साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Friday, December 29, 2017

"गालिब के नाम" (चर्चा अंक-2832)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

रास्ते शाश्वत हैं 

अनुशील पर अनुपमा पाठक 
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A New Year,  

new food resolution:  

Water 

(HINDI ) 

दिनभर में कमसे कम आठ ग्लास पानी हरेक व्यक्ति को पीना चाहिए ,परम्परा से चली आई है यह सीख। और कुछ माहिर तो इससे ज्यादा पानी रोज़ाना पीने के हक़ में रहे हैं। अच्छी खबर यह है आपको अगर मुश्किल लगता है यह काम ,खासकर कुछ ख़ास दिनों में -ज़रूरी नहीं है आप इतना पानी पीयें ही। जलीय अंश से भरपूर फल एवं भाजियों ,सब्ज़ियों तरकारियों से इसकी बीस फीसद तक आपूर्ति हो सकती है... 
Virendra Kumar Sharma 
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हाइकु काव्य  

(हाइकु पर 10 हाइकु) 

1.  
मन के भाव  
छटा जो बिखेरते  
हाइकु होते।  
2.  
चंद अक्षर  
सम्पूर्ण गाथा गहे  
हाइकु प्यारे। ... 
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम  
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बेचैन निगाहें 

जनवरी का सर्द महीना था ,सुबह के दस बज रहे थे और रेलगाड़ी तीव्र गति से चल रही थी वातानुकूल कम्पार्टमेंट होने के कारण ठण्ड का भी कुछ ख़ास असर नही हो रहा था ,दूसरे केबिन से एक करीब दो साल का छोटा सा बच्चा बार बार ऋतु के पास आ रहा था ,कल रात मुम्बई सेन्ट्रल से ऋतु ने हज़रात निजामुदीन के लिए गोलडन टेम्पल मेल गाडी पकड़ी थी ”मै तुम्हे सुबह से फोन लगा रही हूँ... 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi  
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Gataura Men Kavita. 

अब आधी सदी से भी अधिक हो गया। लाल रंग वाले लोहे के रेल पुल की परछाईं तब से अब तक वैसी की वैसी नदी के पानी में उतरा रही है। 
और पुल के तुरन्त बाद वह जो दिख रहा है, गतौरा का रेलवे स्टेशन होगा।पिण्डली भर नदी के पानी में खड़ा होकर मैं,  पुल पर से होकर गुजरने वाली किसी ट्रेन का रास्ता देख रहा था। नदी के पानी में खड़े होकर पुल पर से होकर गुजरने वाली किसी ट्रेन को देखना कैसा लगेगा... 
satish jayaswal  
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पिता.....  

नादिर खान 

विविधा.....पर दिव्या अग्रवाल 
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अबकी बरस 

Purushottam kumar Sinha  
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(राधा तिवारी)  
धर्म हमेशा यही सिखाता 
जीने की है कला बताता 
रामराज्य साकार करो तुम 
खाली झोली सदा भरो तुम 
रावण राज न आने पाये 
दुख के गीत न कोई गाये 
धर्म हमेशा यही सिखाता 
जीने की है कला बताता 

6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. सुन्दर शुक्रवारीय चर्चा अंक में 'गालिबे उलूक' को भी जगह देने के लिये आभार आदरणीय।

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  4. उम्दा चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete

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"जीवित हुआ बसन्त" (चर्चा अंक-2857)

मित्रों! मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- &...