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बुधवार, जुलाई 27, 2011

"आदमी को क्या दिया?" (चर्चा मंच-588)

मित्रों बुधवासरीय चर्चा में आपका स्वागत है। 
झंझावात के बाद फ़िर एक बार खुशनुमा माहौल है । 
ऐसे खुशनुमा माहौल मे सबसे पहले बधाई संजय भास्कर जी को जिनके 300 फोलोवर .....  हो चुके हैं । 
इसके बाद बधाई तनेजा जी सहित ब्लाग जगत के सभी भाईयों को इलेक्ट्रानिक मीडिया भी मजबूर होकर हमारी उपस्थिति hindi bloggers on ND T V  दर्शा रहा है । खैर  साहब आज बहुत ही निराशा हुई चर्चा के लिए लिंक तलाशे तो देखा आज के हालात में  भी लोग प्रेम में उलाहना में  नफ़रत में उलझे हुए थे । 
खैर साहब मेरी इच्छा थी कि ब्लाग जगत आज धार सरकार पर रखे  खैर साहब मन्नू ------- राजा बोला अब तेरा क्या होगा से बात शुरू हुआ तो अनिल पुसदकर जी कहने लगे  ये काली सूची क्या है? गलती की है तो सीधे काल-कोठरी  ।
तभी शेखावत जी ने कहा भाई सरकार की गलतियों को छोटा करो गुणवत्ता बरकरार रखते हुए चित्र का आकार छोटा करें]  तभी गिरिजेश कुमार कह उठे भाई  चलते -चलते...: उदारीकरण ने आम आदमी को क्या दिया?    खैर साहब जहाजों का आसमान में झप्पी पाना आसान है । कहानी कहते कहते कह दिया मैं भरता ही रहा हुंकारा, पर तुम मूक हो गईं सहसा  कहते ही महिला स्वर गूंजा आज स्त्री बस वासना की पूर्ति भर है क्या?  हमने कही भाई  मियाँ लाल बुझक्कड़.  बाबा के  ब्वाय फ़्रेंड को  नेपाल यात्रा  में भेज दो और भगवान के लिए सेना को बख्श दो...   खैर साहब जब देश ही सोया है तो नयी आस जगने दो घर-आँगन गूँज उठी किलकारी!  उस नये शहजादे को खिलने दो । खैर साहब  इससे अच्छा है प्रकृति की गोद में तीन दिन  बिताएँ और   मेरे मन की: बादल की कहानी ......  की कहानी सुनाइगा और  एक नयी पहल छ: दिन और एक सीएमएस वेब साईट   सिखाइगा । 

खैर साहब हिंद है  उड़ सपनों के पंख लगा और हम भी है देश का हित देखते हुए आज समय आन्दोलन का है सारे भावों को भूल कर बाकी आपकी इच्छा!

मंगलवार, जुलाई 26, 2011

उसका जीवन भी क्या जीवन (मंगलवारीय चर्चामंच-587)

मैं चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ फिर हाज़िर हूँ चर्चा मंच पर मंगलवारीय चर्चा लेकर इस चर्चा में आप सब का स्वागत और अभिनन्दन है। आज की चर्चा की शुरुआत करते हैं- 
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 1
राजभाषा हिंदी ब्लॉग पर मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत दुष्यंत कुमार त्यागी जी की मशहूर ग़ज़ल 'हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए'
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2
“पथ निखर ही जाएगा”  यह है डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का "उच्चारण"
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3
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 4
"राहें जो अंजानी सी थी" पर रेखा जी पेश कर रही हैं 'एक अद्भुत प्रतिभा' सभी इस प्रतिभा से सबक ले सकते हैं
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5
"विचार" ब्लॉग पर मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत है पक्षियों का प्रवास-13 'प्रवास-यात्रा के दौरान व्यवहार'
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6
"निरंतर" की कलम से ब्लॉग पर देखिए डॉ. राजेन्द्र तेला 'निरंतर' द्वारा प्रस्तुत 'ज़िन्दगी फुटबाल का खेल'
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7
"आरंभन" ब्लॉग पर रवीश कुमार पाण्डेय की 'दिनचर्या' देख लें आप कहां तक सहमत हैं ज़ुरूर बताइएगा...
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 8
भाई उदयवीर सिंह "उन्नयन" पर कितने  **संजीदा **  हैं आप आप देखें!
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 9
प्रस्तुत है "सद्भावना दर्पण" पर गिरीश पंकज जी की ग़ज़ल 'शायद वो मेरा ख़्वाब था, शायद ख़याल था'
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10
कवि योगेन्द्र मौदगिल द्वारा 'भाई किलर झपाटा को सादर-सप्रेम...'
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11
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12
"सागर" ब्लॉग पर सागर कह रहे हें 'मै इक निर्जल सागर'
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13
"साहित्य सुरभि" पर दिलबाग विर्क जी की 'अग़ज़ल-22'
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14
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15
भाई रविकर जी का कहना है- 'अब घर ३६- गढ़ हुआ-' "कुछ कहना है" ब्लॉग पर
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16
"उड़न तश्तरी..." पर समीरलाल समीर की 'चलती सांसों का सिलसिला...' देखें
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17
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18
"My Unveil Emotions" से डॉ. आशुतोष मिश्र ‘आशू’ शिकायत दर्ज़ करा रहे हैं कि- 'यूँ न सावन में रुलाया होता'
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 19
'ठाले बेठे' पर नवीन सी. चतुर्वेदी का कहना है कि 'गर है सच्चा प्यार-व्यक्त करिए जीते जी'
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20 
और चलते-चलते एक नज़र "ग़ाफ़िल की अमानत" पर भी डाल लीजिए- 'थे कभी पंखुड़ी गुलाब के से नाज़ुक लब' 
अब आप लोगों से अगले सोमवार यानी 01-08-2011 को मुख़ातिब होऊँगा, तब तक के लिए नमस्कार!

सोमवार, जुलाई 25, 2011

"लिंक ही लिंक" (चर्चा मंच-586)

मित्रों!
आज सावन का दूसरा सोमवार है!
भोले नाथ के भक्त काँवड़ लाने के लिए शिव की नगरी हरद्वार पहुँच रहे हैं। मैं भी शिवजी महाराज का आराधन करते हुए आज की चर्चा आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ!
लेकिन एक जरूरी सूचना आपको दे दूँ कि अगले सप्ताह से सोमवार की चर्चा आदरणीय चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफिल‘ जी किया करेंगे। इसका कारण यह है कि उनकी रविवार की छुट्टी रहती है और वो आराम से रविवार की शाम तक चर्चा पूरी करके सोमवार को पोस्ट कर दिया करेंगे। मैं अब मंगलवार की चर्चा किया करूँगा।
बहुत दिन हुए तुमने कुछ कहा नही
मतभेद ही चैतन्यता की निशानी है। 
सरस पायस पर
बरखा का यह बाल गीत भी छपा है!
रवि मन पर भी एक
शब्दों की चमत्कारी रचना है!
रिल्के, मरीना और एक सिलसिला 
Sunday Blues .. टूटी चूड़ी में फंसा हुआ इतवार

मानवता    जीते    सदा,  ईश्वर   लेख   अमिट || 
नामुराद इश्क में जब से चोट खाई है मैंने 
अपनी हस्ती रोज़ आग में जलाई है मैंने .
पलकों के सपने
  मे देखिए

भीगे नैना -
*बरखा रानी * *मन भाई है* *इन्द्रधनुष को न्योता* *देकर आई है * * * *तुम ही हो * *रंगों के सौदागर* *भर देना जीवन * *रंगीन उजागर….
ब्लॉग की ख़बरें!
बहुत-बहुत बधाई! इस नन्हे मुन्ने को
     
अली अहमर ने जीता 5 हज़ार का ईनाम - अली अहमर की उम्र अभी मात्र डेढ़ साल है और ‘केरल किड्ज़ क्लब‘ द्वारा आयोजित ‘समर कॉन्टेस्ट‘ में सब पर बाज़ी मार ली है। यह सूचना हमें उनके पापा जनाब मुनव्वर अली...
हिंदुस्तान की आवाज़ -- आपकी धरोहर
 १८५७ का पूरा सच - १८५७ का पूरा सच ..... देश में एक गीत बहुत ज्यादा गाया जाता है.... " दे दी हमे आजादी बिना खडग बिना ढाल साबरमती के संत तुने कर दिया कमाल... "
मनोज
भारतीय काव्यशास्त्र – 76 - *भारतीय काव्यशास्त्र – 76* *आचार्य परशुराम राय* पिछले अंक में *अगूढ़ गुणीभूतव्यंग्य *पर चर्चा की गयी थी। इस अंक में इसके दूसरे भेद *अपरांग गुणीभूतव्यं... को देखिए-
मनोरमा
खूबसूरत ये जहाँ - दिन कटे जब ठीक से तो है इनायत ये जहाँ और गर्दिश के दिनों में बस क़यामत ये जहाँ रंग चश्मे का है कैसा देखते हैं किस तरह बात लेकिन सच यही कि है मुहब्बत…..
ज्ञान दर्पण

कविता की करामात - कवि अपनी दो पंक्तियों में भी वह सब कह देता है जितना एक गद्यकार अपने पुरे एक गद्य में नहीं कह पाता,राजा महाराजाओं के राज में कवियों को अभिव्यक्ति की पूरी ...
DR.JOGA SINGH KAIT JOGI

ACCUPRESSUR - एक्यूप्रेसर सम्पूरण शरीर का एक्यूप्रेसर करने के लिए भिन्न-भिन्न बिन्दुयों पर प्रेशर डालना होता है .इसके लिए पूरी जानकारी होना ज़रूरी है.ताकि रोग के अनुसार...
kaushal
राज्यों को और अधिक शक्तियां एवं संसाधन सौंपने से राष्ट्र की उन्नति तीव्र गति से होगी - राज्यों को और अधिक शक्तियां एवं संसाधन सौंपने से राष्ट्र की उन्नति तीव्र गति से होगी केंद्र तथा राज्यों में शक्तियों का वितरण एक ऐसी विशेषता है जो संघात्म...
मेरे सपने
दीपक जलता रहा रातभर - तन का दिया, प्राण की बाती, दीपक जलता रहा रात-भर । दु:ख की घनी बनी अँधियारी, सुख के टिमटिम दूर सितारे, उठती रही पीर की बदली, मन के पंछी उड़-उड़ हारे । बची र...
Mushayera

तन्हाई ही हमें रहना सिखाती है. - ये जिंदगी तन्हाई को साथ लाती है, हमें कुछ करने के काबिल बनती है. सच है मिलना जुलना बहुत ज़रूरी है, पर ये तन्हाई ही हमें रहना सिखाती है. यूँ तो तन...
हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल HBFI

कंप्यूटर क्रांति खा रही है याददाश्त इंसान की Hindi Blogging Guide (18) - अभी हाल ही में एक शोध में यह बात सामने आई है कि लोग अब चीज़ों को अपने दिमाग़ में याद रखने के बजाय गूगल के भरोसे रहने लगे हैं। वे चीज़ों को याद रखने की आदत खो...
रिंकू का भोजपुरी धमाल

कंप्यूटर से फाइल को पूरी तरह से डिलीट करने का तरीका | - आप के कंप्यूटर से किसी भी फाइल को पूरी तरह से डिलीट करने के लिए एक बहु उपयोगी सॉफ्टवेर | इस्तेमाल में बहुत ही आसन और साइज़ में सिर्फ* 646 Kb* का है ये सॉफ्ट...
हे गाँव
| Author: कुश्वंश | Source: अनुभूतियो का आकाश
हे गाँव बस पहुचने वाली है  अभिलाषित खुशहाली तुम तक  एक नदी का सपना जो  तुमने  सालों से देखा था अब बाढ़ ने कर दिया है पूरा  बस पहुचनेवाली है नावें तुम तक देखना बाढ़ उतरने न पाए  सस्ते घर की फ़ाइल  तैयार है  बस शीघ्र ही  बनेगे और बनेंगे  ही नहीं  मिलेंगे भी  बस थोड़ी सी  जमीन  तुम्हारे औद्योगिक विकाश के लिए लेंगे  बिल्डरों को देनी है  ...
एक स्कूल, जहां पढ़ते हैं 18 जुड़वा बच्चे
| Author: akhtar khan akela | Source: Akhtar Khan Akela
रोहतक. शहर में एक ऐसा स्कूल है, जिसमें 18 जुड़वा बच्चे पढ़ते हैं। इनके नैन नक्श इतने मिलते हैं कि पहली बार देखने पर कोई भी धोखा खा सकता है। स्कूल के टीचर भी कन्फ्यूज हो जाते हैं
मेरी नेपाल यात्रा ( चौथी किस्त )
अशोक बजाज | Source: ग्राम चौपाल
गूगल से प्राप्त पशुपतिनाथ की तस्वीर हिमालय पर्वतमाला की वादियों में बसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पावन धरा नेपाल  में 9 जुलाई से 12 जुलाई 2011 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय  सहकारी सेमीनार में भाग लेने का अवसर मिला.इस सेमीनार का आयोजन राष्ट्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान बैंगलोर ने किया था…..
JHAROKHA

सावन की छ्टा - ** *सावन की छाई प्यारी छ्टा* * मदमस्त पवन घनघोर घटा बरसो रे मतवारी बदरिया जरा झूम बरसो रे। बरसो रे---------------। नील गगन में ताने चादर अपनी काली ...
चाहत...

- *!!!मैं इतनी लालची भी नही!!!* * * * * *तुम एक बार कहो तो सही,* *मैं इस दुनिया का,* *सब कुछ छोड़ सकती हु,* *तुम्हारे लिए,* *ये कपडे ये गहने,* *ये झुमके ये कंग...
पिया बसंती
| Author: ana | Source: गीत
Read piya basanti Self Publishing with YUDU
नेकी कर दरिया में डाल
| Author: शिखा कौशिक | Source: नेता जी क्या कहते हैं ?
नेकी   कर    दरिया   में   डाल
रात की तंग गलियां
| Author: ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι | Source: Khuda Khair kare
रात की तंग गलियों में सपने मेरे गुम रहे, उनकी यादों के बेदर्द तूफ़ां भी मद्ध्म रहे।
गुरु आख़िर गुरु है..................
| Author: Sunil Kumar | Source: दिल की बातें
अक्सर हम यह कहावत सुनते है की गुरु गुड़ रह गया और चेला शक्कर बन गया | मगर यह वास्तविकता नहीं है |इसका प्रमाण मैं एक दन्त कथा के माध्यम से देना चाहता हूँ |किसी गाँव में एक पहलवान गुरु रहते थे | और अपने अखाड़े के सभी शिष्यों को कुश्ती की शिक्षा दिया करते थे | उनके चेलों ने भी उनकी शिक्षा का लाभ उठा कर दूर दूर तक अपने गुरु  का नाम रोशन किया | एक द ..
मै तलाशता खुद को...
| Author: Bimal Raturi | Source: Feelings of bimal...
मै तलाशता खुद को ... कभी सागर की गहराई में.... कभी पहाड़ो की ऊंचाई में... कभी बादलों की काली घटाओ में... कभी सावन में महकती लताओं में ... मै तलाशता खुद को... कभी ऑरकुट के अंधियारे में.. कभी फेसबुक के उजाले में... कभी गूगल में खोजता खुद को ... कभी याहू में खुद को तलाशता .... कभी मंदिरों में भगवान् से पूछता... कभी मस्जिद में खुद को खोज ...
HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR

ख़्वाब एक ग़ज़ल - *तू एक ऐसा ख़्वाब है * *जो जिस्म में ढलता ही नहीं * *मेरा ही हमसाया * *जो मेरे साथ चलता ही नहीं !* *किस मोम से बना है तू * *जो मेरे ताप से पिघलता ही नही...
Love Everybody
विद्या की कविता - मेरी अम्मा एक पिटारी यादों की मीठी लोरी लाड-प्यार की बातों की। मैं सूरज हूं उसका, चांद-सितारा हूं झड़ी लगाती हर दम आशीर्वादों की। वक्त झुका है हर दम जिसके...
अंतर्मंथन
इसे पढ़कर आप भी डॉक्टर बन सकते हैं ---. - एक समाचार से पता चला की दिल्ली में हर तीसरा व्यक्ति इन दिनों* वाइरल बुखार*से ग्रस्त है .हालाँकि हालात इतने बुरे भी नहीं हैं , लेकिन यह सच है की बरसात के दिन...
**संजीदा **
चिराग-ए-लियाकत ,कदम रहबरी के ,
जुदा  तुमको  दिल से नहीं कर सकेंगे --
रहोगे   सदा    तुम   दिलों   में  हमारे ,
रुसवा   तुम्हें   हम  नहीं   कर  सकेंगे -
रचना जी का शुक्रिया -नारी ब्लॉग से हटाने के लिए
|  शिखा कौशिक |  vicharon ka chabootra
रचना जी का शुक्रिया -नारी ब्लॉग से हटाने के लिए
अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ)
पीड़ा होगी.... - **** *रजकण हूँ आंगन में बिखरा रहने दो*** *नयनों में तुम नहीं बसाना – पीड़ा होगी.*** *क्रंदन हूँ कोयल की पंचम तानो का*** *अधरों पर तुम मुझे न लाना – पीड़ा होग...
अंधड़ !
भ्रष्ट-तंत्र की नौ-टंकियों पर टिकी पुण्य-भूमि की बुनियाद ! - लालच और भोग-विलासिता की दौड़ में अंधे होकर, मानवीय मूल्यों की परख और पहचान तो खैर हम लोग सदियों पहले ही खो चुके थे, कितुं अपने सांस्कृतिक परिवेश को भी पश्च...
अनुपमांश
"प्यारी साइकिल" - *"प्यारी साइकिल"* मेरी साइकिल मुझे बहुत प्यारी. ढोटी बोझ सभी का बारी बारी, मेरी साइकिल मुझे बहुत प्यारी, ढोटी बोझ सभी का भारी भारी, इश साइकिल की बात निरा...
प्रेमवाणी

हदीस और आधुनिक विज्ञान - आज से चौदह शाताब्दि पूर्व मुहम्मद सल्ल0 ने कुछ ऐसे तथ्य की ओर संकेत किया था जिनका समर्थन आज के आधुनिक युग में विज्ञान पूर्ण रूप में करता है। इस लेख में ...
prerna ki kalpanayen
यह कैसी निराली रीत - *यह कैसी निराली रीत * *दो साल से देश के बाहर रहने के कारण काफी परिवार के कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाई /जिसका मुझे हमेशा अफ़सोस रहेगा ,और उस समय मुझ...
बरसात उदास - कैसी अजीब / यह बरसात की हवा / जैसी सूनी और सपाट / उदास खुद यह बरसात / ना कोई झोँका / केशों को उलझाता / चेहरे पर / ना फुहारों में भीगता / कोई चेहरा ही /...
“उन दोनों में कहाँ प्यार था....?” - *समय परिवर्तनशील है पर यह अपने साथ सबको बदलता है. एकला नहीं चलता. आपचाहो ना चाहो उसकी इसे परवाह नहीं. मायने भी बदल देता है ये चीजों के और चीजें तोबदल देता...
शहीदों को तो बख्श दो - 5. यही बाकी निशाँ होगा - बहे बहरे-फ़ना में जल्द या रब लाश "बिस्मिल" की कि भूखी मछलियाँ हैं जौहरे-शम्शीर क़ातिल की समझकर फूंकना इसकी ज़रा ए दागे नाकामी बहुत से घर भी हैं आबाद इस उजड़े...
नाकामयाबी हिस्सा ज़िन्दगी का - अंजाम से बेखबर निरंतर ख्वाब देखता नए अरमान संजोता ख्वाइशों की दुनिया में रहता था अब पछताता हूँ लम्हा लम्हा मरता हूँ खुद से लड़ता हूँ हसरत के न...
कविता-एक कोशिश
तू ही तो जीना सिखाती है ... - तू ही तो मुझे सुलाती है ,तू ही तो मुझे जगाती है हर पल तू संग संग रहती है ,तू ही तो जीना सिखाती है जब पूरब से सूरज...
Akanksha
विशवास किस पर करें - है दिखावे से भरपूर दुनिया कुछ स्पष्ट नजर नहीं आता अति वादी अक्सर मिलते हैं कोइ तथ्य नजर नहीं आता आँखें तक धोखा खा जाती हैं अंजाम नजर नहीं आता ...

bjp cartoon, congress cartoon, yediyurappa cartoon, 2 g spectrum scam cartoon, cwg cartoon, corruption in india, corruption cartoon
- [image: bjp cartoon, congress cartoon, yediyurappa cartoon, 2 g spectrum scam cartoon, cwg cartoon, corruption in india, corruption cartoon] Cartoon by Kirt...
मंगलवार 2 अगस्त को फिर भेंट होगी!
♥ उच्चारण ♥

रविवार, जुलाई 24, 2011

रविवासरीय (24.07.2011) चर्चा

नमस्कार मित्रों!

मैं मनोज कुमार एक बार फिर से हाज़िर हूं रविवासरीय चर्चा के साथ।
                                    

--बीस--



तूफ़ान का सपना

Dorothy

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आसुओं में
छिपी नमी
जो बरसती है
बारिश की
भीनी भीनी
फ़ुहार बनकर
और बंजर जमीं में भी
बिछ जाती है
हरियाली की मखमली चादर
नवाकुरों कोपलों
और कलियों का
पालना बनकर


                               --उन्नीस
—

अर्धांगिनी की अर्थव्यवस्था

ZEAL

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स्वाभिमान के साथ जीने के लिए आर्थिक स्वतंत्रता अवश्य होनी चाहिए ! स्त्रियाँ यदि नौकरी कर रही हैं तो आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं , कांफिडेंट होती हैं , परिवार का सहयोग भी करती हैं और अपने कमाए हुए धन को अपनी मर्जी के अनुसार खर्च करके अपना पर्सनल स्पेस भी सुरक्षित रखती हैं !


                              --अट्ठारह
—

नफ़्रत ही कोई ढब से निभाये कभी-कभी

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil'

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तेरे बग़ैर गीत तो गाये कभी-कभी।  


पर हर्फ़ कोई छूट सा जाये कभी-कभी॥

मिस्ले-सराय, दिल में तो आये तमाम लोग,
मेह्मान कोई चाँद भी आये कभी-कभी।


                             --सत्तरह
—

अब तंबाकू की साधारण पैकिंग करेंगी जादू

डा प्रवीण चोपड़ा

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भारत में भी इस तरह के पैकिंग नियम बनाये जाने की सख्त ज़रूरत है लेकिन यह ध्यान रहे कि कहीं चबाने वाला तंबाकू इन नियमों की गिरफ्त से न बच पाए क्योंकि वह भी इस देश में एक खतरनाक हत्यारा है।


                              --सोलह—

जात तो पूछो साधो की ....

निर्मल गुप्त

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संत कबीर ने नसीहत दी थी -जात न पूंछो साधु की पूछ लीजिए ज्ञान \मोल करो तलवार का पड़ी रहन दो म्यान.
मेरे शहर में म्यान की समुचित शिनाख्त के बिना सर्वश्रेष्ठ तलवार का भी कोई मोल नहीं होता.बिना बढ़िया रेपर के यहाँ कोई माल नहीं बिका करता.


                                    --पन्द्रह
—

चोरी

संदीप शर्मा

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यह आदत तो मुझे बचपन से ही लग गई थी। जब मां दाल-चावल के डिब्बों में अपने बचे हुए पैसे छुपाया करती थी। मां को खुद नहीं मालूम होता था कि किस डिब्बे में उसने कितने पैसे छुपाए हैं। मैं चुपके से रसोई में जाकर दाल का डिब्बा खोल लेता। अंदर हाथ डालने पर कई पैसे हाथ में आते।


                                --चौदह
—

तिलक और आजाद

Vijai Mathur

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बाल गंगा धर 'तिलक'और पं.चंद्रशेखर आजाद की जयन्ति २३ जूलाई पर श्र्द्धा -सुमन 


                              --तेरह
—

"ग़ज़ल-...आज कुछ लम्हें चुराने हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

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सुहाते ही नहीं जिनको मुहब्बत के तराने हैं

हमारे मुल्क में ऐसे अभी बाकी घराने हैं

जिन्हें भाते नहीं हैं, फूल इस सुन्दर बगीचे के

ज़हन में आज भी ख्यालात उनके तो पुराने हैं


                                   --बारह
—

बोलती आँखें-हाइकु

ramadwivedi

- समीकरण
टिका है संबंधों का
समझ पर ।

***

होती हैं बातें
मौन रह कर भी
बोलती आँखें।


                              --ग्यारह
—

पीड़ा होगी....

अरुण कुमार निगम

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शहनाई की मधुर रागिनी , रचो महावर


और हथेली पर मेंहंदी की रांगोली दो

दीवाली कर लो तुम अपने वर्तमान को

और अतीत की स्मृतियों को अब होली दो.


                                 --दस
—

 

पण्डित चन्द्रशेखर 'आजाद' - जन्म दिवस पर अमर शहीद का जीवन परिचय

pankajprabhakarsingh

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चन्द्रशेखर आज़ाद हमेशा सत्य बोलते थे। एक बार की घटना है आजाद पुलिस से छिपकर जंगल में साधु के भेष में रह रहे थे तभी वहाँ एक दिन पुलिस आ गयी। दैवयोग से पुलिस उन्हीं के पास पहुँच भी गयी। पुलिस ने साधु वेश धारी आजाद से पूछा-"बाबा!आपने आजाद को देखा है क्या?" साधु भेषधारी आजाद तपाक से बोले- "बच्चा आजाद को क्या देखना, हम तो हमेशा आजाद रहते‌ हें हम भी तो आजाद हैं।"


                                  --नौ
—

प्रेम गीत -यही रंग है

जयकृष्ण राय तुषार

clip_image011यही रंग है

जिसे उर्वशी और


मेनका ने था पाया ,

यही रंग है

जिसे जायसी ,ग़ालिब

मीर सभी ने गाया ,

बिना अनूदित

सब पढ़ लेते इसको

अनगिन भाषाओँ में |


                                   --आठ
—

विदा की गरिमा

मंजु मिश्रा

मैं अब कभी,


किसी को, सौ बरस

जीने का आशीष

नहीं दूँगी !

यह आशीष नहीं

एक अभिशाप है,

एक सजा, जो

काटे नहीं कटती.


                                   --सात
—

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सूरज के साथ-साथ

गिरिजा कुलश्रेष्ठ

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वह सत्तर साल का बूढा
दूध के साथ भर जाता है
भगौनी में ढेर सारी ऊर्जा
और उल्लास भी ।
सुनहरी धूप सा
एक विश्वास भी...।


                                 --छह
—

आत्महत्या-प्रयास सफल तो आज़ाद असफल तो अपराध .

शालिनी कौशिक

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"भारतीय दंड सहिंता की धारा ३०९ कहती है -''जो कोई आत्महत्या करने का प्रयत्न करेगा ओर उस अपराध को करने के लिए कोई कार्य करेगा वह सादा कारावास से ,जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से ,या दोनों से दण्डित किया जायेगा .''


                                     --पांच
—

तोड़ महलिया बना रहे

प्रवीण पाण्डेय

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मानव ने पर अंधेपन में,

अपनी तृष्णा का घट भरने,

सकल प्रकृति को साधन समझा,

ढाये अत्याचार घिनौने,


                                    --चार
—

ज़िंदगी के कुछ होलसेल किस्से

निखिल आनंद गिरी

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सिर्फ शब्दों की तह लगाना

नहीं है कविता,..


वाक्यों के बीच

छोड़ देना बहुत कुछ

होती है कविता...


                                 --तीन
—

रात में अक्सर - डॉ नूतन डिमरी गैरोला

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रात में अक्सर
जब शिथिल हो कर
गिर जाती है थकान
शांत बिस्तर में
रात उंघने लगती है तब
पर तन्हाइयां उठ कर जगाने लगती हैं
और कानाफूसी करती है कानों में
नीलाभ चाँद देर रात तक
खेला करता तारों से|


                                  --दो
—

छः ग़ज़लें -कवि डॉ० विनय मिश्र

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मौसम से हरियाली गायब

जीवन से खुशहाली गायब

ईयरफ़ोन हुआ है गहना

अब कानों से बाली गायब

ईद खुशी की आये कैसे

होली गुम दीवाली गायब

उतरा है आँखों का पानी

औ चेहरे  की लाली गायब


                                   --एक--

किश्तों के सहारे

नवीन रांगियाल

हम तस्वीरें नही

मांस और खूं भी नहीं

जादूगर तुम भी नहीं

मैं भी नहीं


पर जादू है कुछ

जिस से सांस आती है

सांस जाती है


तुम बस मेरा मिजाज लौटा देते हो

साल दर साल किश्तों की तरह

और में जिन्दा रहता हूँ

तुम्हारी चुकाई हुई उन किश्तों के सहारे

आज बस इतना ही!


अगले हफ़्ते फिर मिलेंगे।

तब तक के लिए हैप्पी ब्लॉगिंग!!