चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Sunday, June 07, 2015

"गंगा के लिए अब कोई भगीरथ नहीं" (चर्चा अंक-1999)

मित्रों।
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

"माटी का गीत" 


गीत सुनाती माटी अपनेगौरव और गुमान की।
दशा सुधारो अब तो लोगोंअपने हिन्दुस्तान की।।

खेतों में उगता है सोनाइधर-उधर क्यों झाँक रहे?
भिक्षुक बनकर हाथ पसारेअम्बर को क्यों ताँक रहे?
आज जरूरत धरती माँ कोबेटों के श्रमदान की।
दशा सुधारो अब तो लोगोंअपने हिन्दुस्तान की...
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विश्वास 

भावनायें सो गयी हैं शब्द सब बद होश हैं ! 
ताल, लय, धुन खो गये हैं गीत सब खामोश हैं... 
Sudhinama पर sadhana vaid 
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संबंधों में कोई लुकाव-छिपाव 

नहीं होना चाहिए 

....आज यू. पी. के एक गांव में घटी घटना की खबर पढ़ी जहां निकाह के लिए गए बन्ने के सर पर से, एक बुजुर्ग महिला द्वारा आशीष देते हुए हाथ फेरने से उसका विग उतर गया। दूल्हे के गंजा होने की बात छिपाई गयी थी, लिहाजा लड़की ने शादी से इंकार कर दिया... 
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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दे देते 

दिया पानी क्या आँखों का रवानी खून की देते 
दिलाती याद उम्र भर निशानी दो जून की देते... 
तमाशा-ए-जिंदगी पर Tushar Rastogi 
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कुछ लोग 

हर सुबह ताज़ी हवा में 
टहलने जाते लोग ..... 
मूंह में दातुन दबाए 
उछलते कूदते कसरत करते लोग ....
जो मेरा मन कहे पर Yashwant Yash 
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It's only for you baby. 

वो सपने मे आकर कहती है, 
"तुम इतना सपना क्यूँ देखते हो?" 
मैं सिर्फ़ इतना कह पता हूँ, 
"तुम जो हर रोज़ आती हो यहाँ." 
न जाने कौन सी कसक है तेरी यादों मे... 
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वक़्त मिला तो सोचा... 

आज कुछ वक़्त मिला तो सोंचा  
ज़िन्दगी के कुछ पन्ने पलट के देख लूँ  
सुना था लोगों को कहते हुए  कि 
ज़िन्दगी इतनी आसाँ नहीं होती... 
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गऊ माँ! 

बहुत आसान है
गाय को माँ कहना
अगर आप गाय पालते नहीं हैं

आप गाय पालें
उस का दूध न निकालें
सारा का सारा उस के बछड़ों के लिए छोड़ दें...

अनवरत
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खरा सच 

अगर प्यार है तो बस सच है … 
अगर मौन है तो बस सच है … 
बस , 
कहीं देर न हो जाये...! 
Sunehra Ehsaas पर Nivedita Dinkar 
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लघु कथा 
*एक जिंदगी सम्मान भरी * 
बात एक अनकही सी
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