चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Saturday, October 29, 2016

"हर्ष का त्यौहार है दीपावली" {चर्चा अंक- 2510}

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
आप सभी को 
धनतेरस, नर्क चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धनपूजा 
और भइयादूज की हार्दिक शुभकामनाएँ!

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

दोहे 

"धनतेरस-सजे हुए बाज़ार" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

...रहे हमेशा देश में, उत्सव का माहौल।
मिष्ठानों का स्वाद ले, बोलो मीठे बोल।।

सरस्वती के साथ हों, लक्ष्मी और गणेश।
तब आएगी सम्पदा, सुधरेगा परिवेश।।

उल्लू बन जाना नहीं, पाकर द्रव्य अपार।
धन-दौलत के साथ हो, मेधा का उपहार।।
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शुभ दिवाली 

शुभ दिवाली ट्रांस फैट पेरोडी - ड्यूएट वर्जन एक दिन मैं ट्रांस फैट पर लेख लिख रहा था। ट्रांस फैट सस्ते तेलों को हाइड्रोजनेट करके फैक्ट्री में बनाया जाता है। सबसे पहले 1911 में प्रोक्टर एंड गैंबल ने इसे क्रिस्को के नाम से बनाया। इंडिया में यह डालडा, रथ या वनस्पति के नाम से आया। उस रात चाय पीते समय मैंने अमित जी की पुरानी ब्लॉक बस्टर फिल्म लावारिस का वो मशहूर गीत (मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है) बजाया। मैं गीत गुगुनाता रहा और ट्रांस फैट पर यह ड्यूएट बनकर सामने आया। इसमें रेखा जी ट्रांस फैट के रूप में है। इस गीत में अमित जी रेखा (ट्रांस फैट) को कहते हैं कि... 
Shri Sitaram Rasoi 
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"तमसो माँ ज्योतिर्गमयः" 

सच तो यही है कि हर रोज श्वेत प्रकाश की किरण बिखर जाते है कोने कोने में किन्तु भेद नहीं पाती मन के अँधेरी गुफाओं को। और हमें भान है कि हमने पढ़ लिया सामने वाले के चेहरे पर उठने वाली हर रेखा को जो मन के कम्पन से स्पंदित हो उभर आते है। फिर सच तो यह भी है कि तम घुप्प अँधेरी चादर के चारो ओर बिखरने के बाद भी। हलकी सी आहट बिना कुछ देखे ही मन में उठने वाली स्पन्दन से चेहरे पर उभरे भाव को पढ़ने के लिए रौशनी के जगनूओ की भी जरुरत नहीं और हमारा मन देख लेता है। चारो ओर बिखरे अविश्वास की परिछाई जाने कौन से प्रकाश का प्रतिबिम्ब है जिसमे देख कर भी एक दूसरे को समझने की जद्दोजहद जारी है... 
Kaushal Lal 
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आदत!! 

Parul Kanani 
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शीर्षकहीन 


घेरे था मुझे 
घुप्प  अँधेरा 
जैसे न होगा 
कभी सवेरा ... 
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प्रेमचंद की कहानी 

निर्वासन 
ये कहानी जब रिकार्ड की थी तो लग नहीं रहा था कि इतनी अच्छी तरह से हो पाएगी। .. इसे मैंने रिकार्ड किया इंदौर से और अनुराग शर्मा जी ने किया पिट्सबर्ग में। ... ख़ास बात ये कि पहले पूरी कहानी मेरी आवाज में रिकार्ड करके भेज दी और उन्होंने बाद में अपना वाला हिस्सा रिकार्ड करके एडिट किया। .. और आवाज फाइनल करने के लिए उन्हें जी मेल की वॉइस चेट पर सुनाया था। .. आप सुनिये और बताइयेगा प्रयोग सफल रहा या नहीं 
अर्चना चावजी Archana Chaoji 
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सजन इज़हार पढ़ लेना 

सजन इकरार कर लेना 
हमारा प्यार पढ़ लेना ,,  
खिला उपवन रँगी मौसम 
सजन इज़हार पढ़ लेना ,, 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi 
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681 


जगो कि भोर पास है
रहो नहीं निराश भी ।
उमंग संग ले चलो
मिले तभी प्रकाश भी ।।

कभी थमी नहीं ,बही ,
कि सिन्धु बाँह तो गहे
चली पहाड़ ,पत्थरों ;
सुनो व्यथा नदी कहे !

न पंथ शूलहीन ही,
सुदूर लक्ष्य ज्ञात है
प्रभूत पीर पा चली ;
तपे दिनेश ,रात है !... 
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लाडलों का प्यार ... 

झरोख़ा पर 
निवेदिता श्रीवास्तव  
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तुम्हारा ही कहलायेगा... 

मैं आज भी इक दीया, 
तुम्हारी दहलीज पर रख आती हूँ, 
कि मेरे दीये का उजाला, 
तुम्हे अंधेरो से बचायेगा... 
Sushma Verma  
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6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. Thank yu sir.. Charchamanch ka hissa banane ke liye

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  3. सुन्दर शनिवारीय चर्चा अंक । आभार 'उलूक' के सूत्र 'अंगरेजी में अनुवाद कर समझ में आ जायें फितूर ‘उलूक’ के ऐसा भी नहीं होता है' को चर्चा में जगह देने के लिये ।

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  4. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!
    सबको दीवाली की शुभकामनाएं!

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  5. सुन्दर चर्चा

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  6. चर्चामंच के सभी पाठकों को दीपोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ! आज की चर्चा में मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी !

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