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Wednesday, March 25, 2015

"ज्ञान हारा प्रेम से " (चर्चा - 1928)

मित्रों।
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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था राज्य कंस का
बेबस थे नर नार
त्राहि त्राही मची हुई थी
नगरिया मथुरा थी बेहाल |
कान्हां गए वहां
माता पिता को छुड़वाने
 कारागार से मुक्त कराने
बदला कंस से लेने... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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आज की कविता और हाइकु 

 बातों ही बातों में
आज की कविता और हाइकु

रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
       आज कविता की दुर्गति बहुत अधिक है।क्यों हैयह विचारणीय प्रश्न है। और विधाओं की तुलना में कविता अधिक लिखी जा रही है।जब अधिक लिखा जाएगा ,तो उसमें सब स्तरीय हो , ग्राह्य हो , यह ज़रूरी नहीं।साहित्य में ऐसी कोई प्रशासनिक शक्ति भी किसी के हाथ में नहीं हो सकती कि क्या लिखा जा , किस शैली में लिखा जाए और कौन लिखे ... 
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वह छिपकली की पूंछ थी....! 

घंटी की आवाज़ सुन कर शिखा गैस बंद कर के दरवाज़े की ओर लपकी। कोरियर वाला था। अंदर पहुंचे , उससे पहले ही माँ की तकलीफ भरी आवाज़ सुन कर चौंक पड़ी। माँ की आवाज़ ऐसी थी जैसे उनके साथ बहुत छल किया जा रहा हो। बेचारगी वाले भाव , भरी आँखे जरा सी सिकोड़ कर कुछ गला भी भर्रा गया जैसे... 
नयी दुनिया+ पर Upasna Siag 
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केलोग्स वाले गुप्ताजी का नाश्ता 

दीपो भक्षयते ध्वान्तं कज्जलं च प्रसूयते | 
यदन्नं भक्षयेन्नित्यं जायते तादृशी प्रजा || 
जैसे दीप का उजाला अँधेरे को खा जाता है, 
और काजल को उत्पन्न करता है, 
वैसे ही जिस तरह का भोजन हम ग्रहण करते हैं, वैसे ही हम उसी तरह का व्यवहार करते हैं। 
उपरोक्त श्लोक आज भी पुरातनकाल की बात को सत्य साबित करता है... 
Vivek Rastogi 
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मन की बात... 

भाग ३ 

मन की बात प्रतिरोध नहीं है ये मेरा उसके प्रति न ही कोई व्यंग्य बस हो जाता है आम आदमी अचंभित और सोच के कबूतर कुलबुलाने लगते हैं आखिर कैसी मन की बात और किसके? कहीं उपहास तो नहीं है ?... 
vandana gupta 
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क्यूँ ना मैं पादप बन जाऊँ 

अंदाज़े ग़ाफ़िल
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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पहले और बाद 

*उम्र शुरू होने के ठीक पहले* 
*और उम्र ढल जाने के ठीक बाद* 
*होती हैं बहुत सारी बातें 
अनगिनत आँकी जाने वाली अटकलें 
रख लिया जाता वजूद कसौटी पर 
दम तोड़ जाते हैं कुछ रिश्ते 
और चेहरा देता है गवाही 
वक़्त के कटहरे में खड़े होकर ।* .... 
सु-मन (Suman Kapoor) 
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कमल ! 

 डॉ ज्योत्स्ना शर्मा 
नील कमल ! 
शांत झील ने गाई 
मीठी ग़ज़ल... 
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प्यार : 

कुछ मुक्तक - 5 

'' प्यार में जब मिलन होता है , 
कुछ नया तब सृजन होता है ; 
आदमी देवता बनता है तब -  
प्यार जब श्रद्धा - कन सँजोता है । ''... 
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कुछ अच्छा सा कर जाएँ हम 

कुछ अच्छा सा कर जाएँ हम

रोज़ शिकायत इनकी-उनकी
अस्त-व्यस्त से जन-जीवन की
देख पराये काले धन की
पीड़ा सहलाते निज मन की
इन सब से बाहर आएँ हम
कुछ अच्छा सा कर जाएँ हम।1।...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 
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मन्त्र शक्ति 

चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मनुष्य योनि इसलिए है क्योंकि इसी योनि में प्राणी अपने सामर्थ्य का सर्वाधिक और सर्वोत्तम उपयोग कर सकता है।इतिहास साक्षी है इसका कि साधारण देह धारियों ने अपनी बुद्धि से कितने और कैसे कैसे असाधारण कृत्य कर डालें हैं। लेकिन सत्य यह भी है कि बहुसंख्यक लोग ऐसे ही हैं, जो पूरे जीवन में प्रकृति प्रदत्त क्षमताओं का साधारण और सामान्य उपयोग भी नहीं कर पाते। और शरीर के साथ ही उनकी क्षमताएँ भी माटी में मिल जाती है... 
संवेदना संसार पर रंजना 
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चन्दरु की दुनिया - 

तीसरी किश्त 

गतांक से आगे 


इस पोस्ट को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ! 
सांवली पारो को उसे परेशान करने में बड़ा मजा आता था। कानों में चांदी  के बाले झुलाती , पाँव में छोटी सी पाजेब खनकाती , वो अपनी सहेलियों के साथ उसके ठेले के गिर्द हो जाती तो चन्दरु समझ जाता कि अब उसकी शामत आई है। दही बड़े की पत्तल तकरीबन चाट कर वो ज़रा सा दही बड़ा उस पर लगा रहने देती और फिर उसे दिखा कर कहती - अबे गूंगे , तू बहरा भी है क्या ? मैंने दही बड़े नहीं मांगे थे , दही पटाकरी मांगी थी। अब उसके पैसे कौन देगा ? तेरा बाप ? वो उस बड़े की पत्तल उसे दिखा कर बड़ी हिकारत से जमीन पर फैंक देती...

6 comments:

  1. सुप्रभात
    उम्दा लिंक्स
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  2. बढ़िया लिंक्स-सह-चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

    ReplyDelete
  3. बढ़िया लिंक्स-सह-चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार आपका !

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  4. बढ़िया जानकारी धन्यवाद
    www.gyankablog.blogspot.com
    थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालोंका आभारी रहूँगा।

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  5. प्रणाम गुरुदेव
    शुक्रिया आप हर बार मेरी पोस्ट डालते हैं ..और मैं भागते भागते आ ही नहीं पाती

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  6. आपने पोस्ट को चर्चा का विषय बनाया उसके लिए आपका आभारी हूँ . अगर यह पोस्ट अच्छा हो सका है तो इसमें गौरैया की ही महानता है वर्ना इस अल्पबुद्धि प्राणी में वह बात कहाँ....
    अजय कुमार त्रिपाठी

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