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Tuesday, May 09, 2017

संघर्ष सपनों का ... या जिंदगी का; चर्चामंच 2629


दोहे - 

रविकर 
फूँक मारके दर्द का, मैया करे इलाज।
वह तो बच्चों के लिए, वैद्यों की सरताज।

चक्षु-तराजू तौल के, भार बिना पासंग।
हल्कापन इन्सान का, देख देख हो दंग।।

भली करेंगे राम 

रविकर 
झाड़ी में हिरणी घुसी, प्रसव काल नजदीक।
इधर शिकारी ताड़ता, उधर शेर की छींक।
उधर शेर की छींक, गरजते बादल छाये।
जंगल जले सुदूर, देख हिरणी घबराये।
चूक जाय बंदूक, शेर को मौत पछाड़ी। 
मेह बुझाए आग, सुने किलकारी झाड़ी।।

संघर्ष सपनों का ... 

या जिंदगी का 

पहली सांस का संघर्ष 
शायद जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है ...  
हालांकि उसके बाद भी जीवन का हर पल 
किसी सग्राम से कम नहीं ... 
साँसों की गिनती से 
नहीं ख़त्म होती उम्र ...  
Digamber Naswa 

सिद्धेश्वर सिंह की कविताएँ 

उतराखंड के खटीमा में सिद्धेश्वर सिंह ने कविता की रौशनी बरकरार रखी है. दो संग्रह प्रकाशित हैं, वे विदेशी कविताओं का हिन्दी में लगातार अनुवाद कर रहे हैं. उनकी कविताएँ सुगढ़ हैं और बहुस्तरीय भी. इधर की उनकी कविताओं में परम्परा से संवाद के तमाम सुंदर फूल खिले हैं. उनकी सुगंध दूर से ही आती है. *सिद्धेश्वर सिंह की कविताएँ ... 
समालोचन पर arun dev  

कुछ ऐसा लिखूँ 

मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा...  

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Untitled 

Dr.Aditya Kumar 

जीना सिखा दे 

anamika ghatak 

ठूँठ होना... 

ओम नागर 

yashoda Agrawal 

परम्परा पर Vineet Mishra 
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ग़ज़ल 

कालीपद "प्रसाद" 

बिकाऊ 

वह जो बाज़ार में नहीं है, 
यह मत समझना कि बिकाऊ नहीं है. 
ग़लतफ़हमी में है वह, 
ग़लतफ़हमी में हैं सभी 
कि उसे ख़रीदना नामुमकिन है.... 
कविताएँ पर Onkar 

कुमाउँनी चेली पर शेफाली पाण्डे 
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पाकिस्तान से रिश्ता क्या ...  

ला इलाही इल्लिल्लाह। 

PAWAN VIJAY 

सैनेटाइजर का प्रयोग ना हीं करें तो बेहतर है 

गगन शर्मा, कुछ अलग सा 

नयन में उमड़ा जलद है 

Dr Varsha Singh 

दोहे  

"लोकतन्त्र बीमार"  

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

स्वच्छता की ओर बढ़ते कदम 

Lokendra Singh 

कुण्डलियाँ  

"आज शाखाएँ बहकी"  

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

8 comments:

  1. शुभ प्रभात.....
    अच्छी प्रस्तुति
    आभार..
    सादर

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  2. बढ़िया लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय रविकर जी।

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  3. आदरणीय शास्त्री जी, मेरी रचना "मातृ-दिवस पर 15 अनमोल वचन" को "संघर्ष सपनों का ... या जिंदगी का; चर्चामंच 2629" शामील करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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  4. बहुत सुन्दर लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा।

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  6. बहुत बहुत आभार रविकर जी!

    ReplyDelete

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"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

मित्रों! शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...