साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Friday, December 08, 2017

"मेरी दो पुस्तकों का विमोचन" (चर्चा अंक-2811)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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स्वप्न मेरे 

Akanksha पर Asha Saxena  
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देखें! कौन अधिक क्रूर!  

अधिक निर्मम! 

पुंजालाल और लोकेश समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें किस अपराध का दण्ड मिला। दोनों सगे भाई हैं। पुंजालाल बड़ा और लोकेश छोटा। बड़ा इक्कीस बरस का और छोटा बीस बरस का। रतलाम से पचास किलो मीटर दूर, तहसील मुख्यालय बाजना के गाँव सालरडोजा के निवासी हैं। सन् 2007 में बीमारी में पिता चल बसा। 2010 में, मजदूरी करते हुए, एक निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरने से माँ दब मरी। तब पुंजालाल चौदह बरस का और लोकेश तेरह बरस का था। स्कूल के उद्घाटन के लिए, 2010 में मुख्यमन्त्री शिवराजसिंह चौहान बाजना पहुँचे... 
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2018 से 2022 तक 

आने वाले बड़े भूकम्प के लिए भी तैयार रहें।इसी सप्ताह, बाली में ज्वालामुखी विस्फोट भी हो चुका तथा केलीफोर्निया के जंगलों में बड़ी आग लग गयी।पिछले कुछ पोस्टों में मैंने लिखा था बड़े भूकम्प के पहले दुनियां को आग एवं ज्वालामुखी विस्फोट का सामना करना पड़ेगा।
डिग्री का जिक्र करते हुए लिखा था कि 30 से 36.40 डिग्री हिमालय क्षेत्र में बड़ा भूकम्प आएगा, आज उत्तरांचल में आया भूकम्प 30.71 डिग्री latitude में आया है,बहुत बड़ा भूकम्प भी इसी डिग्री मध्य आएगा। 
2018 में पृथ्वी पर महाविनाश होगा।... 

rajeev Kulshrestha  
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बनाया कोमल फूल उन्हें 

बनाया कोमल फूल
एक झोंके में धूल। 
फिर भी नहीं समझ रहे हैं
हम सब अपनी भूल।।
वे अनगढ़ माटी के ढेले हैं
उनको तो तपना होगा।
ताप सहनकर जग-भट्ठी में
पक्की ईंट बनना होगा... 
Mamta Tripathi  
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स्मृति हाज़मे की !! 

स्मृतियों को मन की फ़िक्र रहती है 
तभी तो वो उसे अकेला छोड़ती नहीं हैं 
कोई खट्टी-मीठी स्मृति हाज़मे की खाई है 
कई बार जब भी कभी 
अकेलेपन की बदहजमी हुई है 😊 
SADA 
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ग़ज़ल 

किसी को’ भी’ नेता पे’ एतिकाद नहीं 
प्रयास में असफल लोग नामुराद नहीं | 
किये तमाम मनोहर करार, सब गए भूल 
चुनाव बाद, वचन रहनुमा को’ याद नहीं... 
कालीपद "प्रसाद"  

होनी.... 

नहीं करते कल्पना जिसकी,  
जीवन में वो भी घट जाता है,  
ये कैसे हुआ,  
क्यों हुआ,  
आदमी सोचता रह जाता है.... 
kuldeep thakur 

अधजल गगरियां  

यदि कोई पाब्लाजी को अपने पालतू के रख-रखाव, उनके स्वभाव, उनकी देख-रेख के बारे में बताने लगे या सुब्रमनियम जी को फूल-पत्तीयों के बारे में बता उनके चित्र लेने की विधि समझाने लगे, ललित जी को घुम्मकड़ी के फायदे बताने लगे या फोटोग्राफी की बारीकियां समझाने लगे तो उन सब की क्या प्रतिक्रिया होगी ... 

9 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. उम्दा सूत्र एवं प्रस्तुति ... आभार

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  3. पुस्तकों के विमोचन पर बधाई और आभार 'उलूक' के समय और इश्क को आज की चर्चा में जगह देने के लिये आदरणीय।

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  4. बहुत सारी हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय।
    सदैव की भाँति सुंदर रचनाएँ।

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. शुभ संध्य....
    सुंदर....
    अति सुंदर....

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  7. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ।

    ReplyDelete

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"जीवित हुआ बसन्त" (चर्चा अंक-2857)

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