साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Tuesday, March 31, 2015

"क्या औचित्य है ऐसे सम्मानों का ?" {चर्चा अंक-1934}

मित्रों!
कल आदरणीया अनुषा जैन ने 
बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा की थी।
आज देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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"गीत-देवभूमि अपना भारत" 
जब बसन्त का मौसम आता,
गीत प्रणय के गाता उपवन।
मधुमक्खी-तितली-भँवरे भी,
खुश हो करके करते गुंजन।।

पेड़ और पौधें भी फिर से,
नवपल्लव पा जाते हैं,
रंग-बिरंगे सुमन चमन में,
हर्षित हो मुस्काते हैं,
नयी फसल से भर जाते हैं,
गाँवों में सबके आँगन।
मधुमक्खी-तितली-भँवरे भी,
खुश हो करके करते गुंजन।।... 
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जाते -जाते  वो मुझे इक ऐसी कहानी दे गया 
के खुशबू अपनी रंग अपना जाफरानी दे गया 

चंद लम्हों को सजा कर लिख दिया ऐसी किताब 
ले   सफे  से  हाशिए  तक  रंग  धानी दे गया ... 
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जिसके कर कमलों से ये घर स्वर्ग सा बना 

जिसके कर कमलों से यह घर, स्वर्ग सा बना। 
 उस माँ की हम, निस दिन मन से, करें वंदना। 
जिसके दम से, हैं जीवन में, सदा उजाले, 
उसके जीवन, में उजास की, रहे कामना... 
गज़ल संध्यापरकल्पना रामानी 
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रह जाती ख्वाहिशें आधी अधूरी 

जी रहे हम सब यहाँ 
कतरा कतरा ज़िंदगी 
न जाने क्यों हमारी 
रह जाती ख्वाहिशें आधी अधूरी... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
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प्यार : 

कुछ मुक्तक - 10 

धनवानों के लिए प्यार है 
ताज - सरीखी एक इमारत , 
पढ़े - लिखों के लिए प्यार 
ढाई अक्षर की एक इबारत ; 
किन्तु प्यार क्या है... 
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हम सब हैं किताब 

हम सब हैं किताब , पढ़ने वाला न मिला 
या खुदा ऐसा भी कोई ,चाहने वाला न मिला 

हाथ में हाथ लिये चलते रहे हम यूँ ही 
दूर तक कोई भी साथ निभाने वाला न मिला... 
गीत-ग़ज़लपरशारदा अरोरा 
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बाहर के दायरों से घर तक 

घर की दुनिया कितनी अपनी सी है। घर का कोना-कोना आपका होता है, दीवारें लगता है जैसे आपको बाहों में लेने के लिए आतुर हों। इस अपने घर में पूर्ण स्‍वतंत्र हैं, चाहे नाचिए, चाहे गाइए या फिर धमाचौकड़ी मचाइए, सब कुछ आपका है। बाहर की दुनिया में ऐसा सम्‍भव नहीं है। इस पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर... 
smt. Ajit Gupta 
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6 comments:

  1. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स आज की |

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  2. सुंदर सूत्र सुंदर संयोजन ।

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  3. सुन्दर लिंक! पढ़वाने लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय!

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  4. बहुत ही सुंदर लिंक पढ़ने को मिले आज कि चर्चा में।
    धन्यवाद सर जी।

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  5. धन्यवाद ! मयंक जी ! मेरी रचना ''मुक्त-मुक्तक : 686 और नहीं कुछ प्राण था वो ''को शामिल करने का ।

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  6. सुंदर संयोजन ...सुंदर लिंक पढ़ने को मिले आज ..

    ReplyDelete

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(चर्चा अंक-2853)

मित्रों! मेरा स्वास्थ्य आजकल खराब है इसलिए अपनी सुविधानुसार ही  यदा कदा लिंक लगाऊँगा। शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  ...