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शनिवार, अप्रैल 20, 2013

धूम , जयकार , झगडे , प्यार और मनुहार के साथ

दोस्तों 

एक तरफ़ राम नवमी की धूम 
दूजी तरफ़ माता का जय जयकार  
तीसरी तरफ़ हमारा देश और हमारे सरोकार 
और चौथी तरफ़ हमारा ब्लोगजगत 
और यहाँ के सरमायेदारों के 
झगडे , प्यार और मनुहार की 
कुछ झलकियों के साथ हाजिर हूँ 
आज की चर्चा में


तुम्हारी लीला अनन्त 



रहना ही पडेगा और चारा ही क्या है :)



जो मूँह में गया और गप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प :) 




फिर भी ना बदलती इसकी तस्वीर 


क्या कहा था ? 



और क्या होना था ?




देखते ही बनता है 



जानना जरूरी है 



अंतरिक्ष मे जीवन की संभावना : दो नये पृथ्वी के आकार के ग्रहो की खोज
चलो चलें आसमाँ के पार एक आशियाँ बना लें :)



जानना जरूरी है 



कविता - क्यों नहीं याद
क्योंकि अब उनसे नहीं है कोई सरोकार



प्यार में दर्द है,
क्योंकि दर्द का दूसरा नाम प्यार ही होता है 




यही होना चाहिये अब तो 




टैग लगी लाइन मिली, लिख दिल्ली दिलदार


उसी शाम फिर से दिल्ली हुयी दागदार 







एक शुभ मुहुर्त 





आओ बजावें सब मिल ढोल मृदंग और थाल 




बरसातें कैसे होती हैं 




हार्दिक बधाइयाँ 




इसमें क्या शक है ?




एक पहचान 




औरत तो शुरु से ही अजीब दिखी है 




पहला पडाव तय कर ही लिया 





यह सब जो खो जाना है


वापस फिर नहीं आना है 





इसलिये कि....


कुछ तुम सुन सको कुछ मैं कह सकूँ 




ओ........! सड़कवासी राम! ...


शायद अब यही होना रह गया था 




RAMAYAN2


बाँचिये 




थोड़ा अपना सा,थोड़ा बेगाना सा ..


ये रिश्ता क्या कहलाता है




श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (४९वीं कड़ी)


जहाँ वाणी में कृष्ण झलक जाता है 




मुझे परदे बहुत पसंद हैं - कुँवर रविन्द्र


ताकि दूसरी तरफ़ उसका घर हो 






उम्मीद है आप सभी खबरों और चर्चाओं से रु-ब-रु हो गये होंगे अगले 

हफ़्ते फिर मिलते हैं तब तक के लिये शुभ विदा 

आगे देखिए... "मयंक का कोना"
(1)
face recognition software 
(अपने चेहरे को कम्‍प्‍यूटर का पासवर्ड बनाइये)


क्‍या आप चाहते हैं कि आपका Computer बिना password  डाले केवल आपको पहचाने...
(2)
डोयिचे वेले बनाम सोते की भैंस का पाडा.

(3)
ऐ मेरे नादान दिल

बावरा मन
(4)
रिश्ते .........
नाम -- शशि पुरवार/जन्म तिथि -- २२ जून /जन्म स्थान--- इंदौर ( म. प्र.)/शिक्षा -स्नातक उपाधि ---- ,बी. एस सी ( विज्ञानं )/स्नातकोत्तर उपाधि - एम . ए ( राजनीती शास्त्र )/ हानर्स डिप्लोमा इन कंप्यूटर साफ्टवेयर /भाषा ज्ञान -- हिंदी ,अंग्रेजी , मराठी ./ पारिवारिक परिचय /माता -- श्रीमती मंजुला गुप्ता /-श्री महेश गुप्ता /प्रकाशन - कई समाचार पत्रों और पत्रिकाओ ,अंतर्जाल एवं कई रास्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशन होता रहता है ./लेखन विधाए - कहानी , कविता ,लघुकथा, काव्य की अलग अलग विधाए और लेखों के माध्यम से जीवन के बिभिन्न रंगों को शब्दों में ढालना पसंद है . जीवन भर विद्यार्थी रहना ही पसंद है . लिखने की प्रेरणा मुझे मेरी माँ से मिली है .भावो को और विचारो को शब्दों में ढालना बहुत पसंद है , बचपन से अपने विचारो की अभिव्यक्ति कर रही हूँ .रचनात्मकता और कार्य शीलता ही पहचान है . संपर्क -email - shashipurwar@gmail.com
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रिश्ते तांका -- 
1 दोस्ती के रिश्ते पावन औ पवित्र हीरे मोती से महकते गुलाब जीवन के पथ पर ....
(5)
निर्भया के साथ हुई दरिंदगी से कम नहीं है यह हैवानियत

शनिवार, जनवरी 26, 2013

जीवन जीने की पाठशाला


गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ आज की चर्चा में प्रवेश कीजिये और अपनी पसन्द का आनन्द लीजिये 
वैसे जैसे हालात हैं और जिस माहौल में हम जी रहे हैं
उसमें कोई शुभकामना या कोई पर्व तब तक 
कोई मायने नहीं रखता जब तक हमारे अन्दर
एक ईमानदार जज़्बा ना जागृत हो जाये
अन्याय से लडने का 
ज़ुल्म को मिटाने का
देश को एक स्वस्थ समाज देने का 

एक स्वर होने का आह्वान ... (4)

ये वक्त की आवाज़ है 


मैं लगा देती हूँ निर्वस्त्रता के सम्पुट जब भी

फिर तो जरूर कुछ ना कुछ होगा


कृष्ण की बातों को समझने का एक सुगम माध्यम

जीवन जीने की पाठशाला 



कटुसत्य - २

सत्य तो सत्य है 

यह है एक ऐसी जगह, जहां एक महिला के होते हैं कई पति

आश्चर्य कैसा ………यहाँ सब संभव है


जिंदगी फिर भी चलती जा रही है।

जीवन चलने का नाम जो है 

ये हमसे नहीं होगा...खुशदीप

तो फिर क्या होगा ?


मैं कह नहीं पायी

अब पछताये होत क्या 


खादी के सफ़ेद कुरते में ----------

फ़ितरत नहीं बदला करती 


बेटाडीन मांगता अश्वत्थामा...संध्या शर्मा

फिर भी ना भरा ज़ख्म


स्वामी विवेकानंद -गतांक से आगे - २४/१/'१३

 एक दिव्य ज्योति जो आलोकित कर गयी विश्व को

संवाद

अब कहाँ संभव हो पाता है 


निम्न चित्र में देखें कि क्या कुछ कापी हुआ ?

देखते हैं 

ओ मीत

आ जा इक बार 


सुभाष की खोज मिष्‍टी बनेगी कांची

जानिये इसे भी 


कुछ लोग

कभी नहीं बदलते

'आपत्तिजनक' निर्णय!

बस यही कर सकते हैं 


भारत हमारा

क्या सच में हमारा है?


माँ

नतमस्तक होने के सिवा और क्या कहूँ ?

पश्चिमी दर्शन और भौतिकवाद

कहाँ से कहाँ ले गया 


आओ मिलकर हम मनाएं गणतंत्र का दिन

ये औपचारिकता भी जरूरी है



गणतंत्र …… संध्या शर्मा

क्या सच में



क्या यही है गणतंत्र भारत का ?

पता नहीं


तंत्र ......... जनतंत्र ....... गणतंत्र ....... >>> संजय कुमार

अब तो फ़ैले हैं ना जाने कौन कौन से तंत्र

आश्वासन के घेरे

इसी मे तो घिरा जाता है


जन गण मन अधिनायक गाओ

और शाम को भूल जाओ ……एक दिन का फ़लसफ़ा



"सिसक रहा गणतन्त्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

सत्य वचन



आप सभी का दिन शुभ हो …………अब आज्ञा चाहूँगी उम्मीद है लिंक्स पसन्द आये होंगे……

सोमवार, जुलाई 04, 2011

आज का अंदाज़-ए-बयाँ कैसा लगा ?......... चर्चा मंच

सोमवार की चर्चा में 
आपका स्वागत है 
आपके पेश-ए-खिदमत है 
आज की चर्चा 


मीठी यादें आ गयीं
मन को मेरे लुभा गयीं 
 

जब तक न कोई सवेरा होगा 

आज वादे और इंतजार में ठन गयी
और माशूक की जान पर बन गयी  


आना जाना यहाँ निरंतर
कोई न परमानेंट   
तू भज ले राम नाम अर्जेंट


रोज तस्वीर जिसकी उधडती है
रोज ही नयी तस्वीर फिर बनती है  



 सितारों से आगे जहाँ और भी है


देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान
किसको ठहराएँ दहेज़ का जिम्मेदार 
 


 देने के कायदे हमको आते नहीं
व्यंग्य सन्देश दुनिया को भाते नहीं 


 अरे दीवानों मुझे पहचानो 
ब्लोगिंग की ताकत को ज़रा आजमा लो 


यह नहीं अभिमान मेरा
ये तो है समर्पण भाव मेरा  



हर चीज यहाँ पर बिकती है
खरीदार के हाथों में सजती है 



उड़न गति न रुक पाती है
मन से न कभी जीत पाती है   


 हम यथार्थ कहते रहे
और बहरी दुनिया सुनती रही  


 कब एकांत पाया है
एकांत में भी खुद से न बच पाया है  


यादों की धरोहर बना लिया
ऐसे पिता का जन्मदिन मना लिया  



कहिये दोस्तों 
आज का अंदाज़-ए-बयाँ कैसा लगा ?
पसंद आये तो टिपण्णी दे देना
नहीं आये तो बिना दिए चल देना
हम समझ जायेंगे 
हुजूर आये तो थे 
मगर खातिरदारी पसंद नहीं आई 
तो अगले सोमवार तक 
हमें इंतजार रहेगा 
आपके आगमन का


 

सोमवार, जून 27, 2011

मौसम सुहाना हो गया……………चर्चा मंच


दोस्तों !
सोमवार की चर्चा में स्वागत है 
आज चर्चा लगा रही हूँ और 
मौसम की खुमारी छायी है
अरे मौसम जो खुशगवार हो गया है
आज बारिश ने भिगो दिया है तो सोचा
हम भी आज आपको भिगो दें 
मानसून के आगमन का 
स्वागत हम भी कर लें
कुछ भीगे भीगे लिंक्स मे 
कुछ नये और कुछ पुराने
मगर है सब अपने
वो ही है सच्चा फकीर 

कौन?

कैसा?

ये हुई न बात 

 खुद पढ़िए 

 इसमें क्या शक है

ओये होए क्या बात है इस अंदाज़ के 

 जरूर पढेंगे जी 

 जानिए कैसे 

 अरे वह ये हुई न बात 

क्यों?

 क्या हुआ था ?

जो खुद तो दहकते हैं
दिल भी दहकाते हैं  

मुबारक हो 

जान लो क्या है ये  .......नया है 

स्वागत है जी 

सुन लो अब तो दर्द भरी पुकार 
क्यूँ क्या हुआ क्यों नहीं  

उफ़ ........दर्द ही दर्द  

उफ़ ........ क्या कर गयी
कभी तो बरसेंगे 

 शायद कोई समझ सके 

तो भिगोयेगी जरूर
आप ही बता दीजिये
 जानना जरूरी है 
जरूर पढेंगे 
ये तो मौसम का तकाजा है 
जीने का बहाना सीख लिया



कतरने ख़्वाबों की 
बताओ कैसे सीयूँ 
 सच कहा 
मगर मठ वो ही रहा 
अब आज्ञा दीजिये 
अगले सोमवार फिर मिलेंगे
 बताइये भीगे या नहीं