Followers

Saturday, October 01, 2016

"आदिशक्ति" (चर्चा अंक-2482)

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

--

आदिशक्ति 

मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा...  
--
--
--
--
--

है खिलखिलाते फूल कोयलिया यहाँ कुहुके सजन 

गाये बहुत है गीत मिलकर प्यार में चहके सजन 
आओ चलें दोनों सफर यह प्यार का महके सजन ...  
हसरत रही है प्यार में हम तुम रहें साथी सदा 
मुश्किल बहुत है यह डगर इस पर रहें मिलके सजन .... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
--

Laxmirangam: 

माँ 

*एक कविता रमा चक्रवर्ती भाभीजी की..* 
M. Rangraj Iyengar 
--
--

मेरे तुम्हारे प्रेम को...!!! 

सुनो मुरली मनोहर....  
कही दूर चले जाते है.....  
नही समझेगा ये समाज,  
मेरे तुम्हारे प्रेम को... 
'आहुति' पर Sushma Verma 
--
दर्द ने कुछ यूँ निभाई दोस्ती 
झटक कर दामन खुशी रुखसत हुई 
मोतियों की थी हमें चाहत बड़ी 
आँसुओं की बाढ़ में बरकत हुई... 

Sudhinama पर 
sadhana vaid 

--
--
--
--

महाराजा अग्रसेन जी का जीवन परिचय 

1 अक्टूबर, 2016 को अग्रसेन जयंती है। सभी अग्रवाल भाइयों और बहनों को अग्रसेन जयंती की असीम शुभकामनाएं। दुर्भाग्य से... अग्रपुरुष अग्रसेन जी का जीवन चरित्र, धर्म नीति, सिद्धांतों की पावन कथा सदियों से विलुप्त रही। इसलिए यह छोटी सी कोशिश है, उनका जीवन परिचय कराने की। महाराजा अग्रसेन लगभग पांच हजार दो सौ वर्ष बाद भी पूजनीय है, तो इसलिए नहीं कि वे एक प्रतापी राजा थे अपितु इसलिए कि क्षमता, ममता और समता की त्रिविध मूर्ति थे महाराजा अग्रसेन... 
--

टूट कर गिर जाएगा आसमां यह किसने कह दिया 

 कुछ लोग बिहार को बहुत ही निम्न दृष्टि से देखते हैं और गाहे बगाहे कुछ ऐसे बयान दे जाते हैं जो काफी दुखदायी होता है। आज बिहार की वर्तमान स्थिति भले उतनी अच्छी नहीं हो लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि हमेशा ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। समय के साथ सब बदलता है और बिहार में भी सकारात्मक बदलाव आएँगे ऐसी मेरी आशा है। दोस्तों मेरा पूर्ण विश्वास है कि एक समय आएगा जब लोग दिल से बोलेंगे कि 'बिहार है तो बहार है'... 
मन का पंछी पर शिवनाथ कुमार 
--
--

तुह्मत तो लाजवाब मिले, होश में हूँ मैं 

मुझको तो अब शराब मिले, होश में हूँ मैं 
और वह भी बेहिसाब मिले, होश में हूँ... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
--

भारतीय संस्क्रति 

भारतीय संस्कृति में जीवन में सोलह संस्कार मनाये जाते हैं अर्थात सोलह बार परिवारीजन उसको होने का एहसास और वे हैं उसके लिये अभिव्यक्त करते रहते हैं कि आप हमारे हैं । भरतीय संसक्ृति में उत्सव त्यौहार और संस्कार सबका नियमन केवल पारिवारिक रिश्तों को एक दूसरे को जोड़े रक्षने के लिये हैं और इसमें विवाह सर्वाघिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जीवन का एक ऐसा मोड़ है जहॉं जिन्दगी बदल जाती है नये जीवन का आरम्भ होता है इसके लिये जन्मदाता भी अपने जीवन की संचित पूंजी न्यौछावर कर देते हैं एक पुत्री का पिता धन जोड़ता है कि बेटी को अच्छे सुपात्र को सौंपे और सुखमय जीवन हो इसके निये अपनी निधि अर्पण करता है... 
--
--

पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात- 

पी ओ के की गन्दगी, सैनिक रहे हटाय। 
इसी स्वच्छता मिशन से, पाक साफ हो जाय।। 
पी ओ के अपनी धरा, धरो मगज में बात। 
आते जाते हम रहें, दिन हो चाहे रात... 
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 
--

अललटप्पू. 

जिसने यह शब्द नहीं सुना होगा,पूछेगा - इसका मतलब क्या ? मतलब है अटकलपच्चू . अब यह भी समझ में नहीं आया तो समझाना पड़ेगा. सुनिये -अगड़म्-बगड़म्,अटर-शटर या अट्ट-सट्ट .एक शब्द में चाहें तो ऊलजलूल या ऊंटपटाँग . मतलब कुछ कम साफ़ हुआ हो तो और स्पष्ट कर दूँ - अंड-बंड ,अऩाप-शनाप ,बे- सिपैर .अगर बेतुका कहें तो भी कामचलाऊ तौर पर चलेगा... 
लालित्यम् पर प्रतिभा सक्सेना 
--

अभी असल तो है बाकी 

(कविता) 

जब 56 इंची सीनों ने गोलियाँ रायफलों से दागीं 
दहशतगर्दों के अब्बू भागे और अम्मी खौफ से काँपीं...  
SUMIT PRATAP SINGH 
--

गीत 

"कंचन सा रूप" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

विदा हुई बरसात, महीना अब असौज का आया।
जल्दी ढलने लगा सूर्य, जाड़े ने शीश उठाया।।
श्राद्ध गये, नवरात्र आ गये,
मंचन करते, पात्र भा गये,
रामचन्द्र की लीलाओं ने, सबका मन भरमाया। 
जल्दी ढलने लगा सूर्य, जाड़े ने शीश उठाया... 

7 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. आदि शक्ति को प्रणाम ! सभी मित्रों को नव रात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं ! आज के मंच पर मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार शास्त्री जी ! धन्यवाद !

    ReplyDelete
  3. आदरणीय शास्त्री जी,नवरात्री की असीम शुभकामनाएं। मेरी रचना शामिल करने क्व लिए धन्यवाद।

    ReplyDelete
  4. नवरात्री की शुभकामनाएं । सुन्दर चर्चा ।

    ReplyDelete
  5. बढ़िया चर्चा

    ReplyDelete
  6. बढ़िया संकलन। मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद :)

    ReplyDelete
  7. सुन्दर चर्चा,मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्बर; चर्चामंच 2816

जिन्हें थी जिंदगी प्यारी, बदल पुरखे जिए रविकर-   रविकर     "कुछ कहना है"   (1) विदेशी आक्रमणकारी बड़े निष्ठुर बड़े बर्...