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Wednesday, March 17, 2010

“मुक्ताकाश...की प्रथम और अद्यतन पोस्ट” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-91
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-
मुक्ताकाश....” वाले श्री आनन्द वर्धन ओझा की प्रथम और अद्यतन पोस्ट के साथ! 
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आनन्द वर्द्धन ओझा

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चल पडा हूं और चलना है मुझे राह लम्बी है, न रुकना है मुझे.

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मुक्ताकाश....

यह है इनकी
प्रथम पोस्ट

बुधवार, २० मई २००९

कैसे गीत.....

अक्षर-अक्षर व्यथित हो गए
शब्द-शब्द मुरझाये
कैसे गीत लिखूँ मधुऋतु के
भावपुष्प कुम्हलाये ।
सपनों से देहरी सजा दी,

आशाओं से आँगन
इच्छाओं की सूखी डाली,
रुखा-सूखा सावन मरुथल
की यह कठिन तपस्या
देख नयन भर आये। कैसे गीत......
ठौर ठिकाने जितने भी थे,
उन पर काली छाया
शोर समाहित हुआ शहर भी,
लुटी-पिटी यह काया।
सड़क-सडक वीरान हो गयी
चौराहे घबराये ! कैसे गीत.....
भेद-विभेद बढाते आये
जन-प्रतिनिधि विषधर से
बूंद-बूंद अलगाव मांगती
आज मूक निर्झर से!
टहनी-टहनी ठूंठ हो गई
पत्ते सब मुरझाये! कैसे गीत...
गांव-गांव में आग लगी है
धुंआ उठा शहरों से
खंड-खंड हो गया नेह भी
सागर का लहरों से
धागे-धागे उलझे, चादर
झीनी होती जाये।
कैसे गीत लिखूं मधुॠतु के
भावपुष्प कुम्हलाये।

मुक्ताकाश....

 

 

 

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और यह है इनकी
अद्यतन पोस्ट

मंगलवार, १६ मार्च २०१०

दुविधा की देहरी से...

[सच, वह सच कहता है !]

साम्प्रदायिकता की बोतलों में
संकीर्णता का लेबल चिपका कर
कुंठाओं के कार्क लगा
तुम मुझे भी उसमें
बंद कर देना चाहते हो :
मेरे लिए तो बड़ी मुश्किल है,
भई , बड़ा द्वंद्व है !
प्रातः-प्रकाश
सांस लेने की
देता है अनुमति
और कलमुहीं रात
हाथ में कला हंसिया ले
मेरी ह्त्या कर देना चाहती है !
समझ नहीं पाता मैं
कब तक--
मैं अपने चहरे पर चूना रगड़ता रहूंगा;
और तुम्हारे चहरे पर
इंसानियत की नर्म रेखाओं की
तलाश में भटकता रहूंगा !
और मस्तिष्क के तूफ़ान को
कागज़ की फजीहत बनाता रहूंगा !!
क्या यही बेहतर है
कि मैं भी बोतल-बंद हो जाऊं ?
शांत कर लूं अपना भेजा
और मानवता की निस्सीम परिधि से
बाहर हो जाऊं ?
लेकिन, उस कैद से पहले,
मैं कुछ प्रश्न पूछ लेना चाहता हूँ--
आत्म-प्रहरी से,
दुविधा की देहरी से !
क्या आपने कभी
दुविधा की देहरी से
आत्म-प्रहरी के दरवाज़े की
सांकल बजायी है ?
एक अदद कोशिश से
क्या बिगड़ता है ?
क्योकि
वह प्रहरी जो कहता है--
सच कहता है !!

और चलते-चलते देख लीजिए कुछ ताजा कार्टून

कार्टून:- आज मिलिये क्रिकेटिंग वंडर से...

Author: काजल कुमार Kajal Kumar | Source: Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून    [Cricket.jpg]

 

कार्टून : सारे नोट तो मायावती के हार मैं लग गए !!

Author: Kirtish Bhatt, Cartoonist | Source: Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: [cartoon01.jpg]BAMULAHIJA

बामुलाहिजा >> Cartoon by Kirtish Bhatt

 

7 comments:

  1. ओझा साहब से परिचय करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

    ReplyDelete
  2. ओझा जी की रचनाओं से पूर्व परिचित हूँ!
    यहाँ उनसे मुलाकात बहुत अच्छी लगी!

    ReplyDelete
  3. ओझा साहब से परिचय करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

    ReplyDelete
  4. ओझा जी से और उनकी सशक्त कविताओं से परिचय अच्छा लगा...शुक्रिया

    ReplyDelete
  5. ओझा जी के बहुमूल्य कृतित्व से परिचित कराना अच्छा लगा !
    आभार चर्चा के लिए ।

    ReplyDelete
  6. बहुत आभार आपका.

    रामराम.

    ReplyDelete
  7. ojha ji ki dono hirachnayein gazab ki hain .........unse parichit karwane ka shukriya.

    ReplyDelete

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

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