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Saturday, August 10, 2019

"दिया तिरंगा गाड़" (चर्चा अंक- 3423)

स्नेहिल अभिवादन   
शनिवार की चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 - अनीता सैनी 
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दोहे 

"दिया तिरंगा गाड़" 

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

उच्चारण 
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सुनो मेघदूत!
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हिन्दी-आभा*भारत (https://www.हिन...
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इन्सॉल्वेंसी 

चाँद की सहेली 
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टूटन का सौंदर्य 
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 अनुशील  
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क्षणिकाएं 

Kashish - My Poetry 
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रात तो रात है....मेगी आसनानी 

मेरी धरोहर 
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तन्हाई 

मनप्रिया का मन 
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सर्वे भवन्तु सुखिनः 
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डायरी के पन्नों से
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स्त्री कितनी आज़ाद -
   रजनी मल्होत्रा (नैय्यर) 

स्वयं शून्य
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क्या किया जाए कुछ समझ नहीं आ रहा था। रास्ते से गुजरने वाले वाहनों से गाडी को ''टो'' करने की गुजारिश की गयी पर एक तो बैल गाडी, ऊपर से पुरानी, कोई भी साथ ले चलने को राजी नहीं हुआ ! इनको नकारा देख, साथ के संगी-साथी भी एक-एक कर, जिसको जहां, जैसे, जो सुविधा मिली उसे ले, इनको छोड़ आगे बढ़ गए। अब काफिले में वो ही मजबूर लोग रह गए जिनका व्यापारी को छोड़ और कोई ठौर-ठिकाना या उपार्जन का अन्य साधन नहीं था। सूरते हाल यह था कि मालिक खड़े हो, आँखों पर हाथ रखे दूर-दूर तक नजर दौड़ा रहा था कि कोई घोड़ा-गदहा-टट्टू दिख जाए जिससे गाडी आगे रेंग सके..... 
कुछ अलग सा 
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सब काम समेटते हुए अनायास ही अन्विता की निगाहें उड़ते हुए पर्दे से अंदर की तरफ चली गई । निरन्तर आनेवाली उबासियाँ को सायास रोकता हुआ अनिरुद्ध अपना सामान समेट कर बैग में रख रहा था । सच बहुत ध्यान से सामान रखना होता है । अगर एक भी चीज छूट गयी तब बेवजह ही परेशान होंगे दिनभर... 
ओशो ने कहीं कहा है कि किताबें लिखना इंसानों के हाथ में था. लिहाजा उन्होंने अपने को सर्वश्रेष्ठ लिख दिया. अब जब तक किसी दूसरे जानवर के हाथ में किताबों से बेहतर कोई अस्त्र न आ जाए, या दूसरे जानवरों को भी किताबें लिखना न आ जाए, मानकर चलिए कि हमें यही मानना पड़ेगा. अगर हमसे पहले गधों को किताबें लिखनी आ गई होतीं तो जानते हो वो क्या लिखते... 

9 comments:

  1. पठनीय लिंकों के साथ खूबसूरत चर्चा।
    आपका आभार अनीता सैनी जी।

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  2. व्वाहहहह..
    श्रेष्ठ..
    आभार..
    सादर..

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  3. सुन्दर प्रस्तुति अनीता जी।

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  4. सुंदर संकलन ! मुझे भी सम्मिलित करने के लिए हार्दिक आभार !

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बहुत रोचक और सुंदर चर्चा...

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  7. सुन्दर चर्चा

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  8. अनीता सैनी ji,
    ab blog ki duniya me aanaa bahut hi kam ho gyaa he. Bahut dino baad kuch likha to sochaa apne blog ki dhool htaa lun zraa. aapne meri post ko jghaa de ke mehnat vasool krwaa di. bahut bahut dhanywaad aapka...
    सुंदर संकलन ! मुझे भी सम्मिलित करने के लिए हार्दिक आभार !

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