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Thursday, April 14, 2011

एक जरूरी सूचना ...उपलब्धि के सफ़र मे……………चर्चा मंच........485

नमस्कार दोस्तों 
आप सभी का स्वागत है 
चर्चामंच पर 
आइये आज आपको ले चलती हूँ
सबसे पहले उपलब्धि के सफ़र पर
 उसके बाद अपनी
रोज की चर्चा तो है ही 
दोस्तों
आज के ब्लोगर किसी परिचय के मोहताज नहीं ...........आप सब जो चर्चामंच पर चर्चा पढ़ते हैं उस चर्चामंच के जनक यही हैं.............हमारा आपके सबके प्रिय ब्लोगर श्री रूपचंद्र शास्त्री मयंक जी .

शास्त्री जी खटीमा में रहते हैं और राजनीती से उनका जुडाव रहा . उन्होंने एम . ए . हिंदी-संस्कृत से किया 
तकनीकी शिक्षा में आयुर्वेद में स्नातक हैं 
बाकि उच्चारण पत्रिका के संपादक रहे हैं इसके 
अलावा अपने एक स्कूल का भी सञ्चालन करते हैं 
बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं शास्त्री जी

शास्त्री जी के बारे में क्या कहूं शायद मुझसे ज्यादा तो आप सब जानते होंगे उन्हें . उनकी कर्तव्यनिष्ठा , स्नेह और लगन से हम सभी परिचित हैं . आज उपलब्धि के सफ़र में मैं शास्त्री जी की उपलब्धि का  जिक्र कर रही हूँ क्योंकि उनका जिक्र किये बिना ये सफ़र अधूरा ही रहेगा. 
होना तो ये चाहिए था कि सबसे पहले मैं उनकी पुस्तक की ही चर्चा करती मगर किसी कारणवश कर नही पाई उसके लिए शास्त्री जी से क्षमाप्रार्थी हूँ . 

दोस्तों , शास्त्री जी की दो पुस्तकें अभी हाल ही में प्रकाशित हुयीं और उनका भव्य उद्घाटन खटीमा में हुआ और वही से सीधा प्रसारण भी हम सबने देखा. इस बारे में ज्यादातर सभी ब्लोगर जानते हैं.

उनकी ये दो पुस्तकें हैं.
सुख का सूरज 
नन्हे सुमन 


इन दो किताबों में शास्त्री जी ने अपनी ज़िन्दगी के सभी अनुभवों को समेट लिया है ............शास्त्री जी की रचनायें पढने के बाद लगता  है जैसे ज़िन्दगी में कहीं गम नहीं है और यदि है तो उसे मुस्कराहट से दूर किया जा सकता है , सकारात्मकता से हर नैराश्य को दूर किया जा सकता है और यही उनकी रचनाओं की विशेषता है . हर रचना जीवन जीने को प्रेरित करती है ............उन्हें अतुकांत कवितायेँ पसंद नहीं हैं इसलिए शास्त्री जी ने सभी रचनाएं  लयबद्ध व छंदयुक्त लिखी हैं जो गुनगुनाने को मन करने लगता है और अगर देखा जाये तो यही कविता का सौंदर्य होता है ...........जब कविता गुनगुनाने को जी चाहे तो वो कविता सीधा दिल से जुडती है. 


यहाँ तक कि नन्हे सुमन पुस्तक उन्होंने बच्चों को  समर्पित की है . आज के युग में बाल - रचनाओं का अभाव सा पाया जाता है उसमे बच्चों के लिए अति उत्तम कविताओं का संग्रह है ............नन्हे सुमन.
उनकी हर कविता इतनी सहज और सरल है कि बच्चे एक बार पढने पर ही याद कर लें और हर कविता एक स्वच्छ सन्देश देती है साथ ही बच्चों को जागरूकता का सन्देश भी देती है. वरना देखा जाता है कि बच्चों की कवितायेँ इतनी कठिन होती हैं कई बार कि बच्चों को याद करनी मुश्किल होती हैं मगर ये शास्त्री जी का बच्चों के प्रति प्रेम और समर्पण का नतीजा है कि उन्होंने बेहद सरल भाषा में हर चीज पर कविता लिखी है जिसे पढ़कर मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रहा जा सकता.


जहाँ तक सुख का सूरज की बात है तो उसमे यूँ तो हर तरह की कवितायेँ समाहित हैं फिर भी कुछ कवितायेँ गहरा प्रभाव छोडती हैं. गद्दार मेरा वतन बेच देंगे में एक वतनपरस्त का दर्द समाया है तो थकने लगी है ज़िन्दगी में उम्र के एक पड़ाव को बेहद संजीदगी से परिलक्षित किया है . वही दूसरी तरफ प्रीत का मौसम और इश्क की गंध भी बेहद मन को लुभाती है . हर विधा को आयाम दिया है शास्त्री जी ने अपनी पुस्तक में फिर चाहे देश हो , समाज हो , प्रेम हो या मौसम कोई भी कोना, कोई भी रस उनकी दृष्टि से छूटा नहीं है और यही उनके लेखन की व्यापकता का आभास कराता है .

शास्त्री जी से संपर्क तो आप सभी जब चाहे कर सकते हैं और यदि उनकी पुस्तक पढने कि इच्छा हो तो उन्हें मेल पर सूचित कर सकते हैं

"डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक" ,

मोबाइल ........09368499921
                      09997996437
                        09456383898  
उनके सभी ब्लोग्स का तो आप सबको पता ही है 
और यदि ब्लॉग पर जाना हो तो 
यहीं ऊपर सारे ब्लॉग के नाम दिए हुए हैं वहां से जा सकते हैं.
अब चलें चर्चा की ओर
और खुद भी ग़ज़ल बन जायें

 सबको बधाई 
सच कहा 
सार्थक जीवन 

चल एक चटाई और लगा भाई के लिए --- 
ये तो कमाल हो गया
बधाइयां जी बधाइयां


प्रेमचंद युगीन उपन्यास (1918-1936)
 खुद ही जानिए
सच्चाई से जुदा

 अंतहीन सफ़र 
ये तो जरूर पढनी पड़ेंगी 

 जो खुद बोलती है

 यही काफी हैं जीने के लिए
 सब सच दिखा देता है
 बस इसका अहसास होना ही काफी है

 आखिर कब तक ?
 कोई घर भी नहीं
ख्यालों की चाबुक पर 
 लगाइए तो
 कब आती हैं
 मन में बस जाता है

 एक हसीं सपना बन गया

शायद कोई कँवल खिल जाये  

'जाने दो' 
कैसे जाने दें
हिसाब तो चुकता करना है

फिर ना कहीं उलझते हैं

सच मे दरवेश 

आखिर कब तक सहे कोई?

 तो कब सोचें?

Untitled 
कितने विकल्प ढूँढे कोई?

चलते चलते कुछ खास लिंक्स भी देख लीजिये 

 यादों की धरोहर बन गयीं
जब से तुम जुदा हो गयीं 

जीवन सत्य दर्शा दिया 

आकलन कैसे करें ?

 कभी तो काटेगा ही 

जाने क्या क्या कह गयी 
एक वेदना दिल में रह गयी

एक प्रेम पत्र अनदेखे अहसास के नाम
अहसास कब जुदा होते हैं
ये तो दिल के गुलाम होते हैं    

समंदर रेत का

और अफसाना दिल का    

 यूँ ही नाम खुशदीप नही रखा

 अंत में एक जरूरी सूचना 

 व्यर्थ समय न गंवाइए 

जल्दी कीजिये

 हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग  पुस्‍तक में आपका जिक्र और सहयोग http://www.nukkadh.com/2011/04/blog-post_2970.html अपनी बुकिंग सुनिश्चित कीजिए और सबको सूचित भी कीजिए

हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग संबंधी पुस्‍तकों की अग्रिम बुकिंग से कमाई : 

मौका मत चूकें

 अब आज्ञा दीजिये दोस्तों 
हमने तो अपना काम कर दिया
अब आपकी बारी है 
पढने की और अपने
खट्टे मीठे विचारों  
से हमें प्रेरित करने की

32 comments:

  1. चर्चा मंच के जनक शास्त्री जी की विस्तृत जानकारी दी है आपने |उनके बारे में तो उनकी लेखन शैली और रचनाएँ ही बहुत कुछ कह जाती हैं |ऐसे समर्पित व्यक्ति के लिए मन में श्रद्धा उत्पन्न होती है |आज की चर्चाबहुत बढ़िया रही |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  2. आदरणीय श्री रूपचंद जी शास्त्री को उनके दो कविता -संकलनों के प्रकाशन पर बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं चर्चा मंच की दिलचस्प प्रस्तुति के लिए आपका आभार. चर्चा मंच के सभी पाठकों ,लिंक्स से जुड़े सभी ब्लॉगर मित्रों को बैशाखी पर्व और डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती की हार्दिक बधाई

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  3. शास्त्री जी के विस्तृत परिचय को पढ़ कर बहुत प्रसन्नता हुई ! उनकी दोनों पुस्तकों के प्रकाशन पर उन्हें हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें ! इतने सुसज्जित एवं सार्थक चर्चामंच के लिये आपका भी अभिनन्दन ! संविधान के प्रणेता अम्बेडकर साहेब की जयंती पर सभी पाठकों को शुभकामनायें ! सार्थक चर्चा के लिये आपका आभार !

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  4. शास्त्रीजी का कृतित्व ही उनका साक्षात्कार है, विस्तृत परिचय ने व्यक्तित्व को और उभार दिया है। सुन्दर लिंक्स का आभार।

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  5. शास्त्री जी के विस्तृत परिचय को पढ़ कर बहुत प्रसन्नता हुई

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  6. laga ek hawa gujri aur bsahut kuch darwaze rakh gai

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  7. शास्त्री जी के बारे में अपने मन के विचार विस्तार से रखे थे पिछले चर्चा मंच पर । शास्त्री जी एक अद्भुत प्रतिभा के धनी है जिनका समाज के लिए विशेष योगदान है। ये हमारा सौभाग्य है हम उनका स्नेह और आशीर्वाद पा रहे हैं।

    सुन्दर चर्चा।

    .

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  8. आज की चर्चा बहुत बढ़िया रही |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  9. अच्छी परिचर्चा दी है आपने , बेहतरीन साहित्य से परिचित भी हुआ, शास्त्री जी का परिचय करने के लिए धन्यवाद. एक बात सज्ञान में ली शास्त्री जी को अतुकांत कविता पसंद नहीं शायद, इसी लिए में अपनी अतुकांत कविताओ के लिए शास्त्री जी के आशीर्वचन से वंचित रहा, कोशिस करूगा की शास्त्री जी के आशीर्वचन मिले. आपका धन्यवाद

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  10. आदरणीय शास्त्री जी का परिचय जब चर्चा मंच के माध्यम से हुआ तो उन की रचना पढ़ कर मैंने अपना मत उन की सेवा में भेजा उस के दूसरे दिन उन का फोन आया क्या आप डॉ. वेद व्यथित बोल रहे हैं मी लिए यह वाणी अभी अपरिचित थी मी हाँ कहने पर अपना परिचय दिया मैं गदगद हो गया
    यही है उन की पहचान वे लेखक होने से पहले सहृदय व्यक्ति हैं और लेखक होने से जरूरी है व्यक्ति का सहृदयी यानि अच्छा इन्सान होना मेरा मन्ना है कि अच्छा इन्सान ही उत्तम रचनाये देता है और जो सहृदय नही है वह चाहे कुछ भी लिख दे वह प्रभाव शाली नही होगा लेखन का प्रभाव तो सहृदयी व्यक्ति का पड़ता है |
    निश्च्नी ही मैं बिना पढ़े भी कह सकता हूँ कि उन की लेखनी से निकले शब्द ब्रह्म सहोदर हैं
    मेरा शास्त्री को नमन ,साधुवाद व नवीन प्रकाशन के लिय हार्दिक शुभकामनायें
    वन्दना जी निस्वार्थ भाव से शास्त्री के सहयोग से निरंतर साहित्य साधना में निमग्न हैं आप भी साधुवाद स्वीकार करें
    मेरा एक निवेदन वन्दना जी आप से यह है की आप जिस पुस्तक की समीक्षा करें उस पुस्तक से कुछ पंक्तियाँ भी अवश्य उद्धृत करें तो आलोचना सोदाहरण हो जाएगी व पाठ उस का भरपूर लाभ प्राप्त कर सकेंगे
    अन्यथा न लें
    पुन: शुभकामनायें व साधुवाद देता हूँ
    डॉ. वेद व्यथित

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  11. बहुत अच्छे लिंक मिले। कुछ जगह हो आया हूं। कुछ जगह जाना है।
    हमारी पोस्ट को मंच पर सम्मानित कर आपने हमें अनुगृहित किया।

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  12. शास्त्री जी का विस्तृत परिचय और पुस्तक समीक्षा अच्छी लगी ।
    शास्त्री जी वास्तव में बधाई के पात्र हैं ।

    सुन्दर चर्चा के लिए आपको भी बधाई ।

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  13. शानदार चर्चा!!

    मेरे द्वारा प्रस्तुत कविवर 'भृंग' की रचना 'पश्चाताप' को शामिल करने के लिए आभार |

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  14. शास्त्री जी की रचनाएँ मुझे हमेशा प्रभावित करती हैं !
    सरल शब्दों में निहित गहन भाव दिल को छू जाते हैं !
    उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए आभार !
    आज की चर्चा अच्छी लगी !

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  15. वंदना जी आपने जिस तरह से आदरणीय शास्त्री जी की उपलब्धियों से हमे रुबरु कराया है,वो बहुत अच्छा लगा....साथ ही आज की चर्चा बहुत सुदंर लग रही है..धन्यवाद।

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  16. शास्त्री जी के विस्तृत परिचय के लिए आभार . सभी ब्लॉगर मित्रों को बैशाखी पर्व और डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती की हार्दिक बधाई आज की चर्चाबहुत बढ़िया रही सार्थक चर्चा के लिये आपका आभार

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  17. शास्त्री जी के बारे में काफी कुछ जानती हूं पर काफी कुछ जानने को बाकी लगता है वह हैं ही ऐसी शख्सियत...चर्चा बहुत ही उम्दा रही साथ ही मेरी रचना को शामिल करने के लिए शुक्रिया...

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  18. shasri ji ka parichay jaan kar bahut khushi hui , meri unse baate hoti rahti hai , wo bahumukhi pratibha ke dhani hai . mera naman unhe .

    aapne itni acchi vyakya ki hai unki , iske liye aap bahdyi ke paatr hai .

    aapne meri kavita ko apni charch me sthaan diya .. iske liye dil se shukriya ..

    dhanywaad.

    vijay

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  19. शास्त्री जी ब्लॉगिंग के अन्ना हजारे हैं...

    जय हिंद...

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  20. शास्त्री जी के बारे में विस्तृत जानकारी मिली.लिंक्स भी अच्छे हैं.
    आभार.

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  21. अच्छी परिचर्चा दी.
    शास्त्री जी मेरे मित्र हैं.उनके लेखन की सादगी और सहजता का जवाब नहीं.

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  22. ROOP CHAND SHASTRI JI KE VYAKTITV
    AUR KRITITV SE PARICHAY KARWAANE
    KE LIYE AAPKO HARDIK DHANYAWAAD.
    CHARCHAMANCH KEE ULLEKHNIY PRASTUTI
    KE LIYE AAPKO BADHAAEE AUR SHUBH
    KAMNA .

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  23. चर्चा मंच पर यह उपलब्धियों कि श्रृंखला बहुत अच्छी लगी ...डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की कविताएँ सच ही बहुत सार्थक सन्देश देने वाली होती हैं ..साथ ही उनमे गेयता होती है जिसे याद करना सरल होता है ...नन्हे सुमन बच्चों के लिए उत्तम पुस्तक है ...मेरा सौभाग्य कि उनकी दोनों पुस्तक पढने का अवसर मुझे मिला ..उनके इस स्नेह के लिए आभारी हूँ ...

    आज कि चर्चा में बहुत अच्छे लिंक्स मिले ...मुझे भी शामिल करने के लिए आभार

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  24. बहुत ही अच्छी कड़ियाँ दी हैं आपने। एक एक कर सबको देख रहा हूँ। मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार।

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  25. वंदनाजी, देर से चर्चा मंच पर आ सकी, आभार एवं धन्यवाद !

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  26. shastri ji ko ek bar fir se in dono kritiyon ke liye badhayi...bahut acchha vistar se parichay diya unka aur unke lekhan ka.

    vandana ji shukriya aapka ki ham pathko ko ek hi jagah itni ekatrit saamagri padhne ke liye mil jati hai.

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  27. शास्त्रीजी से सम्बन्धित विस्तृत जानकारी से परिपूर्ण सुन्दर लिंक से सुसज्जित चर्चा हेतु आभार...

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  28. चर्चा मंच - एक अच्छा विचार है | परिचर्चा गुलदस्ते जैसी लगती है | बहुत से फूलों से एक जगह परिचय हो जाता है |

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  29. आज की चर्चाबहुत बढ़िया रही| बहुत अच्छे लिंक मिले|शास्त्री जी का परिचय करने के लिए धन्यवाद!मेरा ब्लॉग शामिल करने के लिए आभार !

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  30. आज की चर्चाबहुत बढ़िया रही| बहुत अच्छे लिंक मिले|शास्त्री जी का परिचय करने के लिए धन्यवाद!मेरा ब्लॉग शामिल करने के लिए आभार !

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  31. ohh vndnaa di...aaj ye link milaa to apnaa comment dene pahucnhi hun.......kisi karn vash...pehale aake apne vichaaron ko wayqt nhi kr paayi....
    shastrii ji ki books ke baare me detail me janaaa aaj aaapke karn/....isklke liye shurkiyaa

    meri rchnaa ko sthaan dene ke liye tah e dil se shurkiyaa
    waqt ki aajkal kamii ho rhi he mere paas so./jydaa waqt nhi paa rhi hun

    aapak bahut bahut shurkiya
    take care

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"स्मृति उपवन का अभिमत" (चर्चा अंक-2814)

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