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Friday, August 28, 2015

"सोच बनती है हकीक़त" (चर्चा अंक-2081)

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है। 
आप सभी को रक्षा-बंधन की 
हार्दिक शुभकामनायें। 

“अगर किसी चीज़ को दिल से चाहो तो सारी कायनात उसे तुम से मिलाने में लग जाती है” ज़रूर सुना होगा. इसी को सिद्धांत के रूप में Law of Attraction कहा जाता है. ये वो सिद्धांत है जो कहता है कि आपकी सोच हकीकत बनती है. Thoughts become things. For example: अगर आप सोचते हैं की आपके पास बहुत पैसा है तो सचमुच आपके पास बहुत पैसा हो जाता है, यदि आप सोचते हैं कि मैं हमेशा गरीबी में ही जीता रह जाऊंगा, तो ये भी सच हो जाता है.
शायद सुनने में अजीब लगे पर ये एक सार्वभौमिक सत्य है. A Universal Truth. यानि हम अपनी सोच के दम पर जो चाहे वो बन सकते हैं. और ये कोई नयी खोज नहीं है भगवान् बुद्ध ने भी कहा है “हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है. “ स्वामी विवेकानंद ने भी यही बात इन शब्दों में कही है ” हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं.”
राजीव कुमार झा 
गर तुमसे यूँ नहीं मिला होता
कोई खटका दिल में नहीं हुआ होता

तुम्हें भुलाने की लाख कोशिश की मैंने
गर मेरे दिल में नश्तर नहीं चुभोया होता
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शकुंतला शर्मा 
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इरा ने पाया
आई ए एस वन
सबको भाया ।
-
कुसुमकली
देख नहीं सकती
कुसुम - कली ।
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राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"
सावन में सिमटी रहती हूँ,
सावन में गुमशुम रहती हूँ.

जब से गए है परदेश सजनवा,
उनसे मिलने की सपने बुनती हूँ.
विभा रानी श्रीवास्तव 
बात बहुत पुरानी है ..... पर लिखना जरूरी है ..... तब हम रक्सौल में रहते थे ..... मेरे ससुर जी व्यापार मंडल के मैनेजर और मेरे बड़े भैया की सिंचाई विभाग में इंजीनियर की नौकरी वहाँ थी ...... बड़े भैया के बॉस थे ; जिनके घर पहली संतान बेटी हुई , दादी और पिता का व्यवहार उस नन्हीं सी जान और उसकी माता के प्रति अच्छा नहीं था ...... घर में ना पैसों की कमी थी ना लड़कियों की संख्या ज्यादा थी ........ सिंचाई विभाग में कार्य करने वालों के घर में नोटों का बिस्तर होता है ...... 
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भिखारियों को भोजन के लिए बाजार वालों ने भण्डारा किया। बाजार को कनातें लगा कर बन्द कर दिया गया था। सड़क को नगर निगम से टैंकर मंगवा कर धुलवाया गया। जब वह सूख ली तो उस पर टाट पट्टियाँ बिछाई गयीं। भोजन के लिए आए भिखारी यह सब कार्रवाई बाजार के कोने में भीड़ लगाए टुकुर टुकुर देखते रहे।
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निधि टंडन 
यायावर हूँ
घुमक्कड़ी...काम मेरा
बेमतलब इधर उधर भटकते रहना
बिन काम के यहाँ वहाँ फिरते रहना
तेरे दिल के सिवा न घर न मकाँ मेरा

पूनम श्रीवास्तव


पापा जी ऐसी कुर्ती ला दो
जिसमें कलफ़ लगी कालर हो
झिलमिल झिलमिल तारों वाली
लटकी उसमें झालर हो।
वीरेन्द्र  कुमार शर्मा
अंग्रेजी भाषा का एक शब्द है :एग् -नास्ट -इक (Agnostic) मोटे अर्थों में ईश्वर की सत्ता में संशय रखने वाला व्यक्ति संशयवादी या फिर अज्ञेयवादी कहा जाता है।व्यापक अर्थों में ये एक ऐसा शख्श होता है जो यह मानता है ईश्वर के अस्तित्व के विषय में -या फिर ईश्वर के विषय में ही कि वह है भी या नहीं है
आकांक्षा सक्सेना 
गुमनाम दिल तेरा दिवाना
तेरी याद ही मेरी जॉन अब मेरा आशियाना
दोस्त, कामयाबी के रास्ते गुमनामी से हैं जाते
तेरी नजरों से रोज मिलकर वापस हम लौट आते
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अनीता जी 
जो एक रस है, अपार है, सदा साथ है. जो जागृत है, प्रेममय है, सदा सुख है. जो सहज है, सदा पुकार दे रहा है, सच्चा मित्र है, वही जीवन में बहार है. जो सदा खुला हुआ द्वार है, सबको समो लेता है, जिसके बिना जीवन असार है. वही जीवन का आधार है.
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रेवा जी 

मन इतनी जल्दी
 कैसे भर लेता है 
ऊँची उड़ान , 
हवा से भी तेज़ 
चलता है , 
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(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 
कितना अद्भुत है यहाँ, रिश्तों का संसार।
जीवन जीने के लिए, रिश्ते हैं आधार।१।
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केवल भारत देश में, रिश्तों का सम्मान।
रक्षाबन्धन पर्व की, अलग अनोखी शान।२।
दर्पण शाह 
चूक गया हूँ
बहुत बड़े मार्जिन से
मैंने कोई ऐसी स्त्री तो नहीं देखी
जिसे दिल तोड़ने की मशीन कहा जाता है
मगर मैं जानता हूँ एक ऐसे शख्स को
जिसे आप उम्मीद तोड़ने की मशीन कह सकते हैं
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कुशवंश 
मैं
जब जन्म ले रहा था
तब एक राजनीतिज्ञ
इस देश मे आरक्षण की एक नई पौध
रोंप रहा था
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कैलाश शर्मा 
अंतस का कोलाहल
रहा अव्यक्त शब्दों में,
कुनमुनाते रहे शब्द
उफ़नते रहे भाव
संध्या शर्मा 
भारत देश उत्सव, पर्वों, रंगों एवं विभिन्न संस्कृतियों का संगम है,यहां साल भर, हर मौसम में प्रतिदिन त्यौहार मनाए जाते हैं यह हमारी
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मधुलिका पटेल
कल बाज़ार में बड़ा शोर था
किस बात का हल्ला चारों ओर था
क्या किया तुम्ने ?
मैने कहा - कल मैने अपनी आँखें
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धन्यबाद, आपका दिन मंगलमय हो। 

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