चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Thursday, June 29, 2017

"अनंत का अंत" (चर्चा अंक-2651)

मित्रों!
गुरूवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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हे निराकार ! 

सु-मन (Suman Kapoor) 
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बारिश,बाइक और चाह। 

पूरब में घुमड़ते बादल गहराते जा रहे थे। गंगा का कछार अभी खत्म नही हुआ था कि हल्की हल्की बूंदे तेज बहती हवाओं के साथ मेरे चेहरे पर पड़ने लगीं। बाइक की रफ़्तार तेज थी। तुम्हारे काले बाल खुलकर हवा में लहराने लगे। एक्सीलेटर पर दबाव बढ़ाने के अनुपात में ही मेरी कमर पर तुम्हारी बाहों की कसावट बढती जा रही थी। कछार पीछे छूट गया सामने सागौन के दरख्त सड़क के दोनों तरफ हवाओं में झूमते नजर आए। बाइक सड़क पर फर्राटा भर रही थी। अब तक मैं सिर से लेकर पैर तक भीग चुका था ठंडी हवाएं बदन को छूकर बरफ बनाने पर तुली थीं पर तुम्हारे धडकनों की गर्माहट से उनका मकसद बार बार असफल हो जाता... 
PAWAN VIJAY  
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"प्रवासी पुत्र" एक संक्षिप्त टिप्पणी 

shikha varshney 
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---- || दोहा-एकादश || ----- 

रत्नेस ए देस मेरा होता नहि दातार | 
देता सर्बस आपुना बदले माँगन हार... 
NEET-NEET पर Neetu Singhal  
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हम किसीसे कम नहीं 

Akanksha पर Asha Saxena 
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अंतर्राष्ट्रीय हिंदी ब्लागर दिवस - 2017 

की तैयारियां 

ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया 
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ज़िन्दगी ख़ुद को समझ बैठी है तन्हा कितना 

आदमी कितना हैं हम और खिलौना कितना
सोचना चाहिए गो फिर भी यूँ सोचा कितना... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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मौत को इश्क़... 

जब जहालत गुनाह करती है 
सल्तनत वाह वाह करती है... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
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हमीं से भीड़ बनती है हमीं पड़ जाते हैं तन्हा 

भीड़ जब ताली देती है हमारा दिल उछलता है 
भीड़ जब ग़ाली देती है हमारा दम निकलता है 
हमीं सब बांटते हैं भीड़ को फिर एक करते हैं 
कभी नफ़रत निकलती है कभी मतलब निकलता है... 
Sanjay Grover 
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खेल- खेल मै खेल रहा हूँ 

कितने पौधे हमने पाले नन्ही मेरी क्यारी में 
सुंदर सी फुलवारी में !  
सूखी रूखी धरती मिटटी ढो ढो कर जल लाता हूँ 
सींच सींच कर हरियाली ला खुश मै भी हो जाता हूँ ... 
Surendra shukla" Bhramar"  
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सुकून ... 

digambar_thumb[1]
सुकून अगर मिल सकता 
बाज़ार में तो कितना अच्छा होता ... 
दो किलो ले आता तुम्हारे लिए भी ... 
काश की पेड़ों पे लगा होता सुकून ... 
पत्थर मारते भर लेते जेब ... 
स्वप्न मेरे ...पर Digamber Naswa  
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हे मानव खड़ा क्या सोचा रहा? 

बिना अर्थ के शब्द व्यर्थ व्यर्थ है 
अर्थ बिना काम काम व्यर्थ है... 
pragyan-vigyan पर Dr.J.P.Tiwari 
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अम्मी चल ना बाहर ! देख कितनी सुन्दर, चमकीली, सोने चाँदी के तारों से कढ़ी फराकें ले के आया है फेरी वाला ! मुझे भी दिला दे न एक ! मामू की शादी में मैं भी नई फराक पहनूँगी !’ छ: बरस की करीना की आँखों में हसरत भी थी और चमक भी ! फेरी वाले की छड़ी पर टँगी रंग बिरंगी फ्रॉकें उसकी नज़रों के सामने से हट ही नहीं रही थीं ! बर्तन माँज कर हाथ धोती बानो की पीठ पर वह झूल गयी ! बानो का दिल मसोस उठा... 
Sudhinama पर sadhana vaid 
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ग़ज़ल  

तेरी महफ़िल में दीवाने रहेंगे 

शमा के पास परवाने रहेंगे । 
तेरी महफ़िल में दीवाने रहेंगे ।। 
तुम्हारी शोखियाँ कातिल हुई हैं । 
तुम्हारे खूब अफ़साने रहेंगे ... 
Naveen Mani Tripathi 
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लोहे का घर-27 


बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
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ग़ज़ल? 

मात्रा के गणित का शऊर नहीं, न फ़ुर्सत। 
अगर, बात और लय होना काफ़ी हो, 
तो ग़ज़ल कहिये वर्ना हज़ल या टसल, 
जो भी कहें, स्वीकार्य है। 
(अनुराग शर्मा) ... 
Smart Indian 
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कविता की पहली हार 

आज जो चौकीदारी करता है 
मेरे मोहल्ले में 
वह जो चौक पर लगाता है 
पंक्चर की दूकान... 
सरोकार पर Arun Roy 
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कोई हलन - चलन नहीं है
कोई चिंतन - मनन नहीं है
कोई भाव - गठन नहीं है
कोई शब्द - बंधन नहीं है

स्वरूप है कोई क्रिया - रहित
बिन साधना हुआ है अर्जित
स्वभाव से ही स्वभाव निर्जित
बोध - मात्र से ही है कृतकृत्य... 

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खेल- खेल मै खेल रहा हूँ 
खेल- खेल मै खेल रहा हूँ 
कितने पौधे हमने पाले 
नन्ही मेरी क्यारी में 
सुंदर सी फुलवारी में !
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सूखी रूखी धरती मिटटी 
ढो ढो कर जल लाता हूँ
सींच सींच कर हरियाली ला 
खुश मै भी हो जाता हूँ !... 

BAAL JHAROKHA SATYAM KI DUNIYA 
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10 comments:

  1. शुभ प्रभात....
    सुंदर व पठनीय रचनाओं का चयन
    आभार
    सादर

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  2. सुप्रभात शास्त्री जी ! बहुत ही सुन्दर लिन्क्स से सजी चर्चा ! मेरी कहानी 'नई फ्रॉक' को आज की चर्चा में सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से आभार ! आशा दीदी की ओर से भी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद !

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  3. शास्त्री जी,
    नमस्कार। आशा है पूर्णतया स्वस्थ होंगे

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  4. भूलवश "चर्चा की कड़ी" में कढी हो गया है, जरा देख लीजिएगा

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  5. 'क्रन्तिस्वर ' की पोस्ट शामिल करने हेतु शास्त्री जी को धन्यवाद व् आभार.

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। आभार 'उलूक' के सूत्र का भी जिक्र करने के लिये आदरणीय ।

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  7. हार्दिक आभार ।

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  8. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

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  9. सुन्दर चर्चा सूत्र ...
    आभार मुझे शामिल करने का ...

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