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रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

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Saturday, October 22, 2016

"जीने का अन्दाज" {चर्चा अंक- 2503}

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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काश... दिव्या माथुर 

काश कि उस मनहूस सुबह मैं 
सीढ़ी से गिर जाती 
मेरी तीमारदारी में तुम्हें दफ़्तर की देर हो जाती 
हलका सा दिल का दौरा या 
तुम्हें सुबह पड़ जाता आराम करो पूरा ह्फ़्ता 
डाक्टर साग्रह कह जाता 
‘स्कूल छोड़कर आओ पापा’... 
yashoda Agrawal 
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दोहे 

"जीने का अन्दाज" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


Image result for नंगा फैशन
कपड़े छोटे हो गये, दिखता नंगा गात।
बिन पतझड़ झड़ने लगे, नये पुराने पात।
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बदल गया है आज तो, जीने का अन्दाज।
लोगों के आचरण से, है भयभीत समाज... 
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कारगर है डेंगू का 

एलोपैथिक के साथ आयुर्वेदिक उपाय 

घर के आसपास पानी जमा न होने, शरीर ढंककर सोने, मच्छरदानी और मास्क्यूटो क्वायल लगाने, टंकियों व कूलर में जमा पानी हर दिन बदलने से लेकर हर दिन बगीचे में रखे गमलों में पानी जमा न होने देने और उन्हें सड़ने से बचाए रखने के उपरांत भी जाने कैसे मेरे शिवा को पिछले सप्ताह डेंगू हुआ तो उसे एक निजी अस्पताल में 5 दिन तक भर्ती रहना पड़ा... 
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सचियाय माता 

सच्चियाय (सच्चिवाय) माता का भव्य मंदिर जोधपुर से लगभग 60 कि.मी. की दूरी पर उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर ओसियॉ में स्थित है। इसीलिये इसे ओसियॉ माता भी कहा जाता है। ओसियां प्राचीनकाल से धार्मिक व कला का महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहाँ पर 8 वीं व 12 वीं सदी के जैन व ब्राह्मणों के कलात्मक मंदिर व उत्कृष्ट शिल्प में बनी मूर्तियाँ विद्यमान है... 
Ratan singh shekhawat 
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अपने किए पे बैठ कर रोया नहीं करते ... 

अपने असूलों को कभी छोड़ा नहीं करते 
साँसों की ख़ातिर लोग हर सौदा नहीं करते 
महफूज़ जिनके दम पे है धरती हवा पानी 
हैं तो ख़ुदा होने का पर दावा नहीं करते... 
Digamber Naswa 
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लघुकथा 

माँ और माँ दिवाली के आठ दिन पहले ही त्योहारों का सिलसिला आरंभ हो गया है। आज अहोई अष्टमी है और घर घर अहोई देवी की पूजा होगी। सभी तो ममता की झोली फैलाकर देवी मैया से अपने पुत्र के स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करेंगी... 
तूलिकासदन पर सुधाकल्प 
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पासवर्ड का एक यूज यह भी 

...दरअसल इस बच्ची और उसकी माँ ने 
तय किया हुआ था कि 
अगर कभी बच्ची को लेने किसी 
अजनबी को भेजने की नौबत आई । 
तो माँ उसे पासवर्ड बतायेगी और बच्ची भी पासवर्ड 
को जान लेने के बाद ही
 उस अजनबी के साथ जायेगी । 
देखा कितना आसान तरीका है, 
बच्चों को किसी दुर्घटना से बचाने का । 
आप भी अपने बच्चों के
साथ ऐसा पासवर्ड तय कर सकते हैं ।... 
rajeev kumar Kulshrestha 
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यादें शरदपूर्णिमा 

 बचपन जैसी न चांदनी ,न चन्द्रमा ,न वो खुला सा आँगन और न ही शरद का अनुभव :)शरद कम ग्रीष्म ज़्यादा :) स्मृति की गर्त हटाती हूँ तो दूध वाली बड़ी सी डोलची में मम्मी की बनाई स्वादिष्ट खीर जाली से ढकी है और आँगन में कपड़े सुखाने वाले तार पर बँधी है... 
अरुणा  
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दोस्ती का महत्व 

दोस्त कौन होते है जो अपने काम आये वही दोस्त होते है पर आज दोस्ती में स्वार्थ आ गया है हर कोई मतलबी है बहुत कम दोस्त होते है जो बिना स्वार्थ के ... 
aashaye पर garima 
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नट बनाम नेता 

 ...नेता रूपी नट तरह तरह की बातें बोलने के लिये भीड़ जोड़ते हैं और कुछ देर तमाषे का आनंद लेकर लोग बिखर जाते हैं । जमूरे जैसे दो चार पिछलग्गू लग जाते हैं कोई नहीं तो तू ही सही और उन्हें समेट कर ही नट तमाशा दिखाने और ठिकाने तलाशने लगता है... 
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आम आदमी 

तंगहाली में , 
ख़्वाहिशों की कमी हूँ 
मैं आम आदमी हूँ । 
मैं भीड का एक हिस्सा हूँ 
खून से लिखा किस्सा हूँ । 
फुटपाथ पर चलता हूँ 
पर कारों तले दलता हूँ । 
दुर्घटना होती है तब 
आँकडों में गिना जाता हूँ 
मैं केवल 
आदमी के नाम जाना जाता हूँ.... 
Yeh Mera Jahaan पर 
गिरिजा कुलश्रेष्ठ 
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कहां है वॉइस् रिकॉर्डर 

और कहां है मेरा कैमरा 

भास्‍कर उप्रेती 
"वो इंसान रह-रहकर याद आएगा! 
डेंगू के उपचार के बाद 
अस्पताल से डिस्चार्ज हो ही रहा था कि 
अनुराग भाई का फ़ोन आया.. 
"पापा नहीं रहे"... 
विजय गौड़ 

11 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

    ReplyDelete
  2. थ्रीडी रांगोली पसंद आई
    आभार ज्योति बहन को

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद, यशोदा जी।

      Delete
  3. बहुत सुन्दर। जीवन के विविध रंग।
    आम आदमी और पत्रकार,
    अब कहाँ रहा सरोकार,
    पत्रकारिता की आड़ में,
    अपने जुगाड़ में,
    इसी भीड़भाड़ में,
    कहीं खो गया,
    जहाँ कुछ मिला,
    उसी का हो गया।।
    आखिर वो भी क्या करे,
    कोई भगवान है कि न डरे,
    इसमें बड़े खतरे हैं,
    खून के कतरे हैं,
    बड़ी बड़ी मछलियाँ हैं,
    झटके हैं बिजलियाँ हैं।
    भाड़ में गई सचाई,
    कुछ पी कुछ पिलाई।
    पर नींद नहीं आई,
    अन्तर्मन कचोटता है,
    लगता कोई नोचता है।।



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  4. मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  5. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉग पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    ReplyDelete
  6. सुन्दर चर्चा

    ReplyDelete
  7. सुंदर चर्चा सूत्र ...
    आभार मुझे शामिल करने का ...

    ReplyDelete

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