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शनिवार, अक्टूबर 04, 2014

"अधम रावण जलाया जायेगा" (चर्चा मंच-१७५६)

मित्रों।
मैं राजीव उपाध्याय
आज चर्चा मंच पर
अपनी पहली चर्चा प्रस्तुत कर रहा हूँ।
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कह रहे पापी अधम रावण जलाया जायेगा.... 



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ये है दशहरे का संदेश...

जीत हुई श्री राम की, साथ था उनके धर्म, छल, कपट, और अत्याचार थे रावण के कर्म। धन वैभव और नारी, थे रावण के पाष, क्रोध, लोभ, अहंकार से, होता है केवल विनाश, कैसे जीत होती रावण की, जब घर में ही था क्लेश, सत्य की जीत होती है सदा, ये है दशहरे का संदेश... [आप सब को इस महान पर्व की शुभकामनाएं...]
मन का मंथन। पर kuldeep thakur 
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"रावण पुष्ट होकर पल रहा" 

देश में केवल हमारे, 
आज पुतला जल रहा, 
दुष्ट रावण तो दिलों में, 
पुष्ट होकर पल रहा, 
आओ सच्चा पथ दिखाएँ, 
स्वयं को परिवार को। 
बाँट दें सारे जगत में, 
सत्य के उपहार को।। 
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अज़ीज़ जौनपुरी : 

जिंदगी बारूद की कहानी तक 

छेनिओं से हथौड़ों तक 
चोट पर चोट करते 
कभी संबंधों से 
अनुबंधों तक
अनुच्छेदों से विच्छेदों तक 
कभी आग से पानी तक 
या फिर आग से 
बारूद की कहानी तक 
इस अखाड़े से उस अखाड़े तक 
कुश्ती और दंगल ... 
Aziz Jaunpuri -
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'मंगल ग्रह राख़ एवं चट्टानों का ढेर है। 
':कुंभकर्ण
विजय राजबली माथुर
जी हाँ अब से नौ लाख वर्ष पूर्व साईबेरिया के शासक व महान वैज्ञानिक 'कुंभकर्ण' ने अपने अन्वेषण के बाद घोषणा कर दी थी कि,'मंगल ग्रह राख़ एवं चट्टानों का ढेर है। '
संजय भास्कर
.............मेरी ख्वाहिश थी 
मुझे माँ कहने वाले ढेर सारे होते 
मेरी हर बात धैर्य से सुनते 
मुझे समझते 

डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक
मेरे गाँवगली-आँगन मेंअपनापन ही अपनापन है।
देश-वेश-परिवेश सभी मेंकहीं नही बेगानापन है।।

घर के आगे पेड़ नीम कावैद्यराज सा खड़ा हुआ है।
माता जैसी गौमाता काखूँटा अब भी गड़ा हुआ है।
टेसू के फूलों से गुंथिततीनपात की हर डाली है
घर के पीछे हरियाली हैलगता मानो खुशहाली है।
मेरे गाँवगली आँगन मेंअपनापन ही अपनापन है।
देश-वेश-परिवेश सभी मेंकहीं नही बेगानापन है।।

मान्यवर,

   दिनांक 18-19 अक्टूबर को खटीमा (उत्तराखण्ड) में 

बाल साहित्य संस्थान द्वारा 

अन्तर्राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मेलन का 

आयोजन किया जा रहा है।
   जिसमें एक सत्र 
बाल साहित्य लिखने वाले ब्लॉगर्स का रखा गया है।
हिन्दी में बाल साहित्य का सृजन करने वाले 
सम्मेलन में प्रतिभाग करने के लिए 
10 ब्लॉगर्स को आमन्त्रित करने की 
जिम्मेदारी मुझे सौंपी गयी है।


कृपया मेरे ई-मेल


पर अपने आने की स्वीकृति से 

अनुग्रहीत करने की कृपा करें।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
सम्पर्क- 07417619828, 9997996437
कृपया सहायता करें।
बाल साहित्य के ब्लॉगरों को खोजने में

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इमरोज के लिए 

उड़ान पर Anusha Mishra 
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एक टिटहरी जूझ रही थी 

चोंच में रेत को भर रही थी 

सुबह से आखिर शाम हुई थी 

संकल्प में ना कमी हुई थी 
समुद्र ने तो चुटकी ली 
क्यों प्राण गंवाने पर हो तुली 
तुम मुझे क्या भर पाओगी...
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कूड़ा 

नदी पर पुल 
पुल के किनारे कूड़े का ढेर 
कूड़े के ढेर पर बच्चे 
बच्चों के हाथों में प्लास्टिक के बोरॆ 
बोरों में शाम की रोटी का सपना...
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
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...बिक गए होते ! 

हम ज़रा और झुक गए होते 
अर्श के मोल बिक गए होते 
साथ देते तिरी हुकूमत का 
तो बहुत दूर तक गए होते... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil
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एहसासों की खिड़कियाँ ... 

बड़ी तीक्ष्‍ण होती है
स्‍मृतियों की
स्‍मरण शक्ति
समेटकर चलती हैं
पूरा लाव-लश्‍कर अपना
कहीं‍ हिचकियों से
हिला देती हैं अन्‍तर्मन को
तो कहीं खोल देती हैं
दबे पाँव एहसासों की खिड़कियाँ...
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प्रिया से -  

सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" 

मेरे इस जीवन की है तू सरस साधना कविता, 
मेरे तरु की है तू कुसुमित प्रिये कल्पना-ज्ञतिका; 
मधुमय मेरे जीवन की प्रिय है तू कमल-कामिनी, 
मेरे कुंज-कुटीर-द्वार की कोमल-चरणगामिनी... 
Voice of Silence पर 
Brijesh Neeraj -
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मंगलवार, जुलाई 30, 2013

"शम्मा सारी रात जली" (चर्चा मंच-अंकः1322)

मित्रों!
      मंगलवार की चर्चाकार बहन राजेश कुमारी जी एक माह के लिए कश्मीर प्रवास पर गयी हुई हैं। अतः चार सप्ताह तक हर मंगलवार को आप मेरी पसंद के लिंक देखेंगे।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।
बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।
'सतसईया' का दोहा हो या,  'पदमावत'चौपाई हो ?
या बच्चन की 'मधुशाला'की,सबसे श्रेष्ठ रुबाई हो ?
आपका ब्लॉग पर DrRaaj saksena 
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कर्कश सुर से तो होती है, खामोशी की तान भली
जल जाता शैतान पतिंगा, शम्मा सारी रात जली
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रजनी निज मन को व्यथित कर;
थिर अन्तस् को स्वर प्लावित कर 
मानो 
निश्छल प्राण छले गये !
अन्तर्गगन पर धीरेन्द्र अस्थाना
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मिट्टी से लिपा चुल्हा चुल्हे में सुलगती लकड़ियाँ 
उसकी आँच में सिकी हुई माँ के हाथों की गरम रोटियाँ 
बहुत याद आते हैं....

अभिव्यंजना पर Maheshwari kaneri

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सभी को दिखाई दे जाते हैं रोज कहीं ना कहीं कुछ मोर उनके अपने जंगलों में नाचते हुऎ सब लेकिन कहाँ बताते है किसी और को जंगल में मोर नाचा था और उन्होने उसे नाचते हुए देखा था ...

उल्लूक टाईम्स पर सुशील

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डायरी के पन्ने ....जो कहानी संग्रह के रूप में लिखे जा रहें हैं ....उसे कुछ हिस्से साथ साथ यहाँ ब्लॉग पर आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ....

अपनों का साथ पर Anju (Anu) Chaudhary

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चुनाव अब धीरे धीरे करीब आ रहे हैं और सब अपनी छवि के लिए राजनैतिक समीकरण जिस तेजी से पूरे देश को उद्वेलित कर रहे हें लगता है कि सारे दलों के लोग अब बिल्कुल दूध के धुले होकर हमारी (जनता) की शरण में आने वाले हें लेकिन दलों की नीतियां भी तो देख लीजे फिर विश्वास कीजिये...

hindigen पर रेखा श्रीवास्तव 

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जिसे अपना बनाए जा रहा हूँ, 
उसी से चोट दिल पे खा रहा हूँ, 
यकीं मुझपे करेगी या नहीं वो, 
अभी मैं आजमाया जा रहा हूँ,....
मेरी धरोहर पर yashoda agrawal
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चलिए, आज हम आपको तिथियों के बहाने सूरज और चंदा की प्रेम कहानी सुनाते हैं। पर ये प्रेम कहानी बाकी कहानियों से अलग है। जहाँ अन्य सभी प्रेमी-युगल मिलन की बाट जोहते रहते हैं, वहीं हमारी चंदा रानी सूरज से मिलन होते ही एकदम काली पड़ जाती हैं....

आह्वान पर  डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'

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छिटपुट साहित्य लेखन की आदत तो बचपन से ही थी किन्तु, सन २००८ में लगभग इसी वक्त मैंने अपना यह ब्लॉग लिखना शुरू किया था। शुरुआती समय में पद्य की जगह गद्य लेखन पर अधिक जोर था, और ज्वलंत समसामयिक मुद्दों पर खूब लिखता था...

अंधड़ ! पर  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

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सृजन मंच ऑनलाइन

मित्रों!
आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।
कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। आपका मेल मिलते ही आपको सृजन मंच ऑनलाइन के लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!
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छहों ऋतुएं मोहे ना भायी सखी री जब तक ना हो पी से मिलन सखी री विरही मौसम ने डाला है डेरा कृष्ण बिना सब जग है सूना जब हो प्रीतम का दर्शन तब जानूं आया है सावन ये कैसा....

एक प्रयास पर vandana gupta 

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 प्यास मेरी अधूरी यही रह गई 
आशियाने बहे ना डगर ही मिली 
सूचना आसमानी धरी रह गई ...

गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 

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उस खाली पड़े कैनवास पर हर रोज सोचता हूँ 
एक तस्वीर उकेरूँ कुछ ऐसे रंग भरूँ 
जो अद्वितीय हो पर कौन सी तस्वीर बनाऊँ 
जो हो अलग सबसे हटकर अद्वितीय और अनोखी 
इसी सोच में बस गुम हो जाता हूँ....

मन का पंछी पर शिवनाथ कुमार

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यूँ ना इस अंदाज़ में हमको देखा करो 
मुहब्बत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे 
ये शोख अदाएं अक्सर बहकाती हैं दिल को ...

आपका ब्लॉग पर yashoda agrawal

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संगम पर बाप आकर बच्चों को ऊंचे ते ऊंचा कर्म कैसे किया जाए ,समझाते हैं। अ-कर्म जिनका आगे हिसाब किताब नहीं बनता करने की विधि समझाते हैं। अब हम बच्चों को उसे एक मेथड एक प्रोद्योगिकी में खुद ही बदलना है निरंतर प्रयत्न से पुरुषार्थ से।कर्म और योग का संतुलन बनाए रखना है...


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क्या ज़मीं क्या अस्मां न किसी पर भरोसा कीजे 
चंद लमहात में सारा ज़माना बदल जाता है 
वो तो फ़कत फ़ितरत है उसकी फ़ितरत है बदलना 
आजकल इन्सान क्या ख़ुदा भी बदल जाता है...

Zindagi se muthbhed पर Aziz Jaunpuri

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माता के शुभ चरण छू, छू-मंतर हों कष्ट | 
जिभ्या पर मिसरी घुले, भाव कथ्य सुस्पस्ट |
भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ | 
पाप-कलुष हों नष्ट, ख़तम हो जाय भ्रांतियां...

"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 

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दो और दो पांच का खेल, 
ताऊ, रामप्यारी और सतीश सक्सेना के बीच

रामप्यारी ने आजकल ताऊ टीवी का काम संभालना शुरू कर दिया है. उसी की पहल पर ब्लाग सेलेब्रीटीज से "दो और दो पांच" खेलने का यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. दो और दो पांच में, ब्लॉग सेलिब्रिटी से निवेदन है कि वे सवाल के जवाब कुछ चटपटे रखें ताकि ब्लोगर साथियों का मनोरंजन भी हो , इस प्रोग्राम का मकसद आपको हंसना सिखाना है. इस मनोरंजक पोस्ट का अधिक अर्थ निकालने की कोशिश न करे यह काम रामप्यारे को ही करने दें. ...
ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया 
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बापू तुम वापस आ जाओ
राष्ट्र-पिताजी आप स्वर्ग में,परियों के संग खेल रहे हैं | 
इधर आपके , चेले-चांटे ,अरब-खरब में खेल रहे हैं....
सृजन मंच ऑनलाइन पर DrRaaj saksena

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फीकापन

एक लम्बी रात जो गुजरती है तुम्हारे ख्वाब में, 
तुम्हें निहारते हुए बतियाते हुए किस्से सुनते-सुनाते हुए ....
तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी 'सलिल'
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कुण्डली छंद ....श्याम लीला-- गोवर्धन धारण.... 

 *जल अति भारी बरसता वृन्दावन के धाम,* 
*हर वर्षा-ऋतु डूबते , वृन्दावन के ग्राम ...
सृजन मंच ऑनलाइन पर shyam Gupta
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"हो गया है साफ अम्बर"

उमस ने सुख-चैन छीना,
हो गया दुश्वार जीना,
आ रहा फिर से पसीना, तन-बदन पर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर...
"धरा के रंग"
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इक सानिहा.....!
अज़ब इक सानिहा, 
इस शहर में हो गया नज़रें मिली और झुकी, 
दिल मेरा खो गया जाने कितने अब्र आये...
काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा 

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मित्रों...आज के लिए बस इतना ही...!
नमस्ते...
अगले मंगलवार को फिर मिलूँगा।