साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Saturday, October 08, 2016

"जय जय हे जगदम्बे" (चर्चा अंक-2489)

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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भगवती दुर्गा संगठित शक्ति प्रतीक हैं 

मानव की प्रकृति हमेशा शक्ति की साधना ही रही है। महाशक्ति ही सर्व रूप प्रकृति की आधारभूत होने से महाकारक है, महाधीश्वरीय है, यही सृजन-संहार कारिणी नारायणी शक्ति है और यही प्रकृति के विस्तार के समय भर्ता तथा भोक्ता होती है। यही दस महाविद्या और नौ देवी हैं। यही मातृ-शक्ति, चाहे वह दुर्गा हो या काली, यही परमाराध्या, ब्रह्यमयी महाशक्ति है। मां शक्ति एकजुटता का प्रतीक हैं। इनके जन्म स्वरूप में ही देवत्व की विजय समायी है... 
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ग़ज़ल 

"खुदा की मेहरबानी है" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

वही नदिया कहाती है, जहाँ जल में रवानी है
वहीं पर आचमन होता, जहाँ पर साफ पानी है

जवानों के ही बूते पर, वतन की आबरू होती
वहीं सब काम होते हैं, जहाँ क़ायम जवानी है... 
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बहू खोजता रोज, कुंवारा बैठा पोता 

पोता जब पैदा हुआ, बजा नफीरी ढोल । 
नतिनी से नफरत दिखे, दिखी सोच में झोल। 
दिखी सोच में झोल, परीक्षण पूर्ण कराया | 
नहीं कांपता हाथ, पेट पापी गिरवाया । 
कह रविकर कविराय, बैठ के बाबा रोता | 
बहू खोजता रोज, कुंवारा बैठा पोता ।। 
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उम्मीद की एक किरण 

फटने न देना कभी 
मन में छाए घने बादलों को, 
वरना सबके साथ 
खुद का वजूद भी नजर नहीं आएगा ... 
अर्चना चावजी Archana Chaoji  
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उम्मीद 

*चल उम्मीद के तकिये पर * 
*सर रख कर सोयें * 
*ख़्वाबों में बोयें * 
*कुछ जिन्दगी * 
*क्या मालूम सुबह जब * 
*आँख खुले * 
*हर उम्मीद हो जाये हरी भरी !! 
अर्पित ‘सुमन’ पर सु-मन 
(Suman Kapoor) 
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बहार 

आ जाती है बहार 
उसके आने से 
बगिया में खिलते फूल
इसी बहाने से 
भ्रमर गुंजन करने लगते 
खिलते फूल देख 
तितलियाँ रंगबिरंगी 
गाती तराने ... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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दुख हम सब के मैया हरती, 

जय जय हे जगदम्बे 

इस दुनिया की मैया तुम ही, जय जय हे जगदम्बे 
करते हम सब भक्ति तेरी, जय जय हे जगदम्बे ... 
Ocean of BlissपरRekha Joshi 
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चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर- 

हँसकर विद्यालय गई, घर आई चुपचाप | 
देरी होती देख माँ, करती शुरू प्रलाप | 
करती शुरू प्रलाप, देवता-देवि मनाये | 
सभी लगाएं दौड़, थके-माँदे-घबराये | 
मिलते ही मुस्कात, बहन माँ भाई रविकर | 
चिंता रहे छुपाय, पिताजी मिले विहँसकर || 
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 
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3 comments:

  1. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति में मेरी 3 पोस्ट एक साथ शामिल करने हेतु आभार!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ।

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  3. आज की चर्चा में मेरी प्रस्तुति और मेरी दीदी की रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार शास्त्री जी ! दीदी इस समय अस्पताल में हैं और मैं तीव्र ज्वर से पीड़ित हूँ ! विलम्ब से आने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ !

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(चर्चा अंक-2853)

मित्रों! मेरा स्वास्थ्य आजकल खराब है इसलिए अपनी सुविधानुसार ही  यदा कदा लिंक लगाऊँगा। शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  ...