समर्थक

Tuesday, January 18, 2011

मुहब्बत ..तकदीर और कुछ चुप्पियों के बादल ….साप्ताहिक काव्य- मंच - चर्चा मंच – 402

नमस्कार ,लीजिए हाज़िर हूँ साप्ताहिक काव्य मंच ले कर आपके सम्मुख …उत्तरभारत ने ठण्ड का आनंद लिया , मकर संक्रांति ( लोहड़ी , पोंगल ) का त्योहार मनाया गया …और अब तैयारी है गणतंत्र दिवस की …इन त्योहारों के लिए सबको मेरी शुभकामनायें …अभी भी सर्दी काफी है , कभी कभी धुंध छाई रहती है …लेकिन बसंत आने को है ….इसी भाव से आज हम चर्चा प्रारंभ करते हैं डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की  रचना से ----
मेरा परिचय यहाँ भी है!
 डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी को सर्वप्रथम मैं उनकी दो पुस्तकों के विमोचन की हार्दिक बधाई  देती हूँ ….आपकी छंदबद्ध रचनाएँ सुखद लगती हैं …आज की कविता प्रकृति का जीवंत चित्रण कर रही है ..पड़ रहा पाला है

कुहासे की चादर,
धरा पर बिछी हुई।
नभ ने ढाँप ली है,
अमल-धवल रुई।।
 My Photoनीरज गोस्वामी जी की एक खूबसूरत गज़ल ..लोग रह जाते हैं उसको देख कर हैरान से
चाहते हैं लौ लगाना आप गर भगवान से
प्‍यार करना सीखिये पहले हर इक इंसान से
खार के बदले में यारो खार देना सीख लो
गुल दिया करते जो, वो लोग हैं नादान से
राजभाषा पर पढ़िए इस नाचीज़  की रचना अस्तित्त्व 

जब आया पैगाम मेरी मौत का मेरे पास
कहा मैंने ठहर अभी उसका ख़त आएगा
गर ठहर तू जायेगी कुछ देर और
तो क्या धरा पर भूचाल आ जायेगा ।
My Photoनीलेश माथुर लाये हैं अपने संघर्ष की कहानी …मेरा कुछ सामान 

(1) मेरा जूता
मेरे पैर का अंगूठा
अक्सर मेरे
फटे हुए जूते में से
मुँह  निकाल कर झांकता है
My Photo हरकीरत “हीर “ जी से कौन परिचित न होगा …नज़्म लिखती हैं कि दर्द को उड़ेल कर रख देती हैं …मुहब्बत ..तकदीर और कुछ चुप्पियों के बादल   बरसा ही तो दिए हैं …
तुमने कहा था ... / तुम आना मैं मिलूँगा तुम्हें  /  सड़क की उस हद पे  / जहाँ गति खत्म होती है
मैं बरसों तुम्हें ... /  सड़क के हर छोर पे  / तलाशती रही .... /  पर तुम कहीं न मिले  /  बस एक सिरे पे ये आज  /  कब्र मिली है .....
मेरा फोटोवंदना गुप्ता जी यादों की गहनता  में डूबी कह रही हैं ..एक  बार तो कहो जानम
इतनी बेचैनी /तो कभी ना हुयी
इतना तो आँख /कभी ना रोई
कुछ तो कारण होगा /शायद तुमने मुझे
याद किया होगा /है ना जानम!
My Photoरामपती मेरे भाव नाम से लिखती हैं … बहुत खूबसूरत रचना लायी हैं –पाजेब
आँखों ही में गुजरी रात
स्याह अँधेरी और गहन
सूरज से कर मीठी बात 
आओ रश्मि पाजेब पहन
 My Photo पी० सी० गोदियाल जी देशवासियों को चेता रहे हैं कि देश उनको पुकार रहा है …तुम्हें मादरे हिंद पुकार रही है , उठो सपूतों
तुम्हे मादरे हिंद पुकार रही है,उठो सपूतों,
वतन के मसले पर, तुम ढुलमुल कैसे हो !
बहुत लूट लिया देश को इन बत्ती वालों ने,
अब यह सोचो, इनकी बत्ती गुल कैसे हो!!
मेरा फोटोआशाजी की कल्पना की एक उड़ान …
एक तितली उड़ी
एक तितली उड़ी
मधु मॉस में
नीलाम्बर में ,
किसी की तलाश में
श्याम  कोरी “ उदय “ जी का पढ़िए कडुआ सच ..न भी चाहेंगे , फिर भी किसी हाथ से जल जायेंगे
खटमल, काक्रोच, मच्छर, दीमक, मकडी, बिच्छू
हिस्से-बंटवारे में लगे हैं, लोकतंत्र असहाय हुआ है !
My Photo साहिल जी की एक खूबसूरत गज़ल  पढ़िए

तेरी यादों का दिल पे जाल रहा
ज़ख्म पर रेशमी रुमाल रहा
खुद ही दिल से तुझे निकाला था,
ये अलग बात के मलाल रहा
मेरा फोटोहँस राज सुज्ञ साधक से प्रश्न करते हुए जानना चाहते हैं कि -दुर्गम पथ पर तुम न चलोगे कौन चलेगा
कदम कदम पर बिछे हुए है, तीखे तीखे कंकर कंटक।
भ्रांत भयानक पूर्वाग्रह है, और फिरते हैं वंचक।
पर साथी इन बाधाओ को तुम न दलोगे कौन दलेगा
My Photoपंकज शुक्ल जी की एक खूबसूरत गज़ल ..फिर भूलूं  , क्यों याद करूँ
मैं तारे भी तोड़ लाता आसमां में जाकर,
तुम ही छिटक के दूसरे का चांद हो गईं।
घनघोर घटाटोप* से मुझको कहां था डर,
तुम ही चमक के दूर की बरसात हो गईं
मेरा फोटोअनीता निहलानी जी प्रेरणा  देते  हुए सन्देश दे रही हैं ..
गुनगुनी सी साधना छोड़ें आज धधकने दें ज्वाला,
प्यास कुनकुनी प्यास ही नहीं आज छलकने दें प्याला !
भीतर छिपी अनंत शक्तियाँ प्रभु का अकूत खजाना
जितना चाहें उसे उलीचें खत्म न होगा आना
मेरा फोटोपूनम जी  ज़िंदगी की बिसात पर कैसे मोहरे  चलते हैं ..यह बता रही हैं अपनी रचना में -

ज़िन्दगी की बिसात पर
मोहरे इंसानों के चलता है कोई
कभी रिश्तों के रूप में,
कभी दोस्तों के रूप में,
कभी भावनाओं के रूप में,
तो कभी भाग्य के रूप में....
हरीश प्रकाश गुप्त जी धूप के बिम्ब से गहन भाव का एक नवगीत लाये हैं
पूस के जाड़े में
ठिठुर रही धूप।
सुविधा के मद में
नैतिकता
होम हुई
मेरा फोटोसाधना जी का मन अब किसी की आवाज़ से रूकने वाला नहीं …पढ़िए उनकी एक खूबसूरत रचना उड़  चला  मन
इन्द्रधनुषी आसमानों से परे,
प्रणय की मदमस्त तानों से परे,
स्वप्न सुख के बंधनों से मुक्त हो,
कल्पना की वंचनाओं से परे,
उड़ चला मन राह अपनी खोजने,
तुम न अब आवाज़ देकर रोकना !
My Photoमृदुला प्रधान जी की एक बहुत खूबसूरत  रचना- धडकनों की तर्ज़ुमानी धड़कनों की तर्ज़ुमानी,/अ़ब किताबों में/रखा है ,/मैंने भी वह/शीत चखा है . My Photoरचना दीक्षित जी ने निशाना साधा है मीडिया पर और दी है खबर
आसमान में आज परिंदों की खूब आवा-जाई है /वहां पे उन्होंने खूब खलबली मचाई है.
My Photoश्रद्धा जैन  लाईं हैं टूटे हुए दिल की बस इतनी सी कहानी ….

शीशे के बदन को मिली पत्थर की निशानी
टूटे हुए दिल की है बस इतनी-सी कहानी
फिर कोई कबीले से कहीं दूर चला है
बग़िया में किसी फूल पे आई है जवानी
मेरा फोटोअतुल प्रकाश त्रिवेदी जी  की कविताएँ गहन अभिव्यक्ति लिए होती हैं …आप भी पढ़ें …यात्रा
किसी घुमक्कड़ की /सारी संपूर्ण 
निरर्थक यात्रा | / अंतिम पड़ाव  पर किसी 
ने  नहीं  कहा   /फिर मिलेंगे
मेरा फोटोज्ञानचंद मर्मज्ञ द्वारा रचित आतंकवाद..  पर लिखी श्रृंखला का अंतिम पड़ाव
जब से आकाश उनका हुआ है, /पंख   नीलाम  करने  लगे  हैं! /हादसों की ख़बर सुन के बच्चे, /पैदा   होने   से  डरने  लगे  हैं!
My Photoमहेंद्र वर्मा जी गज़ल में किस तरह शाश्वत सत्य को कह रहे हैं ..ज़रा गौर करें ..
ख़ाक है संसार
बुलबुले सी ज़िदगानी, या ख़ुदा,
है कोई झूठी कहानी, या ख़ुदा।
वक़्त की फिरकी उफ़क पर जा रही,
छोड़ती अपनी निशानी, या ख़ुदा।
मेरा फोटोकेवल राम जी कह रहे हैं ..देख लीजिए …. तो चलिए ज़रा देखा जाए
रूठा हूँ तो मनाकर देख लीजिये              

दूर गर हूँ तुमसे पास बुलाकर देख लीजिये 
खफा क्योँ हो तुम, कि हम तुम्हें प्यार नहीं करते 
अपनी अदा-ए-इश्क दिखाकर देख लीजिये
My Photo
मुहब्बत ज़िंदगी का खूबसूरत पहलू है ..यही कह रहे हैं शाहिद मिर्ज़ा जी …अपनी खूबसूरत गज़ल में गुनगुनाएं मुहब्बत में

अजायबघरों में सजाएं मुहब्बत              

कहीं से चलो ढूंढ लाएं मुहब्बत 
तराना दिलों का बनाएं मुहब्बत               
चलो साथ में गुनगुनाएं मुहब्बत
My Photo पूजा उपाध्याय उदासी के कोहरे की चादर और साँस साँस खारा पानी लहरों का महसूस करते हुए कह रही हैं कि ज़िंदगी बड़ा बेमानी सा लफ्ज़ हो गया है -- किनारे पर डूबने की ज़िद
गहरे लाल सूरज के काँधे से  /  रात उतारती है लिबास उदासी का   /  और दुपट्टे की तरह फैला देती है आसमान पर  /  हर बुझती किरण से कोहरे की तरह  /  बरस रही है उदासी
My Photoस्वराज्य करुण देश के नेताओं को भगवदगीता का सार सुना रहे हैं ..
कितनी ज़मीन ले कर जाओगे अनंत यात्रा पर
हे राजन ! तुम और तुम्हारे
दरबारी क्या लेकर आए थे

इस दुनिया में और
क्या लेकर जाओगे यहाँ से
My Photoदिव्या  जी की लेखनी इस बार बादल और जुल्फों पर भी चली है …ज़रा बानगी देखिये -
सौतन जुल्फें
बादल में यूँ छुप-छुप के , जुल्फों की परी आई ।
भीगे हुए लबों पर , है मुस्कान थरथराई।
 My Photoअविनाश चन्द्र बिगुल बजा रहे हैं कि यदि हमें अपने इतिहास और भूगोल बचाए रखने हैं तो समर ही  श्रेयस्कर है ..
अब चीर के सप्त वितानों को,
औ तोड़ के प्रति प्रतानों को।
मधु-संकुल से बाहर निकलो,
रज-विरज में प्राण बहाने को।
My Photoअलोकिता  जला रही हैं आशा का दिया

जब सूरज उगने लगता है
और पंछी  गाने लगते हैं
तब भोर किरण आशा बनके
इस दिल को जगाने लगती है
moon2 मंजु मिश्रा अभिव्यक्ति पर लायी हैं कुछ क्षणिकाएं ..चलो जुगनू बटोरें
रिश्ते,
बुनी हुयी चादर
एक धागा टूटा
बस उधड़ गए
My Photo डा० नूतन जी अपनी बेटी के जन्मदिन पर अपनी भावनाओं का उपहार दे रही हैं .
मुझे  मिली  परी..
तलबल पानी के कोटर में / अन्धकार के गोले में / कुछ धमनियों का शोर था / सिकुड़ी सिमटी /सकुचाई अधखिली / मैं खिलने को, खुलने को बेताब थी / रौशनी के पुंज संग /वो परी आई
My Photoअमृता तन्मय कह रही हैं कि दुनिया ही नहीं घर भी रहस्यमय होता है और यही दावा  भी कर रही हैं

जितनी रहस्यमयी है
घर से बाहर की दुनिया
उससे कहीं ज्यादा
रहस्यमय है -ये घर
मेरा फोटोके० एल० कोरी की एक खूबसूरत गज़ल -ख्वाब में ही सही आके तो मिला कर
कभी मुझ पर भी तू इतनी दुआ कर
ख्वाब में ही सही आके तो मिला कर |
मेरा फोटोअनुपमा पाठक की रचना भक्ति मार्ग को अपनाने को प्रेरित करती है …मुक्ति का सोपान--
सूरज की  /  किरणों सा  /  स्निग्ध  /  चाँद की  /  चांदनी सा  /  सौम्य .
My Photoराज़ी शहाब बहुत सी यादों को समेटे लाये हैं  ये पल
याद आएंगे ये चुलबुले से कुछ पल
दुनिया के झमेलों से थक हार कर
जब उठाएंगे पुरानी डायरी
सच बहुत याद आएंगे ये पल
 मेरा फोटोधीरेन्द्र सिंह जी रचयिता  की कल्पना की उड़ान की बात कह रहे हैं -

सांखल बजती रही भ्रम हवा का हुआ
कल्पनाओं के सृजन की है यही कहानी
डूब अपने में किल्लोल की कमनीयता लिए
रसमयी फुहार चलती और कहीं जिंदगानी
My Photoआज की चर्चा का समापन  मैं प्रवीण पांडेय जी की कविता से करना चाहूंगी  जिसमें उन्होंने मानव के आज के जीवन को समग्रता से समेटा है …
टाटों पर पैबंद लगे हैं
सुख की चाह, राह जीवन की, रुद्ध कंठ है, छंद बँधे हैं।
रेशम की तुम बात कर रहे, टाटों पर पैबन्द लगे हैं।
आशा है आज के मंच पर आपको अपनी पसंद के लिंक्स मिले होंगे …लिंक्स तक पहुँचने के लिए आप चित्र पर भी क्लिक कर सकते हैं ….आपकी प्रतिक्रियाएं हमारा मनोबल बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं … आपके सुझावों का हमेशा स्वागत है ….तो फिर मिलते हैं अगले मंगलवार को एक नयी चर्चा के साथ …नमस्कार ----- संगीता स्वरुप

LinkWithin