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Sunday, August 16, 2015

"मेरा प्यार है मेरा वतन" (चर्चा अंक-2069)

मित्रों।
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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प्यारा भारत, देश हमारा ! 

15 अगस्त सन 1947 को हमारा देश आजाद हुआ। तब से अब तक इतने साल गुजर गए। इन सालो में बढ़ते समय के साथ साथ जहा एक और हमने कला , विज्ञान , साहित्य , अंतरिक्ष , टेक्नोलॉजी ,चिकत्सा ,परमाणु शक्ति , सशक्त वायु , थल और जल सेना बल , कृषि एवं अन्य उधोग के क्षेत्र में तरक्की तो की लेकिन वही दूसरी ओर हम अपने बढ़ते स्वार्थ... 
डायनामिक  पर Manoj Kumar -
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जय,जय, जय माँ भारती 

चंद दोहे देश के उन वीर सपूतों/बालाओं के नाम 
जिन्होंने देश को गुलामी की बेड़ियों से 
मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी। 
उन राष्ट्रभक्तों/राष्ट्रनायकों के नाम 
जिन पर माँ भारती को नाज़ है, 
जिनकी वजह से हम सभी 
भारतीय कहलाने में गर्व महसूस करते हैं।  
बाबू कुँवर सिंह 
सन सत्तावन का ग़दर, चमक उठी तलवार। 
वीर कुँवर रण बाँकुरे, मानी कभी न हार... 
शीराज़ा  पर हिमकर श्याम 
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पन्द्रह अगस्त का दिन 

JHAROKHA पर पूनम श्रीवास्तव 
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देश बचाना है हमको---। 

Fulbagiyaपर डा0 हेमंत कुमार 
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कविता -----ज़िन्दगी 

वीर बहुटी पर निर्मला कपिला 
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जय हिन्द! 

जय हिन्द की सेना 

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 

सभी वीरों को नमन करते हुए देशवासियों को शुभकामनाएं
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मेरी आजादी पर जश्न मना रहे हैं वो 

जो  खुद धार्मिक जंजीरों में जकड़े हुए हैं .....

हाथों से तिरंगा कैसे लहराएंगे 

जो उनसे अपनी कुर्सी पकड़े हुए हैं.....

गर्व से न मुस्कुरा पाएंगे शहादत पर 

जिनके अपने ही घरों में झगड़े हुए हैं.......

कदम ताल मिलाना क्या जाने वो

जिनके शरीर आलसी से अकड़े हुए हैं.......

मैं अपनी हिफ़ाज़त खुद कर सकता हूँ

मेरे संस्कार पुश्तैनी हैं,तगड़े हुए हैं.... 
My Photo
मेरे मन की पर अर्चना चावजी 
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आज़ाद हूँ मैं 

गुलाम सोच की बेड़ियों को काट कहो , 
कि 'आज़ाद हूँ मैं' अब 
तो 'हे भारतवर्ष की सन्नारियों' 
और फिर मनाओ धूम से देश के स्वतंत्रता दिवस के साथ 
खुद की भी आज़ादी का जश्न 
शायद मिल जाए दोनों को ही सम्पूर्णता 
और गर्व से कह सको तुम भी 
ये आधी नहीं पूरी आबादी का है 
नारा जय हिन्द ... 
vandana gupta 
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बालकहानी 

बालकुंज पर सुधाकल्प 
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बूँदें... 

Image result for सावन की बूँदें
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर मधु 
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हँसना, खाँसना, छींकना, 

हिचकी लेना मना है। 

बुधवार की शाम हम घर आ रहे थे। बूँदाबादी हो रही थी। हम उस इलाके से निकल रहे थे जहाँ बहुत से इन्फोर्मेशन टेक्नॉलोजी के दफ्तर हैं। शाम को जबर्दस्त ट्रैफिक हो जाता है। सड़क के दूसरी तरफ एक मोटरसायकिल की दुर्घटना दिखी। अवश्य कोई युवा होगा या होगी। मन ही मन मनाया कि चोट अधिक ना लगी हो... 

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