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Thursday, October 06, 2016

अविश्वास का खतरनाक दौर ( चर्चा - 2487 )

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है
देश इन दिनों अजीब हालातों से गुजर रहा है | कौन सच्चा है, कौन झूठा - कुछ समझ नहीं आ रहा | विरोध के कारण विरोध हो रहा है या कुछ गंभीर स्थिति है, कुछ नहीं कहा जा सकता | पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ भक्तों की भीड़ है | समाचारों पर भी विशवास नहीं क्योंकि चैनल, अखबार तक बिके दिखते हैं | ऐसा अविश्वास देश को कहाँ ले जाएगा यह भविष्य के गर्भ में है लेकिन सामान्य आदमी खुद को ठगा-सा महसूस कर रहा है |
हम साबित करे ही क्यों?

पुनरावृति का हस्ताक्षर
मेरी फ़ोटो
मातृभूमि के वीर जवानों से 
मेरा फोटो
अ सर्जिकल स्ट्राइक टोल्ड बट अनवॉच स्टोरी

मैं से मुक्ति का सफ़र

खुदा है तो खुदा बन, क्यों बनता है पत्थर

सूरज ने कभी...

अफियत की वक्त मुक़रर्र कर दो

बरसात के मौसम में
मेरा फोटो
बशर्ते कि 
ऋता शेखर 'मधु'
कुछ नया-लघुकथा

डबरे का पानी
फ़ोटो:
हँसती है जिन्दगी और गम मुस्कुराते हैं
Vimal Gandhi-kmsraj51
 सब से मुस्कुरा कर मिलो
My photo
बिना बिन्दी की रंगोली
मेरा फोटो

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय दिलबाग विर्क जी।

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  2. This comment has been removed by the author.

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  3. चर्चा मंच सजाया आपने
    भावपूर्ण संयोजन से
    हमने भी कोशिश की है
    पढ़ने की मनोयोग से |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

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  5. धन्यवाद दिलबाग सिंह विर्क जी,, हमारी Post(सब से मुस्कुरा कर मिलो।) काे चर्चा मंच पर शामिल करने के लिए।

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  6. बढिया सकंलन..
    धन्यवाद मेरी रचना को शामिल करने हेतु।

    ReplyDelete
  7. बढिया सकंलन..
    धन्यवाद मेरी रचना को शामिल करने हेतु।

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  8. चर्चा पढ़ने का अपना ही एक आनन्द रहा .
    धन्यवाद विर्क जी .

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  9. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  10. सुव्यवस्थित सार्थक सूत्र
    हमारी रचना शामिल करने हेतु बधाई !

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