Followers

Tuesday, March 30, 2010

“प्रेरणा कैसी-कैसी?” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक - 104
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक
आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-
देखिए 24 घण्टों के कुछ चुने हुए लिंक्स-
समीर लाल जी को तो प्रेरणा मिल गई! क्या आप भी प्रेरणा की तलाश में हैं?
पढ़ लीजिए जरा ये पोस्ट-
उड़न तश्तरी ....

प्रेरणा कैसी कैसी!! - कभी किसी को देख सुन कर *वो आपको इतना अधिक प्रभावित करता है कि आपका प्रेरणा स्त्रोत बन जाता है.* आप उसके जैसा हो जाना चाहते हैं. ठीक ठीक उसके जैसा न भी ...
क्या आप ताऊ रामपुरिया को बधाई देना भूल गये हैं?
अगर भूल गयें हैं तो यहाँ आकर बधाई दीजिएगा!
ताऊ डॉट इन

ताऊ की 500 सौवीं पोस्ट के उपलक्ष्य मे कवि सम्मेलन व मुशायरा - आदरणीय ब्लागर गणों, मैं रामप्यारे उर्फ़ "प्यारे" आप सभी का अभिनंदन करता हूं. और मुझे यह घोषणा करते हुये अपार हर्ष होरहा है कि ताऊ की आज की यह पोस्ट 500 सौ ..
वन्दना अवस्थी दुबे को जन्म-दिन की बहुत बहुत शुभकामनाएँ!
हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन
आज वन्दना अवस्थी दुबे का जन्मदिन है - आज, 30 मार्च को अपनी बात ..., जो लिखा नहीं गया ..., किस्सा कहानी वालीं वन्दना अवस्थी दुबे का जन्मदिन है। इनका ई-मेल पता vandana.adubey@gmail.com है। बधाई व..
लो जी!
साहित्य चोरी का एक प्रकरण और संज्ञान में आया है! जरा यह पोस्ट पढ़कर भी देख लें!
Science Bloggers' Association

साहित्यिक चोरी की एक नई मिसाल- हिन्दी विज्ञान पत्रकारिता : कल आजकल और कल - पिछले दिनों  इसी ब्लॉग पर साहित्यिक चोरी की चर्चा हुयी थी- अभी एक किताब पर नजर पडी़ तो लगा कि जैसे साहित्यिक चोरी की एक नई मिसाल सामने आ गयी हो। किताब का नाम...
अदा जी के दर्द में शामिल होने के लिए इस गजल पर भी दृष्टिपात कर लें-
काव्य मंजूषा

फिर एक घाव उसने और लगाया है... - आज फिर उसने मुझको रुलाया है रूठी हुई थी मैं पर उसने मनाया है ज़ख्मों पर कुछ पपड़ी सी पड़ी थी नाखून से कुरेद कर उसने हटाया है दिल के क़तरनों के पैबंद बन...
बड़ी-बड़ी छोड़ने वाले कुछ मुहावरे यहाँ भी हैं-
अंधड़ ! 
मुहावरे ही मुहावरे ! - *तू डाल-डाल,मैं पात-पात*,*नहले पे दहले* ठन गए, जबसे यहाँ कुछ* अपने मुह मिंया मिट्ठू* बन गए। ताव मे आकर हमने भी कुछ *तरकस के तीर दागे*, बडी-बडी छोडने वाले, ...
एक विरहन की तड़प यहाँ भी तो है- वियोग शृंगार का एक छंद-
GULDASTE - E - SHAYARI

- आपसे मुलाकात न हो तो होती है हमें फ़िक्र, हर वक़्त अपने आपसे करते हैं आपका ज़िक्र, आप जैसा कोई दूजा न होगा हमें नसीब, आप दूर होकर भी सदा रहोगे हमारे करीब !
बेकारी का युग है!
देर मत कीजिए!
पं. डी.के.शर्मा वत्स जी के यहाँ जल्दी से आवेदन कर दीजिए!
कुछ इधर की, कुछ उधर की
  चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान द्वारा कवि,गजलकार,लेखक,कार्टूनिस्ट के पदों हेतु आवेदनपत्र आमंत्रित - जैसा कि आप सब लोग जानते हैं कि हिन्दी ब्लागर्स को आ रही समस्यायों को देखते हुए पिछले दिनों हमने आप लोगों की सहायतार्थ "चिट्ठाद्योग सेवा संस्थान" नाम से एक ...
बुन्देलखण्डी गीत का आनन्द लेने के लिए इस पोस्ट को अवश्य पढ़ें!
मसि-कागद

आज मुनईयाँ के ससुरे सें चिट्ठी आई है------->>>मशाल - साहित्यप्रेमियों के सामने एक बुन्देलखंडी गीत प्रदर्शित कर रहा हूँ.. जो कि एक लडकी जो अपने ससुराल में है और कई दिनों तक अपने मायके(पीहर) से कोई खोज-खबर ना ल...
अनुवाद करने में सिद्धहस्त डॉ. सिद्धेश्वर सिंह आज सुनवा रहें हैं-
नासिर काजमी साहब की एक ग़ज़ल आबिदा परवीन के जादुई स्वर में ...
कर्मनाशा

चलो अब घर चलें दिन ढल रहा है - ** * *'कर्मनाशा' पर इधर कुछ समय से अपनी और अनूदित कविताओं की आमद अपेक्षाकृत अधिक रही है और यह भी कि अपनी कई तरह की व्यस्तताओं और यात्राओं के कारण बहुत कम...
और मित्रों हमें भी अवुवाद का शौक चर्राया है! आज पढ़िए मेरी पहली अनूदित रचना!
उच्चारण
“John Masefield की Beauty कविता का हिन्दी अनुवाद” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) - *मित्रों! आज से **उच्चारण** पर विदेशी कवियों की कविताओं के अनुवाद की श्रंखला प्रारम्भ कर रहा हूँ! इस कड़ी में आज प्रस्तुत है- * ** *John Masefield की Bea...
 
कल फिर ग्यारह चिट्ठों की चर्चा लेकर उपस्थित हो जाऊँगा!

10 comments:

  1. आज की चर्चा बहुत रोचक है,
    क्योंकि इसमें बहुत सूझबूझ के साथ
    अच्छे से अच्छी पोस्ट्स शामिल करने की
    कोशिश की गई है!
    --
    यही आज की चर्चा की विशेषता भी है!

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर चर्चा .. सर समीर जी को कौन सी वाली प्रेरणा मिल गई है ? कहीं टी.वी. सीरियल वाली प्रेरणा तो नहीं ... वंदना अवस्थी को जन्मदिन की शुभकामनाये

    ReplyDelete
  3. बहुत ही उत्तम चर्चा.

    रामराम

    ReplyDelete
  4. शुक्रिया साहेब !

    ReplyDelete
  5. पिछले कुछ दिनों से नित्यप्रति आपकी हर चर्चा में एक नयापन सा दिखाई देने लगा है..जो कि चर्चा को ओर भी सुन्दर बना देता है.....
    अति उत्तम!!

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन चर्चा..आनन्द आया.

    ReplyDelete
  7. सुन्दर चर्चा. इसी बहाने कई महत्वपूर्ण लिंक भी मिला जाते हैं. इन सद्प्रयासों के लिए साधुवाद !!

    ReplyDelete
  8. are vaah....ye to badi acchhi jagah hai....kitte saare logon kee khushboo ek hi jagah mil rahi hai....vaah ...vaah....kyaa baat....

    ReplyDelete
  9. http://baatpuraanihai.blogspot.com/
    अरे.....रे.....रे.....रे.....कहाँ चले गए रूप जी.........??ये लीजिये मैंने रंग बदल लिया.....भूत तो था ही अब गिरगिट भी बन गया.....
    अब आपको मुझे दीदे फाड़-फाड़ कर नहीं देखना पडेगा.....मगर आप दुबारा आओ तब ना.....भूत के ब्लॉग पर लोग आने से बहुत दारा करते हैं... क्यूंकि शायद बीती हुई खूंखार चीज़ों से लोग डरते हैं....मगर आप तो इक उम्र गुजार चुके हो....अब आज से आपको मेरा साथ देना पडेगा.....!! आओगे ना आप ओ रूप जी...नहीं नहीं....शास्त्री जी....अरे नहीं नहीं....मयंक जी .....अरे नहीं भई .....गुरूजी....अरे हाँ गुरूजी.....आपको पांव धोक
    प्रणाम.....सादर नमस्कार.....अब ठहाका लगाकर हंस भी दो ना.....हा....हा....हा....हा....हा.....!

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

जानवर पैदा कर ; चर्चामंच 2815

गीत  "वो निष्ठुर उपवन देखे हैं"  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')     उच्चारण किताबों की दुनिया -15...