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Wednesday, June 03, 2015

तोते को अब तो दूसरा वाक्य सिखाओ; चर्चा मंच 1995




विजय राज बली माथुर 




Harash Mahajan 




Ravishankar Shrivastava 




Shalini Kaushik 




Tushar Rastogi




RAJEEV KULSHRESTHA 




lokendra singh 


वो कभी नहीं थकता था 

जो आज टूट गया है 
अपना साया ही ज़िस्म का खून चूस गया है 
जिसने गीले में सोकर सूखा हमें दिया बिस्तरा 
पाला हमें अभाव में भी मुस्कुरा के 
इस तरह ज़रा सा रो भी दें 
तो घंटो जो मनाया करते थे... 
Lekhika 'Pari M Shlok' 

दोहे "भाँति-भाँति के आम"

तोतापरी-बनारसीदेशी-क़लमी आम।
भाँति-भाँति के आम हैंभाँति-भाँति के नाम।।
उच्चारण पर रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

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