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Saturday, February 17, 2018

"कूटनीति की बात" (चर्चा अंक-2883)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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नई कहानी 

शादी के आठ दिन बाद वह मायके चली गई थी जिसके बाद करीब डेढ़ महीने बाद वापस लौटी। सगाई और शादी के बीच डेढ़ साल का फैसला था ने इजाजत दी थी कि पोस्ट ग्रजुएट कर ले। प्रीवियस ईयर के बाद ही शादी हो गई। इन डेढ़ महीनों में यही जद्दोजहद चलती रही कि फाइनल कहाँ से करे... 
कासे कहूँ? पर kavita verma 
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शीर्षकहीन 

ये अमावस तारीखों में दर्ज हुयी बीत जाएगी, 
पर जो तुम मन में बसा लिए हो वो अमावस कभी क्या बीत पाएगी ? 
जवाब यही कि वक्त तो आने दो ... 
स्पर्श पर deepti sharma  
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खलल 

न नींद न ख्वाब
न आँसू न उल्लास,
वर्षों से उसके नैन कटोरे  
यूँ ही सूने पड़े हैं !

न शिकवा न मुस्कान
न गीत न संवाद,
सालों से उसके शुष्क अधरों के
रिक्त सम्पुट
यूँ ही मौन पड़े हैं... 
Sudhinama पर sadhana vaid 
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दर्द सहा इतना कि हो गया हूँ पत्थर  
ऐ ख़ुदा ! तेरी ख़ुदाई का न रहा डर 
दर्द सहा इतना कि हो गया हूँ पत्थर।

वो अच्छाई का लिबास ओढ़े हुए था 
तिलमिलाना तो था ही उसे सच सुनकर। 

जहाँ से चला था, वहीं लौट आया हूँ 
न मैं बदला, न ही बदला मेरा मुक़द्दर... 
साहित्य सुरभि 
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बहुत प्रभावी !  

सभी छात्रों को सुनना चाहिए! 

मोदी जी ऐसे ही लोगों को पसंद नहीं हैं.कुछ विशेषताएँ उन्हें औरों से अलग करती हैं , आज उन्होंने 'परीक्षा पर चर्चा ' में छात्रों के प्रश्नों के उत्तर इतने प्रभावी दिए हैं , मैं मंत्रमुग्ध होकर सुनती रही और सोचती थी कि ज्ञान तो कई लोगों के पास होता हैलेकिन लोगों से जुड़कर कैसे उस ज्ञान को उन तक पहुँचाया जाए, यह नमो बहुत अच्छी तरह से जानते हैं. २ घंटे तक मंच पर खड़े होकर छात्रों के प्रश्नों के उत्तर देना वह भी पूरे आत्मविश्वास और तर्कपूर्ण ढंग से ! ऐसे हर किसी से कर पाना संभव नहीं है. आज मैं यह कहने में संकोच नहीं कर रही कि पहली बार देश को ऐसा प्रधानमंत्री मिला है जो छात्रों के मन को ... 
Alpana Verma अल्पना वर्मा  
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लखनऊ तवायफ व गजल ----  

महफिल व मजलिस -  

भाग तीन  

शरारती बचपन पर sunil kumar 
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कूड़ाघर 

गैया जातीं कूड़ाघर
रोटी खातीं हैं घर-घर
बीच रास्ते सुस्तातीं
नहीं किसी की रहे खबर।

यही हाल है नगर-नगर
कुत्तों की भी यही डगर
बोरा लादे कुछ बच्चे
बू का जिनपर नहीं असर.... 
प्रतुल वशिष्ठ  
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6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सार्थक बात की गयी है कूटनीति पर , मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

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  3. बहुत सुन्दर सूत्रों से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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"ज्ञान न कोई दान" (चर्चा अंक-3190)

मित्रों!  बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') -- दोहे   &q...