साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

Followers

Thursday, April 14, 2016

बैसाखी से रौनक ( चर्चा - 2312 )

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है 
सभी ब्लॉगर दोस्तों को बैसाखी की हार्दिक शुभकामनाएं | बैसाखी का दिन भारतीय इतिहास में बेहद महत्त्वपूर्ण है | मुगलों के आतंक का विरोध करने लिए इसी दिन खालसा की स्थापना हुई तो इसी दिन जलियांवाला बाग़ हत्याकांड हुआ, जिसके बाद देश अंग्रेजी साम्राज्य  के विरुद्ध उठ खड़ा हुआ | 14 अप्रैल का दिन भी काफी महत्त्वपूर्ण है | इस दिन संविधान निर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉ. भीमराव आम्बेदकर जी ( वैसे तो उन्हें संविधान निर्माता भी कहा जाता है, लेकिन संविधान किसी एक व्यक्ति की देन नहीं, यह एक सामूहिक प्रयास था और भीमराव जी सिर्फ प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे ) का जन्म हुआ था, हालांकि देश में आजकल युग पुरुषों पर कब्जा जमाने का रिवाज हो गया है | भगतसिंह पर पंजाब का, सरदार पटेल पर संघ का और आम्बेदकर पर दलित समुदाय का, लेकिन अगर ये महापुरुष इतनी संकुचित सोच वाले होते तो ये इतने महान नहीं हो सकते थे | 
मेरा फोटो
My Photo
धन्यवाद 

No comments:

Post a Comment

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"सारे भोंपू बेंच दे, यदि यह हिंदुस्तान" (चर्चामंच 2850)

बालकविता   "मुझे मिली है सुन्दर काया"   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   उच्चारण     अलाव ...