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मंगलवार, सितंबर 27, 2022

"सर्वमंगला मंगल लाए"(चर्चा-अंक 4564)

सादर अभिवादन स्वागत है आप सभी का (शीर्षक और भूमिका आदरणीया अनीता जी की रचना से)

अन्नपूर्णा भरे भंडार

सर्वमंगला मंगल लाए,  

परम शक्ति चण्डिका अपर्णा 

माँ भैरवी भय हर ले जाय ! 

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नवरात्रि का दूसरा दिन

माँ के "ब्रह्मचारिणी" रूप का पूजन

ब्रह्मचारिणी अर्थात तप का आचरण करने वाली 

माता का यह रूप हमें अपने आचरण को परखने और निखारने की सीख देता है 

अपने आचरण को सयंमित कर गृहस्थ जीवन में रहना भी एक तप है

"माँ ब्रह्मचारिणी" हमें अपने चरित्र और आचरण को शुद्ध रखने की शक्ति दे 

इसी मंगल कामना के साथ चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर....

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दोहे "आते हैं नवरात्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


श्राद्ध गये तो आ गयेमाता के नवरात्र।

लीला का मंचन करेंरामायण के पात्र।।

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सबको देते प्रेरणामाता के नवरूप।

निष्ठा से पूजन करोलेकर दीपक-धूप।।

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सर्वमंगला मंगल लाए

जगज्जननी ! महा  मूल प्रकृति !

ज्योतिस्वरूपा वामदेवी,

जगदम्बा, ईशा,  सरस्वती

लक्ष्मी, गंगा, उमा, पार्वती !


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देवी आराधना

देवी मैया ओ  अम्बे मैया 

कर दो मेरा बेड़ा पार भव सागर  से 

तुम तक सरलता से पहुंचूं    

खाऊँ न  हिचकोले मध्य भवर   में |

बड़ी बड़ी लहरें आई हैं  मुझे डरानें 

भव सागर से  कैसे बेड़ा पार लगाऊँ 

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देवी गीत..

भोर भये रवि आने से पहले

देख नहीं मैं पाईभवानी मोरे अँगनवाँ


बाग हँसन लगेकमल खिलन लगे

कलियाँ हैं लहराईंभवानी मोरे अँगनवाँ


गोदिया बालक हँसि मुस्काने

मोहें नज़र नहीं आईं,भवानी मोरे अँगनवाँ


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नूर तेरा …

हर सिम्त है बिखरा

नूर तेरा 

हर शै में

तू ही समाया,

ढूंढ रहे तोहे

मंदिर मस्जिद 

जग पगला भरमाया.....

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स्कूल शिक्षा के लिए हैं, बच्चे सीखते हैं, किताबों से, प्रायोगिक तरीकों से...। आज प्रकृति और वन्य जीव खतरे में हैं... समझना मुश्किल है कि कैसे बचेंगे...? हमें सही अंकुरण बच्चों में करना होगा... आपने इस तरह जीवों की प्रतिकृति अनेक स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों पर देखी होंगी...। हम बो रहे हैं बच्चों के विचारों में कि इन प्रतिकृति में कचरा भर सकते हैं...। सोचिए वह किन उदाहरणों और सबकों के साथ बड़ा होगा... और ऐसे में वह प्रकृति और वन्य जीवों के प्रति कितना सकारात्मक होगा... समझना मुश्किल नहीं है...।----------------------------------एक सच्चा स्वतंत्रता सेनानी

 1976 की बात है. माता इंदिरा गांधी की कृपा से तब देश में इमरजेंसी लगी हुई थी.

उन दिनों पिताजी हरदोई में चीफ़ जुडिशिअल मजिस्ट्रेट थे.

1972 में भारत की स्वतंत्रता के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन दिए जाने की घोषणा की गयी थी लेकिन इस योजना का कार्यान्वयन इमरजेंसी के दौरान ही हो पाया था.

एक बार पिताजी अपने रूटीन चेकअप के लिए हरदोई के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल गए थे जहाँ पर उनकी मुलाक़ात सी० एम० ओ० (चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर) से हो गयी.

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आदिवासियों के घर और रहन- सहन

दिवाली की तैयारियों में आप भी ग्रामीण महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं इन्हें अपने घरों के रंग रोगन और साज सज्जा में शामिल कर सकते हैं। इसी बहाने दूसरों के घर भी रौशन हो जाएंगे। 

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धीर और गंभीर : कवि/शायर रणधीरजी हां, मैं बात कर रहा हूं बरेली-उ०प्र० में जन्मे प्रसिद्ध कवि और शायर श्री रणधीर प्रसाद गौड़ 'धीर' जी की। धीर जी को कविता और शायरी का फ़न विरासत में मिला है।आपके पिता स्मृतिशेष श्री देवीप्रसाद गौड़ 'मस्त' बरेलवी साहब अपने ज़माने के जाने माने शायर थे। श्री रणधीर प्रसाद गौड़ धीर साहब रेलवे के सीनियर सैक्शन इंजीनियर के पद से सेवा निवृत्ति प्राप्त करके आजकल स्वतंत्र साहित्य सृजन और समाज सेवा के कार्यों में निमग्न हैं।---------------------------आज का सफर यही तक आपका दिन मंगलमय हो कामिनी सिन्हा 

रविवार, सितंबर 18, 2022

"विश्वकर्मा भगवान का वंदन" (चर्चा अंक 4555)

सादर अभिवादन

रविवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है

(शीर्षक और भुमिका आदरणीय ब्रजेन्द्रनाथ जी की रचना से)


धर्म पथ पर बढ़ चलें हम, शुद्ध हो मेरे आचरण,

 सृष्टि के प्रथम शिल्पी का करते हैं अभिनन्दन। 

हाथ जोड़ विश्वकर्मा भगवान का करते हैं हम वंदन। 


"विश्वकर्मा"सृष्टि के प्रथम शिल्पकार के चरणों में सत सत नमन करते हुए चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर...

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सृष्टि के शिल्पकार तो विश्वकर्मा जी है लेकिन हमारे नये भारत के सृजनकर्ता हमारे प्रिय प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी है। ये कहने में मुझे भी जरा सा भी संकोच नहीं है।

जो भी सिर्फ देश के लिए तटस्थ होकर सोचेगा उन्हें इस बात का एहसास जरुर होगा।

बाकी, कमियां निकालना तो हमारी मानसिकता हो ही गई है।

आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी को जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

परमात्मा उन्हें दिर्घायु करें 

 "दामोदर नरेन्द्र भाई मोदी" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दागे नहीं खयाली गोले,
कूटनीति से काम लिया।
सत्य-अहिंसा के बल पर,
अपने भारत को एक किया।
भटके हुए युवा बिरुओं को,
देशभक्ति को सिखलाया।
भारत भाग्य विधाता बनकर,
पथ समाज को दिखलाया।।
******

विश्वकर्मा भगवान का वंदन (कविता )
ब्रह्माण्ड में तेरा ही राज, भक्तों की रखना तू लाज, भाव मैं अर्पित करूँ, झुके नहीं कभी सच का ताज। हम अभिमानी, मूर्ख, पूजा विधि से हैं अनजान. अपनी शरण में ले लो प्रभु, हम तेरी ही हैं संतान। बढ़ें चले प्रगति पथ पर, करके तेरा स्मरण. सृष्टि के प्रथम शिल्पी का करते हैं अभिनन्दन। हाथ जोड़ विश्वकर्मा भगवान का करते हैं हम वंदन।*****वृद्ध वय ढलता सूर्य

प्रोढ़ होता मन सुने अब

क्षीण से तन की कहानी 

सोच पर तन्द्रा चढ़ी है

गात पतझर सा सहानी

रीत लट बन श्वेत वर्णी

झर रही परिपक्वता से।

*****


६६५.दीवारें

जब तक मेरे घर में 

कोई दीवार नहीं थी, 

घर बड़ा-सा लगता था,

अब दीवारें बन गई हैं,

तो लगता है,

एक ही घर में 

कई घर बन गए हैं. 

*****

पाती ढाई आखर की

इस ढाई आखर में छिपे हैं,
          जाने कितने कोमल भाव।
तेरे मन में मोल न इसका,
          भूल गए तुम खाकर ताव।
व्याकुल मन ये तड़प रहा है,      
              डस रही है यह तन्हाई।
लिख निर्मोही कब आओगे,

           समझ न पाते प्रीत पराई।
*****

मां का नहीं होना

सूरज के होते हुए भी 

पसरा होता है अंधेरा 

चांद के होते हुए 

नहीं होती शीतलता 

नर्म दूब जब लगे 

तपता अंगारो सा 

फिर लगता है क्या होता है 

मां का नहीं होना। 

*****

ग़ज़ल "प्यार का इज़हार करना चाहिए" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सोच में विस्तार करना चाहिए
ज़िन्दग़ी को प्यार करना चाहिए

हौसले से थाम कर पतवार को
सागरों को पार करना चाहिए

मुल्क की अस्मत बचाने के लिए

दुश्मनों पर वार करना चाहिए

*****

आज का सफर यहीं तक, अब आज्ञा दे

आपका दिन मंगलमय हो

कामिनी सिन्हा 

मंगलवार, सितंबर 13, 2022

"हिन्दी है सबसे सरल"(चर्चा अंक 4551)

सादर अभिवादन

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है

(शीर्षक और भुमिका आदरणीय शास्त्री सर जी की रचना से)


मेरे भारत की भाषाएँ फूलें-फलें,

हमको सन्तों की वाणी भुलानी नहीं।

"रूप" इसका सँवारें सकल विश्व में,
रुकने पाए हमारी रवानी नहीं।

हिन्दी भाषा के सम्मान में कहीं गई इन पंक्तियों के साथ शुरू करते हैं आज का सफर......--------गीतिका "हिन्दी है सबसे सरल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


व्याकरण में भरा पूर्ण विज्ञान है,
जोड़ औतोड़ की कुछ कहानी नहीं।

सन्धि नियमों में पूरी उतरती खरी,
मातृभाषा हमारी बिरानी नहीं।
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हिन्दी की विशेषता

 है हिन्दी हमारी मातृभाषा 

हमें है  प्यार उससे  

कारण नहीं समझ से बाहर 

लिपि है  बहुत  सरल उसकी  |

कितनी भाषाएँ मिलीं है उससे 

जैसे जल में शक्कर मिली हो |

उन शब्दों   को यदि  खोजा जाए 

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 मेडिकल व्यापारियों से सावधान रहें -सतीश सक्सेना


इंसान अपने जीवन भर मृत्यु के बारे में कभी कोई विचार नहीं करता , बस खतरनाक बीमारी से लड़ते समय ही उसकी याद आती है और साथ ही मृत्यु भय भी, जो स्थिति की गंभीरता को कई गुना बढ़ा देता है ! इसके न होने की अवस्था में बीमारियों को मानव की आंतरिक रक्षा शक्ति रोग पर कुछ समय में काबू पा लेती है , मगर अगर मरीज को जान जाने के खतरे की संभावना बता दी जाए तो मानसिक तनाव के कारण कुछ समय में ही, सामान्य बीमारी भी कई गुना खतरनाक हो जाती है ! अफ़सोस यह है कि इस भय को मेडिकल व्यवसाय में अधिक से अधिक धन कमाने के लिए, अच्छी तरह भुनाया जाता है !

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लघुकथा- सीनियर सिटीजन ग्रुप

अंकिता और अमर दोनों पति-पत्नी अच्छे पदों पर काम कर रहे थे। उनका बेटा हैदराबाद में जॉब कर रहा था। अमर के पिता का देहांत हो चुका था और माँ (शिल्पा) की उम्र 70 साल थी। वैसे तो वो सेहतमंद थी और अपने सभी काम खुद ही करती थी लेकिन अंकिता अक्सर इस बात से तनाव में रहती कि अभी तो सास तंदुरुस्त है मगर उम्र के साथ-साथ जब उनकी शारीरिक तकलिफे बढ़ेगी तो क्या होगा? उनकी देखभाल कौन करेगा? असल में अब अंकिता को लगने लगा था कि सास के रहते वो फ्री नहीं रह पाती है। इसलिए वो सास को वृद्धाश्रम भेजने के लिए अमर को मनाने लगी।
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दादी की पाती
कुछ साल पहले "हिंद युग्म" के "बाल उद्यान" भाग में "दीदी की पाती" नाम से एक सीरीज शुरू की थी । वह बहुत पसंद की गई। न केवल बच्चों ने उसको पसंद किया ,बड़े भी उस पाती का बहुत इंतजार करते थे। बच्चों के साथ रहना उनके लिए लिखना मुझे विशेष रूप से पसंद है। अब उनके लिए एक यू ट्यूब चैनल शुरू किया है । आप सब का सहयोग चाहिए ।  चूंकि अब दीदी भी दादी बन गई हैं तो इसका नाम भी बदल दिया। पर बातें कहानियां वही रोचक हैं। 😊 देखे सुने और लाइक सब्सक्राइब करें। -----------
नाक़ाम इश्क़ ...

काँटों की चुभन है नाक़ाम इश्क़
रहने नहीं देती जो चैन से
महसूस होता है रिस्ता दर्द, रह-रह के चुभती कील सरीखे
 
एक अन्तहीन दौड़ की दौड़ 
क्या प्रेम की प्राप्ति के लिए ? 
या भटकता है खुद की तलाश में इन्सान ?

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"मेरे ज्येष्ठ पुत्र का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


मेरे आँगन के उपवन में,
मुरझाये सब सुमन खिल गये।
नीरस जीवन, सरस हो गया,
सब अनुपम उपहार मिल गये।
सूने मन के आँगन-उपवन,
वासन्ती उद्यान हो गये।
नितिन तुम्हारे कारण मेरे,

पूरे सब अरमान हो गये।।

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ज्येष्ठ पुत्र को जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं सर

आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दे 
आपका दिन मंगलमय हो 
कामिनी सिन्हा