चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Tuesday, April 12, 2011

सरकार की बाउंड्री में अन्ना का चौक्का -- साप्ताहिक काव्य मंच – 42 , चर्चा मंच – 483

नमस्कार , सबसे पहले नवरात्रि की आप सभी को शुभकामनायें …, पिछले सप्ताह राजनैतिक गलियारों में काफी धूम रही ..अब देखना यह है कि जिस जीत पर जनता खुश है उसे सच में खुशी मिलती है या नहीं …लेकिन फिर भी  यह तो मानना पड़ेगा कि जनता चाहे तो सरकार को झुका सकती है. जनता ने एक जुट होने का परिचय तो दे दिया  …चलिए हम भी शुरू करते हैं आज की चर्चा ….एक परिचय से
rama_1.JPG  परिचय( उन्हीं के शब्दों में ) -- मैं डा. रमा द्विवेदी  हूं। बीस वर्षों के हिन्दी अध्यापन के उपरान्त मैंने  स्वैच्छिक अवकाश ले लिया है।स्वतंत्र लेखन में कविता,कहानी,निबन्ध शोध-पत्र आदि में विशेष रुचि है एवं साहित्यिक पत्रिका “पुष्पक” कादम्बिनी क्लब, हैदराबाद की संपादिका हूं। डा० रमा द्विवेदी  जी की  पढ़िए  हाईकू रचनाएँ ..अद्भुत झूठ
१- चलती रहीं
घड़ियों की सुइयाँ
और ज़िन्दगी ।
२- कुछ खुशियाँ
रीतती ज़िन्दगी से
पाने की चाह ।
   मेरा परिचय डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी एमिली डिकिंसन  की कविता का अनुवाद ले कर आये हैं ..

"मेरी नदी-एमिली डिकिंसन"

मेरी नदी भागती है,
जिसकी ओर।
उसका कोई,
ओर न छोर।
Indian-motifs-48  मनोज ब्लॉग पर श्याम नारायण मिश्र की रचना --पापी मन  जाल हो गया
अभी अभी आपने क्या मांग भरी है  /बिखरा सिन्दूर  /  व्योम लाल हो गया /उषा काल हो गया।
My Photo  कुँवर कुसुमेश  जी खूबसूरत गज़ल ले कर आये हैं ..कश्तियाँ मुब्तला किस सफ़र में

डगमगाने लगी है भंवर में.
कश्तियाँ मुब्तला किस सफ़र में.
My Photo  डा० दराल  लाये हैं समाज से जुडी ऐसी रचनाएँ जो ज़िंदगी के आस - पास होती हैं …जागरूक नागरिक की सोच पढ़िए उनकी रचनाओं में ---
  वाणी गीत स्थिरता की बात को समझा रही हैं ध्रुव तारे के माध्यम से …
ध्रुव तारा और धरा
धरा घूमती है सूर्य के चारो और
और अपने अक्ष पर भी
तभी तो मौसम बदलते हैं
दिन- रात होते हैं ...
   अनिता सक्सेना जी  मन के भावों को उकेरती हुई पूछ रही हैं ..

ये कैसा पतझड़

वस्त्रहीन से पेड़ खड़े
पत्ते बिखरे हर ओर पड़े
कौन कहाँ उड़ आया है
ये कैसा पतझड़ छाया है ?
  अनवरत ब्लॉग पर दिनेशराय द्विवेदी  जी  अखिलेश “ अंजुम “ की रचना पढवा रहे हैं     दुर्ग इनका तोड़ना पड़ेगा दोस्तों
आम आदमी का क़त्ल खेल हो न जाए
लोकतंत्र देश में मखौल हो न जाए
और देश फिर कहीं ये जेल हो न जाए
न्यायपालिका कहीं रखैल हो न जाए
मेरा फोटो  पूनम जी  मासूमियत से बता रही हैं कि उनके जीवन में जो रंग हैं वो  किसने भरे हैं ..रंग ..मेरे जीवन के कनवास पर अनामिका जी भटक रही हैं मृग तृष्णा  में ..
मेरे जीवन के / ये कैसे मंथन हैं  / और इस गहरे मंथन में / कैसी प्यास.. / और प्यार की तृष्णा है ....
My Photo  आशीष राय जी की  लेखनी में बहुत से रंग दिखते हैं …सुन्दर शब्दों के समायोजन से लिखी खूबसूरत अभिव्यक्ति पढ़ें दृढ प्रतिज्ञता ..
कहना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ  अभी तो जनता ने अन्ना के साथ कदम मात्र बढ़ाया है ..अभी निरंतर चलना है …

लो  हो गयी आत्म सम्मान यज्ञ  की पूर्णाहुति
वैभव विलासिनी दिल्ली में , जगी जन अनुभूति
कर्मठता की प्रतिमूर्ति रवि , कब ढल सकता है
जलद पटल को भेद , व्योम में संबल भरता है
My Photo  डा० उर्मिला सिंह जी के मन के – मनके  पर खूबसूरत रचना तू मौन  सा  , तू व्योम सा

तू , मौन सा , तू व्यौम सा
तू , निराकार - आकार सा 
            तू , यहां सत्य 
            तू , वहां व्याप्त
मेरा फोटो  ज्ञानचंद मर्मज्ञ  जी की  खूबसूरत गज़ल ..ज़िंदगी है मुस्कुराने के लिए

मुश्किलों  को  आज़माने के लिए
वक़्त की क़ीमत समझ पाया न जो
रह  गया   आँसू   बहाने   के  लिए
मेरा फोटो  वंदना शुक्ल जी ने  " वो " के माध्यम से सार्थक प्रश्न उठाये हैं …क्या आपके पास उत्तर है ?
वो करीब करीब भाग रही थी !
पति के हकों और खुद की विवशताओं  को
पल्लू में बाँध, कमर में खोंसे !
  पारुल पुखराज की रचना पढ़िए
स्मृति दंश
मृत जनों से अधिक निर्मम रहे
गुमशुदा लोगों के स्मृति दंश
जो होतीं उनकी कब्रें
तो देख आते यदा-कदा
  ऋचा  बता रही हैं --
ज़िंदगी का
बहीखाता


सुबहें अब पहले सी नहीं होतीं
कोई बाहों में भर के अब नहीं उठाता
सूरज बहुत देर से निकलता है
दिन के दूसरे या तीसरे पहर
   अरविन्द पांडेय  जी अपनी “ स्वप्न “ शीर्षक कविता के दूसरे खंड में  क्या कह रहे हैं ..पढ़िए  उनके ब्लॉग पर 

सप्तऋषि का प्रशांत आलोक.

धरा का करता था श्रृंगार,
चंद्रिका का सुन्दर विक्षेप.
यथा ,करती है इश्वर-भक्ति,
बुद्धि पर सत्त्व-वृत्ति का लेप.
 My Photo  अमितेश जैन जी की गज़ल …
उंगलियां सब पर उठाते रहे हैं हम ..
उंगलियां सब पर उठाते रहे हैं हम
आईने से चेहरा छुपाते रहे हैं हम
भ्रष्टाचार को हमने ज़रूरत बना लिया
मुल्क को अपने डुबाते रहे हैं हम
 My Photo
   एस० एम० हबीब  उदासी का सबब नहीं जानते  तो ले आये हैं एक गज़ल ..बिना वजह

"अजीब सा एहसास है, बिना वज़ह, शाम कुछ उदास है, बिना वज़ह।
किसी के अरमानों का लहू फैला है, या सुर्ख यूँ ही आकाश है, बिना वज़ह। "
My Photo  शिखा वार्ष्णेय के ख़याल भी जाने कहाँ कहाँ उड़ गए .और कहाँ कहाँ छिटक गए.....ज़रा नज़र डालिए उनके छिटके ख्यालों पर --ख्याली  मटरगश्ती


शब्दों के
लिहाफ को
ओढ़े हुए पड़ी हूँ ,
इस ठिठुरती रूह को
कुछ तो सुकून आये
मेरा फोटो कौशलेन्द्र जी की रचना में जानिये तारीखें कब और कैसे बदल जाती हैं ----
ताकि  जान  न पाए कोई
रात
गहरी ......
और गहरी होती जा रही है

पर घड़ी के काँटे    
चूकते नहीं टोकने से
Mahesh Kushwansh   -कुश्वंश  जी  लाये हैं बेहद  सच्ची  दुनिया

कई शब्द मिलकर 
लेते है एक आकर
उस आकार से झांकती है पंक्तिया
पंक्तियों में  
संवेदनाये
संवेदनाये फिर आकार लेती है 
 My Photo  कैलाश सी० शर्मा जी सपनों की नदी की बात बता रहे हैं –सपने
पाने को छुटकारा
मोड़ दिया था रुख
रेतीले मरुधर में,
पर कहाँ सूख पायी
My Photo  मेरे भाव  के माध्यम से जब किसी लडकी का विवाह होता है तो उसके मन में क्या भाव होते हैं जानिये दहलीज़ पर
ड्योढ़ी  पर खड़ी
करती हूँ  मनन
आशाएं जो जुडी
उनका न हो हनन
 मेरा फोटो  साधना वैद जी मन के भावों को कुछ इस प्रकार कह रही हैं कि --कितना  चाहा
कितना चाहा
कि अपने सामने अपने इतने पास
तुम्हें पा तुम्हें छूकर तुम्हारे सामीप्य की अनुभूति को जी सकूँ,

लेकिन हर बार ना जाने …
आपका साथ, साथ फूलों का  यहाँ पढ़िए राकेश श्रीमाल जी  की कुछ रचनाएँ …
मसलन
कल तुमसे बात करते हुए
मैंने थमा दिए थे
तुम्हारे हाथ में थोड़े से शब्द
My Photo  नित्यानंद ज्ञान आम आदमी की हार को ले कर आये हैं …बहुत सशक्त रचना --

घायल हुए हम और तुम

सिंगुर हो
या नंदीग्राम

या कहीं और 
कहीं नही लड़ी गई
तुम्हारी - हमारी लड़ाई
My Photo अविनाश चन्द्र जी की ओजपूर्ण  रचना पढ़िए ..वह आह्वान  कर रहे हैं ..मनु से
गूँजी मादल की स्वर-लहरी, मनु बाण उठा!
आगे जो आए बेल-वृक्ष-चट्टान उठा।
जो कर्मठ ना हो पुष्प भी नहीं खिलता है,
जीवन उसका जो शाख-प्रशाखें सका हटा।
मेरा फोटो  लगता है नवरात्रि के त्योहार पर सात्विक भोजन लेते लेते वंदना गुप्ता जी को ज़िंदगी भी न जाने कैसी लगने लगी है --

स्वादहीन फ़ीका बासी खाना लगती है ज़िन्दगी

स्वादहीन फ़ीका बासी खाना लगती है ज़िन्दगी
जब तक कि रूह के चौबारे पर ना उतरती है ज़िन्दगी
  सप्तरंगी प्रेम ब्लॉग पर  यशवंत माथुर  की रचना    
तेरी आँखों के ये आँसूं,मेरे दिल को भिगोते हैं,
तुझे याद कर-कर हम भी,रात-रात भर रोते हैं,
  राजभाषा हिंदी  ब्लॉग पर पढ़िए -तृष्णाएँ
ज़िन्दगी एक धोखा है
फिर भी लोग विश्वास करते हैं
कि हम जीते हैं
और न जाने
कब तक जीते रहेंगे
My Photo  चर्चा के समापन पर हास्य कवि  अशोक चक्रधर की रचना ले कर आई हूँ …

सरकार की बाउंड्री में अन्ना का चौका

(नर्तन और परिवर्तन की पूर्ण क्षमता सिर्फ़ युवाओं में होती है।)
दो अप्रेल ग्यारह का इंडिया गेट
और नौ अप्रेल ग्यारह का जंतर-मंतर,
बताइए क्या थीं समानताएं
क्या है अंतर?
और इसी हास्य रस के साथ आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ ….उम्मीद है आपको चर्चा पसंद आएगी …फिर मिलते हैं अगले मंगलवार को …कुछ नयी रचनाओं के साथ …आभार ..नमस्कार - संगीता स्वरुप

27 comments:

  1. बहुत बढ़िया चर्चा..... आभार
    सारे लिनक्स...बेहतरीन

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  2. संगीता जी शुभप्रभात ....!!
    बहुत बढ़िया चर्चा .....
    बहुत अच्छे लिनक्स....धन्यवाद |

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  3. हमेशा की तरह बेहतरीन काव्य लिंक्स से सजी धजी अनुपम चर्चा . मेरी कविता को मंच पर जगह देने के लिए हार्दिक आभार .

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  4. बहुत बढ़िया चर्चा..... आभार
    सारे लिनक्स...बेहतरीन

    ReplyDelete
  5. बड़े सुन्दर लिंक्स।

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन चर्चा ..
    आभार !

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  7. सुंदर काव्यमयी चर्चा । संगीता जी आपके श्रम को नमन

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  8. बहुत परिश्रम से तैयार की गई सुन्दर चर्चा!
    --
    रामनवमी की बधाई स्वीकार करें!

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  9. आकर्षक शैली में दिलचस्प टिप्पणियों के साथ सुन्दर ब्लॉग चर्चा के लिए आभार ।

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  10. बहुत बढ़िया लिंक्स.रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें.

    मुझे स्थान दिया ,धन्यवाद संगीता जी.

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  11. आद. संगीता जी,
    इतने सारे सुन्दर लिक्स से सजे चर्चा मंच की सुन्दरता और गुणवक्ता आज देखते ही बन रही है !
    चर्चा मंच पर मेरी ग़ज़ल को स्थान देने के लिए धन्यवाद !

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  12. काव्य मन संतुष्ट हुआ, धन्यवाद.

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  13. संगीता जी बहुत—बहुत शुक्रिया ।आपने मेरी पोस्ट को चर्चा मंच में स्थान दिया ।
    आपके श्रम को नमन....

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  14. संगीता जी...नमस्कार...हमेशा की तरह बेहतरीन चर्चा..रामनवमी की शुभकामनाएं....सभी लिंक्स एक से एक.....धन्यवाद।

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  15. लिंक्स तो बहुत सुन्दर लगाये हैं मगर अभी पढ नही पाउँगी ……………आपको भी नवरात्रि और रामनवमी की शुभकामनायें………………आज और व्यस्त हूँ उसके बाद पढूँगी…………………बेहतरीन चर्चा के लिये आभार्।

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  16. Charcha Manch ko Salaam....
    Sabhi rachnaaye Bahatreen..
    AABHAAR...
    Dhanybaad...

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  17. राम नवमी पर विभिन्न रंगों से सजी चर्चा.लिंक्स के साथ आपकी टिप्पणियाँ उनका चुनाव करने में पाठक की सहायक होती हैं.सुन्दर सार्थक चर्चा.
    बहुत बहुत आभार.

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  18. This comment has been removed by the author.

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  19. बहुरंगी सुंदर चर्चा |बधाई |
    आशा

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  20. सुन्दर लिंक्स से सजी बहुत बढ़िया चर्चा..मेरी रचना को चर्चा में शामिल करने के लिये धन्यवाद..राम नवमी की हार्दिक शुभकामनायें!

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  21. bahut mehnat se bahut sunder charcha sajayi hai...kuchh links dekh liye hain abhi kuchh par jana baki hai....waqt ki izazet chahiye.

    meri rachna ko lene ke aabhar.

    aapki mehnat ko naman. aur apka dhanywad jo aap ek hi jagah hamare padhne ki samagri ekatrit karva dete hain.

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  22. चर्चा मंच के सभी कवियों को मेरा सादर नमस्कार एवम बधाई . संगीता जी इस मंच पर बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं , आपका शुक्रिया . युवा लेखकों को इस मंच से नई पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा .

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  23. आकर्षक चर्चा है ..एयर बहुत अच्छे लिंक्स.. सादर धन्यवाद

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  24. डा. रमा द्विवेदी...
    चर्चा मंच के सभी रचनाकारों को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
    संगीता जी ,वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण और श्रमसाध्य कार्य कर रहीं हैं उनकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम ही है...इतने सारे रचनाकारों को खोज कर एक जगह सम्मिलित करके लाना और सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करना कठिन कार्य है......संगीता जी की सद्भावना को शत -शत नमन। संगीता जी आपने इस चर्चा मंच पर मुझे स्थान दिया एवं सभी रचनाकारों के लिंक्स देकर परिचय करवाने का एक बहुत बड़ा क्षितिज दिया है ...इस सबके लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार...

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  25. ek me anek rason se sikt kar diyaa aapne ,trelar dikhaayaa ,ab film to dekhni pdegi hi .
    "shukriya !charcha manch ke liye -
    jantaa agar chaahe to sardaar ko bhi hukkaa pilaa sakti hai ."-
    veerubhai.

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  26. अत्यंत खुबसूरत.. अद्भुत चर्चाओं का संकलन है दी... पढ़कर आनंद आ गया...
    म्जुहे शामिल करने के लिए आभार....
    सादर..

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