फ़ॉलोअर



यह ब्लॉग खोजें

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, अगस्त 25, 2014

"हमारा वज़ीफ़ा... " { चर्चामंच - 1716 }

*--------------------------------------------------------*
*****
"ॐ नमः शिवाय"
 प्रिय ब्लॉगर मित्रों , 
चर्चामंच के इस अंक में मै आप सबका 
बहुत जल्दी में स्वागत करता हूँ , 
बहुत जल्दी मैंने इसलिए कहा  -#.$#--
खैर छोडिये वजह जानकार क्या होगा - लेकिन अब ?
*--------------------------------------------------------*
- बढ़ते हैं लिंक्स की ओर -
 *--------------------------------------------------------*
तुम्हारा एक नाम रखूं ?

My Photo
एक नाम रखूं ?
क्या नाम रखूं
 तुम्हारा !
प्रेम !
नहीं तुम्हारा नाम प्रेम नहीं !
वो प्रेम ही क्या
जो छुपाया जाये।
तुम्हारा

*--------------------------------------------------------*
आईने के पीछे भी होता है बहुत कुछ 
सामने वाले जिसे नहीं देख पाते हैं

कहा जाता रहा है आज से नहीं कई सदियों से सोच उतर आती है शक्ल में दिल की बातें तैरने लगती हैं आँखों के पानी में हाव भाव चलने बोलने से पता चल जाता है किसी के भी ठिकाने का अता पता बशर्ते जो बोला या कहा जा रहा हो
- उलूक टाइम्स -
*--------------------------------------------------------*
कुछ रिश्‍ते !!!!
मेरा फोटो
कुछ रिश्‍ते
सच्‍चे होते हैं इतने कि
झूठ और फ़रेब
खुद छलनी हो जाते हैं
इनके क़रीब आकर !
- सदा -
*--------------------------------------------------------*
कैरियर एकदम सेट है।
रामबुधन जी के तीन बच्चे हुआ करते थे। वैसे हैं तो अब भी, मगर नहीं के बराबर। अब वो क्यों नहीं के बराबर हैं, ये जानते हैं : बात उस समय की जब रामबुधन जी का बड़ा बेटा 14 साल का, मझला बेटा 12 और छोटा क़रीब 9 साल का था। ये उम्र ऐसी है
हालात-ए-बयाँ/Halat-E-Bayaan -
*--------------------------------------------------------*
सत्य से पहचान 
झूठ से ही परिभाषित करते हैं  

‘स्वयं’ को जब हम

तब छले जाते हैं बार-बार

“जो है” जब उस पर नजर नहीं जाती

‘जो होना चाहते हैं’ की चाह में जले जाते हैं
“जो है” शुभ है, सुंदर है, सत्य है
मन पाए विश्राम जहाँ -
*--------------------------------------------------------* 
मेरा भी रोने को ,
मन करता है

मेरा भी सोने को ,
मन करता है ,
पर हर कंधे ,
गीले होते है ,
धन्यवाद !
*--------------------------------------------------------* 
इसके बाद देखिए मेरी पसंद के कुछ लिंक
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
*--------------------------------------------------------*

खामोश भावनाओं की उपज 

संभावनाओ की प्रत्याशा में, 
जब ऊम्मीद की किरण 
अपनी रश्मि बिखेरती है 
और जब 
फैला देती है समूचे परिवेश में 
अपनी आभा की प्रतिच्छाया 
जिसकी मद्धिम सी रोशनी में 
दिख जाता है तुम्हारा 
वह सजीला एवं सलोना सा रूप...
*--------------------------------------------------------*
*--------------------------------------------------------*

सुहाना सफर – यूरोप म्यूनिख - 2 

Sudhinama पर sadhana vaid
*--------------------------------------------------------*

क्यूँ? है न ? 

मेरी भावनायें... पर रश्मि प्रभा...
*--------------------------------------------------------*

हमारा वज़ीफ़ा... 

उठाना-गिराना रईसों की बातें 
ख़ुलूसो-मुहब्बत ग़रीबों की बातें 
सियासत तुम्हारी महज़ क़त्लो-ग़ारत 
अदब-मौसिक़ी-फ़न शरीफ़ों की बातें...
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
*--------------------------------------------------------*

हनुमान जी के अहंकार का नाश ! 

Patali पर Patali-The-Village
*--------------------------------------------------------*

ईरोम जी, 

यदि आप भगवान को मनाती तो…!! 

आपकी सहेली पर jyoti dehliwal
*--------------------------------------------------------*

जबसे कोई आस पास रहता है..... 

*--------------------------------------------------------*

उन्होंने साहित्य में 

आधुनिक भारतीय चेतना को स्थापित किया 

naveen kumar naithani 
*--------------------------------------------------------*

दर्दों के बोझ में .. 

उन्नयन पर udaya veer singh
*--------------------------------------------------------*

दोस्ती करना संभल कर... 

*--------------------------------------------------------*

एक नवगीत 

-हरे वन की चाह में 

जयकृष्ण राय तुषार 
*--------------------------------------------------------*

कबीरा ये तन जात है , 

सके तो राखि बहोर ,  

खाली हाथों वे गए ,  

जिनके लाख करोड़ 

Virendra Kumar Sharma
*--------------------------------------------------------*

नेशनल दुनिया में मेरी बाल कविता 

"उल्लू" 

*--------------------------------------------------------*
क्या कहते हैं ये सपने ? 
 जब भी खो जाता हूँ 
मैं नींद के आगोश में 
सपने आकर चले जाते हैं 
एक के बाद एक कतार में...
मेरे विचार मेरी अनुभूति पर 

कालीपद "प्रसाद" 
*--------------------------------------------------------*

जोश और होश - बोधकथा 

Smart Indian
*--------------------------------------------------------* 

मंगलवार, जुलाई 30, 2013

"शम्मा सारी रात जली" (चर्चा मंच-अंकः1322)

मित्रों!
      मंगलवार की चर्चाकार बहन राजेश कुमारी जी एक माह के लिए कश्मीर प्रवास पर गयी हुई हैं। अतः चार सप्ताह तक हर मंगलवार को आप मेरी पसंद के लिंक देखेंगे।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मित्रों!
आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।
बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।
'सतसईया' का दोहा हो या,  'पदमावत'चौपाई हो ?
या बच्चन की 'मधुशाला'की,सबसे श्रेष्ठ रुबाई हो ?
आपका ब्लॉग पर DrRaaj saksena 
--

कर्कश सुर से तो होती है, खामोशी की तान भली
जल जाता शैतान पतिंगा, शम्मा सारी रात जली
--

रजनी निज मन को व्यथित कर;
थिर अन्तस् को स्वर प्लावित कर 
मानो 
निश्छल प्राण छले गये !
अन्तर्गगन पर धीरेन्द्र अस्थाना
--
मिट्टी से लिपा चुल्हा चुल्हे में सुलगती लकड़ियाँ 
उसकी आँच में सिकी हुई माँ के हाथों की गरम रोटियाँ 
बहुत याद आते हैं....

अभिव्यंजना पर Maheshwari kaneri

--
सभी को दिखाई दे जाते हैं रोज कहीं ना कहीं कुछ मोर उनके अपने जंगलों में नाचते हुऎ सब लेकिन कहाँ बताते है किसी और को जंगल में मोर नाचा था और उन्होने उसे नाचते हुए देखा था ...

उल्लूक टाईम्स पर सुशील

--
डायरी के पन्ने ....जो कहानी संग्रह के रूप में लिखे जा रहें हैं ....उसे कुछ हिस्से साथ साथ यहाँ ब्लॉग पर आप सबके साथ साँझा कर रही हूँ ....

अपनों का साथ पर Anju (Anu) Chaudhary

--
चुनाव अब धीरे धीरे करीब आ रहे हैं और सब अपनी छवि के लिए राजनैतिक समीकरण जिस तेजी से पूरे देश को उद्वेलित कर रहे हें लगता है कि सारे दलों के लोग अब बिल्कुल दूध के धुले होकर हमारी (जनता) की शरण में आने वाले हें लेकिन दलों की नीतियां भी तो देख लीजे फिर विश्वास कीजिये...

hindigen पर रेखा श्रीवास्तव 

--
जिसे अपना बनाए जा रहा हूँ, 
उसी से चोट दिल पे खा रहा हूँ, 
यकीं मुझपे करेगी या नहीं वो, 
अभी मैं आजमाया जा रहा हूँ,....
मेरी धरोहर पर yashoda agrawal
--
चलिए, आज हम आपको तिथियों के बहाने सूरज और चंदा की प्रेम कहानी सुनाते हैं। पर ये प्रेम कहानी बाकी कहानियों से अलग है। जहाँ अन्य सभी प्रेमी-युगल मिलन की बाट जोहते रहते हैं, वहीं हमारी चंदा रानी सूरज से मिलन होते ही एकदम काली पड़ जाती हैं....

आह्वान पर  डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'

--
छिटपुट साहित्य लेखन की आदत तो बचपन से ही थी किन्तु, सन २००८ में लगभग इसी वक्त मैंने अपना यह ब्लॉग लिखना शुरू किया था। शुरुआती समय में पद्य की जगह गद्य लेखन पर अधिक जोर था, और ज्वलंत समसामयिक मुद्दों पर खूब लिखता था...

अंधड़ ! पर  पी.सी.गोदियाल "परचेत"

--
सृजन मंच ऑनलाइन

मित्रों!
आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।
कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। आपका मेल मिलते ही आपको सृजन मंच ऑनलाइन के लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!
--
छहों ऋतुएं मोहे ना भायी सखी री जब तक ना हो पी से मिलन सखी री विरही मौसम ने डाला है डेरा कृष्ण बिना सब जग है सूना जब हो प्रीतम का दर्शन तब जानूं आया है सावन ये कैसा....

एक प्रयास पर vandana gupta 

--
 प्यास मेरी अधूरी यही रह गई 
आशियाने बहे ना डगर ही मिली 
सूचना आसमानी धरी रह गई ...

गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 

--
उस खाली पड़े कैनवास पर हर रोज सोचता हूँ 
एक तस्वीर उकेरूँ कुछ ऐसे रंग भरूँ 
जो अद्वितीय हो पर कौन सी तस्वीर बनाऊँ 
जो हो अलग सबसे हटकर अद्वितीय और अनोखी 
इसी सोच में बस गुम हो जाता हूँ....

मन का पंछी पर शिवनाथ कुमार

--
यूँ ना इस अंदाज़ में हमको देखा करो 
मुहब्बत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे 
ये शोख अदाएं अक्सर बहकाती हैं दिल को ...

आपका ब्लॉग पर yashoda agrawal

--
संगम पर बाप आकर बच्चों को ऊंचे ते ऊंचा कर्म कैसे किया जाए ,समझाते हैं। अ-कर्म जिनका आगे हिसाब किताब नहीं बनता करने की विधि समझाते हैं। अब हम बच्चों को उसे एक मेथड एक प्रोद्योगिकी में खुद ही बदलना है निरंतर प्रयत्न से पुरुषार्थ से।कर्म और योग का संतुलन बनाए रखना है...


--
क्या ज़मीं क्या अस्मां न किसी पर भरोसा कीजे 
चंद लमहात में सारा ज़माना बदल जाता है 
वो तो फ़कत फ़ितरत है उसकी फ़ितरत है बदलना 
आजकल इन्सान क्या ख़ुदा भी बदल जाता है...

Zindagi se muthbhed पर Aziz Jaunpuri

--
माता के शुभ चरण छू, छू-मंतर हों कष्ट | 
जिभ्या पर मिसरी घुले, भाव कथ्य सुस्पस्ट |
भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ | 
पाप-कलुष हों नष्ट, ख़तम हो जाय भ्रांतियां...

"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 

--
दो और दो पांच का खेल, 
ताऊ, रामप्यारी और सतीश सक्सेना के बीच

रामप्यारी ने आजकल ताऊ टीवी का काम संभालना शुरू कर दिया है. उसी की पहल पर ब्लाग सेलेब्रीटीज से "दो और दो पांच" खेलने का यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. दो और दो पांच में, ब्लॉग सेलिब्रिटी से निवेदन है कि वे सवाल के जवाब कुछ चटपटे रखें ताकि ब्लोगर साथियों का मनोरंजन भी हो , इस प्रोग्राम का मकसद आपको हंसना सिखाना है. इस मनोरंजक पोस्ट का अधिक अर्थ निकालने की कोशिश न करे यह काम रामप्यारे को ही करने दें. ...
ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया 
--
बापू तुम वापस आ जाओ
राष्ट्र-पिताजी आप स्वर्ग में,परियों के संग खेल रहे हैं | 
इधर आपके , चेले-चांटे ,अरब-खरब में खेल रहे हैं....
सृजन मंच ऑनलाइन पर DrRaaj saksena

--
फीकापन

एक लम्बी रात जो गुजरती है तुम्हारे ख्वाब में, 
तुम्हें निहारते हुए बतियाते हुए किस्से सुनते-सुनाते हुए ....
तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी 'सलिल'
--
कुण्डली छंद ....श्याम लीला-- गोवर्धन धारण.... 

 *जल अति भारी बरसता वृन्दावन के धाम,* 
*हर वर्षा-ऋतु डूबते , वृन्दावन के ग्राम ...
सृजन मंच ऑनलाइन पर shyam Gupta
--
"हो गया है साफ अम्बर"

उमस ने सुख-चैन छीना,
हो गया दुश्वार जीना,
आ रहा फिर से पसीना, तन-बदन पर।
खिल उठी है चिलचिलाती, धूप फिर से आज भू पर...
"धरा के रंग"
--
इक सानिहा.....!
अज़ब इक सानिहा, 
इस शहर में हो गया नज़रें मिली और झुकी, 
दिल मेरा खो गया जाने कितने अब्र आये...
काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा 

--
मित्रों...आज के लिए बस इतना ही...!
नमस्ते...
अगले मंगलवार को फिर मिलूँगा।