साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

Followers

Monday, June 22, 2015

"पितृ-दिवस पर पिता को नमन" {चर्चा - 2014}

मित्रों।
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
--

पिता के लिए एक दिन ....

(father's Day par ) 

दुनिया के हर पिता को समर्पित 

एक पिता के काँधे पर होता है 
भार अपनी सृष्टि का , 
जैसे छत को संभाले रखती हैं दीवारें , 
अपनी मजबूत पकड़ के साथ | 
पूर्ण रूप से निबाहता है 
अपनी जिम्मेवारियों को... 
चांदनी रात पर रजनी मल्होत्रा नैय्यर 
--

दोहे 

"पितृ-दिवस" 

पूज्य पिता जी आपका
वन्दन शत्-शत् बार।
बिना आपके है नहीं
जीवन का आधार...
--
--
--
--
--

लोहे के घर से........ 

बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
--

रोशनी तुमसे पिता 

घर चमन में झिलमिलाती, रोशनी तुमसे पिता 
ज़िंदगी में हमने पाई, हर खुशी तुमसे पिता... 
गज़ल संध्या पर कल्पना रामानी 
--
--

पिता महान 

[पितृ दिवस पर]  
1. पिता का साया 
तरुवर की छाया 
पिता सुरक्षा 
2. ऊँगली थामे 
कठिन डगर पे 
राह दिखाये 
3... 
शीराज़ा [Shiraza] पर हिमकर श्याम 
--
--
--

आँखों की भाषा 

कितने स्वप्न सँजों रखे हैं, 
कब से सोयी है अभिलाषा, 
चुपके चुपके कह जाती है, 
आँखों से आँखों की भाषा । १... 
न दैन्यं न पलायनम् पर प्रवीण पाण्डेय 
--
--

मैं हूँ ना मेरे बच्चो 

चैतन्य को सँभालते पापा 
*पिता * 
*बुहारते हैं पथ * 
*कि कोई काँटा* 
* ना* * चुभे * 
*बच्चों **के** पाँव में... 
परिसंवाद पर Dr. Monika S Sharma 
--
--

हैप्पी फादर्स डे --- 

भूल मत जाना उसको जो जन्मदाता है।
खुद एक कोट में जीवन काटे ,
पर बच्चों को ब्रांडेड कपड़े दिलवाता है।
खुद झेले डी टी सी के झटके ,
पर आपको नैनो के सपने दिखलाता है। 
चलना सीखा जिसकी उंगली की जकड़ में ,
अब पकड़ कर हाथ सहारा देना ,
भूल मत जाना उसको जीवन के पतझड़ में। 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
--
--

वर्षा का आनंद 

जल बरसा हरियाली छाई के लिए चित्र परिणाम
छाई घनघोर घटा  आज 
बादलों ने की गर्जन तर्जन 
किया स्वागत वर्षा  ऋतु का 
नन्हीं जल की बूंदों से |
धरती ने समेटा बाहों में 
उन नन्हें जल कणों को 
आशीष दिया भरपूर उन्हें 
सूखी दरारें मन की भरने पर... 
Akanksha पर Asha Saxena 
--
--

आज छोटे पुत्र विनीत का जन्मदिन है,
इस अवसर पर मेरे कुछ उद्गार...
खाओ आज मिठाई जमकर,
जन्मदिवस है आज तुम्हारा।
महके-चहके जीवन बगिया,
आलोकित हो जीवन सारा।।

No comments:

Post a Comment

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"साँसों पर विश्वास न करना" (चर्चा अंक-2855)

मित्रों! मेरा स्वास्थ्य आजकल खराब है इसलिए अपनी सुविधानुसार ही  यदा कदा लिंक लगाऊँगा। रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  द...