Followers

Tuesday, March 23, 2010

“तेईस मार्च के शहीदों को शत-शत नमन!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-96

चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


कल आवश्यक कार्य से खटीमा से बाहर रहा।
रात को वापिस लौटा तो नेट-देवता नाराज थे!
आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-

 

 

 

Tuesday, 23 March 2010

आज शहीदी दिवस है----->>>दीपक 'मशाल'

मसि-कागद 

आज शहीदी दिवस है----->>>दीपक 'मशाल' - आज शहीदी दिवस है भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का.. कुछ याद आ रहा है- ''भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु..पहन वसंती चोले रात मेरे सपने में आये आके मुझसे बोले हमारा व्.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen 

तेईस मार्च के शहीदों को शत-शत नमन. - भगत सिंह, राजगुरू और सहदेव को उनके शहीदी दिवस पर शत-शत नमन..

एक प्रयास

शक्ति का वंदन - शक्ति का पूजन , अर्चन वंदन,श्रृंगार किया तुमने मगर साथ ही शक्ति का उपहास, परिहास खण्डन, मर्दन ह्रास ,त्रास और तर्पण भी किया तुमने फिर कैसे शक्ति के उप...

उड़न तश्तरी ....

समेटना बिखरे भावों का- भाग १ - भावों और विचारों का क्या है? वक्त बेवक्त किसी भी रुप में चले आते हैं. कभी दर्ज कर लिया, कभी छूट गये. दर्ज कर लिया तो एक दस्तावेज के रुप में सहेजने का दि.

ताऊ डॉट इन

ताऊ पहेली - 66 : (मुंडेश्वरी मंदिर, कैमूर) विजेता उडनतश्तरी - प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 66 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है मुंडेश्वर...

कर्मनाशा

कविता की रोटी की पाकविधि / रेसिपी - ** इस ठिकाने पर अक्सर विश्व कविता के अनुवाद को प्रस्तुत किया जाता रहा है। इसी क्रम में आज प्रस्तुत है जापान के मशहूर कवि , अनुवादक और अंग्रेजी के प्रोफ़ेसर ...

मानसी

ग़ज़ल- दिल में ऐसे उतर गया कोई - *दोस्त बन कर मुकर गया कोई * *अपने दिल से यूँ डर गया कोई आँख में अब तलक है परछाईं दिल में ऐसे उतर गया कोई सबकी ख़्वाहिश को रख के ज़िंदा फिर* *ख़ामुशी से लो ...

मुक्ताकाश....

'चट्टान नहीं हूँ...' - [एक परित्यक्ता की व्यथा-कथा का यह काव्य पहले भी मेरे ब्लॉग पर अवतरित हुआ था। लेकिन मेरी ही किसी असावधानी से कतिपय टिप्पणियों के साथ विलुप्त हो गया था। उसे ...

शब्द-शिखर

  'पानी' को 'काला-पानी' होने से बचाएं - अंडमान में आजकल पानी की किल्लत जोरों पर है. चारों तरफ पानी ही पानी, पर पीने को एक बूंद नहीं, यह कहावत यहाँ भली-भांति चरितार्थ होती है. सुनामी के बाद यहाँ म...

 “उच्चारण

 “ देश-भक्ति गीत” - *आज प्रस्तुत कर रहा हूँ * *अपना एक पुराना देश-भक्ति गीत! * *जिसको अपना मधुर स्वर दिया है * *मेरी जीवनसंगिनी "श्रीमती अमर भारती" ने* * * *मेरे प्यारे वतन, ...

मनोरमा  

जनवादी लेखक संघ झारखण्ड का तृतीय राज्य सम्मेलन - पिछले दस दिनों से इसी राज्य सम्मेलन में खुद की व्यस्तता के कारण इन्टरनेट की दुनिया से प्रायः कट सा गया था। जनवादी लेखक संघ (जलेस) झारखण्ड का तृतीय राज्य सम...

नुक्कड़

शौरी को साफ करने में जुटे आडवाणी - *अरूण शोरी पर नज़रें तरेरीं आडवाणी ने* *अपने यस मेन्स को टीम गडकरी में फिट करने के बाद अब निशाने पर शौरी* *कांग्रेस से पींगे बढाने में लगे हैं शौरी* *(लिमटी ख...

bhartimayank

  “आओ ज्ञान बढ़ाएँ!” (अमर भारती साप्ताहिक पहेली) - ** * उत्तर देने का समय बढ़ा दिया है!* * * * क्ल्यू-* * * *[image: amritsar] रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-25 में * ** *आप सबका स्वागत है।* आपको पहचान कर न...

नीरज 

किताबों की दुनिया -26 - मैं *कुमार विनोद *जी को व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानता,लेकिन मेरा सौभाग्य देखिये नौ फरवरी को कुरुक्षेत्र से उनका अचानक मेल आया, जिसमें लिखा था कि उन्होंने मेर...

*होशोहवास/ HOSHOHAWAS*

  होशोहवास में प्रकाशित प्रमुख तस्वीरें - *यहाँ प्रस्तुत है अब तक की प्रकाशित प्रमुख तस्वीरों के पोस्ट :* - *तस्वीरें बोले सुन...सुन...सुन...** * - *प्रेम बिक रहा बाज़ार में * - *वेलेंटाइन ड...

JHAROKHA 

मानसिक हलचल: बबूल और बांस - मानसिक हलचल: बबूल और बांस bahut hi gaharaai me likhte hai .bahut hi achchi jankaari di hai abhi mujhe aapse bahut kuchh seekhana hai aap.aapka mere blog par...

Meri Katputliyaan

अविदित - इस वक्त और अनंत के बीच किसी गहरे गर्त में ठहरा हुआ कोई बोध... तृषित... अधूरा... अस्तित्व की निरर्थकता से निढ़ाल अनभिज्ञ आकर्षण के बीच ऐंठा हुआ तलाशत...

Science Bloggers' Association

यह कुत्ते जैसी मौत ईश्वर किसी को न दे। - 'कुत्ते कौ मौत मरना' एक मुहावरा है, जिसे अक्सर लोग आवेश में अपने शत्रुओं के लिए इस्तेमाल में लाते हैं। लेकिन यदि आपको अंदाजा हो जाए कि यह मौत कैसी होती है, त...

जज़्बात  

सर से ऊपर गया पानी ~~~ - पानी है तो जिन्दगानी है, पर पानी जब सर से ऊपर चला जाये तो? आज विश्व जल दिवसके अवसर पर मेरी रचना का पुनर्वाचन करें पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें …

"सच में!"

तलाश खुद अपनी! - इन्तेहा-ए-उम्मीदे-वफ़ा क्या खूब! जागी आंखों ने सपने सजा लिये। मौत की बेरुखी, सज़र-ए-इन्सानियत में, अधमरे लोग हैं,गिद्दों ने पर फ़ैला लिये। चाहा था दुश्...

ईश्वर की पहचान

जल का संरक्षण और हमारी ज़िम्मेदारियाँ - आज हर व्यक्ति जल का दुर्पयोग कर रहा है। स्नानागार, शौचालय, रसोई घर और बागीचे की सींचाई में जल की खपत अत्यधिक मात्रा में हो रही है। हम सब का कर्तव्य बनता ह...

GULDASTE - E - SHAYARI

- मीठी मीठी यादों को पलकों में सजा लेना, साथ गुज़रे हसीन पलों को दिल में बसा लेना, न जाने कब कहाँ फिर तुमसे मुलाकात हो, प्यार भरे मुस्कुराहट से सपनों में बुला ...

Alag sa 

चुभ-चुभ कर भीतर चुभे, ऐसे कहे कबीर. - महाभारत काल में माँ के द्वारा त्यागे जाने और फिर अधिरथ द्वारा पाले जाने वाले कर्ण ने जैसे उस युग में अपनी गौरव गाथा फैलाई थी उसी प्रकार कबीर ने अपनी जननी द...

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

  विज्ञान का वास्‍तविक तौर पर प्रचार प्रसार काफी मुश्किल लगता है !! - भारतवर्ष में फैले अंधविश्‍वास को देखते हुए बहुत सारे लोगों , बहुत सारी संस्‍थाओं का व्‍यक्तिगत प्रयास अंधविश्‍वास को दूर करते हुए विज्ञान का प्रचार प्रसार कर...

युवा दखल

दुनिया को बचाना है तो इसे बदलना ज़रूरी है… - विचार सत्र में बोलते हुए राज्य संयोजक प्रदीप जिसे आज आमतौर पर* भूमण्डलीकरण कहा जाता है वह दरअसल पूंजी का भूमण्डलीकरण *है। श्रम आज भी जंज़ीरों में जकड़ा हुआ...

Rhythm of words...

दर्द!! - जिंदगी को जिंदगी होने का दर्द है खुद को खुद में ही खोने का दर्द है॥ एक आस पर जीती है और रोज उस में ही बीती है एक उम्मीद में खुद को बोने का दर्द है॥ वो जो ख...

काव्य मंजूषा   बाप का जूता.....


उसकी उम्र मात्र १५ वर्ष की थी, अपने पिता की अर्थी को काँधा देते वक्त वो  बिलख-बिलख कर रो पड़ा, लोग अभी तक कह रहे थे क्या कलेजा पाया है बच्चा,  एक बूँद आंसू नहीं टपकाया है, एकदम 'बज्जर कलेजा' है इसका, कोई और होता तो  उतान हो गया होता, लेकिन वाह रे खेदना मान गए हैं तुमको, सब बहुत खुश थे  कि लड़का दुःख झेल गया है, अब सयान हो गया है, कलेजा होवे तो खेदना जैसा  होवे....

मुझे शिकायत हे. Mujhe Sikayaat Hay.

बूझो तो जाने!! जबाब - नमस्कार आप सभी को,यह पहेली करीब ६ महीने पहले ढुढी थी, सोचा पुछू या नही??िफ़र इसे यू ही छोड दिया, लगा यह कठीन नही होगी, ओर आज निकम्मा बेठा था, कारण सुबह बहु...

अमीर धरती गरीब लोग

ये डीज़ल लगा-लगा कर थक़ गया आज तक़ किसी ने पलट कर देखा तक़ नही,सोचता हूं अब पर्फ़्यूम बदल ही लूं,ऐक्स इफ़ेक्ट कैसा रहेगा? - बड़ी-बड़ी बात करने के लिये ज़रूरी नही है बड़ी पोस्ट लिखना सो एक छोटी सी पोस्ट आप लोगों के विचारार्थ सामने रख रहा हूं।वैसे तो मेरी खुद की नाक बहुत खराब है मगर प...

पराया देश  

कुछ अति सुंदर चित्र गीता से.... - मुझे एक मेल मिला था, जो अग्रेजी मै था, था तो बहुत अच्छा लेकिन मेरी अपनी भाषा मै नही था, सो मेने उसे मिटा दिया, हटा दिया, लेकिन उस मै कुछ बहुत सुंदर सुं...

देशनामा 

देवी कैटरीना की स्तुति में कविराज अक्षय की रचना की संदर्भ सहित व्याख्या...खुशदीप - पढ़ाई के तरीके बदल रहे हैं...अब उन तरीकों से बच्चों को पढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है जिन्हें वो आसानी से समझ सकें...जैसे बच्चा-बच्चा और किसी को पहचानता हो ...

तेताला  

हिन्‍दी फिल्‍म निर्देशक अनवर जमाल से बातचीत (अविनाश वाचस्‍पति) - यह बातचीत गत वर्ष द्वितीय हरियाणा अंतरराष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह, यमुनानगर द्वारा प्रकाशित दैनिक बुलेटिन में प्रकाशित हुई थी। उसी का स्‍कैनबिम्‍ब लगाया गया...

आरंभ Aarambha  

छत्‍त‍ीसगढी भाषा में शौर्य गान का नाम है जस गीत - *ललित शर्मा जी से क्षमा सहित * शहरों में नवरात्रि की धूम चारों ओर है, मंदिरों और माता के दरबार में आरती के बाद जस गीत व सेवागीत गाए जा रहे हैं। शीतला मंद..

kuchlamhe

"विरह के रंग (काव्य संग्रह)" - *"विरह के रंग* " *"(काव्य संग्रह) ISBN: 978-81-909734-1-०"* *आज शिवना प्रकाशन के आदरणीय पंकज सुबीर जी के मार्गदर्शन के तहत "विरह के रंग"के साथ अपने पहले काव...

चित्र पहेली का उत्तर 

Source: भारतीय नागरिक - Indian Citizen

समीर साहब और शास्त्री साहब के उत्तरों को छोड़कर बाकी उत्तर थोड़े से पास तक पहुंच रहे हैं. यह एक मजार के पास के चित्र हैं, जहां लोग हजारों की संख्या में इकठ्ठे हुये हैं. और इसके कारण जाम लग गया जो लगभग एक घंटे तक लगा रहा तथा यात्रियों को वापस लौटकर अपने गंतव्य के लिये अन्य मार्गों का प्रयोग करना पड़ा.  पुलिस वालों ने भी जाम खुलवाने की जगह यात्रियों को वापस लौटाना ही उचित समझा. सऊदी अरब, जो कि एक कट्टर इस्लामी मुल्क है, में भी कोई धार्मिक आयोजन सड़कों पर आयोजित नहीं किया जाता, जबकि भारत में यह आम ...

जीत क्या शय है हार कर देखो

Mar 23, 2010 | Source: धड़कन - दिल की बातें ...... दिल से ..

अपनी हस्ती उजाड कर देखो

खुदकुशी ठान ली चिरागों ने-गज़ल

Mar 23, 2010 | Author: श्याम सखा 'श्याम' | Source: ग़ज़ल के बहाने-gazal k bahane

दिल में लेकर जो  प्यास बैठीं हैं क्यों समन्दर के पास बैठी हैं

ओ मेरे कवि !

Mar 22, 2010 | Author: दर्पण साह 'दर्शन' | Source: ...प्राची के पार !

युद्ध: कुछ प्रभाव.

C.M.Quiz-30 का परिणाम [राज भाटिया जी ने सबको पीछे छोड़ा]

क्रिएटिव मंच-Creative Manch

राज भाटिया जी बने C.M.Quiz-30 के प्रथम विजेता क्विज संचालन - अनंत

शहीद भगत सिंग ...

Mar 22, 2010 | Author: अनामिका की सदाये...... | Source: अनामिका की सदाये...

दोस्तो शहीद भगत सिंग जी की याद में कुछ फूल समर्पित है...जैसा कि वो अपनी बुलंद आवाज में लोगो में नयी स्फूर्ती का आवाहन करते थे..उसी लय में कुछ पंक्तीया मैने लिखी है जो आपकी नजर है..

आपने की है कभी ऐसी शरारत ?

Mar 22, 2010 | Author: लविज़ा | Laviza | Source: लविज़ा | Laviza

उस दिन जाने क्या हुआ था, मेरा नहाने का ही मन नहीं हो रहा था. मम्मा जबरदस्ती मुझे नहलाने के लिए ले गयी तो मैं इतना हंगामा मचाया की मम्मा भी थक गयी.

नरेंद्र मोदी ने कानून-संविधान न मानने की कसम खा रखी है

Mar 22, 2010 | Author: Suman | Source: लो क सं घ र्ष !

गुजरात दंगो की जांच के लिए नियुक्त विशेष जांच दल के सामने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को पेश होना था किन्तु वह जांच दल के सामने उपस्थित नहीं हुए। फरवरी 2002 में गुजरात में हजारों अल्पसंख्यकों का नरसंहार धर्म के आधार पर किया गया था। माननीय उच्चतम न्यायलय ने जाकिया की शिकायत पर विशेष जांच दल नियुक्त किया था। जाकिया का आरोप था कि मोदी व उनकी सरकार के मंत्री पुलिस व प्रशासनिक अधिकारीयों से मिलकर गुजरात में दंगे भड़काए थे और कत्लेआम कराया था। जब संविधानिक पदों के ऊपर बैठे हुए लोग इस तरह क ...

मनोज

अपनी भावनाएं, और विचार बांट सकूं।         

अपशकुन

(स्थल - अस्पताल के प्रसुति गृह के सामने का बरामदा।)

दृश्य-1

मिसेज खन्ना – (मिसेज सलूजा के उतरे हुए चेहरे को देख कर) क्या हुआ बहन जी? कुछ उदास दिख रही हैं।

मिसेज सलूजा - पोते की आस लगाये थी। बहू ने बेटी पैदा किया है।……

 

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून

[Nobel+Prize.jpg]

कार्टून:- अर्थशास्त्र का एक और नोबेल भारतीय को मिलेगा -

वे नहीं सूंघ सकतीं बेकरी की डबलरोटी

Mar 22, 2010 | Author: शरद कोकास | Source: शरद कोकास

नवरात्रि पर्व : सातवाँ दिन अब तक जिनकी कवितायें आपने पढ़ीं : फातिमा नावूत , विस्वावा शिम्बोर्स्का, अन्ना अख़्मातोवा .गाब्रीएला मिस्त्राल ,अज़रा अब्बास , और दून्या मिख़ाइल कवितायें पढ़ीं । अब तक जिन्होने अपनी उपस्थिति दर्ज की: लवली कुमारी ,हरि शर्मा ,पारुल ,राज भाटिया , सुमन , डॉ.टी.एस.दराल , हर्षिता, प्रज्ञा पाण्डेय ,मयंक , हरकीरत “हीर” , के.के.यादव , खुशदीप सहगल , संजय भास्कर ,जे. के. अवधिया , अरविन्द मिश्रा , गिरीश पंकज ., सुशीला पुरी , शोभना चौरे , रश्मि रविजा , रश्मि प्रभा  , बबली , वाणी गी ...

          आज की चर्चा समाप्त!

        राम-राम!! 

10 comments:

  1. बढ़िया और विस्तृत चर्चा

    शहीदों को हमारा भी शत-शत नमन

    ReplyDelete
  2. शहीदेआजम भगत सिंह ने कहा था -‘‘भारतीय मुक्ति संग्राम तब तक चलता रहेगा जब तक मुट्ठी भर शोषक लोग अपने फायदे के लिए आम जनता के श्रम को शोषण करते रहेंगे। शोषक चाहे ब्रिटिश हों या भारतीय।’’क्या कहीं भी यह भारतीय मुक्ति संग्राम अस्तित्व में है ?
    दृष्टिकोण
    www.drishtikon2009.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. बहुते लाजवाब चर्चा.

    रामराम.

    ReplyDelete
  4. बहुत बढिया चर्चा…………………शहीदों को शत शत नमन्।

    ReplyDelete
  5. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगत सिह को पोस्ट में याद करने लिए आभार बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति .....

    ReplyDelete
  6. शहीदों को शत् शत् नमन.....
    अच्छी चर्चा .......

    ReplyDelete
  7. बढ़िया और विस्तृत चर्चा।
    शहीदों को शत् शत् नमन।

    ReplyDelete
  8. विस्तार से की गयी प्रासंगिक चर्चा । आभार ।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...