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चर्चाकारः डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक".. लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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मंगलवार, जून 26, 2018

"मन मत करो उदास" (चर्चा अंक-3013)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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किताबों की दुनिया -183 

नीरज पर नीरज गोस्वामी  
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जो बटोरा है सब खोना है 
इसी एक बात का रोना है 
खेल अलग-अलग चला 
अब अंत एक-सा होना है... 
Shyam Bihari Shyamal - 
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बर्लिन से बब्बू को:  

एक जिद का पूरी होना 

बर्लिन से बब्बू को’ के बारे में मेरी यह बात तनिक लम्बी ही होगी। कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि कृति के मुकाबले उसके निर्माण का ब्यौरा लम्बा हो जाता है। नाक पर नथनी भारी हो जाती है। कोई महत्वपूर्ण उल्लेख छूट न जाए इस भावना के अधीन अधिकाधिक जानकारियाँ, सन्दर्भ और नाम देने का मोह मैं छोड़ नहीं पा रहा हूँ। दादा श्री बालकवि बैरागी, सितम्बर 1976 में तत्कालीन पूर्वी जर्मनी की यात्रा पर गए थे। तब मैं मन्दसौर में, दैनिक ‘दशपुर दर्शन’ का सम्पादन कर रहा था। दादा की यह दूसरी विदेश यात्रा थी... 
एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 
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स्वार्थी 

आज मैंने तुम्हें  
तुम से मिलाने की  
एक और कोशिश करी... 
प्यार पर Rewa tibrewal 
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जिंदगी 


सु-मन (Suman Kapoor) 
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निस्तब्ध... 

पुष्पा परजिया 

निशब्द, निशांत, नीरव, अंधकार की निशा में
कुछ शब्द बनकर मन में आ जाए,
जब हृदय की इस सृष्टि पर 
एक विहंगम दृष्टि कर जाए 
भीगी पलकें लिए नैनों में रैना निकल जाए 
विचार-पुष्प पल्लवित हो 
मन को मगन कर जाए ... 
yashoda Agrawal  
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अंतराल  

Shantanu Sanyal  
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हवा ने दिन को सजा दिया है ... 

ये दाव खुद पे लगा दिया है  
तुम्हारे ख़त को जला दिया है 
तुम्हारी यादों की ईंट चुन कर 
मकान पक्का करा दिया है... 
Digamber Naswa  
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रविवार, अक्टूबर 15, 2017

"मिट्टी के ही दिये जलाना" (चर्चा अंक 2758)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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चर्चा मंच पर प्रतिदिन अद्यतन लिंकों की चर्चा होती है।
आश्चर्य तो तब होता है जब वो लोग भी चर्चा मंच पर 
अपनी उपस्थिति का आभास नहीं कराते है, 
जिनके लिंक हम लोग परिश्रम के साथ मंच पर लगाते हैं।
अतः आज के बाद ऐसे धुरन्धर लोगों के ब्लॉग का लिंक 
चर्चा मंच पर नहीं लगाया जायेगा।
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गीत  

"मिट्टी के ही दिये जलाना"  

मित्रों!
पिछले वर्ष 16 अक्तूबर, 2016 को
निम्न गीत लिखा था,
परन्तु इस गीत की कुछ पंक्तियों में
थोड़ा बदलाव करके
बहुत से लोगों ने इस गीत को
अपने नाम से यू-ट्यूब पर
लगा दिया है।
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खूँटा 

तुमने ही तो कहा था 

कि मुझे खुद को तलाशना होगा 

अपने अन्दर छिपी तमाम अनछुई 
अनगढ़ संभावनाओं को सँवार कर 
स्वयं ही तराशना होगा... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
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दहशत में जीभ 

मेरी जीभ आजकल गुमसुम रहती है,कुछ नहीं बोलती,चुपचाप पड़ी रहती है मेरे मुंह में.
सो गया है उसका अल्हड़पन,फूल नहीं झरते अब उससे,.. 

कविताएँ पर Onkar 
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काश मिलती तुम हमें जिंदगी 

काश मिलती तुम हमें ज़िन्दगी 
प्यार तेरे संग करते ज़िन्दगी ...  
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi - 
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श्याम मधुशाला ---  

डा श्याम गुप्त 

शराव पीने से बड़ी मस्ती सी छाती है , 
सारी दुनिया रंगीन नज़र आती ... 
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