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Sunday, March 28, 2010

“कैसे बन गये इतने सारे? टिम टिम करते तारे!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-102
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक
आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-
देखिए 24 घण्टों के कुछ चुने हुए लिंक्स-
कैसे बन गये इतने सारे टिम टिम करते तारे?
Mar 28, 2010 | Author: Manoj Bijnori | Source: Science Bloggers' Association
आये दिन हम अन्तरिक्ष में होने वाले अनेक परीक्षणों के बारे में जानते रहते है पर कभी कभी हमारे दिमाग में एक सवाल उठने लगता है की आकाश में ये जो तारे हैं इनका निर्माण कैसे हुआ होगा ये अन्तरिक्ष की जानकारी भी बहुत रोचक है और इस अन्तरिक्ष को सही से जाननेके लिए हज़ारो वर्ष भी कम है।…..
कैसा हो कलियुग का धर्म ??
Mar 28, 2010 | Author: संगीता पुरी | Source: गत्‍यात्‍मक चिंतन
प्रत्‍येक माता पिता अपने बच्‍चों को शिक्षा देते हैं , ताकि उसके व्‍यक्तित्‍व का उत्‍तम विकास हो सके और किसी भी गडबड से गडबड परिस्थिति में वह खुद को संभाल सके। पूरे समाज के बच्‍चों के समुचित व्‍यक्तित्‍व निर्माण के लिए जो अच्‍छी शिक्षा दे, वो गुरू हो जाता है। इसी प्रकार सारी मानव जाति के कल्‍याण के लिए बनायी गयी शिक्षा धर्म और उसे देनेवाले धर्म गुरू हो जाते हैं। इस शिक्षा का मुख्‍य उद्देश्‍य ज्ञान की प्राप्ति होनी चाहिए, जिसका आज गंभीर तौर पर अभाव है। सिर्फ गणित और विज्ञान को पढकर शिक्षा तो प ...
जनसत्‍ता के संपादक ओम थानवी जी ने आज जनसत्‍ता में लिखा है कि ...... (अविनाश वाचस्‍पति)
 
Mar 28, 2010 | Author: अविनाश वाचस्पति | Source: नुक्कड़
इमेज पर करके क्लिक आप पढ़ लीजिए पढ़ कर अपनी राय दीजिए आप करते हैं क्‍या महसूस कहिए आप भी विशेष कुछ।…
“पिता जी को पड़पोते ने साबुन मलकर नहलाया”
| Source: पिताजी
   आज का बिल्कुल ताजा संस्मरण पोस्ट कर रहा हूँ! मेरे पिता जी की आयु इस समय 90 वर्ष की है। इस उम्र में भी वे अपने दैनिक कार्य स्वयं ही करते हैं। यों तो उनके लिए निचली मंजिल पर भी स्नानगृह बना है। मगर उसमें गीजर नही लगा है। इसलिए पूरे जाड़ों-भर वह प्रति दिन सुबह 10 बजे स्नान करने के लिए ऊपर ही आ जाते हैं। आज भी वह स्नान के लिए आये और नहा कर जब बाहर निकले तो उनके पूरे शरीर पर नील पुता था।  ...
सोचा ना था....

डार्लिंगजी :पुस्तक समीक्षा - नर्गिस और सुनील दत्त की जोड़ी हमेशा हमारे लिए एक आयडियल जोड़ी रही है...लेकिन उनके मिलने की कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम पेंचीदा नहीं है....जहाँ एक ओर बचप...
बगीची

कंप्‍यूटर एक्‍सपर्ट होने के लिए उम्र के कोई मायने नहीं हैं (अविनाश वाचस्‍पति)वाचस्‍पति) - खबर तो यही कहती है पर आप क्‍या कहते हैं जानें ऐसा जमाने में तो अच्‍छा लगता है छोटा बच्‍चा जान के ...
ललितडॉटकॉम

अल्पना के ग्रीटिंग्स की एक प्रदर्शनी-आर्ट गैलरी रायपुर मे-27मार्च से 31 मार्च तक - ललित शर्मा द्वारा निर्मित सृजनशील हाथ सृजन कार्य मे निरंतर लगे रहते हैं, यह एक साधना है, इस साधना से नई कृतियों का जन्म होता है, जिसमें सृजनकर्ता ...
मानसी

एक सपना जी रही हूँ - * * *एक सपना जी रही हूँ पारदर्शी काँच पर से टूटते बिखर रहे कण हँसता खिलखिला रहा है आँख चुँधियाता हर इक क्षण थोड़े दिन का जानकर सुख मधु कलश सा पी रही हूँ ए..
Fulbagiya

खुली खुली खिड़की सी दीदी - ** ** ** * खुली खुली खिड़की तुम हमको अच्छी बहुत बहुत लगती हो हमको तो तुम प्यारी प्यारी बिलकुल दीदी सी लगती हो। जैसे बिजली के जाने पर दीदी हमको पंखा झलती ..
आरंभ Aarambha

बस्तर मे आदिवासियों का माटी तिहार और उल्लास - बस्तर के आदिवासियों का जीवन तथा सारा अस्तित्व जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत माटी से ही जुड़ा होता है। माटी के बिना वह स्वयं की कल्पना नहीं कर सकता। बस्तर के आद..
Rhythm of words...

भूख! - ऐ जिंदगी! बस इतना बता दे मुझको तू उम्मीद की जगह क्यों मुझे में भूख बोती है मैं चाहकर भी सुकून से सो नहीं पाता रात का चाँद भी मुझको लगता 'रोटी' है ॥ झांकत..
saMVAdGhar संवादघर

परंपराओं वाले बबुआ - कई बार अपने या दूसरों के ब्लागस् पर अपनी या दूसरों की कुछ टिप्पणियां ऐसी लगती हैं कि मन होता है इन्हें ज़्यादा महत्व देकर ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहिए।...
देशनामा

बच्चे आप से कुछ बोल्ड पूछें, तो क्या जवाब दें...खुशदीप - बड़े दिन से हंसी ठठे वाली पोस्ट लिख रहा था...आज कुछ सीरियस लिखने का मूड है...पहले मैं इस विषय को ब्लॉग पर लिखने को लेकर बड़ा ऊहापोह में था...लिखूं या न लिख...
काव्य मंजूषा

जाने क्या है ये..... - जाने क्या है ये ! मुझे सताने का मंसूबा या तुम्हारी जीतने की जिद्द, जो सारे दरवाज़े बंद कर देते हो छोड़ देते हो मुझे अकेला...! छोटी सी नाव में बिन पतवार ...
पंछी पंख-विहीन....
- जीवन के स्वयं समर्पण को मैं जीत कहूं या हार कहूं? मैने देखी प्राचीर-रश्मि देखा संध्या का अंधकार, पूनों की रजत ज्योत्सना में, लख सका अमा का तम अपार, इन काली-..
मिसफिट:सीधीबात

सफ़ेद मुसली खिलाडियों के वरदान और खिलाड़ी अनजान : अलका सरवत मिश्रा -
भारतीय नागरिक - Indian Citizen
आरजू - अब कोई तमन्ना नहीं बाकी, अब कोई आरजू नहीं बाकी। उनके कूंचे से निकले जनाजा मेरा, है बाकी तो ये आरजू बाकी। इश्क तो बाकी है अभी हममें, उनमें मगर वफा नहीं बाकी,.
शब्दों का सफर
[नाम पुराण-4] एक घटिया सी शब्द-चर्चा… - *पिछली कड़ियां-A.**[नामपुराण-1]**B.**[नामपुराण-2]**c.**[image: Ghatam]** [नामपुराण-3]* न दी-तटीय बस्तियों के साथ *घाट *शब्द का प्रयोग भी बहुधा मिलता है। ये ...
bhartimayank
“आओ ज्ञान बढ़ाएँ:पहेली-26” (अमर भारती) - * रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-26 में * *आप सबका स्वागत है।* आपको पहचान कर निम्न चित्र का नाम और स्थान बताना है।[image: khatima copy] *उत्तर देने का समय 30..
कुमाउँनी चेली  
फेसबुक और ऑरकुट के दीवानों, ज़रा इधर भी नज़र डालो - *[पुराने पन्नों से] साथियों .....मास्टरों और उधार का चोली दमन का साथ है अतः आशा है कि आप लोग मुझे साहिर साहब की इस रचना को उधार लेकर, इसका  ...
मनोरमा  
सुमन के भीतर आग है - हार जीत के बीच में जीवन एक संगीत। मिलन जहाँ मनमीत से हार बने तब जीत।। डोर बढ़े जब प्रीत की बनते हैं तब मीत। वही मीत जब संग हो जीवन बने अजीत।। रोज परिन्दों ...
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से.....
महिला आरक्षण. और.सीटी प्रकरण के बाद . कुछ नेता सेक्स परिवर्तन..की फ़िराक में .... - महिला आरक्षण के कट्टर विरोधी कुछ नेताओं को जब उनकी बीबियों ने घर के बाहर का रास्ता दिखाया,.. तो वे ना घर के रहे ना घाट के... उधर संसद में सीटी प्..
उच्चारण
  “प्रजातन्त्र की जय बोलो!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”) - *लोकतन्त्र की जय बोलो! प्रजातन्त्र की जय बोलो!! रंगे स्यार को दूध-मलाई, मिलता फैनी-फैना है। शेर गधे बनकर चरते हैं, रूखा-शुष्क चबेना हैं।। लोकतन्त्र क..
डा. कुमार विश्वास आज जोधपुर मे
Mar 28, 2010 | Author: HARI SHARMA | Source: हरि शर्मा - नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे
आज हिन्दी कवि सम्मेलनो के सबसे चर्चित युवा गीतकार डा कुमार विश्वास जोधपुर मे है और शाम को ६ बजे एस एल बी एस कालेज मे उनका कार्यक्रम है. पहले मुलाकात हुई हवाई अड्डे पर फिर राजपूताना होटल के उनके कमरे मे. शाम को उनका कार्यक्रम है. मुलाकात का शेष भाग उसके पश्चात ब्लोग पर लिखेगे.   उनके स्वागत मे उन्ही का एक नया गीत प्रस्तुत है
…..
'इस्कॉन' को झटका: अमेरिकी अदालत ने हवाई अड्डों पर दान लेने के लिए याचना का अधिकार ठुकराया
Mar 28, 2010 | Author: लोकेश Lokesh | Source: अदालत
'क्रिश्चियन साइंस मॉनीटर' के मुताबिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार में पहले संशोधन के तहत लास एंजेलिस हवाईअड्डे पर दान लेने के लिए याचना करने का अधिकार पाने के लिए 13 सालों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे 'इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस'(ISKCON) के लिए अदालत का यह फैसला जाहिर तौर पर अंतिम हार है।…
अल्लाह के घर महफ़ूज़ नहीं हैं
Mar 28, 2010 | Author: Suman | Source: लो क सं घ र्ष !
महफ़ूज़ नहीं घर बन्दों के, अल्लाह के घर महफूज़ नहीं। इस आग और खून की होली में, अब कोई बशर महफ़ूज़ नहीं॥ शोलों की तपिश बढ़ते-बढ़ते, हर आँगन तक आ पहुंची है। अब फूल झुलसते जाते हैं, पेड़ों के शजर महफ़ूज़ नहीं॥ कल तक थी सुकूँ जिन शहरों में, वह मौत की दस्तक सुनते हैं । हर रोज धमाके होते हैं, अब कोई नगर महफ़ूज़ नहीं॥ दिन-रात भड़कती दोजख में, जिस्मों का ईधन पड़ता है॥ क्या जिक्र ..

मनोज

अपनी भावनाएं, और विचार बांट सकूं।

काव्यशास्त्र : भाग 8
आचार्य वामन
--आचार्य परशुराम राय

आचार्य वामन आचार्य उद्भट के समकालीन थे। क्योंकि महाकवि कल्हण ने अपने महाकाव्य राजतरङ्गिणि में लिखा है कि आचार्य उद्भट महाराज जयादित्य की राजसभा के सभापति थे और आचार्य वामन मंत्री थे। जयादित्य का राज्य काल 779 से 813 ई. माना जाता है।
आचार्य वामन काव्यशास्त्र में रीति सम्प्रदाय प्रवर्तक है। ये रीति (शैली) को काव्य की आत्मा मानते हैं। इन्होंने एकमात्र ग्रंथ काव्यालङ्कारसूत्र लिखा है
……

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून

कार्टून:- आज की नमस्ते भाषाविदों को. -
कार्टून : कहाँ भाग खड़े हुए कांग्रेसी ?
Mar 28, 2010 | Author: Kirtish Bhatt, Cartoonist | Source: Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA
 कार्टून को बड़ा देखने लिए उस पर क्लिक करें  बामुलाहिजा :  Cartoon by Kirtish Bhatt



आज के इस अंक में 
बस इतना ही!
राम-राम!

11 comments:

  1. वाह आज तो रविवार के चलते खूब आराम से पढ़ने को मिली चर्चा. धन्यवाद.

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  2. बेहतरीन चर्चा..पसंद आई.

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  3. शुरूआत में ही एक ओर विज्ञान .. तो दूसरी ओर धर्म .. इतने सारे अच्‍छे अच्‍छे लिंक्स .. और अंत में कार्टून्‍स .. अच्‍छा सजाया आपने चर्चा मंच को !!

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  4. बेहतरीन चर्चा..काव्यशास्त्र को चर्चा में महत्व पाया देखकर काफ़ी प्रसन्नता हुई।

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  5. बहुत लाजवाब चर्चा.

    रामराम.

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  6. पसन्‍द पर चटका लगाओं तो ईमेल और आइडी पूछता है फि इनवेलिड कर देता है। अच्‍छी रही चर्चा।

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  7. इस चर्चा मंच से बहुत से अच्छे पोस्ट की जानकारी मिली...धन्यबाद....

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  8. शास्त्री जी,
    आपका समर्पण हम सब ब्लॉगरों के लिए प्रेरणास्रोत है...

    जय हिंद...

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  9. बेहतरीन चर्चा..

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जिन्हें थी जिंदगी प्यारी, बदल पुरखे जिए रविकर-   रविकर     "कुछ कहना है"   (1) विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्...