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Sunday, April 10, 2016

पावन नवरात्रि। की शुभकामनाएं....चर्चा अंक 2308

जय मां हाटेशवरी...

महाशक्ति की आराधना का पर्व है नवरात्रि। तीन हिंदू देवियों - पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ विभिन्न स्वरूपों की उपासना के लिए निर्धारित है, जिन्हें नवदुर्गा
के नाम से जाना जाता है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरूपों की अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरूपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरूपों की पूजा
करते हैं।
आप सभी को....पावन नवरात्रि।  की शुभकामनाएं....
अब चलते हैं आज की चर्चा की ओर....


माता जी की वन्दना "शुभ नवरात्र" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')
बनी चन्द्रघंटा तीजे दिन,
मन्दिर में रहती हो पल-छिन,
सुख-वैभव तुमसे है आता।
दया करो हे दुर्गा माता।।
उच्चारण
रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
 कठपुतलियाँ
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ख़ुद को दर्शक समझनेवाले भी
कोई और नहीं, कठपुतलियाँ ही हैं,
जो कभी खुश हो लेती हैं,
कभी दुःखी हो लेती हैं,
दूसरी कठपुतलियों को देखकर.
कविताएँ
Onkar
ख़ुद्दारिए-अवाम...
साझा आसमान
Suresh Swapnil

दर्द देने वाले ही दवा दे रहे है
आधारशिला
आदमी, आदमी को ही लूटता है
क्‍या खोया क्‍या पाया सोचता है
दुख भीतर ही तो कचोटता है
जीवन में खो जाते है जो जो
उन्‍ही को बार बार खोजता है
आपका ब्लॉग
रौशन जसवाल विक्षिप्‍त

 नव वर्ष की हर्षित बेला...
उत्साह बढे चित चेतन में,
निर्मल रहे आचार।
सफलतायें नित नयी मिले,
बधाई बारम्बार।
मंगलमय हो काज आपके,
सुखी रहे परिवार।
शब्द-शिखर
आकांक्षा यादव 

अमर शहीद मंगल पाण्डेय जी की १५९ वीं पुण्यतिथि
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बुरा-भला
शिवम् मिश्रा

जा रे, मैं नहीं देती अटेंशन...
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'दरअसल, मुझे भी सांस लेने वालों की नहीं जीने वालों की तलाश होती है. अब तुम सांस नहीं ले रही, मुझसे भाग नहीं रही, मुझसे चिपक भी नहीं रही और अब तुम मेरी
पक्की दोस्त हो.' वो मायूस सी आवाज में कहता है. मैं जीवन को माफ़ कर देती हूँ. गलतियाँ किससे नहीं होतीं. कौन है जो गलतियों से खाली है, हम दोनों अब पक्के दोस्त
हैं.
प्रतिभा की दुनिया ...
Pratibha Katiyar
कश्मीर स्वर्ग से नर्क कैसे बना ?
भंडाफोडू
सत्यवादी

सीता और लक्ष्मण सहित श्रीराम का रानियों सहित राजा दशरथ के पास जाकर वनवास के लिए विदा माँगना
श्रद्धा सुमन
Anita
 एही चुटकिया जनम भर अगोरो...
नैना भरे माई दिहिले , सुहाग भरि- भरि हंडा ,
एतन सुहाग गौरा पाइन धूम भइल तिहुँ खण्डा !
मारग में सगरी मेहरियाँ दौरि आवन लगलीं ,
गौरा के चरनन लगि-लगि ,सुहाग पावन लगलीं !
खेतन ते भागी, पनघट ते भगि आई ,घाटन से दउरी धुबिनियाँ ,
गोरस बहिल ,ऐसी ढुलकी मटकिया, तौ हूँ न रुकली गुजरिया ,
दौरी भडभूजी ,मालिन ,कुम्हारिन , बढनी सकेल कामवारी.
शिप्रा की लहरें
प्रतिभा सक्सेना

 कैसे माने कमतर शक्ति ,हर महिका सम नारी की .
भटके न वह मुझे देखकर ,भटके न संतान मेरी ,
जीवन की हर कठिन डगर पर ,इसी में मेहनत नारी की .
................................................................................
मर्यादित जीवन की चाहत ,मर्म है जिसके जीवन का ,
इसीलिए पिंजरे के पंछी से ,तुलना हर नारी की .
..........................................................................
बेहतर हो पुरुषों का जीवन ,मेरे से जो यहाँ जुड़े ,
यही कहानी कहती है ,यहाँ शहादत नारी की .
कौशल
Shalini Kaushik


 हिन्दू नववर्ष 2073 की शुभकामनाएं
यह साल नया कुछ ऐसा कर दे, जीवन में नित मौज रहे
खुशियों से झोली सबकी भरे , उमंग नवेली रोज रहे
हर रोज रहे पक्षी को पानी, रोज भूख को अन्न मिले
रोज ईद संग दीप जले और रोज होली के रंग मिले
मिले मानवता सजी धजी और बेटी का भी मान रहे
खेतीहरों की पीर मिटे और भारत भू जय गान रहे।
काव्य प्रेरणा
 - राम लखारा 'विपुल
दुर्गा दुर्गति नाशिनी
जय हो जय हो माता योगेश्वरी जय हो
तुम्हीं स्वाहा तुम्हीं स्वधा वषट्कार हो
तुम्हीं स्वरा तुम्हीं सुधा तुम्हीं ओंकार हो
तुम्हीं संध्या सावित्री जननी सकार हो
तुम्हीं सृष्टिरूपा थिति रूपा संहार हो
महाविद्या महामेधा महामायाकार हो
महास्मृति महादेवी मोहरूपाकार हो
तुम्हीं कालरात्रि महारात्रि मोहरात्रि हो
तुम्हीं श्री ईश्वरी ह्री बोधरूपा बुद्धि हो
तुम्हीं लज्जा पुष्टि तुष्टि शांति क्षमा हो
तुम्हीं खड्गशूलधारिणी परमेश्वरी हो
जय हो जय हो माता योगेश्वरी जय हो
रचनाकार

ईस्वी केलेंडर से काम चलाते हैं।
मैकाले की शिक्षा याद रही,
वेद-पूराण हम  भूल गये,
बस इंडिया ही याद रहा,
भारत को हम भूल गये।
आया है हमारा नव वर्ष,
चैत्र नवरात्र बताते हैं।
 हम पूरे अभी आजाद कहां
ईस्वी केलेंडर   से काम चलाते हैं। 

मन का मंथन [man ka manthan]
कुलदीप ठाकुर


धन्यवाद।


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