फ़ॉलोअर



यह ब्लॉग खोजें

शुक्रवार, जून 05, 2015

"भटकते शब्द-ख्वाहिश अपने दिल की" (चर्चा अंक-1997)

मित्रों।
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक
--

भटकते शब्द 

Kailash Sharma 
--
--
--
--
--
आपका ब्लॉग से कुछ लिंक
आपका ब्लॉग
--

कौन रोकता है सच बोलने से ? 

कांग्रेस प्रवक्ता आनंद  शर्मा की ये पेशकश कि अपने विदेशी दौरों में मोदी जहां जहां जाएँ उनके साथ काॅन्ग्रेसी प्रवक्ता भी साथ साथ जाए दिलचस्प है। इस  काम के लिए उनसे उपयुक्त और भरोसेमंद व्यक्ति सोनियावी हुश हुश कांग्रेस को और कौन मिल सकता है। शौक से जाएँ और एनआरआईज़ जो अब विदेशों में स्वाभिमान के साथ चलने लगें हैं ये  बतलाएं... 
Virendra Kumar Sharma 
-- 
जितेन्द्र तायल
--
--

ब्लैकमेल और हम 

छोटे थे तो फ़िल्मों से पता चलता था कि ब्लैकमेल नाम की भी एक क्रिया होती है और बहुत ही घिनौने लोग इसे अंजाम देते हैं। बड़े होते-होते, समझ आते-आते समझ में आया कि इस महानता में तो जगह-जगह, तरह-तरह से लोग हाथ बंटा रहे हैं। ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ के मुहावरे से तो आज बहुत-से लोग परिचित हैं... 
संवादघर पर Sanjay Grover 
--

ये कैसा संन्यास ? 

करोड़ों की संपत्ति छोड़ रघुनाथ दोषी भिक्षु बने अर्थात उन्होंने सन्यास ग्रहण कर लिया और यहीं से एक प्रश्न ने दिमाग में हल्ला मचा दिया जब देखा कि १०० करोड़ की लागत से तो पंडाल बनाया गया जहाँ भिक्षु बनने का आयोजन संपन्न हुआ . प्रश्न उठता है जब आपने सन्यास लेने का मन बना ही लिया तो माया से भी दूर हो गए और यदि माया से दूर हो गए तो ये दिखावा क्यों ? क्या संन्यास लेना दिखावा है ... 
vandana gupta 
--

उर्जाधानी 

तेरी अजब गजब कहानी ... 

अंधेर नगरी में एक उर्जाधानी है और वहां के प्रबंधक बिना पाना पिंचस के ज्ञान प्राप्त साहब हैं और उनके दूत कंपनियों को संभाले हुए हैं और इन्होंने पाना पिंचस वाला ज्ञान प्राप्त किया हुआ है... 
समयचक्र पर mahendra mishra 
--

मन के साथ चलता हूँ ... 

बस यूं ही मन के साथ चलता हूँ 
कहता हूँ कुछ बाहर की 
कुछ भीतर की 
यहाँ वहाँ की देख कर-सुनकर 
खुद से चुगली करता हूँ... 
जो मेरा मन कहे पर Yashwant Yash 
--

गुमशुदा नदी - - 

अग्निशिखा : पर SHANTANU SANYAL 
* शांतनु सान्याल * শান্তনু সান্যাল 
--
--
--
--

स्नेह की छाँव...! 

अनुशील पर अनुपमा पाठक 
--

हमे तो साथ तेरा ही 

हमेशा से गवारा है 

हमीं मरते रहे तुम पर 
किया हमसे किनारा है 
चले आओ यहाँ तुम को 
सजन हमने पुकारा है... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
--
--
--

आज ...मैं क्या कहूँ ?

Mera avyaktaपर 
राम किशोर उपाध्याय 
--
--

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।