चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Thursday, September 27, 2012

कुत्ते की पूँछ ( चर्चा - 1015 )

आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है 
चलते हैं चर्चा की ओर 
ZEAL
रचनाकार
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SADA
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आज की चर्चा में बस इतना ही 
धन्यवाद 
**********************

38 comments:

  1. बहुत ही चुनकर लाये गये सूत्र हैं, इस चर्चा में।

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  2. शुभप्रभात ....
    उत्तम लिंक्स चयन ...बहुत सुंदर चर्चा ...
    आभार ...

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  3. चर्चा की बहुत सुन्दर प्रस्तुति...! सुप्रभात...!

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  4. सुप्रिय महेंद्र श्रीवास्तव जी !

    आपने जो उत्तर दिया उसका स्वागत है .और जो मैं कह रहा हूँ पूरे उत्तरदायित्व से कह रहा हूँ ,जिसे समझने के लिए आपकों पूरे होशो हवाश में होना होगा .

    आपने कहा मैं किसी विशेष पार्टी के लिए काम करता हूँ .आप ऐसे व्यक्ति को जो किसी पार्टी के लिए काम करता हो मानसिक रूप से बीमार नहीं कह सकते .आप यह सिद्ध करना चाहतें हैं कि मुझे तो भगवान् भी ठीक नहीं कर सकता .कोई मानसिक दिवालिया किसी पार्टी का पेड वर्कर नहीं हो सकता .

    अलबत्ता आप अपने बारे में बताइये आप किस गिरोह के सदस्य हैं .आपकी मानसिकता समझ में नहीं आती आप अपने ही तर्कों को काट रहें हैं .मुझे किसी पार्टी के लिए सक्रीय भी बता रहें हैं मानसिक रोगी भी .

    मेरे विचार से आप क्या और बहुत से लोग भी असहमत हो सकते हैं .

    एक बात बतलादूं आपको ये शुक्र की बात है आप भगवान को तो मानते हैं बस यही एक समानता है मेरे और आप में .हम दोनों भगवान को मानते हैं .

    मैं आपकी तरह किसी संगठन में तो काम नहीं करता पर मेरी संगत अच्छी ज़रूर है .

    Replies

    महेन्द्र श्रीवास्तव25 September 2012 12:06
    गल्ती हो गई शर्मा जी,
    मैं आपको एक पढ़ा लिखा सीरियस ब्लागर समझता था।
    इसलिए कई बार मैने आपकी बातों का जवाब भी देने की कोशिश की।
    सोचा आपकी संगत गलत है, हो जाता है ऐसा, लेकिन मुझे उम्मीद थी
    शायद कुछ बात आपकी समझ में आज जाए।
    लेकिन आप तो कुछ संगठनों के लिए काम करते हैं और वहां फुल टाईमर
    यानि वेतन भोगी हैं। यही अनाप शनाप लिखना ही आपको काम के तौर
    सौंपा गया है। एक बात की मैं दाद देता हूं कि आप ये जाने के बगैर की
    आपको लोग पढ़ते भी हैं या नहीं, कहां कहां जाकर कुछ भी लिखते रहते हैं।
    खैर कोई बात नहीं, ये बीमारी ही ऐसी है। वैसे अब आप में सुधार कभी संभव ही
    नहीं है। सुधार के जो बीज आदमी में होते है, उसके सारे सेल आपके मर
    चुके हैं। माफ कीजिएगा पूछ को सीधा करना मेरे बस की बात नहीं है।
    अब तो ईश्वर से ही प्रार्थना कर सकता हूं कि, शायद वो आपको सद् बुद्धि दे।
    ओ भाई साहब महेंद्र श्रीवास्तव जी हमारी ही बिरादरी के हो इसलिए बतला रहा हूँ "पूछ " और "पूंछ "में फर्क होता है अगर पूंछ बोले तो tail की बात कर रहे हो तो वर्तनी तो शुद्ध कर लो वरना अर्थ का अनर्थ हो जाएगा .

    " माफ कीजिएगा पूछ को सीधा करना मेरे बस की बात नहीं है।
    अब तो ईश्वर से ही प्रार्थना कर सकता हूं कि, शायद वो आपको सद् बुद्धि दे।"

    "पूछ" भाई साहब कहते हैं महत्ता को और वह अर्जित गुण है व्यक्ति विशेष का किसी के कम किए कम न होय .

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  5. दोस्त यही मोहब्बत ,यही प्यार जो आपने ज़ाहिर किया हमसे दिन रात काम करवाता है .आप हमारे लेखन की आंच में समिधा डालतें रहें ,मार्ग निर्देशन करतें रहें .
    सामग्री निकालेंहटाएंस्पैम50
    4627 में से 1-50 1

    अरे-अरे वीरु जी आप कहाँ मीडिया टाइप लोगों के चक्कर में पड कर अपने अनमोल ब्लॉग पर इस प्रकार के लेख लगा रहे हो,मीडिया के लोगों व लेख के चक्कर में ना पडे। इनका अधिकतर विश्वास समाप्त हो गया है। आप अपनी मेडिकल सम्बंधी लेख लगाते रहे। अपना नेक कार्य करते रहे। मेरी संगत अच्छी है पर
    सामग्री निकालें | हटाएं | स्पैम

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  6. दोस्त आपने मामला पूंछ का सुलझा दिया है .सीढ़ी पूंछ वाला स्वान दिखाके .आज से आपकी "पूछ "बढ़ गई समझो .एक सच्चा वाकया सुन लो .बात नोइडा (पश्चिमी उत्तर प्रदेश )के २६ सेकटर की है .हमारी बड़ी बहन रहतीं हैं वहां सो अकसर जब दिल्ली जातें हैं वहां भी आ जातें हैं .एक मर्तबा हमने देखा -एक स्वान बिना टांग उठाए मूत रहा था .

    हमसे रहा न गया .हमने मालिके स्वान से पूछा वाह भाई साहब यह बिना टांग उठाए ही मूत रहा है .कहने लगें इंटेलिजेंस है इसकी .

    तो साहब छूट तो बान भी सकती है ,भारत में ईमानदारी भी आ सकती है ,तपन वाले चंद लोग चाहिए जिन्हें केजरीवाल न बनाया जा सके ,सताया न जा सके .

    कुत्ते की पूंछ

    मसला पूंछ का


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  7. इस सोने की चिड़िया के, सारे ही गहने छीन लिए,
    हीरा-पन्ना, माणिक-मोती, कौओ ने सब बीन लिए,
    शास्त्री जी को इस राष्ट्र के कोटिश :प्रणाम .इतने ओज वाली रचनाएं आप रोज़ परोस रहें हैं इस अलगाव को सुलगाए रखिए ,ये पीजा -पाश्ता ,नंगे कोयल हस्त भागेंगे यहाँ से .

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  8. ऊपर वाली टिपण्णी पूंछ की गफलत में चली आई .माफ़ करना भाई साहब आदमी की "पूछ" कम होने पर पूंछ बहुत तंग करती है स्वत : वक्त बे -वक्त ,मौक़ा बे -मौक़ा हिलती है .कुछ लोग टेढ़ी पूंछ और टेढ़ी खीर दोनों को सीधा करना चाहतें हैं .बान पड़ जाती है इन्हें भी इसीलिए कहा गया -

    बान हारे की बान न जाए ,कुत्ता मूते टांग उठाय .

    पूछ कम होने पर वकत घट जाने पर ,औकात पता चल जाने पर आदमी तरह तरह के प्रपंच करता है .गाली गलौंच पे उतर आता है .पूंछ का स्तेमाल करते हुए अपनी "पूछ " महत्ता बनाए रखना एक कला है .जिसे नहीं आती यह कला वह दुम दबाके भागता है .


    कुत्ते की पूंछ

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  9. लघु कथा नहीं यह हमारे समय का विस्तारित दसतावेज़ है .

    वह उसके थन में मुंह लगा देते. बछड़े की तरह दूध चूसने लगते. तब भी रजनी की आँखें बंद हो जातीं.
    राघव ने जंगल, रजनी और नेट को एक साथ महसूस किया. जंगल उनके लिए आत्मा का एकांत आक्रोड़ था तो रजनी ममता और प्यार की साक्षात् मूर्ति और नेट चापलूसी की पगडंडी.



    आगे पढ़ें: रचनाकार: रमाशंकर शुक्ल की 4 लघुकथाएं http://www.rachanakar.org/2012/09/4.html#ixzz27dNmghf8

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  10. डॉ .भव सिंह बहुत सशक्त कथा है .लघु न कही बस व्यथा कथा है हिंदी के नाम पे चलने वाले ढकोसले की .

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  11. लघु कथा पुराने शत्रु टूटे फूटे पारि तंत्रों की व्यथा है .

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  12. साफ़-सुथरी चर्चा -
    आभार भाई जी ||

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  13. दिलबाग विर्क :

    हार्दिक शुभकामनाएँ!
    हिन्दी का दिवस
    महीना साल ना बनायें
    बस हिन्दी के हो जायें!

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  14. This comment has been removed by the author.

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    1. 500 का आंकडा पार

      504 वाँ भी हाजिर है
      आपकी मित्र मंडली मैं
      अब एक उल्लूक भी
      हो गया शामिल है !

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  15. यवनिका के पार्श्व में
    बहुत खूबसूरत रचना !

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  16. राजस्थान की खेजड़ी

    बचाया है पर्यावरण
    जान ले के हाथ में
    उदाहरण भरे पडे़ हैं
    हजारों इतिहास में
    कट रहे हैं पेड़ उतने ही
    अब हास परिहास में !

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  17. सृष्टि की दृष्टिजन्य निरन्तरता

    बहुत सुंदर !

    पूर्णता को प्राप्त करता है
    अपूर्ण ईश्वर हो जाता है
    जब तक अपूर्ण रहता है
    आस पास नजर आता है
    पूर्ण होते ही अपूर्ण
    अनंत हो जाता है !!

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  18. एस एम एस लीला

    तब तक सब बहुत अच्छा है
    जब तक अति नहीं करता है !

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  19. विडिओ कन्वर्टर
    उपयोगी जानकारी !

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  20. This comment has been removed by the author.

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  21. मसला पूंछ का

    इसीलिये भैय्या वीरू
    हमने अपनी पूँछ
    बीबी से पूछ कर
    कभी का कटवा ली
    अब सीधी करने की
    कोशिश भी नहीं करती
    पूँछ हमारी घरवाली
    बाकी किसी को
    हम अपनी पूँछ
    अब नहीं दिखाते
    जो देखना चाहता भी है
    उसके धौरे हम नहीं जाते !!

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  22. तुम कहते हो :

    और धड़कन तो
    भूलने और याद
    करने की चीज नहीं
    स्वत:स्फूर्त है
    जिंदगी है !

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  23. कुछ रिश्ते

    बहुत सुंदर!

    कुछ रिश्ते
    इस किताब के
    जिल्द के
    उस किताब से
    होते हैं
    क्योंकि दोनो
    किताबों के जिल्द
    एक ही अखबार
    से लगाये
    गये होते हैं !

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  24. ऎग्रीगेटर :

    क्या फर्क पड़ता है
    धुऎं के बादल से
    छिपा भी दिया जाये
    आसमान परिभाषित
    नहीं होता सीमाओं से
    ले लो कुछ क्षण का
    चैन अगर इतने से
    ही तुम्हें चैन आ जाये !

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  25. प्यारी सजनी

    तस्वीर किसी और की लगाई है
    कविता किसी और पर बनाई है !
    बहुत अच्छी है !

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  26. बेहतरीन ब्लोगों का संग्रह है चर्चामंच, आज के भी लिंक्स बहुत अच्छे हैं.

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  27. वाकई बहुत खूब चर्चा सजी है आज.और लिंक्स भी एक स बढ़कर एक हैं.

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  28. बहुत सुंदर चर्चा

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  29. हर चित्र (लिंक) कुछ कहता सा..सुन्दर चर्चा.

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  30. बेहतरीन लिंक्स पढ़ने को मिले,अचानक यहाँ अपनी रचना को देखकर मन खुश हो गया,
    चर्चामंच द्वारा मेरी पोस्ट के प्रकासन की सूचना नही मिली,,,,

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  31. Hi I come 1st time on your Blog charcha manch.or bdi khushi hui yahan par tarah tarah ki blogs ke links dekh kar.Mene haal hi ek Online Education Blog shuru kiya hai.mujhe bdi khushi hogi agr aap use bhi apne manch par shamil kren.Thanks.
    uska link ye hai : http://online-elearn.blogspot.com/

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  32. वाह ... बेहतरीन चर्चा एवं लिंक्‍स

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  33. बेहतरीन लिंक्स ..सुन्दर चर्चा सुन्दर मंच...

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  34. sundar sangrah..uttam rachanyen..bahut bahut sadhuwad aapka.

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