 
अपनी उपस्थिति का आभास नहीं कराते है, 
जिनके लिंक हम लोग परिश्रम के साथ मंच पर लगाते हैं।
अतः आज के बाद ऐसे धुरन्धर लोगों के ब्लॉग का लिंक 
चर्चा मंच पर नहीं लगाया जायेगा।
--
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--
--
--
--

एक ग़ज़ल :  

छुपाते ही रहे अकसर--- 

छुपाते ही रहे अकसर ,जुदाई के दो चश्म-ए-नम 
जमाना पूछता गर ’क्या हुआ?’ तो क्या बताते हम... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक  
--
--
--

आपको लोग नाम से जानते हैं  

कि घर के नंबर से ? 

...समय काफी बदल गया है; गंगा में बहुत सा पानी बह चुका है जो अपने साथ-साथ लोगों की आँख का पानी भी बहा कर ले गया है ! अब तो मौहल्ले, कालोनी को छोड़िए लोग अपने पड़ोसी तक को पहचानने से गुरेज करने लगे हैं ! आस-पड़ोस के लोगों की पहचान भी घरों के नंबर से होने लगी है, किसी से पूछिए मल्होत्रा जी कहाँ रहते है तो छूटते ही उलटा पूछेगा, कौन 312 वाले ? जो गंजे से हैं ? किसी कालोनी में जा किसी बच्चे से कोई पूछे कि शर्मा जी को जानते हो तो पलट कर वही पूछेगा, घर का नंबर क्या है... 
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
--

एक रोज।। 

एक रोज छुपा दूंगा सारे लफ्ज तुम्हारे 
और तुम मेरी खामोशी पर फिसल जाओगी!! 
देखता हूँ कब तलक छुपी रहोगी मुझसे 
एक दिन अपनी ही नज्म से पिघल जाओगी... 
कविता मंच पर Parul Kanani  
--
--
--

महाशाप... 

किसी ऋषि ने  
जाने किस युग में  
किस रोष में  
दे दिया होगा 
सूरज को महाशाप 
नियमित, अनवरत, बेशर्त  
जलते रहने का  
दूसरों को उजाला देने का... 
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम 
--
--

सिक्के मुस्कराहटों के  

मैंने टांक दिया है आज 
फ़िर तेरे खामोश लिबास पे 
हँसी की जेब को 
जिसमें कुछ सिक्के भी 
रख छोड़े हैं मुस्कराहटों के 
जो तुम्हें चाह कर भी 
खिलखिलाने से नहीं रोक पाएंगे !! 
SADA 
--