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Saturday, April 16, 2011

बस अपने जीवन की एक शाम मेरे नाम कर दो ना:-(शनिवासरीय चर्चा)......Er. सत्यम शिवम

*ॐ साई राम*
शायद मन की झूठी आशा है और क्या है,
-----सत्यम शिवम------
"स्पेशल काव्यमयी चर्चा"
ब्लॉगः"अकांक्षा"
ब्लॉगरःआशा जी
नमस्कार दोस्तों मै सत्यम शिवम आपके समक्ष लेकर आया हूँ "स्पेशल काव्यमयी चर्चा" साथ में शनिवासरीय चर्चा...

आज की "स्पेशल काव्यमयी चर्चा" में आशा जी के ब्लाग "अकांक्षा" के दस सुंदर पोस्टों को लिया गया है.......
"स्पेशल काव्यमयी चर्चा" के बारे में अधिक जानकारी हेतु इस लिंक पर जाये...

आप भी अपनी काव्यमयी प्रस्तुति आज ही मुझे भेज दे....
मेरा ईमेल है :-satyamshivam95@gmail.com

अब शुरु करते है,आज की शनिवासरीय चर्चा....
सर्वप्रथम कविताओं से महकी अपनी क्यारी....
*काव्य-रस*
1.)"साहित्य प्रेमी संघ" पर अन्नी श्रीवास्तव जी की सुंदर कविता
2.)साधना वैध जी की "सुधिनामा" पर एक साथ
3.)क्राति वाजपेयी जी की "उन्मुक्त काव्यांजलि" पर 
4.)बाबुषा जी के "कुछ पन्ने" पर
5.)निवेदीता जी के "झरोखा" पर
6.)वंदना जी के "जख्म..जो फूलों ने दिये" से
7.)मिनाक्षी पंत जी की "दुनिया रंग रंगीली" पर
8.)हरदीप कौर सन्धु जी की "शब्दों का उजाला" से
9.)"उच्चारण" पर 
10.)"साहित्य शिल्पी" पर
11.)मानव मेहता जी की "सारांश...एक अंत..." पर
12.)"वटवृक्ष" पर आनंद द्विवेदी जी की कविता
13.)मेरी "काव्य कल्पना" पर
14.)"प्रियंकाभिलाषी" पर
15.)सुनील कुमार जी की "दिल की बातें" से निकली
16.)"21वीं सदी का इंद्रधनुष" पर बबन पांडेय जी का
17.)कुश्वंश जी की "अनुभूतियों का आकाश" पर
18.)निशांत जी के "कविता..एक कोशिश" पर
19.)"Amrita Tanmay" पर
20.)"जो मेरा मन कहे" से यशवंत माथुर जी पूछते है
21.)"लाडली" पर सदा जी कहती है
22.)"निरंतर" की कलम से..." पर डा.राजेंद्र तेला "निरंतर" जी कहते है
23.)महेश बारमाटे "माही" जी लेकर आये है
24.)डा. नागेश पांडेय संजय का गीत
अब कुछ उम्दा लेखों वाली पोस्ट....
*गद्य-रस*
25.)"जिंदगी:जियो हर पल" पर प्रीति टेलर जी मना रही है
26.)"मेरे अरमान..मेरे सपने" पर दर्शन कौर धनोए जी मना रही है
27.)"भारतीय ब्लाग लेखक मंच" पर 
28.)"चलते चलते...." पर केवल राम जी कहते है
29.)"मनोज" पर आचार्य परशुराम राय जी का लेख
30.)"क्रांति स्वर...." पर विजय माथुर जी का सशक्त आलेख
31.)"स्पंदन" पर Shikha varshney जी का
32.)मेरी "गद्य सर्जना" पर 
अब लोट पोट होने की बारी....
*हास्य-रस*
33.)"हास्य फुहार" पर
34.)"सृजन संसार" पर मनोज कुमार जी लेकर आये है
35.)"हास्य व्यंग्य मंच" पर
36.)"बामुलाहीजा" पर
कुछ जिह्वा स्वाद की कहानी.... 
*स्वाद-रस*
37.)"Foodeterian" पर
बाल कोणे की सैर....
*बाल-रस*
38.)"नन्हे मुन्ने" पर बालगीत: डा नागेश पांडेय 'संजय'
39.)"पंखुरी Times...!" पर देखिए
अब कुछ तकनीकि जानकारी....
*तकनीक-रस*
40.)"Hindi Tech - तकनीक हिंदी में" पर
पहली बार प्रेम रस में तकनीक रस का तड़का समाया.....
41.)"प्रेम रस" पर शाह नवाज जी बता रहे है
अंत में अवसान की ओर....
*अध्यात्म-रस*
42.)सदा जी के "सद्विचार" पर
43.)"ॐ शिव माँ" पर राज शिवम जी बता रहे है

चलिए पूरी हुई आज की चर्चा,आप सब आज की चर्चा का आनंद लीजिये.....साथ ही "स्पेशल काव्यमयी चर्चा" के लिए अपने पोस्ट भेजना मत भूलिए....

फिर मिलते है अगले शनिवार को,आपके विचारों के लिए प्रतीक्षारत रहूँगा.....धन्यवाद।
-----सत्यम शिवम-----

41 comments:

  1. एक सुंदर चर्चा के लिए आपका आभार शिवम जी.

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  2. आज के चर्चा मंच पर आपके द्वारा सजाई गयी चर्चा
    आपके साहित्य प्रेम और योग्यता की परिचायक है |
    इतनी कविताओं को जोड़ कर आपके द्वारा निर्मित स्पेशल शनीवारीय चर्चा के लिए आभार के लिए मुझे शब्द ही नहीं मिल रहे हैं |बहुत बहुत आभार मुझे इस मंच पर शामिल करने के लिए |
    आशा

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  3. सुन्दर लिंक्स के साथ बहुत सार्थक चर्चा मंच सजाया है आपने ! मेरी रचना को इसमें आपने स्थान दिया ! आभारी हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !

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  4. बहुत ही सुंदर और सार्थक चर्चा।

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  5. बेहतरीन चर्चा.

    आभार एवं धन्यवाद !

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  6. बहुत सारे लिंक्स और अच्छी रचनाओं को संगृहीत कर सजाई चर्चा ..मेरे कबूतर यहाँ भी पहुँच गए ....इन्हें यहाँ लाने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद ...!

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  7. बेहतरीन चर्चा !

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  8. सुन्दर लिंक्स के साथ बहुत सार्थक चर्चा मंच सजाया है आपने

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  9. चर्चा मंच पर मुझे जगह देने के लिए अनेकानेक धन्यवाद | चर्चा मंच की आज की सभी रचनाएँ बेहद ही खूबसूरत हैं | अनेक रंगों से सजा ये मंच बहुत ही सुन्दर और आकर्षक है | एक बार फिर बहुत बहुत धन्यवाद |

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  10. साधना जी ने ये अज्ञेय जी की ये पंक्तियाँ अपनी कविता में अपनी कहकर जोड़ ली हैं जो अनुचित है - मानव का रचा हुआ सूरज
    मानव को भाप बना कर सोख गया,
    पत्थर पर लिखी हुई
    यह जली हुई छाया
    मानव की साक्षी है

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  11. अज्ञेय जी की यह पूरी कविता भी पाठक पढ़ें- एक दिन सहसा
    सूरज निकला
    अरे क्षितिज पर नहीं,
    नगर के चौक:
    धूप बरसी
    पर अंतरिक्ष से नहीं,
    फटी मिट्टी से।

    छायाएँ मानव-जन की
    दिशाहिन
    सब ओर पड़ीं-वह सूरज
    नहीं उगा था वह पूरब में, वह
    बरसा सहसा
    बीचों-बीच नगर के:
    काल-सूर्य के रथ के
    पहियों के ज्‍यों अरे टूट कर
    बिखर गए हों
    दसों दिशा में।

    कुछ क्षण का वह उदय-अस्‍त!
    केवल एक प्रज्‍वलित क्षण की
    दृष्‍य सोक लेने वाली एक दोपहरी।
    फिर?
    छायाएँ मानव-जन की
    नहीं मिटीं लंबी हो-हो कर:
    मानव ही सब भाप हो गए।
    छायाएँ तो अभी लिखी हैं
    झुलसे हुए पत्‍थरों पर
    उजरी सड़कों की गच पर।

    मानव का रचा हुया सूरज
    मानव को भाप बनाकर सोख गया।
    पत्‍थर पर लिखी हुई यह
    जली हुई छाया
    मानव की साखी है।

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  12. बहुत अच्छे लिंक्स। सुंदर चयन।

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  13. रामेश्वर दयाल कम्बोज जी।
    आपने बहुत सही पकड़ा है।
    नेट पर यह चलन आम हो गया है।
    लोग इस प्रकार की चोरी अक्सर करते हैं।
    मैं इसकी निन्दा करता हूँ।
    --
    सत्यं शिवम् जी ने बहुत बढ़िया लिंक दिये हैं, आज की चर्चा में पढ़ने के लिए।

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  14. बड़े ही अच्छे लिंक मिले।

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  15. १६ अप्रेल --- अभी अभी सहज साहित्य के रचनाकार महोदय से यह जानकारी मिली है कि इस कविता की आरंभिक चार पंक्तियाँ अज्ञेय जी द्वारा रचित हैं ! मैं उनकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ ! इग्नू से डी. सी. एच. का कोर्स करने के दौरान ये पंक्तियाँ हमें एक प्रश्न के रूप में आगे पूरी कविता रचने के लिये दी गयीं थीं जिन्हें मैंने इस रूप में रचा था ! उन्होंने जो जानकारी दी उसके लिये उनकी आभारी हूँ ! मुझे स्वयं यह पता नहीं था कि यह किसकी रचना है वरना इसका उल्लेख अवश्य कर देती ! उनका बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद ! अपनी रचना में यह उल्लेख उनके अनुग्रहपूर्ण सौजन्य से मैंने कर दिया है !

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  16. आदरणीय शास्त्री जी ! आप चर्चामंच के जनक एवं संचालक हैं तथा वरिष्ठ रचनाकार हैं ! किसीके लिये अपशब्दों का प्रयोग करने से पहले यदि बात की तह तक जाकर पहले पूरी जानकारी आप ले लिया करें तो अच्छा होगा ! दोनों रचनाओं में उन पंक्तियों के अलावा क्या आपको और कोई साम्य दिखाई दे रहा है ? आशा है आप भविष्य में ऐसी टिप्पणियाँ करने से पहले विचार अवश्य करेंगे ! सधन्यवाद !

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  17. बहुत सुंदर चर्चा मंच है --जब भी मेरी रचना प्रकाशित होती है तो ख़ुशी से फूली नही समाती हूँ --यहाँ आकर सबकी काव्य शेली पढ़ ने के लिए मिलती है धन्यवाद --

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  18. सार्थक चर्चा ... आभार !

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  19. सर्वप्रथम सभी गुणी जनों को प्रणाम...मै बहुत छोटा हूँ,आप सब के सामने...पर आज जो विवादास्पद माहौल बना है यहाँ उसके लिए कुछ कहने का तो अधिकारी हूँ ही...

    रामेश्वर दयाल कम्बोज जी...को बहुत बहुत आभार और धन्यवाद...त्रुटीयाँ सुधारने वाल और बताने वाला ही हमारा सबसे बड़ा शुभचिंतक होता है...आपने जिस तरह अज्ञेय जी की कविता की कुछ पंक्तियों को साधना जी की कविता में बताया है,वो बिल्कुल सही है.....परन्तु साधना जी जैसी सुधी कवयित्री कभी भी ऐसा कुछ नहीं कर सकती,जब उन्हें किसी और की रचना का सहारा लेना पड़े...वो खुद बहुत ही बेहतरीन लिखती है.....साथ ही उन्होनें ये भी बताया है,कि कैसे उन्हें अज्ञेय जी की ये पंक्तियाँ दी गयी थी और उन्होनें उसपर कविता बनायी थी....उन्होनें ये भी जिक्र किया है,कि उन्हें पता ना था ये अज्ञेय जी की पंक्तियाँ है,गलती से ही सही पर साधना जी ने असलियत से सबको मुखातिब किया है.......साधना जी को बहुत बहुत धन्यवाद...साथ ही शास्त्री जी की टिप्पणी पर जो साधना जी ने जो कहा है मै उसके लिए कम सहमत हूँ...मेरे अनुसार जो जितना श्रेष्ठ और बड़ा होता है,उनके पास जिम्मेवारी का बोझ भी कुछ ज्यादा ही रहता है....शास्त्री जी ने बस इंटरनेट पर हो रही काव्य शैलियों के दुरुपयोग के बारे में बताया है...उन्होनें साधना जी को प्रत्यक्ष में कुछ नहीँ कहा है,क्योंकि मेरे अनुसार ब्लागजगत के ये महान शख्सियस और जनक हर छोटे और बड़े सभी की काबिलीयत के बारे में भलिभाँति जानते है......साधना जी से आग्रह है,कि वो अपनी पोस्ट में अज्ञेय जी का जिक्र कर ले.......

    आशा है आप सब मुझसे सहमत होंगे....आभार और धन्यवाद।

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  20. dhanyawaad bhai...tumhari prerna se hi maine firse likhna suru kiya tha...bahut sunder links hain ye sab...badhaee...

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  21. एक बेहतरीन चर्चा.मेहनत से जुटाए लिंक्स और सुंदरता से सजाये हुए.
    बहुत बहुत आभार आपका.

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  22. आद्ररणीया साधना बैद्य जी।
    सत्यता कहना यदि आपको अपशब्द लगे तो यह गुनाह मैंने किया है। आप तो बहुत बड़ी सवयित्री की बेटी हैं। अपने ऊपर यह लागू न करें। मैंने तो यह सभी के लिए कहा है। आपने सुधार कर लिया है और अपनी गलती स्वीकार कर ली है। बात यहीं पर समाप्त हो जाती है। ॉ
    यह आपकी महानता का परिचायक है।

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  23. बहुत अच्छी चर्चा की आपने.
    'क्रांति स्वर' और 'जो मेरा मन कहे' हमारे दोनों ब्लोग्स को शामिल करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया.

    विजय माथुर
    यशवंत माथुर

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  24. बहुत ही बेहतरीन चर्चा है.... हर एक लिंक बढ़िया रहा...

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  25. सुन्दर लिंको से सजी शानदार चर्चा…………बहुत सुन्दर चर्चा करते है आप्।

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  26. बेहद अछे लिनक्स और बेहद सुन्दर चर्चा..........इस चर्चा में मेरी कलम को स्थान देने के लिए सत्यम जी आपका बहुत शुक्रिया........ :))

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  27. सत्यम जी ,

    बहुत उम्दा और विस्तृत चर्चा ...परिश्रम सेदिये गए लिंक बहुत अच्छे हैं ..आभार

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  28. बेहतरीन...आज के चर्चा मंच पर बहुत सारे लिंक्स और अच्छी रचनाओं को संगृहीत कर आपने पढ़ने को बहुत कुछ नया दिया है.....

    आभार एवं धन्यवाद !!!!

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  29. भाई जी .सुन्दर चर्चा के लिए साधुवाद .किसी बहाने सही , पर चोरी जैसे दुखद विषय पर भी खूब चर्चा हो गयी .पर आपने तो अपने अंदाज से-व्यवहार से सबका मन ही चुरा लिया है . आपको इसकी सजा मिलनी चाहिए .मिल भी रही है . तभी तो सब आपकी चर्चा के प्रत्युत्तर में उसे टिप्पणियों से सजा देते हैं .भई वाह . बधाई हो आपको भी और शास्त्री जी को भी .
    http://abhinavsrijan.blogspot.com/

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  30. आज बहुत दिनों बाद फिर से अपने दोस्तों से मिलने का सोभाग्य मिला | सत्यम में तुम्हारी बहुत शुक्रगुजार हूँ की तुम एक बार फिर मुझे यहाँ ले आये और में इतने सुन्दर - सुन्दर रचनाकारों से फिर से मिल सकी | इतने सुन्दर चर्चा मंच पर लाने का शुक्रिया और हमारी रचना को यहाँ प्रस्तुत करने का भी शुक्रिया |

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  31. आज बहुत दिनों बाद फिर से अपने दोस्तों से मिलने का सोभाग्य मिला | सत्यम में तुम्हारी बहुत शुक्रगुजार हूँ की तुम एक बार फिर मुझे यहाँ ले आये और में इतने सुन्दर - सुन्दर रचनाकारों से फिर से मिल सकी | इतने सुन्दर चर्चा मंच पर लाने का शुक्रिया और हमारी रचना को यहाँ प्रस्तुत करने का भी शुक्रिया |

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  32. सत्यम शिवम् जी आपने सुन्दर लिंक्स के साथ बहुत ही सार्थक चर्चा मंच सजाया है.. बहुत - बहुत आभार..

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  33. आपका आभार
    सभी रचनाएं अच्छी लगी
    ..

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  34. Nice links satyam. I could not read all of them yet I intend to.
    And thank u so much for including all 'absurd' I scribble.

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  35. साधना वैद्य जी!
    आप बार-बार अपनी सफाई क्यों दे रहीं है?
    भूल का सुधार हो गया? बात यहीं पर खत्म हो गई!
    भाई रामेश्वर कम्बोज ने जिस बात की ओर इशारा किया था अगर वो गलत था तो धड़ल्ले के साथ कह देतीं कि कविता में यह अंश मेरा ही है।
    बात को तूल देने से कोई लाभ नही हैं मैंने पहले भी कह दिया है कि बात समाप्त हो गई है।
    मैं अपने चर्चाकार साथियों से निवेदन करूँगा कि यदि किसी ब्लॉगर की पोस्ट पर इस प्रकार का विवाद हो तो उस पोस्ट को चर्चा से तुरन्त हटा दिया करें, साथ ही ऐसी टिप्पणियों को भी अविलम्ब हटा दिया करें जिसके कारण चर्चा मंच पर विवाद होता हो!

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  36. bahut sundar charcha.......naye links ke sath...

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  37. आशा जी को बहुत बहुत बधाई....."स्पेशल काव्यमयी चर्चा" हेतु...बहुत ही आनंद के साथ उनके ब्लाग का मैने "स्पेशल काव्यमयी चर्चा" किया....धन्यवाद।

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  38. आप सबों का बहुमूल्य सुझाव मिला...आभार..शुभरात्रि।

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  39. हमें सम्मलित करने के लिए और इस सुंदर चर्चा के लिए आपका बहुत बहुत आभार शिवमजी

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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