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को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Saturday, March 07, 2015

"भेद-भाव को मेटता होली का त्यौहार" { चर्चा अंक-1910 }

मित्रों।
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
होली तो होली।
देखें आपने अपने ब्लॉगों पर 
होली पर क्या पोस्ट किया है?
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"दोहे्-भेद-भाव को मेटता 

होली का त्यौहार"

फागुन में नीके लगें, छींटे औ' बौछार।
सुन्दर, सुखद-ललाम है, होली का त्यौहार।।

शीत विदा होने लगा, चली बसन्त बयार।
प्यार बाँटने आ गया, होली का त्यौहार।।
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होली आई 

Fulbagiya पर डा0 हेमंत कुमार
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प्रेमी वसंत 

1. 
कोंपले मुस्कुराती कलियाँ आया वसंत 
2. 
दिशा दिगंत सुरभित सुमन फैली सुगंध 
3.. .
शीराज़ा पर हिमकर श्याम 
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घर पहुँचने की खुशी 

बयां नहीं की जा सकती है 

 हम जीवन मे संघर्ष करते हैं, अपने लिये और अपने परिवार के लिये । सब खुश रहें, सब जीवन के आनंद साथ लें । जब हम संघर्ष करते हैं तब और जब हम संघर्ष कर किसी मुकाम पर पहुँच जाते हैं तब भी घर जाने का अहसास ही तन और मन में स्फूर्ती भर देता है। घर जाने का मतलब कि हम हमारी कामकाजी थकान से रिलेक्स हो जाते हैं और अपने लिये नई ऊर्जा का संचार करते हैं। घर पर अपने परिवार से मिलने की खुशी हमेशा ही रहती है।...
Vivek Rastogi 

“फागुन सबके मन भाया है” 

होली आई, होली आई,
गुजिया, मठरी, बरफी लाई

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मीठे-मीठे शक्करपारे,
सजे -धजे पापड़ हैं सारे,
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रंग दो अपने प्यार के रंगो से... 

होली का रंग बिखरा है चारो ओर
आज कुछ ऐसी बात करो
रंग दो अपने प्यार के रंगो से
उन्ही रंगो से मेरा सिंगार करो.. 
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कोई और रंग 

Love पर Rewa tibrewal 
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क्योंकि रंग 

इंसान नहीं होते 

हर ओर उड़ते बिखरते 
बहकते चहकते महकते 
गीले और सूखे रंग 
रंगभेद जात धर्म अमीर 
और गरीब से परे सबके चेहरों पर 
सजे हुए हैं एक भाव से 
विविधता में एकता का भाव लिए 
क्योंकि रंग इन्सानों की 
तरह भेदभाव नहीं करते.. 
Yashwant Yash 
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पुरानी होली 

पिछले साल होली में 
तुमने जो रंग डाला था, 
वह अभी तक नहीं छूटा, 
बल्कि और गहरा गया है. 
तुम्हारी पिचकारी में क्या जादू था 
कि मैं आज तक भीगा हुआ हूँ... 
कविताएँ पर Onkar 
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होली से पहले 

ज़रा सा  मुस्करा  देना होली  मनाने  से पहले  
हर गम को जला  देना होली  जलाने से पहले   
मत  सोचना  किसने दिल दुखाया है अब तक,  
सबको  माफ़  कर  देना  रंग  लगाने  से पहले..
धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 
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"पूज्य पिता जी ! 

हमारी होली सूनी है" 

पूज्य पिता जी !

   आपके बिन मेरी होली सूनी है। आपकी बहुत याद आ रही है पिता जी। आज पहली ऐसी होली है जो हम लोग आपके बिना मना रहे हैं। घर सूना है आँगन सूना है। बार बार उस कमरे को देख रहा हूँ जिसमें आपका चित्र लगा है। इस खुशी के त्यौहार पर भी बार-बार आँखों में आँसू आ रहे हैं...  

11 comments:

  1. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स

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  2. सभी चिट्ठाकारों को होली और भाईदूज की हार्दिक शुभकामनायें

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  3. सुंदर शनिवारीय होली चर्चा । आभार शास्त्री जी 'उलूक' के सूत्र 'होली की हार्दिक शुभकामनाऐं....' को स्थान दिया ।

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  4. सुन्दर लिंक्स. मेरी कविता को शामिल करने के लिए आभार

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  5. बहुत बढ़िया होली लिंक्स प्रस्तुति
    सभी को रंगोत्सव की बहुत बहुत मंगलकामनाएं!

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  6. होली के रंग पर पर बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  7. सुन्दर लिंक्स. मेरी कविता को शामिल करने के लिए आभार

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर, सतरंगी चर्चा...रंग बिखेरते लिंक्स..मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार...रंग पर्व की शुभकामनाएँ!!

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  9. बहुत बहुत धन्यवाद सर!
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

    सादर

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  10. धन्यवाद ! मयंक जी ! मेरी रचना ''नवगीत (29) उसके साथ खेलकर होली... '' शामिल करने का । सभी पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ !

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  11. बहुत -बहुत आभार ............सुन्दर चर्चा!

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