चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, January 25, 2011

एक गहरी श्वांस ले कर , मनाएं कैसे हम गणतंत्र --साप्ताहिक काव्य-मंच –३३ … चर्चा मंच ४०९

नमस्कार - काव्य की साप्ताहिकी लेकर हाज़िर हूँ … कल गणतंत्र दिवस है ..राजपथ पर परेड की तैयारियां जोर शोर से हैं , विभिन्न राज्यों की खूबसूरत झांकियां निकलेंगी , विद्यालयों के बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम मन को लुभाएगा …सेना के तीनों अंगों का भव्य प्रदर्शन होगा …देश के विकास का जायज़ा लिया जायेगा …पर आम जनता के मन में जो प्रश्न उमड़ते हैं उनको जानिये हमारे रचनाकारों की रचनाओं में ….आज चर्चा का प्रारम्भ कर रहे हैं ऐसी ही एक रचना से …
मेरा परिचय यहाँ भी है!डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की रचना --
मनाएं कैसे हम गणतंत्र -
अंग्रेजी से ओत-प्रोत,
अपने भारत का तन्त्र,
मनाएँ कैसे हम गणतन्त्र।
गिरीश पंकज जी की एक गज़लमुझको मंजिल नहीं , डगर देते जाना
जीने का बस एक हुनर देते जाना
मुझको कोई ख़्वाब इधर देते जाना


बची रहे ये दुनिया हरदम पापों से
ऊपरवाले का इक डर देते जाना
मनोज जी इस बार लाये हैं एक गृहणी के मनोभावों से युक्त रचना ..हाउस वाईफ
फोन.. शांत,
कोने में .. एकांत,
तुम्हारा स्वर आए
तरसती हूं
दिनभर।

करती हूं इंतज़ार
शाम का,
घर आओगे
 शोभना चौरे जी  मैं और तुम के भेद को समाप्त करती हुई कह रही हैं ..कुछ यूँ ही ...
मै तो हूँ तुम्हारी
मै ,
में मुझे
ऐसे खोजते हो
जैसे
रात में धूप खोजते हो ?
मेरा फोटोवंदना जी गणतंत्र दिवस पर आम जनता की वेदना को शब्द दे रही हैंफिर कैसा गणतंत्र प्यारे ?
जो करते  घोटाले 
देश को देते  बेच
उसी को हार पहनाते हैं
देश की खातिर 
जान गंवाने वाले तो
रूखी सूखी खाते हैं
ये कैसा गणतंत्र है प्यारे
ये कैसा गणतंत्र ?
 मेरा फोटोअरुण सी० राय विकास के सरोकारों की बात करते हुए कह रहे हैं …होना  ही था..

होना ही था
जंगलों को तबाह
देने के लिए रास्ता
सडको को /राजमार्गों को
अलग बात है यह
पगडण्डी नहीं मांगती बलिदान
बिठाती है सामंजस्य .
मेरा फोटोडा० शरद सिंह प्रवासी भारतीयों के दर्द को कुछ इस तरह बयाँ कर रही हैं --
घर के बाहर घर की यादें

घर के बाहर  घर की यादें  और अधिक गहराती हैं।
कच्ची इमली, नीम की छाया,  सब की यादें आती हैं।
कैसा  होगा  देश में सूरज, चंदा कैसा दिखता होगा
नदी-ताल की  चंचल  लहरें,  आंखों में छा जाती हैं।
My Photoइमरान अंसारी .मीरा दीवानी के मन के भावों को शब्दों में उतार कह रहे हैं ..तुमको  बाँध चुकी हूँ मन में

ब्लॉग पर ताला जड़ा है ..और रीडर पर पूरी पोस्ट आई नहीं …इस लिए पोस्ट का अंश नहीं उठा सकी …
My Photoपारुल जी ज़िंदगी के बारे में बस कह रही हैं ---उफ़
डूबी सी है खुद के अन्दर
ढूँढती है फिर भी समंदर
जाने क्यों ये खाली जिंदगी
उफ़!ये साली जिंदगी !!
मेरा फोटोमनोज जी का एक ब्लॉग है  विचार ..इस पर मनोज जी ने आशा का संचार करने वाला नवगीत प्रस्तुत किया है
एक गहरी श्वांस  ले कर
एक गहरी श्‍वांस लेकर !
मैं अंधेरे में खड़ा था, रोशनी की आस लेकर।
मिट गया सब तिमिर गहरा
जल  गया   जब   दीप कोई।
दे    गया   था   धवल   मोती
पड़ा   तट   पर    सीप कोई।
उतर आए लो! सितारे झील में आकाश लेकर।
My Photoरचना दीक्षित शून्य को जीवन के जोड़ घटाव में लेकर आई हैं अपनी रचना शून्य  में
जब भी उलझती हूँ,
अंतर्मन की गांठों से.
याद आते हैं आर्य भट्ट,
शून्य के जनेता, प्रणेता
उनका गणित
My Photoअमित चन्द्र अपने ब्लॉग एहसास पर लाये हैं ---याद
याद आता है मुझे
तेरे साथ गुजरा वो जमाना।
तुम्हारा हॅसना, मुस्कुराना
छोटी-छोटी बातों पर
तुम्हारा रूठ जाना।
मेरा फोटो डा०  वर्षा सिंह  गणतंत्र दिवस पर एक विशेष रचना लायी हैं …देव भूमि सा  है देश
गुज़र गया है वक्त जो ज़रा उसे पुकार लो
अतीत की हवेलियों को फिर ज़रा बुहार लो
My Photoपूजा जी रंग भर रही हैं अपने सफ़ेद  आसमां  में
जब भी परेशान होती हूँ
और कुछ सूझता नहीं...
तब आ जाती हूँ
इस सफ़ेद दुनिया में
और भरने लग जाती हूँ
अपना पसंदीदा रंग इसमें...
मेरा फोटोजेन्नी शबनम बता रही हैं कि क्या औकात है आज भी नारी की ….मर्द  ने कहा
मर्द ने कहा...
ऐ औरत,
ख़ामोश होकर मेरी बात सुन
जो कहता हूँ वही कर
मेरे घर में रहना है तो
अपनी औकात में रह
मेरे हिसाब से चल
वरना...
My Photoरानी विशाल जी की कश्मकश  को पढ़िए
यथार्थ और परिकल्पनाओं के अधर
भावनाओं के सागर में उठती लहर
सत्य समझ छद्म आभासों को
पाने को लालायित हुआ ह्रदय
My Photoकविता रावत जी जीवन के फलसफे को बता रही हैं कि- अभी कितना चलना है ..
न बुझते हुए दीपक को देखो
कि अभी उसे कितना जलना है
न उखडती हुई सांसों को देखो
कि अभी उन्हें कितना चलना है
My Photoरवि शंकर जी ने दुकान सजाई है शब्दों की …मैं शब्द बेचता हूँ साहब

जी हाँ ...
मैं शब्द बेचता हूँ साहब... !
चौबीसों घंटे
खुली रहती है मेरी दूकान ...
जब मन चाहे आइये ..
और अपने काम के शब्द
ले जाइए.. !
आखर कलश पर पढ़िए  क्रांति जी की कुछ कविताएँ …अपनी  अपनी धूप . मेरा गाँव , सभ्यता के अवशेष  और इन दिनों
जाने कब तक
जाने कब की,
अपनी-अपनी
धूप है सब की,
जिस को उठाए
फिरते हम-तुम,
कहने को सब
साथ हैं जबकि
My Photoप्रियंका राठौर  अपने ही हाथों अपने सपनों का तर्पण कर रही हैं …टूटते सपनों के साथ

टूटते सपनों के साथ
रिश्ते की चिता जलाती हूँ ,
उस सुलगती अग्नि बीच
खुद ही झुलसती जाती हूँ !
My Photoवंदना सिंह जी की पढ़िए एक गज़ल
यादो के नगर में ये कौन आ गया
दिल  पर ये  कैसा कोहरा छा गया


ढूंढते हो जिसे इन मैली घटाओ में
उस चाँद को रातो का अँधेरा खा गया
Aprna Tripathiअपर्णा त्रिपाठी  पलाश पर लायी हैं प्रकृति के साथ जोडती विरह वर्णन की रचना ---ओढ़े  चूनर
नील गगन के तले धरा पर
पीली चादर सरसों की
ओढे चूनर मानो बिरहन
राह निहारे प्रियतम की
My Photo
संतोष कुमार की बहुत भावमयी प्रस्तुति है ..बेवफा  ज़िंदगी
बेवफा जिंदगी 
ढूंढता दरबदर
इस शहर, उस शहर 
गली-गली, डगर-डगर 
ठोकरें मिली फकत
था आंसुओं का एक नगर
मेरा फोटोअंजना जी दे रही हैं अपने बेटे को सन्देश --बेटू , चलते रहना होगा तुम्हें
चलोगे तो गिरोगे भी,
मगर हर चोट का दर्द सहना होगा तुम्हें,


हर बार उठना होगा,
और चलते रहना होगा तुम्हें,
 मेरा फोटोइस्मत ज़ैदी जी कह रही हैं --- आज कोई तमहीद नहीं ,बस एक ग़ज़ल मुलाहेज़ा फ़रमाएं----बात  अनकही
जब कभी डराती है शब की तीरगी मुझ को
मां ही इक मिनारा है दे जो रौशनी मुझ को


बोलती थीं नज़रें पर लफ़्ज़ बे सदा से थे
वक़्त पर ज़बां ने भी चोट आज दी मुझ को
मेरा फोटोआशाजी कल्पना के सागर में डूब कह रही हैं कि अपने जीवन की एक शाम मेरे नाम कर दो
अपने जीवन की एक शाम
मेरे नाम कर दो
और कुछ दो या ना दो
एक शाम उधार दे दो
मेरा फोटोधीरेन्द्र सिंह जी
शब्दों के चातुर्य से लाये हैं
आस की ज्योति
 नयन नटखट पलक पटापट मन है हतप्रभ
स्मित सिमट होंठों पर नव राग सजाए
साज-सुर संगत करें नित रंगत समेटे
इन्द्रधनुषीय भाल पर रहे बाण चलाए
डा० कविता किरण  बता रही हैं …दिल जलता है दीपक जैसे

पहुंचेगा मंजिल तक जैसे
दिल जलता है दीपक जैसे
मुड-मुड कर वो देख रहा है
उसको मुझ पर हो शक जैसे
My Photoदीप्ति शर्मा की एक संवेदनशील रचना …झरना
क्यूँ दर्द समझ कर भी,
नासमझ बना करते हैं|
वो पत्थर के रोने को
झरना कहा करते हैं
My Photoज्योति डांग अपने अदृश्य ईश्वर के बारे में बता रही हैं ..तुम ईश्वर हो मेरे
एक छोटी मुस्कुराहट
तुम्हारी
बहुत कुछ दे जाती है मुझे
सहती आई हूँ नित
दुनिया की बातें
तेरी हँसी सुकून सा देती है
मेरा फोटोमुकेश कुमार तिवारी जी की रचना पढ़िए गणतंत्र दिवस पर विशेष …
गण पैसा और तंत्र
आज,
फिर मना गणतंत्र दिवस
सुबह से ही रेडियो चीख रहे थे
मॉल्स में भारी छूट मिल रही थी
देशभक्तिं शीतलहर सी फैली हुई थी
स्कूलों से लड्डू खाये बच्चे लौट रहे थे
My Photoसत्यम शिवम बड़ी रूमानी सी  रचना ले कर आये हैं ..
तेरा साथ चाहिए ..
बना लूँ खुशियों का घर मै,थोड़ी सी खुशियाँ और पास चाहिए,
भूला दूँ हर गम एक पल में,बस दर्दभरी आखिरी रात चाहिए।
My Photoउदयवीर सिंह जी अंडमान घूम कर आये हैं ..और वहाँ जो उन्होंने महसूस किया उसे अपनी कविता में उतारा है ..आप भी पढ़ें …अंडमान
नमन       करता     हृदय       तुम्हें  ,
मेरे      स्वाभिमान !
अंडमान  !

विरासत     के     प्रवक्ता  ,प्रलेख,
तेरे पन्नों   पर   किये   गये  ,हस्ताक्षर   
महान   !
My Photo कैलाश सी० शर्मा जी की क्षणिकाएं  
कैसा तीखा वार करा रही हैं ज़रा गौर करें …

(१)
जन जन को पीस रहा 
शासन का तंत्र है,
शायद यही जनतंत्र है.

मेरा फोटोअजय जी रिश्तों की बात कह रहे हैं ..
रिश्ते - दिल और दिमाग
रिश्ते हमे चाहे जितने दर्द दे|
तब भी हम उन्हें दिल से निभाये जाते है ...
वो तो हमारे दिल में रहते है
जिनसे हम रिश्ते बना लेते है ....
 मेरा फोटोSagebob … कुछ अलग सा नाम लगा ..इसी लिए मैंने इसे देवनागरी में नहीं लिखा है ….बहुत गहन रचना है ..शब्दों से परे-

क्योंकि शब्दों के भी पंख निकल आते हैं
शब्द उड़ उड़ के शून्य  में बिखर जाते हैं
कभी पुण्य की, कभी पाप की
परिभाषा में सिमट जाते हैं शब्द
 मेरा फोटोस्वप्निल कुमार “ आतिश “ की एक गज़ल …ये  नयी दौर के उजाले हैं
आस्तीनों में पलने वाले हैं
ये नए दौर के उजाले हैं
आप कहते थे " कौडियाले* हैं"
आज ये सब नसीब वाले हैं
आज  चर्चा का समापन मैं अरविन्द मिश्र जी के ब्लॉग पर लगी रचना से करना चाहूंगी … कविवर सोम ठाकुर जी की यह रचना पढवाने हेतु अरविन्द जी का आभार
नज़रिए हो गए छोटे हमारे ...बौने बड़े दिखने लगे हैं
नजरिये हो गए छोटे हमारे मगर बौने बड़े दिखने लगे हैं
जिए हैं जो पसीने  के सहारे मुसीबत में पड़े  दिखने लगे हैं
समय के पृष्ठ पर हमने लिखी थीं ,छबीले मोरपंखों से ऋचाएं
सुनी थी इस दिशा से उस दिशा तक अंधेरों ने मशालों की कथाये
चर्चा समाप्त करते करते  कुछ नए लिंक्स मिले जो अच्छे लगे ….उनको भी दे रही हूँ …आशा है पसंद आयेंगे --

My Photoअर्चना जी भीष्म से कह रही हैं कि आपने भीषण प्रतिज्ञा न की होती ..काश



My Photoअशोक व्यास जी की एक खूबसूरत रचना …अमृत की प्यास उजागर कर


Veena Srivastava वीना जी लायी हैं ….नया आयाम---- धरा से जुड़ी हकीकत /होती है /नभ से ऊंची / प्यार की पूजा / होती है / ईमान से ऊंची |

My Photoअपर्णा भटनागर बता रही हैं कि  मैं उन्हें जानती हूँ----मैं उन्हें जानती हूँ / उनकी विधवा देह पर / कई रजनीगंधा सरसराते हैं|

My Photoमहेंद्र वर्मा जी गज़ल में बता रहे हैं जीवन की बात

My Photoडा० अजीत तोमर जी की रचना बात कर रही है मुसाफिर की



मेरा फोटोराष्ट्रीय बालिका दिवस पर आकांक्षा यादव जी की कविता पढ़िए --मैं अजन्मी   मैं अजन्मी  / हूँ अंश तुम्हारा / फिर क्यों गैर बनाते हो /है मेरा क्या दोष /जो, ईश्वर की मर्जी झुठलाते हो
काफी कुछ लिंक्स समेट कर आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ ….उम्मीद है आपको आपकी पसंद की रचनाएँ ज़रूर मिलेंगी …आपकी प्रतिक्रियाएं हमारा मनोबल बढ़ाती हैं … लिंक्स तक जाने के लिए चित्रों पर भी क्लिक कर सकते हैं ….फिर मिलते हैं अगले मंगलवार को नयी चर्चा के साथ ..नमस्कार ---- संगीता स्वरुप

45 comments:

  1. aaj ka charcha munch behad sundar hai aur badhai ke kabil hai

    ReplyDelete
  2. aadarniya sangeetaji aapko bhi gantantra ki badhai.very nice post

    ReplyDelete
  3. aadarniya sangeetaji aapko bhi gantantra ki badhai.very nice post

    ReplyDelete
  4. गणतन्त्र दिवस के पूर्व की आपकी यह चरेचा बहुत ही महत्वपूर्ण लिंकों से परिपूर्ण है! इसमें आपका श्रम तथा समर्पण स्तुत्य है!

    ReplyDelete
  5. खास है गणतंत्र दिवस की चर्चा...... बहुत सारे अच्छे लिनक्स के लिए आभार

    ReplyDelete
  6. गणतंत्र दिवस के लिये मेरी ओर से शुभकामनाएं |मैं आभारी हूँ| आपका स्नेह पूर्ण संदेश पा कर आगई हूँ आज के चर्चा मंच की लिंक्स पढ़ने के लिये उन्हें समेटने के लिये |मुझे शामिल करने के लिये आभार
    बहुत अच्छी चर्चा |एक बार पुनः बधाई और आभार आपकी सफलता के लिये |
    आशा

    ReplyDelete
  7. संगीताजी,आप की पोस्ट पताका गणतंत्र दिवस के तिरंगे की मानिंद फहरा रही है. आप की मेहनत और लगन को सलाम. सचमें आप मेरे जैसे असंख्य पाठकों के प्रेरणा स्त्रोत हैं.
    आज के चर्चा मंच में इस नाचीज़ को शामिल करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया.

    ReplyDelete
  8. संगीता जी बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुत की गणतंत्र स्पेशल. मेरी रचना को शामिल करने के लिए धन्यबाद. सारे लिनक्स बेहतरीन होंगे. अभी सभी पर जाना बाकी है. पुरे दिन का होमवर्क सुबह सुबह ही मिल गया. दिन अच्छा गुजरेगा.

    आप सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओं के साथ.

    रचना

    ReplyDelete
  9. सम्पूर्ण समग्र और संतृप्त कर देने वाली चर्चा !

    ReplyDelete
  10. nice charcha ..sabhi ko gantantra divash ki shubhkaamnaayen :)

    ReplyDelete
  11. Adarniya shreshth,

    pranam .

    kavya shilp ke shidhahast hanthon ne
    fir tamir ki hai ek vibhinn aayamon walli,bahu kakshiya sundar imarat .
    shkhad anubhuti.
    aabhar. badhayiyan gantantra ki.

    ReplyDelete
  12. सभी लिनक्स एक से बढ़कर एक है .......आभार

    ReplyDelete
  13. संगीता जी आपने बहुत सुन्दर चर्चा दी . हर एक लिंक बहुत अच्छा लगा अभी सब तो नहीं पढ़े लेकिन आज दिन भर के लिए काफी अच्छी खुराक मिल गई . हमारी रचना को लेने के लिए शुक्रिया

    ReplyDelete
  14. respected madam

    pranam

    sorry,by mistake my comment was
    published via anonymous poit,itis to
    consder by name--udaya veer singh.

    once again thanks. truly you have been done a commendable job for literarians

    ReplyDelete
  15. संगीता जी,

    आपका आभार मेरे ब्लॉग की पोस्ट को यहाँ स्थान देने के लिए.......वाकई आपका ये प्रयास इतने सरे लिनक्स को पढना फिर उनको छांटना ........बहुत मेहनत का काम है......मेरा सलाम है चर्चामंच को और उसके सभी लेखको को......शुभकामनायें|

    ReplyDelete
  16. हमेशा की तरह बेहतरीन ...!

    ReplyDelete
  17. बहुत ही खुबसुरत मंच सजाया है आपने। एक साथ इतने सारे बेहतरीन लिंक। मजा आ गया। मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

    ReplyDelete
  18. बहुत उम्दा लिंक्स ले कर आयी हैं,दी। बहुत अच्छी चर्चा। कुछ नये ब्लॉग्स का पता मिला आपके माध्यम से… बहुत अच्छा लगा उन्हे पढना। और इन सब गुणीजनों की चर्चा में मेरा नाम शामिल करने के लिये आभार।

    चर्चामंच के सभी सदस्यों को भारत के गौरव-गणतंत्र की हार्दिक बधाई।

    ReplyDelete
  19. बहुत-बहुत धन्यवाद इन रचनाओं से मिलवाने के लिए... एवं इस मंच पर स्थान देने के लिए...
    आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

    ReplyDelete
  20. बहुत सुन्दर चर्चा. इक साथ ही बहुत कुछ सहेज लिया आपने...'शब्द-शिखर' की पोस्ट की चर्चा के लिए आभार. अपना स्नेह बनाये रहें.

    ReplyDelete
  21. बहुत ही सुन्दर चर्चा मंच सजाया है काफ़ी बढिया लिंक्स मिले और कुछ नये फ़ोलो भी किये……………बहुत मेहनत की है ……………आपका आभार्।

    ReplyDelete
  22. आज एक राज की बात खोल ही दूं। आप इस मंच को इतने कलरफुल ढंग से, मनोयोग से, मेहनत से सजाती हैं, कि कई बार मन मसोस कर ही रह जाना पड़ा कि इस पर भी स्थान मिले। कविताएं मैं विशेष लिखता नहीं, और आपकी साप्ताहिक समीक्षा कविताओं पर होती है।

    तो विचार पर एक कविता लगाई। पर कई चर्चाकार को मालूम ही नहीं कि मेरा ‘विचार’ भी किसी काम का हो सकता है।

    तो मैंने सोचा कि गृहिणी की व्यथा-कथा लिख दूं .... शायद कुछ गृहिणियों की नज़र पड़ जाए। .... और मैं सफल रहा।

    कविता अच्छी हो या नहीं , इस मंच की रंगीनियत से सराबोर हो वह भी अच्छी लगने लगी है।

    आभार आपका, इतने बेहतरीन मंच को और बेहतरीन बनाने के लिए।

    ReplyDelete
  23. ghar ke net devta ke roothne ke baad aaj bahut dino baad charcha manch aur net jagat par pahunchna ho paya aur vo bhi office ke net maharaz ke zariye.

    Aaj ka charcha manch bahut khoobsoorti se aur mehnat se sajaya hai jo chitthha jagat ki kami ko pura karta hai.

    ReplyDelete
  24. संगीता जी,

    जिस शिद्दत से इतनी विस्तृत चर्चा की हैं उससे आपकी की हुई मेहनत साफ झलकती है। लिंक्स का खज़ाना मिला, अब कल तक ही पूरा पढ़ पाऊँगा।

    चर्चा मंच में स्थान दिये जाने का शुक्रिया।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी
    कवितायन

    ReplyDelete
  25. गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर विभिन्न भावमयी रंगों से सजी प्रस्तुति मनोहारी लगी तथा प्रस्तुति का उत्तरार्ध कई भावनापूर्ण झंकार से मोहित कर रही है। यह प्रस्तुति अपने आप में एक रचना है।

    ReplyDelete
  26. चर्चा मंच ने हफ़्ते भर की भावनाओं से पूर्ण सामग्री उपलब्ध करा दी धन्यवाद संगीता जी ,

    इस मंच पर इतने बड़े साहित्यकारों के साथ शामिल करने का भी शुक्रिया

    ReplyDelete
  27. sangeeta ji,
    meri rachna ko shaamil karne keliye bahut bahut aabhar. yun hin protsaahit karti rahein ummid rahegi. kuchh charchaayen padhi, sabhi bahut badhiya. shubhkaamnaayen.

    ReplyDelete
  28. बहुत सुन्दर चर्चा..अच्छे लिंक्स के साथ उनके बारे में कुछ पंक्तियाँ पोस्ट को जानने में सहायक होती हैं.
    आभार सार्थक चर्चा का.

    ReplyDelete
  29. संगीता जी
    बहुत बहुत धन्यवाद चर्चा में शा मिल करने के लिए |आपकी इस प्यार भरी मेहनत की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है |इतने सारे और खूबसूरत से पेश किये गये लिनक्स के लिए आभार |

    ReplyDelete
  30. बेहद ही उम्दा किस्म की चर्चा की हैं आपने..इसमे मेरी भी रचना शामिल करके आपका शुक्र गुज़ार हूँ।

    आपका ब्लागजगत के समर्पण काबिल-ए-तारीफ हैं सच मे बहुत मेहनत करती है आप और मेरे जैसे अपात्र व्यक्ति को भी अपनी सभा संगत का हिस्सा बनाती रहती है जो सच मे आपका बडप्पन ही है।

    सादर आभार
    डा.अजीत

    ReplyDelete
  31. bahut achche links mile! dhanyawaad ek bar phir meri rachna ko shaamil karne ke liye. Aapke protsahan ke liye abhari hoon.

    ReplyDelete
  32. संगीता जी बहुत ही सुंदर चर्चा है ! बहुत अच्छे लिनक्स मिले ! मेरी कविता को चर्चा मंच पर शामिल करने के आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

    ReplyDelete
  33. नमस्कार संगीता जी...बहुत ही सुंदर चर्चा...मेरी रचना"तेरा साथ चाहिए" को सराहने हेतु...धन्यवाद...बस यूही मेरा उत्साह बढ़ाते रहे........आपका आभार।

    ReplyDelete
  34. आज का चर्चा मंच तो बहुत अच्छा लगा... बहुत ही अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलीं...
    आपको बहुत-बहुत बधाई
    और मेरी रचना को चर्चा मंच का हिस्सा बनाने पर धन्यवाद

    ReplyDelete
  35. रोचक, सार्थ और उपयोगी चर्चा के लिए धन्यवाद।

    मेरी रचना सम्मिलित करने के लिए आभार।

    ReplyDelete
  36. आभार आपका ....इस रचना को इस योग्य समझनेके लिए....साथ ही बेहतरीन रचनाओं तक पहुचाने के लिए शुक्रिया....

    ReplyDelete
  37. संगीता जी, गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !
    बहुत अच्छा लगा चर्चा मंच पर आकर..मेरी रचना को चर्चा में शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद! सबको सहेजने का आपका प्रयास बधाई योग्य है। बहुत ही प्रभावशाली और सार्थक चर्चा रही आज की ।
    आपकी इस प्यार भरी मेहनत की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है।

    ReplyDelete
  38. सुन्दर लिंक्स से सजी बहुत ख़ूबसूरत चर्चा. मेरी प्रस्तुति को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए धन्यवाद...आभार

    ReplyDelete
  39. bahut saarthak posts.. achchhe links ..
    gantantr divas ke liye aapko dher saari shubhkaamnaen!

    ReplyDelete
  40. संगीता स्वरुप जी, चर्चा-मंच पर अपनी रचना का होना एक हृदयस्पर्शी, अद्भुत अनुभव रहता है...मुझे शामिल करने के लिये आभार।

    सचमुच, आप बहुत श्रम करती हैं सभी को वैचारिक स्तर पर परस्पर एक-दूसरे से जोड़ने के लिए। इस बार का संयोजन भी बहुत सार्थक एवं महत्वपूर्ण है।
    आपको बहुत-बहुत बधाई, आभार एवं गणतन्त्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  41. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये .......... चर्चा मंच पर सभी रंग देखकर बहुत आनंद आया .... बहुत विविधता और भावनाओं से ओत प्रोत मंच सजाया आपने .... मेरी कविता को भी स्थान दिया आपने ... बहुत बहुत शुक्रिया .... आप यूं ही प्रोत्सान देती रहे .... बहुत खूब

    ReplyDelete
  42. अरे वाह ! संगीता जी .. चर्चामंच तो बहुत सुन्दर लिंक्स से सजा है...

    ReplyDelete
  43. आज भी यह चर्चा पढ़ रहा हूँ ! बहुत उपयोगी लिंक दिए हैं आपने !

    ReplyDelete
  44. bahut sunder charcha
    meri kavita ko sthan dene ko bahut aabhar
    yuhi margdarsan karte rahe
    ...
    aapka aabhar

    ReplyDelete
  45. संगीता जी! मेरी कविता को चर्चामंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत आभार. व्यस्तता के चलते में समय पर उपस्थित नहीं हो पायी, क्षमा कीजियेगा... आपकी चर्चामंच की प्रस्तुति लाजवाब रहती है, देखकर मन रोमांचित हो उठता है... आप अपना बहुमूल्य समय चर्चामंच को सजाने, सवारने और हम जैसों को प्रोत्साहित करने के लिए करती है इसके लिए मैं आपकी आभारी हूँ... सबसे बड़ी बात आप जैसे सभी वरिष्ट और गुणीजनों के प्रोत्साहन से ही मैं निरंतर ब्लॉग पढने और जुड़े रहने के लिए थोडा बहुत समय निकाल पा रही हूँ ....पुन: आपका आभार

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin