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Saturday, December 16, 2017

"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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हाँ मैं कह न सका  

तुमसे मुझे प्यार है 

स दिन तय कर लिया था कि आज बताना है कि मैं प्यार में भीगा हूँ । सोचने लगा कि कह दूं घर जाकर कि - सुनो तुमसे प्यार है , तुम इंकार न करना । तुम्हारी चपल चँचल निग़ाहों में प्रेम के पक्के वाले रंग मुझे दिखाई दे रहें हैं । घर से कुछ दूर खड़ा होकर घर की तरफ देखा मुड़कर छोटी बहन ने बुलाया - भैया क्या कहीं जा रहे हो ? ये बुक ले आना ठीक है सपाट ज़वाब देकर निकला और रिक्शेवाले से कहा - यादव कॉलोनी ? 
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दो पल की जिंदगी......  

अवधेश प्रसाद 

दो पल की जिंदगी मुझे कोई उधार दे दे 
पतझड़ सी जिंदगी मे थोडी बहार दे दे... 
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal 
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प्रेम का पुनः अंकुरण 

कुछ देर

मेरे पास भी बैठ लो
धूप में
पहले जैसे

जब खनकती चूड़ियों में

समाया रहता था इंद्रधनुष
मौन हो जाती थी पायल
और तुम
अपनी हथेली में
मेरी हथेली को रख
बोने लगती थी
प्रेम के बीज... 
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कागज की टीस 

...जैसे ही कलम ने स्पर्श कागज का पाया 
फिर से ठ्हरों का स्वर कानों से टकराया 
मै हूँ तुम्हारे लेटर पैड का पीला पड गया पन्ना 
कर ही दी तुमने आज पूरी मेरी अधूरी तमन्ना... 
palash "पलाश" पर डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
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क्षणिकाएं 

काटते रहे अहसास 
फसल शब्दों की,और कुचल गए शब्द
मौन के पैरों तले। 
Kailash Sharma 
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धूप एक नन्हीं सी 

चावल हैं चुने हुए
दाल भी भुने हुए
लहसुन की कलियाँ
छीलकर मँगवाई
कटे हुए कटहल में
मसालों के चूरन से
कूकर में झटपट
सब्जी बनाई
देती है बार बार
थकन की दुहाई... 
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर 'मधु'  
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और बचा लो इज़्ज़त -  

बेटी तो फालतू है ना 

भले ही अपराधी 302 आई.पी.सी.में हत्या का दोषी हो सजा भुगते पर ऐसे में अपनी बच्ची की तो झूठी इज़्ज़त के नाम पर आप बलि चढ़ा रहे हैं जबकि अगर समय से अपराध पर कार्यवाही कर अपराधी को एक या तीन साल की सजा करा दी जाये तो अपराधी पर से एकतरफा प्रेम का भूत भी उतर सकता है और अगर नहीं उतरता तो कम से कम ये पछतावा तो नहीं रहता कि हमने अपनी बच्ची को खुद मौत के मुंह में धकेल दिया .अब ये आप पर है कि आप अपने स्नेह-प्यार  के नाम पर अपनी बेटी को बचाएंगे या झूठी इज़्ज़त के नाम पर अपराधी को -सोचिये और निर्णय कीजिये .
शालिनी कौशिक 
     एडवोकेट
  [कानूनी ज्ञान ]  
कानूनी ज्ञान पर Shalini Kaushik 
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गुमनाम हसरतें 

गुमनाम हसरतों को यूँ आवाज़ ना दो ऐ जिंदगी 
कुछ सब्र करो फ़कीरी कहीं तमाशा ना बन जाए 
चादर मैली समझ किस्मत ठुकरा ना जाए 
गुजारिश इसलिए बस इतनी सी हैं 
उन गुमनाम हसरतों को यूँ आवाज़ ना दो ऐ जिंदगी... 
RAAGDEVRAN पर MANOJ KAYAL 
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पुराने अखबार में रात .... 

डॉ. इन्दिरा गुप्ता 

खबर ओढ़ कर सो गई नई खबर 
चुपचाप कल रात फुटपाथ पर पैदा हुई नई खबर 
शीत काल ! सिकुड़ कर अखबार के 
एक कॉलम को भर गई 
पुराने अखबार में 
रात एक ज़िंदगी लिपट गई... 
विविधा.....पर yashoda Agrawal 
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दोहे  

"रखो रेडियो पास में"  

(राधा तिवारी) 


भूल गया है रेडियोअब तो सारा देश।
टीवी पर ही देखतेदुनिया के सन्देश।।

लाये फिर से रेडियोमेरे भाई साब।
मिलता हमको है नहींइसका कोई जवाब।।

8 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. क्रांतिस्वर की यह पोस्ट इस लिंक में देने हेतु आभार एवं धन्यवाद।

    ReplyDelete
  3. बढ़िया लिंक्स

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। 'उलूक' के सूत्र को आज की चर्चा शीर्षक पर स्थान देने के लिये आभार आदरणीय ।

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बहुत रोचक चर्चा... आभार

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  7. रोचक चर्चा
    कमाल का संयोजन अग्रज
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार
    सादर

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"कल-कल शब्द निनाद" (चर्चा अंक-3131)

मित्रों!   रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')    -- दोहे...