Followers

Tuesday, June 27, 2017

"कोविन्द है...गोविन्द नहीं" (चर्चा अंक-2650)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--
--
--
--
--

ईद मुबारक 

! कौशल ! पर Shalini Kaushik 
--
--
--

संदेश 

"आज के बच्चों के लिये" 

चाँद पे जाना मंगल पे जाना 
दुनिया बचाना बच्चो 
मगर भूल ना जाना... 
कविता मंच पर kuldeep thakur 
--
--

वही घर है, वही माँ हैं, वही बाबूजी 

लोहे के घर में पापा बेटे को सुला रहे हैं 
कंधे पर हिल रहे हैं, हिला रहे हैं 
बेटा ले रहा है मजा खुली आंखों से! 
पापा सोच रहे हैं सो चुका है... 
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
--

अच्छी नींद का कारोबार 

कौन कितना दौलतमंद है, ताकतमंद है, 
इसे जानने के लिए 
उसकी नींद पर गौर करें... 
कल्पतरु पर Vivek 
--

जनाज़े पर किसी के जाके मुस्काया नहीं करते 

ज़रर हर मर्तबा वालों को बतलाया नहीं करते 
फ़लक़ छू लें भले ही ताड़ पर छाया नहीं करते... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
--

हेमलासत्ता 

(भाग-2) 

नाई की बात सुनकर खेतासर के लोग बोले- हेमला से हम हार गए, वह तो एक के बाद एक को मारे जा रहा है, बड़े गांव में भी हम लोगों को चैन से नहीं रहने दे रहा है। हम कुछ नहीं कर सकते। अब तो बड़े शहर जाकर वहाँ से मियां मौलवी को लाना होगा। सुना है वहां एक खलीफा जी बड़े सिद्धहस्त हैं, उनके आगे हाथ जोड़कर जो बेऔलाद औरतें भेंट चढ़ाती हैं उन्हें वह गंडे-ताबीज देते हैं, जिससे उनकी गोद भर जाती हैं। जिन्न, डाकिनी और देव सब उनसे डरते हैं, भूत, मसान, खबीस सभी उनसे कांपा करते हैं। उनके पास जाकर खेतासर के लोगों ने नगद भेंट निकालकर हाल सुनाया तो वे बोले- “मैं आप लोगों से पहले भेंट हरगिज नहीं लूँगा, पहले चलकर वहाँ उस भूत को दफन करके आऊँगा, उसके बाद ही भेंट स्वीकार करूँंगा।“  यह सुनकर सभी खुश होकर बोले- जैसी आपकी मर्जी, अब हमारी यही अर्जी है कि आप हमारे साथ चलें। विनती कर वे लोग उसे गांव लाये और उसकी खूब खातिरदारी की, जिसे देख खुश होकर खलीफा बोला- ’सुनो सब, सत्ता से डरने की कोई बात नहीं अब समझो वह भसम हो कर रहेगा.... 
--

योगा के योगी 

सुबह उठते ही नाक लंबी लंबी साँसे लेने को व्याकुल हो उठती है ,जीभ फडफडाकर सिंहासन करने को उग्र हो जाती है, गला दहाड़ कर शेर से टक्कर को उद्दत होने लगता है , बाकी शरीर मरता क्या न करता वाली हालत में शवासन से जाग्रत होने पर मजबूर हो जाता है बेचारा, योग की आदत के चलते ... योग का मतलब प्राणायाम युक्त शारीरिक व्यायाम ज्यादा अच्छा है समझने को , अब समझें प्राणों का आयाम ...  
अर्चना चावजी Archana Chaoji  
--
--

विश्व योग दिवस के मुकाबले 

विश्व अखाड़ा व जिम दिवस 

देश गढ्ढे में था और उसी गढ्ढे के भीतर गुलाटी मार मार कर योगा किया करता था. सन २०१४ में एक फकीर अवतरित हुआ जिसकी वजह से देश गढ्ढे से आजाद हुआ और निकल कर विकास के राज मार्ग पर आ गया. जब देश राज मार्ग पर आ गया तो गुलाटीबाज योगा को भी राज गद्दी मिल गई. सारी दुनिया ने इसे एकाएक पहचान लिया और यू एन ओ ने विश्व योगा दिवस की घोषणा करके भारत को विश्व गुरु घोषित कर दिया... 
--
--
--
--
दलितों को जिंदगी जीना है मजबूरी, 
समाज उनके लिए क्या कर रही 
यह बात पता नहीं किसी को पूरी ... 
--
--

किताबों की दुनिया -131 

नीरज पर नीरज गोस्वामी 
--

वफ़ा के सताए... 

ईद में मुंह छुपाए फिरते हैं 
ग़म गले से लगाए फिरते हैं 
दुश्मनों के हिजाब के सदक़े 
रोज़ नज़रें चुराए फिरते हैं... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
--

किस्मत की धनी 

vandana gupta 
--

ज़रा सी शायरी कर ले !! 

नए किरदार गढ़ने के नशे में 
मैं बेकिरदार होकर रह गया हूँ... 
तिश्नगी पर आशीष नैथाऩी 

8 comments:

  1. शुभ प्रभात....
    सुंदर पठनीय लिंकों का चयन
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति में मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    ReplyDelete
  3. SUNDAR LINKS SUNDAR CHARCHA................BADHAI

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/

    ReplyDelete
  4. चर्चा में काफी अच्छे पठनीय लिंक मिलें साथ ही समयचक्र की पोस्ट को चर्चा में शामिल करने के धन्यवाद आभार

    ReplyDelete
  5. हार्दिक धन्यवाद।

    ReplyDelete
  6. sundar charcha, mere blog "....mere man kee" ko sthan dene ke liye shukriya

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

जानवर पैदा कर ; चर्चामंच 2815

गीत  "वो निष्ठुर उपवन देखे हैं"  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')     उच्चारण किताबों की दुनिया -15...