समर्थक

Saturday, January 22, 2011

" आज उच्चारण हुआ दो वर्ष का" (चर्चा मंच-40मि6)

मित्रों!
आदर्श नगर आजादपुर मंडी के नजदीक ......

स्थान - शिव मन्दिर शिवाजी रोड आदर्श नगर एक्सटेंसन I

आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के पूर्व में

कल शनिवार दिनांक 22 जनवरी, 2011 को
मुझे इसमें सम्मिलत होने के लिए
आज शाम को ही निकलना पड़ेगा।
इसलिए सीधे-सीधे
कुछ अपनी पसंद की पोस्टों के लिंक आपको दे रहा हूँ!
---------------
उच्चारण

-------------


मनोज कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई।
--------------
मगर चलना कठिन होगा।
---------
सरकार के महँगाई बढ़ाने के कारण ही सबको मौका मिल रहा है।
--------------
हस्तक्षेप को बधाई।
-------------

बामुलाहिजा >> Cartoon by Kirtish Bhatt ...
-----------------------
अपने मन को टटोलिए तो सही।
--------------
बसन्तोत्सव का रंग दिका दिया आपने तो
----------
चाँद से दोस्ती हो हथेली में चाँदनी भर जाये सिरहाने सपना .... 
अब और क्या चाहिए ?
-----------
आप भी कुछ लिखो अमन के पैगाम के लिए...
--------------
कबीर हरि का सिमरनु छाडि कै,राति जगावन जाए॥ 
सरपनि होइ कै अऊतरै, जाइ अपुने खाए॥
--------------------
---------------------

मौसम का हालचाल : 

कवि श्री रूप चन्द्र शास्त्री मयंक स्वर अर्चना चावजी



----------------
बुलबुल के चहकने से - कोयल के कुहुकने से - फूलों के महकने से - समझ गयी तुरंत - लो फिर आ गयी बसंत- लिए संग-संग सुरभि अनंत ...!!!
लो फिर आई बसंत
--------------

मुझे समीर लाल एक शैलीकार लगते हैं: श्री ज्ञानरंजन जी: ‘देख लूँ तो चलूँ’ के विमोचन पर -सुप्रसिद्ध साहित्यकार, अग्रणी कथाकार और पहल के यशस्वी संपादक श्री ज्ञानरंजन जी के मुख्य आथित्य एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ हरि शंकर दुबे की अध्यक्षता मे...
---------------
 इस विरहन की मिलन की आस तुम्हीं हो 
श्याम इस पपीहे की अतृप्त सी भक्तिमय प्यास तुम्हीं हो 
तुम्हीं हो हाँ तुम्हीं हो मेरी नैया के खेवनहार मेरे एकतारे ...
-------------------
*इस समय सर्दियों का मौसम है । 
इसी मौसम में पहले कभी कभार बहँगी पर गज़क - रेवड़ी बेचने वाले 
दीख जाया करते थे। अब वह दीखते तो हैं लेकिन बहँगी की जगह ठेले...
-------------------------
*सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि रस क्या होता है?* 
*कविता पढ़ने या नाटक देखने पर 
पाठक या दर्शक को जो आनन्द मिलता है उसे रस कहते है...
-----------------------
----------------
प्रकृति पहाड़ों से खिलाई फूलों से सजाई ईश्वर ने हमारी यह धरती थी 
जब बनाई कोई कमी न थी छोड़ी 
पर इक ग़लती कर दी थोड़ी दे दी अक्ल हमें ---
-------------------
हर साल 21 जनवरी को अमरीका में ‘नेशनल हगिंग डे’ मनाया जाता है। 
मिलने-जुलने व गले लगने के इस दिन की शुरुआत 25 साल पहले हुई थी।*
--------------------
-----------
-------------------
-------------
--------------
-----------
---------------
-------------------
------------------
--------------------
---------------
---------------------
--------------------
meri pehli kavita
अब दीजिए आज्ञा!
नहीं तो दिल्ली जाने के लिए मेरी बस छूट जाएगी।।

9 comments:

  1. उच्चारण की सालगिरह पर हार्दिक शुभ कामनाएं और बधाई
    आशा

    ReplyDelete
  2. HAPPY BIRTH DAY UCHCHARAN. hahahahaha
    Shastri sir party to banti hai hamari kab de rahe hain? aapka uchcharan 2 saal ka ho gaya

    ReplyDelete
  3. sarthak charcha .ucharan ki doosri varshgath par hardik shubhkamye .

    ReplyDelete
  4. वाह! बहुत सुन्दर चर्चा लगा दी जल्दी जल्दी मे भी…………इतने सुन्दर लिंक्स के साथ्…………आभार है आपका।

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर लिंक सजों कर रख दिया है आपने।
    हमारे ब्लॉग को सम्मान देने के लिए शुक्रिया।

    ReplyDelete
  6. शास्त्री जी ! आज दिल्ली जाने की तैयारी के बावजूद भी आपने काफी लिंक चर्चा में दिए और पोस्ट भी सुन्दर बनी... अब लिंक में जाना होगा... आपको उच्चारण के दो वर्ष पूरे होने में पर बधाई और हार्दिक शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  7. बहुत रोचक चर्चा.सुन्दर लिंक्स.आभार.

    ReplyDelete
  8. sabse pahle uchcharan ka janamdin mubaraq ho.ab yadi aap ki charcha ki bat kee jaye to pahle ki tarah hi rang-birangi saji hui bahut sarthak charcha.bahut achchhe links badhai....

    ReplyDelete
  9. विस्तृत और उपयोगी चर्चा

    ReplyDelete

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin